क्या शरद यादव गिरा सकते हैं नीतीश कुमार की कुर्सी?

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पटना। बीस सालों तक हमकदम रहे शरद यादव और नीतीश कुमार की राहें अब पूरी तरह जुदा होती दिख रही हैं. जी हां शरद यादव तीन दिन के लिए बिहार दौरे पर हैं. और अपने इस बिहार दौरे पर वो खुलकर नीतीश कुमार से अपनी असहमति जाहिर कर रहे हैं. नीतीश कुमार का बीजेपी के साथ जाने का फैसला उन्हें रास नहीं आया था.. मगर काफी वक्त तक चुप्पी साधे रखने के बाद अब वो खुलकर अपनी बातें रख रहे हैं. अब ये कहना बिलकुल भी गलत नहीं होगा कि शरद यादव नीतीश कुमार के खिलाफ खुल कर मैदान में आ गए हैं. बिहार दौरे पर पहुंचे शरद यादव अब नीतीश कुमार की बखिया उधेड़ रहे हैं.

 


सोनपुर में बोलते हुए शरद यादव ने अपने इरादे साफ कर दिया. सोनपुर में बोलते हुए शरद यादव ने कहा कि बिहार की जनता ने दो तिहाई बहुमत से 5 बरस के लिए सरकार बनाई थी. वो बिहार की जनता के साथ करार था, मतदाता के साथ करार था, उस करार को चोट पहुंची है. जब जनादेश मिला था, समूचा देश बिहार की जनता को धन्यवाद दे रहा था. याद रखना, वोट ईमान है. उस करार को किसने तोड़ा है? मैं यहां आपके बीच इसलिए हूँ कि गठबंधन को चट्टान जैसा बनाना है. वहां तोड़ सकते हो पटना में बैठ कर के, दिल्ली में बैठ के नहीं तोड़ सकते. 8 घंटे में आपने बिहार की जनता का विश्वास चूर-चूर कर दिया. आपने जो करार किया था, उसको तोड़ दिया, चोट पहुंचाई. चोट एक व्यक्ति को नहीं, 11 करोड़ बिहार के जनता को आपने पहुंचाई है. उनसे वादा करके उस वादे को तोड़ने का काम किया.

 

एक गठबंधन हमारा था, एक बीजेपी-मोदी-शाह का. एक मेनिफ़ेस्टो हमारा था, एक बीजेपी वालों का. बताओ 70 बरस में ऐसा अंधेर कभी हुआ है, 2 मेनिफ़ेस्टो लेके जनता के बीच गए हो? 5 बरस के लिए भरोसा जताया था. बीजेपी के पास संसाधन था. हम तो कर्पूरी जी के साथ गांव-गांव, गली-गली छाने हैं बिहार का. बस एक गाड़ी होती थी हमारे पास नेता, विरोधी दल की. इससे ज़्यादा जनता के ख़िलाफ़ और जनता से वचन तोड़ने का काम हिंदुस्तान के इतिहास में 70 बरस में कभी नहीं हुआ. जो करार टूटा है, उस करार को, उस गठबंधन की जनता को मैंने अब थाम लिया है, तो उसे अब इकट्ठा करना है. गठबंधन को तोड़ सकते हो यहां पटना में बैठकर, मगर गठबंधन की जनता यहां इकट्ठा रहेगी.

पूछ रहे थे पत्रकार, आप सड़क पर आ गए हैं. अरे हम ज़िंदगी भर से सड़क पर हैं, खेत-खलिहान पर हैं, हम वहीं रहेंगे. ये राज और सिंहासन यहां से बनता है, जनता से. जनता एक है, जनता का गठबंधन एक रखना है हमको, इसलिए आपके बीच में आया हूं. यहां मैं इतने ही शब्दों के साथ कहना चाहता हूं कि गठबंधन जनता के बीच का करार था, जनता के बीच का वादा था. जनता के बीच का एक तरह से ईमान था। वोट याद है! जनता से किया वादा ईमान है, वो ईमान टूटा है. वह लोकतंत बर्बाद और तबाह हो जाएगा, ईमान नहीं टूटना चाहिए। आपसे यही कहना है, ये गठबंधन जो टूटा है, इसे नहीं टूटने देना है. यहां बेशक तोड़ सकते हैं, लेकिन धरती पर यह गठबंधन बनते रहेगा, चलते रहेगा. वो तब तक चलेगा, जब तक दिल्ली पर कब्ज़ा नहीं हो जाता.

 

 

 

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