…तो इस लिए दी जा रही मायावती के स्मार्क बनाने वाले मामले को प्राथमिकता?

जब इस मामले की तह तक जाने की कोशिश करते हैं तो पाते हैं कि इसके पीछे की कड़ी बीएसपी और समाजबादी पार्टी से भी जुड़ी है।

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Published By- Aqil Raza

By- Aqil Raza   ~

तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती द्वारा बनावाए गए पार्कों और स्मार्कों के मामले में, 2009 में डाली गई याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मायावती को पैसा वापस सरकारी कौटे में लौटाने का प्राथमिक विचार किया है। पर सवाल इस बात का है कि लोकसभा के आम चुनावों के करीब आते ही इस मुद्दे पर सुनवाई क्यों हुई है?

 

जब बसपा के वकील ने मामले की अगली सुनाई को चुनावों के बाद डालने की अपील की तो तुरंत CJI रंजन गोगोई ने उसे खारिज कर मामले की अगली सुनवाई 2 अप्रैल को तय कर दी । लेकिन आखिर ऐसी क्या वजह है जो चुनाव से पहले ही इस मुद्दे को इतनी गौर से देखा जा रहा है।

जब इस मामले की तह तक जाने की कोशिश करते हैं तो पाते हैं कि इसके पीछे की कड़ी बीएसपी और समाजबादी पार्टी से भी जुड़ी है।

 

आपको बता दें कि खुद अखिलेश यादव बसपा के कार्यकाल में बनी इन प्रतिमाओं को लेकर सवाल उठा चुके हैं. उत्तर प्रदेश की गद्दी संभालने के बाद अखिलेश यादव ने ही मायावती  के कार्यकाल में बने पार्कों और स्मारकों की लोकायुक्त से जांच का आदेश दिया था.

 

और अब जब उत्तर प्रदेश में ‘बुआ-भतीजे’ की जोड़ी ताल ठोंक रही है. पिछले दिनों हुए उत्तर प्रदेश के उप-चुनावों में केंद्र और राज्य में सत्तारूढ़ बीजेपी को पटखनी देने वाली सपा-बसपा में गठबंधन के बाद सीटों का बंटवारा भी हो चुका है, ऐसे में बीजेपी के लिए यह बड़ी खतरे की घंटी है।

और जैसे ही इस मामले पर सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में हुई तुरंत सारे मीडिया चैनल सक्रीय हो गए, बड़ी बड़ी हेडलाइन्स में सुप्रीम कोर्ट के विचार तक को आदेश में बदल दिया गया। सुप्रीम कोर्ट सिर्फ प्राथमिक विचार की बात कर रहा था तो कुछ कथित मीडिया में उसको सुप्रीम कोर्ट का आदेश कहकर चलाया गया था।

 

तो क्या यह मान लिया जाए की गोदी मीडिया द्वारा इस मुद्दे को उठाकर किसी तरह सपा और बसपा के बीच हुए गठबंधन में खटास डालने की कोशिश की जा रही है।

 

~ आकिल रज़ा

(एंकर एंड मैनेजिंग हेड, नेशनल इंडिया न्यूज़)

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