नेहरू जयंती पर “आईडिया ऑफ इंडिया” का सच और झूठ

By- दिलीप मंडल, सच को स्वीकार कीजिए. हमारी कोई साझा विरासत नहीं है. हम आपस में धर्म, जाति, भाषा, चमड़ी के रंग आदि के आधार पर एक दूसरे से लड़ने-भिड़ने और एक दूसरे से नफरत करने वाले लोग हैं जो इतिहास के संयोग से एक भौगोलिक इलाके के अंदर रह रहे हैं. हजारों साल का हमारा जो इतिहास है, उसमें गर्व करने लायक कुछ नहीं है. इतिहास के किसी भी दौर में देश का ये नक्शा नहीं रहा. इतिहास में कभी ऐसा समय नहीं था जब कन्याकुमारी, मणिपुर, गुजरात और कश्मीर एक साथ किसी एक शासन के तले रहे. भारत एक नया देश है. इसलिए संविधान निर्माताओं ने भारत…

क्या धार्मिकआस्था कि वजह से बढ़ रहा दिल्ली का प्रदूषण?

By- संजय श्रमण जोथे, दिल्ली मे प्रदूषण की समस्या की जिम्मेदारी न तो पूरी तरह से कानून व्यवस्था से जुडी है न औद्योगीकरण से न पूंजीवाद से और न ही शहरीकरण से। आप माने या न मानें ये इस देश के धर्म और संस्कृति से पैदा हुई समस्या है। किसान खेत में खूंटी जला रहा है क्योंकि यह सस्ता पड़ता है भले ही उसे अगली फसल में ज्यादा उर्वरक और कीटनाशक डालकर पूरी फ़ूड चेन को प्रदूषित करना पड़े, लेकिन वो ऐसा करेगा क्योंकि पढा लिखा वर्ग उससे बात ही नहीं करता किसानों और पेशेवरों सहित नागरिक समाज में संवाद नहीं होता। धार्मिक लोग पटाखे जला रहे हैं…

The Role of Caste in the ‘Asia Bibi Case’

By ~ Amen Jaffer, Dr. B. R. Ambedkar begins his undelivered speech of 1936, Annihilation of Caste, by arguing that the success of political and economic reform in India depends on social reform. He described an Indian society riven by caste oppression in which the upper caste sought to control the minutest details of the lives of the lowest castes - what they can wear, the food then can eat, the spaces where their bodies are allowed. This was a world in which the lowest castes are treated as untouchable, where their bodies,…

“Strengthening Special Strategic Partnership between India and South Korea: Prospects and Challenges”

12th RASK International Seminar held at University of Delhi Researchers’ Association for the Study of Korea held its 12th International seminar on “Strengthening Special Strategic Partnership between India and South Korea: Prospects and Challenges” on 26th and 27th of October, 2018 and released its book entitled “Act East: Transitions in India’s Engagement with South Korea” edited by Professor Sushila Narshimhan and Professor Kim Do Young. More than 40 research scholars and faculties from various discipline of various…

कमजोर पर ज़ोर, यह है सवर्ण फेमिनिज़्म का दौर!

By- Deepali Tayday "कमजोर पर ज़ोर... यह है सवर्ण फेमिनिज़्म का दौर" इस बात का ताज़ा उदाहरण दिखा, मुम्बई के ओशिवरा में जब रात के एक बजे शराब के नशे में धुत सो कॉल्ड मॉडल मेघा शर्मा अपार्टमेंट में रात में ड्यूटी कर रहे गार्ड के साथ बेहद मारपीट-गालीगलौच और झूमा-झटकी की......। मेघा शर्मा यहीं पर नहीं रुकी, बल्कि गार्ड पर असॉल्ट करने का झूठा इल्ज़ाम लगाकर 100 नम्बर डायल करके पुलिस को भी बुला लिया। और फिर चीखते-चिल्लाते हंगामा करते हुए पुलिस, गार्ड और अपार्टमेंट के लोगों के बीच में सरेआम कपड़े उतारकर ब्रा-पेंटी में खड़ी हो गईं। दरअसल,…

अलवर में गौ तस्करी के शक में की गई हत्याओं की ज़िम्मेदार है एक घिनौनी मानसिकता!

By- आकिल रज़ा यह बात मैं बहुत ही ज़िम्मेदारी के साथ लिख रहा हूं.. कि मॉव_लिंचिंग का जो दर्द हम यहां बैठकर महसूस करते हैं, दरअसल वो उतना नहीं है बल्कि उससे कई गुनाह ज्यादा है, वैसे तो देश के कई राज्यों और शहरों में मॉव लिंचिंग की घटनांए हई हैं, लेकिन उन सबसे ऊपर लिस्ट में नाम आता है मेवात क्षेत्र का, मेवात भारत के उत्तरपश्चिम में हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में स्थित एक ऐतिहासिक व पारंपरिक क्षेत्र है। मोटेतौर पर इसकी सीमा में हरियाणा का मेवात जिला, राजस्थान के अलवर, भरतपुर और धौलपुर जिले और साथ ही उत्तर प्रदेश का कुछ…

हाशिमपुरा नरसंहार: सरकारी कत्लेआम के साढ़े तीस साल बाद

~ Anil Janvijay, अक्सर पूछा जाता हैः ''हाशिमपुरा नरसंहार को कितने साल हो गए.'' जवाब हैः ''जितनी उम्र जैबुन्निसा की बिटिया की है.'' जैबुन्निसा हाशिमपुरा में अपनी मां और दो बेटियों के साथ भाई के घर में रहती हैं. दो कमरों के बीच सेहन वाले घर में जैबुन्निसा की बुजुर्ग मां चारपाई पर लेटी हैं. उनके घर में कोई मर्द सदस्य नहीं है. जैबुन्निसा कहती हैं, ''उस दिन अलविदा जुमा (अरबी महीने रमजान का आखिरी जुमा) था. हमारी तीसरी बेटी (उज्मा) उसी रोज पैदा हुई थी. उसके अब्बा (इकबाल) अपनी बिटिया को देखकर नमाज पढ़ने गए थे लेकिन फिर नहीं लौटे.''…

‘धर्म पर लिबरल और नाइंसाफी पर कठोर’

~ खालिद अनीस अंसारी गुलाम नबी आज़ाद को अचानक एहसास होता है कि 'हिन्दू' उम्मीदवारों ने उनको चुनाव प्रचार में बुलाना बंद कर दिया है. हामिद अंसारी फरमाते हैं की बंटवारे के लिए सिर्फ अँगरेज़ और पाकिस्तान ज़िम्मेदार नहीं बल्कि भारत भी उतना ही ज़िम्मेदार है. इस बात को साबित करने के लिए वह सरदार पटेल का सहारा लेते हैं. कल जब सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी केस की तारीख़ पर टिप्पड़ी की तो असदुद्दीन ओवैसी ने बीजेपी को चुनौती दे डाली की अध्यादेश ला कर मंदिर बना कर तो दिखाएं. शेहला रशीद एक मानसिक परेशानियों की शिकार आयरिश गायत्री के इस्लाम धर्म…

मैं आपसे पूछता हूं धर्म परिवर्तन करके अपना नाम स्थाई रूप से क्यों नहीं बदल लेते-डॉ बीआर अंबेडकर

धर्म परिवर्तन कोई बच्चों का खेल नहीं है। यह ‘मनुष्य के जीवन को सफल कैसे बनाया जाए’ इस सरोकार से जुड़ा प्रश्न है...इसको समझे बिना आप धर्म परिवर्तन के संबंध में मेरी घोषणा के वास्तविक निहितार्थ का अहसास कर पाने में समर्थ नहीं होंगे। छुआछूत की स्पष्ट समझ और वास्तविक जीवन में इसके अमल का अहसास कराने के लिए मैं आप लोगों के खिलाफ किये जाने वाले अन्याय और अत्याचारों की दास्तान का स्मरण कराना चाहता हूं। सरकारी स्कूलों में बच्चों का दाखिला कराने का हक जताने पर या सार्वजनिक कुंओं से पानी भरने का अधिकार जताने पर या घोड़ी पर दूल्हे को…

#MeToo में बहुजन औरतें क्यों नहीं ????

22 सितंबर 1992 को राजस्थान के जयपुर से लगभग 50 किलोमीटर दूर भटेरी गांव में सवर्णों ने एक बहुजन महिला भँवरी देवी प्रजापति के साथ सामूहिक बलात्कार किया सिर्फ इसलिए क्योंकि 'साथिन' पद पर पदस्थ सरकारी कर्मचारी की ड्यूटी निभाते हुए भँवरी ने एक नौ महीने की बच्ची की शादी रोकी थी। सवर्ण वर्ग उनसे बेहद नाराज़ था कि एक कुम्हारिन की हिम्मत कैसी हुई हमारी परंपरा और संस्कृति में टांग अड़ाने की।इसका बदला भँवरी देवी के पति को मारपीट करके बांधकर उसके ही सामने ही खेत में 5 सवर्णों ने बारी-बारी से बलात्कार करके लिया। भँवरी ने जब अपनी आप बीती…