बेगूसराय में कांटे की टक्कर:

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By~Sanjeev Chandan

कुछ अनुभवी लोगों से सीधे या दूसरों के माध्यम से पता चले बेगूसराय के वोट पैटर्न से एक पिक्चर का पता चलता है। हालांकि प्रिडिक्शन करना ठीक नहीं होता चुनाव परिणाम को लेकर, लेकिन एक तस्वीर तो स्पष्ट हो ही जाती है वोटिंग देखकर।

1. गिरिराज सिंह के समर्थक उत्साहित हैं। इनमें वे लोग भी हैं जिनमें से कोई विधायक तो कुछ दबंग नेता भी हैं। जाति भूमिहार। इनके अनुसार गिरिराज सिंह जीत रहे हैं। भूमिहारों का वोट बमुश्किल कन्हैया को मिला है कैडर वोट के अलावा। इनके अनुसार गिरिराज सिंह को यादवों का वोट भी अच्छा मिला है। अति पिछड़ों और दलितों का वोट भी उन्हें अच्छा मिला है यह भी दावा है।

2. लेकिन उनके इन दावों से अधिक उनकी कुछ सूचनाएं उनकी जीत की आश्वस्ति से अलग तस्वीर का संकेत भी देती है। उन्होंने बताया कि मल्लाह वोट तनवीर साहब को अग्रेसिव गया है। मुसलमान वोट जो कन्हैया ज्यादा अच्छा बांट रहे थे वह रात-रात तक के फैसलों से तनवीर साहब के पक्ष में एकजूट हो गये। जब कोई प्रबल विरोधी यह सूचना दे रहा है और वह अनुभवी भी है तो यह तय है कि मुसलमानों और मल्लाहों का वोट तनवीर जी के समर्थन में जा रहा है। लगभग एकमुश्त। कैडर वोट और कुछ युवा वोट जरूर कन्हैया को भी मिला होगा।

3. गिरिराज समर्थकों ने यह भी कहा कि तनवीर साहब के बैठने की अफवाह फैलाना भी सीपीआई को मंहगा पड़ा। तनवीर जी ने खुद बयान जारी कर स्पष्ट किया कि जो अभी झूठ बोल फैला सकता है वह संसद में जाकर क्या नहीं झूठ बोलेगा? उनके बयानों से मुझे लगता है कि गिरिराज समर्थकों ने भी इस अफवाह फैलाने का सच जनता तक पहुंचाया।

4. राजद खेमे ने यादव वोट के भी बंटने से इनकार किया। उनका कहना है कि बमुश्किल 5-10% वोट तो हमेशा बंटता है।

5. राजद खेमे के अनुसार सीपीआई ने एक चाल और चली थी। वह था खगड़िया में मल्लाहों के नेता मुकेश सहनी को समर्थन कर मल्लाहों का वोट लेने की। उन्होंने खगड़िया में सहनी का समर्थन करने का परचा भी मल्लाहों के बीच बंटवाया। राजद खेमे का दावा है कि सहनी ने खुद दो बार मल्लाहों से मिलकर उनकी चाल को निष्प्रभावी किया। राजद सूत्रों के दावे की पुष्टि गिरिराज समर्थकों के बयान से भी होता है।

6. दोनो पक्षों के अनुसार सीपीआई को दो विधानसभा में बहुत अच्छा वोट मिला। लेकिन गिरिराज समर्थक कहते हैं कि इसका मतलब यह नहीं कि वह तीसरे पोजिशन से अधिक होगी उन जगहों पर भी। मुझे लगता है हालांकि कि वहां अच्छा वोट उसे काफी ऊपर ले जायेगा पोजिशन तीसरा भी हो तो भी। दूसरी रहने की भी संभावना है।

इन सूचनाओं के आधार पर मुझे तनवीर साहब और गिरिराज सिंह में कांटे का टक्कर दिख रहा है। यदि सायलेंट वोट, भाजपा विरोधी गैर सवर्ण वोट, तनवीर जी के पक्ष में मुखर रहा तो उनकी जीत पक्की होगी।

कन्हैया का क्रेज लोगों के बीच था। युवाओं के बीच खासकर। बेगूसराय शहर और पास के इलाकों में। कुछ साथी उन इलाकों में 2014 में मोदी की लहर की तरह एक लहर कन्हैया के पक्ष में भी देख आये हैं। लेकिन शायद यह वोट में पूरी लोकसभा में तब्दील नहीं हो पायी।

Via~Sanjeev Chandan

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