भोजपुर बिहार का पिछड़ा वर्ग आंदोलन बनाम भूमिहारो का ब्राह्मण – सामंतवाद

By~Manish Ranjan :: भोजपुर और कैन्हैया :: भोजपुर .... आंदोलन के बारे में कल्याण मुखर्जी लिखते हैं : " 1967 के आम चुनाव में सहार चुनाव क्षेत्र से जगदीश महतो के साथी रामनरेश राम चुनाव लड़ रहे थे। 17 फरवरी 1967 को, वोट वाले दिन, वोट डालने गए जगदीश मास्टर ने एक भूमिहार को वोटों की गड़बड़ी करते पकड़ा। भूमिहार लोग बहुत दिन से इस निडर और अख्खड़ कोइरी को सबक सिखाने का मौका तलास ही रहे थे। जैसे ही जगदीश मास्टर ने उस भूमिहार को पकड़ा, चारो ओर से भूमिहारो ने उनपर हमला कर दिया और इतना पीटा की अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। अपमान और क्षोभ से…

बेगूसराय में कांटे की टक्कर:

By~Sanjeev Chandan कुछ अनुभवी लोगों से सीधे या दूसरों के माध्यम से पता चले बेगूसराय के वोट पैटर्न से एक पिक्चर का पता चलता है। हालांकि प्रिडिक्शन करना ठीक नहीं होता चुनाव परिणाम को लेकर, लेकिन एक तस्वीर तो स्पष्ट हो ही जाती है वोटिंग देखकर। 1. गिरिराज सिंह के समर्थक उत्साहित हैं। इनमें वे लोग भी हैं जिनमें से कोई विधायक तो कुछ दबंग नेता भी हैं। जाति भूमिहार। इनके अनुसार गिरिराज सिंह जीत रहे हैं। भूमिहारों का वोट बमुश्किल कन्हैया को मिला है कैडर वोट के अलावा। इनके अनुसार गिरिराज सिंह को यादवों का वोट भी अच्छा मिला है। अति…

वाराणसी में मोदी को टक्कर देने वाले तेज बहादुर कौन हैं?

By-दिलीप मंडल कौन है तेजबहादुर यादव और उसकी फैमिली फोटो आपको क्यों देखनी चाहिए? भ्रष्टाचार से लड़ने के सबसे सटीक प्रतीक क्यों हैं तेजबहादुर यादव? तेज बहादुर यादव ने अपनी जिंदगी बीएसएफ में खपा दी थी. दुश्मन की गोलियों की बीच जिंदा रहा. लगातार सीमाओं पर तैनात रहा. वैसा ही राष्ट्रवादी था, जैसा आरएसएस हर किसी को बनाना चाहता है. मुसलमानों के लिए नफरत वाली उनकी पोस्ट आप पढ़ सकते हैं. मतलब कि जैसा कि होता है, वैसा ही था. बाकी की कहानी ये है कि रिटायरमेंट के करीब आखिरी पोस्टिंग थी. वहां खाना खराब मिला, तो उन्हें गुस्सा आया. मोदी राज…

तनवीर हसन-दो दशक से सामाजिक न्याय की मजबूत आवाज

By -Khalid Anis Ansari तनवीर हसन दो दशक से ज्यादा राजद के साथ रहे हैं लेकिन कभी मंत्रिपद नहीं मिला. आलोचनात्मक आवाज़ हैं, आवामी नेता हैं, चमचागिरी नहीं करते हैं सुप्रीमो की. एक बार आधा गाँधी मैदान भर दिया था पटना में तो सियासी हलचल मच गयी थी. बकौल #नूर हसन आज़ाद भाई, जो कि पसमांदा आन्दोलन के सीनियर और तजुर्बेकार एक्टिविस्ट हैं, तनवीर साहब ने विधान सभा में दलित मुसलमानों के आरक्षण के लिए भी कई बार आवाज़ उठाई है. एक बार जब बक्खो मुस्लिम समाज के विस्थापन का मुद्दा उठा था तब भी तनवीर साहब ने उनके अधिकारों के लिए संघर्ष किया था.…

बेगुसराय में सीपीआई की प्रति क्रांति चल रही है…

Published by- Aqil Raza By- संजीव चन्दन ~ बेगुसराय से सीपीआई के कैडर होते थे भोला सिंह, जिनकी जाति-यात्रा राजनीतिक यात्रा में तब्दील होते हुए आखिरी तौर पर भाजपा तक पहुंची। उनका पांव छूने भूमिहार-बलकरण कन्हैया पहुंचा ही था। यह ऐतिहासिक दृश्य रहा ब्रह्मो-कम्युनिस्ट आन्दोलन का। उन्ही भोला सिंह के ऊपर मुसहर जाति से आने वाली सांसद और तत्कालीन विधायक भागवती देवी का एक भाषण पढा जाने लायक है। (कोशिश होगी स्त्रीकाल में उसे पढवाये) समझ में आयेगा कि जहां भी जायें जाति हड्डी तक धंसी हुई ले जाते हैं परशुराम के वंशज लोग।…

मोदी-शाह की नाक में दम कर दिया है राज ठाकरे ने:

By-Prashant Tandon इस चुनाव का सबसे दिलचस्प पहलू हैं राज ठाकरे. उनकी पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का एक भी प्रत्याशी चुनाव नहीं लड़ रहा है लेकिन वो पूरे महाराष्ट्र में ताबड़ तोड़ रैलियां कर रहे हैं. अपने हर भाषण में वो सिर्फ मोदी और अमित शाह पर तीखे हमले करते हैं. जैसी उनकी छवि है वो खरी खरी बात करते हैं. एक इंटरव्यू में उन्होने कहा कि बीजेपी के सांसद अपने काम करवाने के लिए शरद पवार की शरण में जाते हैं. मुंबई की जी रैली का ये वीडियो क्लिप है उसमे उन्होने कहा कि मुकेश अंबानी ने हवा का रुख भांप लिया है इसीलिये कांग्रेस के…

मध्य प्रदेश : बाबरी मस्जिद पर टिप्पणी को लेकर साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज।

निर्वाचन आयोग के निर्देश पर मध्य प्रदेश पुलिस ने भाजपा प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. प्रज्ञा ने बाबरी मस्जिद पर विवादित बयान दिया था, जिसके बाद उनके खिलाफ यह कार्रवाई की गई है. इससे पहले निर्वाचन आयोग ने शनिवार को भाजपा प्रत्याशी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था. बाद में उसने दिन में टीटी नगर पुलिस थाने को आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन को लेकर ठाकुर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने को कहा था. मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) वीएल कांता राव ने पीटीआई-भाषा से कहा कि ठाकुर के खिलाफ भारतीय…

योगी आदित्यनाथ और नितीश कुमार मोदी बीजेपी को दे रहे भीतर से चुनौती।

By~ नवल किशोर कुमार लोकसभा चुनाव दिन-पर-दिन दिलचस्प होता जा रहा है। खासकर उत्तर भारत के राज्यों यथा उत्तर प्रदेश और बिहार में। इन दोनों राज्यों में कुल 120 सीटें हैं। उत्तर प्रदेश में 80 और बिहार में 40। जाहिर तौर पर दिल्ली में सरकार बनाने के लिए इन दोनों राज्यों में फतह जरूरी है। फिर चाहे वह कांग्रेस हो या भाजपा। पिछली बार इन दोनों राज्यों से भाजपा और उसके घटक दलों को कुल मिलाकर 102 सीटें मिली थीं। भाजपा के समक्ष चुनौती न केवल पिछले प्रदर्शन को दुहराने की है बल्कि बेहतर करने की है। वजह यह भी है कि इस बार कांग्रेस और उसके…

मायावती ने बहुजन एकता की खातिर कितनी बड़ी कुर्बानी दी :- जानिए बहुजन बुद्धिजीवियों से

By-Dr Manisha Bangar,Kankalata Yadav बहुजन चेतना के खातिर बहुजन एकता की खातिर मायावती जी ने व्यक्तिगत स्तर पर बहुत बड़ी कुर्बानी दी. नेता जेंडर न्यूट्रल होता है लेकिन समाज उसे खासकर महिला नेता को जेंडर न्यूट्रल की नजर से नहीं देखता. वह उसे जाती और जेंडर दोनों की चौखट में देखता है. यही इस गंदे ब्राह्मणवादी संस्कृति की देन है. महिला होने के नाते और बहुजन समाज की नेता होने के नाते हम समझ सकते है को कितना कठिन गया होगा गेस्ट हाउस कांड को परे रखकर एकजुट होना. इसमें इस बात का भी स्वागत करना चाहिए कि मुलायम सिंह जी और अखिलेश यादव…

बसपा और सपा साथ आने के बाद सवर्णों की लल्लो -चप्पो करने की मजबूरी खत्म हो गई है

By-दिलीप मंडल यूपी में 24 साल बाद बहनजी और नेताजी के एक साथ आने के बाद अब प्रदेश में राजनीति की तस्वीर साफ हो गई है. यह बहुत बड़ा सामाजिक समीकरण हैं, जिसमें दलित-पिछड़ों और अल्पसंख्यकों की हिस्सेदारी के बाद इसे रोक पाना किसी के लिए भी आसान नहीं होगा. बाकी जनता मालिक है लोकतंत्र में. जिसे चाहे जिता दे, जिसे चाहे हरा दे. सपा और बसपा ने अपनी पिछली कड़वाहट भुलाई है, यह महत्वपूर्ण है. इस कड़वाहट का बुरा असर दलितों और पिछड़ों दोनों ने झेला है. सपा राज में दलितों और बसपा राज में पिछड़ों का काफी अहित हुआ है. इसके अलावा दोनों दलों को…