क्या जजों के फैसले का लोगों पर पड़ रहा गलत असर ?

नीति आयोग के CEO अमिताभ कांत ने हाल में आई अपनी किताब में लिखा है कि बेहतर आर्थिक नतीजों के लिए शासन बहुत जरूरी है. उन्होंने खास तौर पर न्यायपालिका पर जोर दिया जिसके फैसले कई बार विकास में बड़ी रुकावट बन जाते हैं. उन्होंने पर्यावरण और विकास के बीच टकराव का जिक्र किया और बताया कि अदालतें कई बार अपने विवेक, यानि संतुलन की दरकार, को भी दरकिनार कर देती हैं. टेलीकॉम रेवेन्यू का मामला और अदालत का फैसला अमिताभ कांत ने कहा कि इस समस्या का समाधान निकालना होगा क्योंकि जजों को उनके फैसलों के आर्थिक असर की समझ जरूर होनी चाहिए.

देशभर में विरोध के बावजूद CAA लागू, सरकार ने जारी की अधिसूचना

नागरिकता संशोधन कानून को केंद्र की मोदी सरकार ने आज से पूरे देश में लागू कर दिया है. देर शाम 10-01-2020 को सरकार ने इसे लेकर नोटिफिकेशन जारी किया. पांच दिसंबर 2019 को सबसे पहले केंद्रीय दल की बैठक के बाद 10 दिसंबर को नरेंद्र मोदी सरकार की कैबिनेट ने नागरिक संशोधन बिल को लोकसभा में पेश किया था, उसके बाद से ही देशभर में इसे लेकर विरोध प्रदर्शन चल रहा है. देश के सभी यूनीवर्सिटी के छात्र नागरिकता संसोधन कानू के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और शाईन बाग में लगभग एक महीने से महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे धरने पर बैठे हैं. आज

CAA पर सुप्रीम कोर्ट के जज का बड़ा ऐलान! मोदी परेशान

सरकार को बोलिये कि इन बच्चों को भी डरा दे, नहीं तो कल ये भी बेखौफ आपके खिलाफ आवाज बुलंद करेंगे। सबको मार दीजिये फिर लाशों को नागरिकता देकर वोट ले लीजियेगा। जब आने वाली पीढ़ियाँ मुझसे सवाल करेंगी कि जब सच कहना सबसे मुश्किल था, तब तुम क्या कर रहे थे. मैं कहूँगा कि सारा जोख़िम उठाकर वह सच बोल रहा था जो बोलना चाहिए था. सत्ता ही नहीं, मौसम भी डीयू के आन्दोलनकारी इंक़लाबियों का इम्तेहान ले रहा था. इनके नारों ने सबका हिसाब दिया. नागरिकता संसोधन कानून को लेकर पूरे देश उबल रहा है. जगह जगह पर विरोध प्रदर्शन हो रहा है. इसी कड़ी

Least we forget Fatima Sheikh’s contribution to women education

A lesser-known personality in Indian history but she will always be remembered as the first Muslim woman teacher and intersectional educationist of India. She is a liberator of millions of oppressed women. She fought for a casteless society and for modern education of girls. Along with Savitribai Phule, she laid the foundation stone of education opportunities for women in India. Her name is "FATIMA SHEIKH". Fatima and her brother, Usman Sheikh, offered refuge to Savitribai and Jyotirao Phule when they were forced to leave

राष्ट्रवाद और हिंदू धर्म की आड़ में अपने वर्चस्व को बचाने, सवर्णों की खतरनाक राजनीति

BY: SHYAM MEERA SINGH सबसे पहले जेएनयू पर आतंकवादी हमले का जश्न मनाने वालों के उपनामों को पढ़ें, "शुक्ला, दुबे, चतुर्वेदी, जादौन, तोमर, चौधरी, राजपूत, गुर्जर, पांडे, त्रिवेदी, त्रिपाठी, सिंह, मिश्रा, शर्मा" आदि वे क्यों हैं? आपने सोचा अहीर क्यों नहीं है? जाटव क्यों नहीं? कुमार क्यों नहीं? वाल्मीकि क्यों नहीं? नाई क्यों नहीं है? धोबी क्यों नहीं? मीना क्यों नहीं है? वास्तव में, इस देश का सड़ा हुआ "अपरकेस" हिंदू धर्म की आड़ में आपके घरों, विश्वविद्यालयों तक पहुंच गया है। राष्ट्रवाद और हिंदू धर्म की आड़ में ये लड़ाई

पॉन्डिचेरी से ऑक्सफोर्ड तक के विश्वविद्यालय परिसरों में जेएनयू हिंसा के ख़िलाफ़ प्रदर्शन

देश और विदेश के तमाम विश्वविद्यालयों में जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय हिंसा के खिलाफ सोमवार को प्रदर्शन किया गया. पॉन्डिचेरी विश्वविद्यालय, बेंगलुरु विश्वविद्यालय, हैदराबाद विश्वविद्यालय, पंजाब विश्वविद्यालय और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में छात्रों ने प्रदर्शन किए.ऑक्सफोर्ड और कोलंबिया विश्वविद्यालय में भी छात्रों ने एकजुटता दिखाते हुए मार्च किया और परिसर में छात्रों की सुरक्षा की मांग की.

आपको क्या लगता है कि एकलव्य का अंगूठा काटने वाला द्रोणाचार्य सिर्फ कहानियों में था?

By- श्याम मीरा सिंह सबसे पहले जेनएयू पर हुए आतंकी हमले पर जश्न मनाने वालों के सरनेम पढ़िए, "शुक्ला, दुबे, चतुर्वेदी, जादौन, तोमर, चौधरी, राजपूत, गुर्जर, पांडे, त्रिवेदी, त्रिपाठी, सिंह, मिश्रा, शर्मा" आदि ही क्यों हैं? आपने सोचा? अहीर क्यों नहीं है? जाटव क्यों नहीं है? कुमार क्यों नहीं है? वाल्मीकि क्यों नहीं है? नाई क्यों नहीं है? धोबी क्यों नहीं है? मीणा क्यों नहीं है? दरअसल इस देश का सड़ चुका "अपरकास्टवाद" हिंदूवाद के भेष में आपके घरों, विश्विद्यालयों में पहुंच चुका है. राष्ट्रवाद और हिंदूवाद की आड़ में ये लड़ाई, ऊंची

दिल्ली पुलिस का JNU पर हमले के पीछे ABVP के गुंडों को नजरअंदाज करना

BY: Darshan Mondkar नकाबपोश गुंडों द्वारा जेएनयू पर हमले से पहले और उसके दौरान हिंसक गतिविधियों के समन्वय के लिए एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया था। डब्ल्यूए समूह को "यूनिटी अगेंस्ट लेफ्ट" कहा जाता था और लोग इस बात पर चर्चा कर रहे थे कि जेएनयू पर हमले की योजना कैसे बनाई जाए, किस गेट से और यह खबर भी दोहराई गई कि किसकी पिटाई की जा रही थी। इस WA समूह में 18 Admins थे। मेरे मित्र आनंद मंगले ने उस समूह में घुसपैठ करने और स्क्रीनशॉट लेने में कामयाबी हासिल करने के लिए सभी 18 नंबरों के रिकॉर्ड को रिकॉर्ड में लिया है। और जो

JNU: व्हाट्सएप संदेशों से योजना बनाकर हमला करने वाले ABVP कार्यकर्ताओं का पता लग गया

रविवार की शाम 7.03 बजे, व्हाट्सएप मैसेजिंग सेवा पर एक समूह चर्चा के लिए एक संदेश भेजा गया था: "Saalo ko hostel mein ghush ke tode।" हमने उनके हॉस्टल में प्रवेश किया और उनके साथ मारपीट की। समूह के एक अन्य प्रतिभागी ने जवाब दिया: "बिल्कुल, यह एक बार और सभी के लिए चीजों को निपटाने का समय है। अगर हम उन्हें अभी नहीं मारेंगे, तो कब? 'कोमियो' ने गंदगी फैला दी है। शाम 6 बजे के आसपास, एक नकाबपोश भीड़ रॉड से लैस जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय परिसर के अंदर हॉस्टल में घुस गई थी। वीडियो फुटेज में नकाबपोश हमलावरों से दहशत में भाग

JNU हिंसा: मोदी जी और शाह जी ने 90 साल बाद दिला दी नाजी शासन की याद

कांग्रेस ने गृह मंत्री अमित शाह पर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में हमला करने वालों को संरक्षण देने का आरोप लगाया और कहा कि इस मामले की न्यायिक जांच होनी चाहिए. पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने संवाददाताओं से कहा, ''मोदी जी और अमित शाह जी ने छात्रों पर दमन चक्र चलाकर नाजी शासन की याद 90 साल बाद दिला दी. जिस तरह से छात्रों, छात्राओं और शिक्षकों पर हमला किया गया और जिस प्रकार पुलिस मूकदर्शक बनी रही, वह दिखाता है कि देश में प्रजातंत्र का शासन नहीं बचा है.'' उन्होंने कहा, ''युवा प्रजातंत्र और संविधान पर हमले