Mourning the loss of Abhiyan Humane ‘the science man’ – Tears Tributes and Resolves of Bahujan Youth

By- Mangesh Dahiwale  ~ Abhiyan’s untimely death on 8th February 2019 left those who knew him shattered and sad. In less than a few years, Abhiyan left his indelible mark on the Ambedkarite movement and gave it a direction uncared for before. While most of us look for ideologies and the past, he looked at the future and not just an immediate future, but deep future where all the people, including his beloved people, will enjoy the best fruits of humanity. His ideology, his philosophy of life, and his action in the world was…

Shahid Azmi: A Man Who Lived and Died For Justice

By- Deshdeep Dhankhar  ~ Nine years ago, on February 11, 2010, advocate Shahid Azmi was shot dead in his office at Taximen’s colony in Kurla, Mumbai. He had gone back to his office that evening after receiving a call from a man who claimed to have a serious case that needed to be discussed with Azmi. Known for his spirit to fight injustice, Shahid Azmi was a Mumbai based human rights lawyer. In his brief career of seven years, Azmi secured the acquittal of 17 Muslim men charged with alleged terrorism.…

वैलेंटांस्डे को कैसे देखते हैं बहुजन बुद्धिजीवी?

Published By- Aqil Raza    ~ क्या हमें वैलेंटाइंस्डे मनाना चाहिए? इस सवाल का जवाब जब हम जानने की कोशिश करते हैं तो बहुजन महनायिका वीरांगना फूलनदेवी की याद आ जाती है,  जिनका नाम विशव इतिहास के श्रेष्ट विद्रोही महिलाओं की सूची में आता है। जिनका इतिहास पूरा विश्व जानता है। बहरहाल इस दिन को लेकर बहुजन बुद्धिजीवियों की क्या राय है। यह जान लेते हैं प्राद्युमन यादव इस दिन के बारे में लिखते हैं, “दो अफवाहें जो आज के दिन चरम पर रहती हैं. पहली ये कि आज के दिन भगत सिंग को फांसी सुनाई गयी थी. सच्चाई ये हैं कि शहीद भगत सिंह जी को 7…

बहुजन युवा ने किया देश का नाम रोशन, थाईलैंड में International Peace & Buddhist Leader Award से सम्मानित

Published By-  Aqil Raza    ~ बहुजन समाज के युवा ने विदेश में International Peace & Buddhist Leader Award पाकर देश का नाम रोशन किया है, जी हां हम बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के रहने वाले और ओएनज़ीसी गुजरात, मेहसाना मे एग्ज़िक्युटिव इंजीनियर के पद पर तैनात, ऑफिसर्स असोसियेशन के  भूतपूर्व सचिव और पिछले दस सालों से देश के सामाजिक आर्थिक विकास मे एक समाज सेवी, एक लेखक , एक गीतकार, एक गायक के तौर पर कार्य करने वाले विपिन कुमार भारतीय की। जिन्होंने एक बार फ़िर देश का नाम रोशन किया है l... हाल ही मे थाईलैंड…

बेमिसाल बर्तोल्त ब्रेख्त, जिनके विचार आज भी भारत के लिए प्रासंगिक हैं

Published by- Aqil Raza    ~ बर्तोल्त ब्रेख्त को एक बेहतरीन कवि... लेखक... नाट्यकार... के रूप में जरूर पहचाना जाता था, मगर वे एक यथार्थवादी क्रांतिकारी थे इसका अनुभव तो स्टेफन पार्कर की किताब “Bertolt Brecht a Literary Life” ने कराया | जर्मन लेखक बर्तोल्त ब्रेख्त और हंगरी के दार्शनिक जार्ज लुकाच के बीच हुई ऐतिहासिक बहस में समतामूलक समाज की स्थापना के लिए प्रतिबद्ध क्रांतिकारी कला व साहित्य के मूल सृजनकारी तत्त्व कौन से होने चाहिए इसकी चर्चा आज के भारत के सन्दर्भ में भी प्रासंगिक है | ब्रेख्त, की यह कोशिश थी कि... बाह्य…

Testimony of AMU controversy by Sharjeel Usmani

Sharjeel Usmani writes~ "I reached the campus at 9.30 am for attending my classes. All was well back then. Few students were organizing a picture exhibition of the all victims of hate crimes in front of History department. First Asifa memorial lecture was scheduled at 11 am in Cultural hall of Maulana Azad Library; Films on Palestinian struggle were to be screened in Kennedy auditorium at 4:30 pm. I got a call from a friend that Republic TV reporters are creating problem in front of Social Science department. I reached there…

एक पत्रकार स्थिति को रिपोर्ट करे, या स्थिति से निपटने और नतीजों के बारे में सोचे…

By- Urmilesh Urmil   ~ मुट्ठी भर लोगों की नुमाइंदगी करने वाले बेहद संकीर्ण, दृष्टिविहीन और जनविरोधी किस्म के लोग आज हमारे राष्ट्रीय परिदृश्य पर क्यों हावी हैं? क्योंकि विपक्ष के दो प्रमुख शिविरों की अपनी-अपनी बेहिसाब कमियां हैं! 2014 में वो साफ़-साफ़ दिखी थीं! 2019 में भी वो दिखाई दे रही हैं! कांग्रेस आम समझ के स्तर पर क्षेत्रीय या सबाल्टर्न के प्रतिनिधि होने का दावा करने वाले दलों से बेहतर है। पर उसके नीति-निर्धारकों में आज भी ब्राह्मणवादी और मनुवादी मिजाज के लोगों का वर्चस्व है! राहुल गांधी की कुछ बेहतर कोशिशों के बावजूद…

JNU में पीएचडी स्कॉलर दिलीप यादव ने लिखा VC को खुला पत्र, बताई शोषण की कहानी

नई दिल्ली। जेएनयू  कुलपति के नाम खुला पत्र सेवा में कुलपति महोदय जेएनयू, नयी दिल्ली विषय: विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा संस्थागत उत्पीड़न महोदय मैं दिलीप कुमार यादव सेंटर फॉर इनर-एशियन स्टडीज स्कूल ओफ़ इंटरनेशनल स्टडीज में पीएचडी का विद्यार्थी हूं। मैं अगले 20-25 दिन में अपनी पीएचडी जमा करने वाला हूं। फिर भी आपका प्रशासन मेरा हॉस्टल ट्रान्स्फ़र कर रहा है। ये समय एक शोधार्थी के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। और शायद आपका प्रशासन इस बात से अज्ञात है कि हॉस्टल ट्रान्स्फर जैसा उत्पीड़न कितना कष्टदायी हो सकता है। जब मैं खुद 20 दिन में…

मेरा जीवन तीन गुरुओं और तीन उपास्यों से बना है- बाबासाहब डॉ बीआर अम्बेडकर

नई दिल्ली। 25 अक्टूबर 1954 के दिन बाबासाहब डॉ अम्बेडकर का हीरक महोत्सव मुंबई के पुरंदरे स्टेडियम में मनाया गया था। वहीं पर बाबासाहब ने अपने भाषण में कहा था कि.. मेरे तीन उपास्य (देवता) है... मेरे प्रथम देवता ज्ञान है। मेरा दूसरा देवता स्वाभिमान है और मेरा तीसरा देवता शील है।  वहीं आगे बाबासाहब कहते हैं कि... हर मनुष्य के गुरु होते हैं, उसी तरह मेरे भी गुरु (प्रेरणास्रोत) है। मेरे प्रथम और श्रेष्ठ गुरु बुद्ध है। मेरे दुसरे गुरु कबीर हैं और मेरे तीसरे गुरु जोतिबा फुले हैं। यही मेरे तीन गुरु हैं, इनकी…

लालू यादव: फिराकपरस्ती के फ़न को कुचल के रख देने वाला सामाजिक न्याय का योद्धा!

सांप्रदायिक शक्तियों के ख़िलाफ़ अचल-अडिग डटे रहने वाले बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री व देश के पूर्व रेलमंत्री लालू प्रसाद बिना डिगे फ़िरकापरस्ती से जूझने का माद्दा रखने वाले, पत्थर तोड़ने वाली भगवतिया देवी, जयनारायण निषाद, ब्रह्मानंद पासवान, आदि को संसद भेजने वाले, खगड़िया स्टेशन पर बीड़ी बनाने वाले विद्यासागर निषाद को मंत्री बनाने वाले, आज़ादी के 43 वर्षों के बीत जाने के बाद भी बिहार जैसे पिछड़े सूबे में समाज के बड़े हिस्से के युवाओं को उच्च शिक्षा से जोड़ने हेतु 6 नये विश्वविद्यालय खोलने वाले लोकप्रिय, मक़बूल व विवादास्पद नेता लालू…