फूलन देवी के जीवन से जुड़ा वो सच जो नहीं जानते होंगे आप!

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अपने ऊपर हुए बेंइतहां जुल्मों का बदला लेने के लिए और मनुवादी व्यव्स्था को चकनाचूर किए जाने को लेकर पूरे विशव में बेंडिड क्यून के नाम से पहचानी जाने वालीं फूलन देवी जिनकी आज ही के दिन यानि 25 जुलाई 2001 को दिल्ली में हत्या कर दी गई थी। फूलन ने 11 सालों तक जेल की गुमनाम जिंदगी और फिर लोकतंत्र के मंदिर संसद भवन तक का सफर तय किया है. भारत के अब तक के इतिहास में जो एकमात्र नाम बलात्कारियों के मन में खौफ पैदा कर सकता है, वो सिर्फ विश्व इतिहास की श्रेष्ठ विद्रोहिणी फूलन देवी जी हैं. उनके निधन पर भारतीय गणराज्य के राष्ट्रपति के. आर. नारायणन ने कहा था कहा था कि फूलन देवी की कहानी विद्रोह की कहानी है. दमन और शोषण के खिलाफ सफल बगावत की कहानी है”

उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में 10 अगस्त 1963 को जन्मी फूलन देवी को बचपन से ही जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ा था। बात उस वक्त की है जब फूलन देवी 15 साल की थीं, तब ही गांव के ठाकुरों ने उनके साथ गैंगरेप किया, इतना ही नहीं यह गैंगरेप उनके माता-पिता के सामने किया। फूलन देवी ने कई जगाह इंसाफ की गुहार लगाई लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगी। जिसके बाद फूलन देवी ने खुद ही इंसाफ करने का फैसला किया और हत्यार उठा लिए। अपने ऊपर हुए जुल्मों सितमों के चलते फूलन देवी ने अपना एक अलग गिरोह बनाने का फैसला किया। 14 फरवरी 1981 को बहमई में फूलन देवी ने एक लाइन में खड़ा करके उन 22 ठाकुरों को गोली से उड़ा दिया था जिन्होंने उसके साथ गैंगरेप किया था।

फूलन देवी ने 1983 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कहने पर 10 हजार लोगों और 300 पुलिस वालों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. उन्हें यह भरोसा दिलाया गया था कि उन्हें मृत्युदंड नहीं दिया जाएगा. 8 साल बाद 1994 में फूलन देवी जेल से रिहा हुईं. रिहा होने के बाद उन्होंने राजनीति में एंट्री ली. फूलन देवी दो बार चुनकर संसद पहुंचीं. पहली बार वो समाजवादी पार्टी के टिकट पर मिर्जापुर से सांसद बनी थीं.

फूलन देवी भले पढ़ी-लिखी नही थीं लेकिन दुनियावी ज्ञान उच्च कोटि का था। एक बार जब स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती ने कहा था कि वे स्त्रियों का छुआ नही खा सकते तो फूलन ने ललकारते हुए कहा था कि यदि स्त्री का छुआ नही खा सकते तो पैदा किस रास्ते हुए? फूलन के इस एक वाक्य में कितनी बड़ी बात है और कितना करारा तमाचा है, यह हर कोई समझदार व्यक्ति समझ सकता है।

फूलन देवी मुलायम सिंह यादव के लिए किसी भी सीमा तक जा सकती थीं वो उनको पिता के समान मानती थीं। फूलन देवी की ताकत का अंदाजा आप इस बात से भी लगा सकते है कि जब मुलायम सिंह यादव के लिए बाल ठाकरे ने कहा था कि मुलायाम सिंह के लिए एक और नाथू राम गोडसे पैदा करना पड़ेगा, तब फूलन देवी ने कहा था कि मुंबई की बिल में बैठ कर बोलने वाले बाल ठाकरे! यदि दम है तो बिल से बाहर निकल मैं तुम्हे समझाऊंगी कि मुलायम सिंह यादव किस फौलाद का नाम है।

फूलन की हत्या के मामले में अंतरराष्ट्रीय अखबार द गारडियन अंग्रेजी में लिखता है जिसका हिंदी अनुवाद है कि बड़े पैमाने पर और कई बार फूलन देवी के राज्य, उत्तर प्रदेश, भारत के सबसे अधिक आबादी वाले और प्रमुख राजनीतिक क्षेत्र में हिंसक प्रदर्शन हुए हैं। उनकी पार्टी के नेताओं ने राष्ट्रवादी हिंदू पार्टी (भाजपा) पर उनकी हत्या की साजिश का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यूपी की बीजेपी सरकार ने जानबूझकर उनकी सुरक्षा को कम किया है, कुछ अन्य विपक्षी नेताओं के मामले में भी किया है। सरकार ने आरोपों से इनकार किया है” वहीं दल्ली में घर के बाहर ही शेर सिंह राणा नाम के शख्स ने फूलन देवी की गोली मार कर हत्या दी थी। राणा के मुताबिक उसने ठाकुरों के हत्याकांड के बदले फूलन देवी को मारा था।

वहीं विश्व की सबसे बडी टाइम मैग्जीन ने फूलन को दुनिया की 15 विद्रोही महिलाओं में चौथे पायदान पर जगह दी थी. कहा जाता है कि फूलन ने कानून जरूर तोड़ा था, लेकिन उसने दबंगों से बगावत की थी, उसके साथ जुर्म करने वालों से बदला लिया था. सालों पहले खुद फूलन ने एक इंटरव्यू में कहा था, ‘मेरे साथ समाज के एक वर्ग ने ज्यादती की, जिसका बदला मैंने लिया’.

फूलन गरीब परिवार से थीं, पिछड़ी जाति की थीं. उनकी जिंदगी में कांटे ही कांटे थे, समाज के बिछाए कांटों के बीच फूलन ने हालात को देखते हुए वो रास्ता बनाया, जो उसे अपराध की दुनिया की तरफ ले गया. इसके साथ ही मैं बस यही कहूंगा कि फूलन देवी ने कहा था कि आप अपनी बेटियों को पढ़ायें। उन्हें बुजदिल न बनाएं। आज अगर कोई एक चांटा मारता है तो उसे उलट कर दो चांटा मारने चाहिए। चाहे मार खाने वाला लड़की का पति हो भाई हो या फिर कोई गैर इंसान।

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