अलवर सामूहिक बलात्कार, जाति और हिंदू संस्कृति

इस पूरी घटना को पुलिस, राजनेता और बलात्कारियों के संरक्षकों के सहयोग से कई दिनों तक छिपाया गया।

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~ Siddharth Ramu, lekhak, senior Journalist

18 वर्षीय दलित महिला के साथ सामूहिक बलात्कार की रूह कंपा देने वाली घटना किसी भी इंसान को स्तब्ध कर देने वाली। 5-6 बलात्कारियों 3 घंटे तक बारी-बारी से महिला के साथ बलात्कार किया। इस दौरान वे महिला और उसके पति को पीटते रहे। बलात्कारियों का साहस देखिए वे बलात्कार का वीडियो भी बनाते रहे। इतना नहीं उन्होंने बलात्कार के बाद इन वीडियों को नष्ट करने के लिए 9 हजार रूपए की भी मांग की। यह सब तब हुआ जब पति-पत्नी शादी की खरीदारी के लिए अलवर जा रहे थे।

इस पूरी घटना को पुलिस, राजनेता और बलात्कारियों के संरक्षकों के सहयोग से कई दिनों तक छिपाया गया। इसका एक कारण यह भी था कि इस घटना के सामने आने से दलित समाज में व्यापक आक्रोश पैदा हो सकता था और इससे राजस्थान में सत्तारूढ़ कांग्रेसी सरकार के उम्मीदवार को चुनावी नुकसान हो सकता था।

आइए भारत मे बलात्कार संबंधी कुछ तथ्यों को देख लें-

  • भारत में प्रत्येक दिन 106 महिला बलात्कार का शिकार होती है।
  • सामाजिक तबकों के आधार पर सर्वाधिक बलात्कार की शिकार आदिवासी, दलित तथा अल्पसंख्यक समुदाय की महिलायें होती हैं।
  • औसतन प्रत्येक दिन 3 दलित महिलाओं के साथ बलात्कार होता है।
  • बलात्कार की शिकार महिलाओं में 94 प्रतिशत 2 वर्ष से लेकर 12 वर्ष की मासूम बच्चियां हैं।
  • दुधमुँही मासूम बच्ची से लेकर 70 साल की दादी-परदादी भी बलात्कार का शिकार होती हैं

 

बलात्कार को हिंदू धर्म और संस्कृति में पूर्ण स्वीकृति प्राप्त है-

 

डॉ.आंबेडकर ने अपनी किताब हिंदू धर्म की पहेलियां ( बाबा साहब डॉ. आंबेडकर संपूर्ण वाग्मय खंड-8 ) के भाग-एक की पन्द्रहवीं पहेली के परिशिष्ट-3 में ब्रह्मा, विष्णु और महेश के बलात्कारी चरित्र की ओर चर्चा की  है। आंबेडकर ने लिखा, “ तीनो देव ( ब्राह्मा, विष्णु और शिव ) सती ( अनसूया ) का शील-हरण करने अत्रि (ऋषि ) की कुटिया की ओर चल पड़े। इन तीनों ने ब्राह्मण भिक्षुओं का वेष धारण किया। जब वे वहां पहुंचे, अत्रि बाहर गए हुए थे। अनसूया ने उनका स्वागत किया और उनके लिए भोजन तैयार किया।” इन तीनों ने उनसे निर्वस्त होने को कहा। आंबेडकर विस्तार से पूरी कथा सुनाते हैं। अंत में आंबेडकर की टिप्पणी इस प्रकार है, “इस कहानी में अनैतिकता की दुर्गंध भरी पड़ी है और उसके अंत को जान-बूझकर ऐसा मोड़ दिया गया है, जिसमें ब्रह्मा, विष्णु,महेश के उस वास्तविक कुकर्म पर पर्दा डाल दिया जाय।” ( पृष्ठृ173-174 )। आंबेडकर ब्राह्मा द्वारा अपनी बेटी वाची के साथ बलात्कार की  भी चर्चा करते हैं।’’(पृ।177)

मनुस्मृति भी जाति के आधार पर स्त्रियों के साथ बलात्कार को प्रोत्साहित करती  है-

मनुस्मृति में जहां एक ओर शूद्र वर्ण के किसी व्यक्ति द्वारा ब्राह्मण की स्त्री के साथ व्यभिचार करने पर शूद्र को प्राण दंड का आदेश देती है-

अब्राह्मण:  संग्रहणे प्राणान्तं दण्डमर्हति।

चतुर्णामपि वर्णानां दारा रक्ष्यतमा: सदा।।

(8.359 )

वहीं यदि ब्राह्मण क्षत्रिय, वैश्य या शूद्र वर्ग की किसी स्त्री के साथ व्यभिचार करता है तो उसे केवल पांच सौ पर्ण का आर्थिक दंड देना होगा-

अगुप्ते क्षत्रियावैश्ये शूद्रा वा ब्राह्मणो व्रजन् ।

शतानि पच्च दण्ड्य: स्यात्सहस्रं

त्वन्त्ज्यस्त्रियम्।।(8.385 )

हिंदू राष्ट्र के आधुनिक विचारक-नायक सावरक बलात्कार को  वीरतापूर्ण और शौर्यपूर्ण कार्य कार्य मानते थे, उन्होंने अपनी  किताब सिक्स ग्लोरियस इकोज ऑफ इंडियन हिस्ट्री में इस बात के पक्ष में तर्क दिया है कि, क्यों मुस्लिम महिलाओं के साथ बलात्कार जायज है। वे इतने पर ही नहीं रूकते हिंदुओं को ललकारते हुए कहते हैं कि “ यदि अवसर उपलब्ध हो तो ऐसा न करना कोई नैतिक या वीरतापूर्ण काम नहीं है,बल्कि कायरता है”।(See Chapter VIII of the online edition made available by Mumbai-based Swatantryaveer Savarkar Rashtriya Smarak)।   उनकी यह किताब 1966 में मराठी में प्रकाशति हुई थी।

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