बहुजन दूल्हे का दर्द- क्या मैं हिंदू नहीं हूं, मेरे लिए संविधान अलग है क्या ?

0
Want create site? With Free visual composer you can do it easy.

कासगंजः उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के बसई बाबस गांव के रहने वाले बहुजन युवक संजय कुमार का दर्द बेहद गहरा है. शादी में हर युवक का सपना होता है कि उसकी बारात गाजे- बाजे से चढ़े लेकिन संजय के साथ ऐसा संभव नहीं है. उनकी शादी में करीब 20 दिन बचे हैं लेकि शादी विवाद में फंसती जा रही है. दरअसल संजय की होने वाली पत्नी कासगंज के निजामाबाद की रहने वाली हैं, जोकि एक ठाकुर बहुल गांव में रहतीं है. संजय चाहते हैं कि उनकी बारात गांव से होकर बैंड बाजे के साथ निकले लेकिन जातीय गर्व में झूम रहे ठाकुर इसका विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि जब उनके इलाके वाले रास्ते पर पहले कभी बारात आई ही नहीं तो ये नई मांग क्यों की जा रही है. जो रास्ता बहुजनों की बारात के लिए इस्तेमाल होता है, वहीं से बारात ले जानी चाहिए.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, संजय इस के लिए सरकारी कार्यालयों, पुलिस, एससी-एसटी कमीशन, मीडिया से लेकर सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ और अदालत तक को चिट्ठी लिख चुके हैं. संजय का सवाल है, ‘क्या मैं हिंदू नहीं हूं. जब देश का संविधान कहता है कि हम सब समान हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, जोकि हिंदुत्व पार्टी के सीएम हैं, कहते हैं कि हम सब हिंदू हैं. अगर ऐसा है तो फिर मुझे इस तरह की परेशानी का सामना क्यों करना पड़ रहा है? मैं हिंदू नहीं हूं क्या? संविधान से चलने वाली सरकार में लोगों के लिए अलग-अलग नियम नहीं हो सकते.’

संजय की मांग पर पिछले हफ्ते कासगंज के जिलाधिकारी और एसएसपी ने भी दुल्हन के गांव का दौरा किया था. जांच के बाद उन्होंने संजय से कहा कि जिस रास्ते से बारात ले जाने की मांग की जा रही है, उसकी गलियां संकरी और रास्ते पर नालियों के कारण कीचड़ भरा हुआ है. जांच में यह भी पाया गया है कि इन रास्तों से पिछले 20 वर्षों से किसी भी बहुजन की बारात नहीं गुजरी है, लिहाजा ऐसे में वहां से बारात निकाले जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती. लड़की के परिजन भी बारात को उसी इलाके से निकालने की मांग पर अड़े हैं.

गांव की प्रधान और ठाकुर समुदाय की कांति देवी ने कहा कि लड़की की शादी से उन्हें कोई परेशानी नहीं है मगर कोई जबरदस्ती हमारे रास्ते पर आएगा और पंरपरा तोड़ने की बात कहेगा तो यह कैसे संभव होगा. कांति देवी ने कहा कि पिछले दो दशकों से जब किसी बहुजन की बारात कभी हमारे रास्ते से निकली नहीं है तो विवाद वाला काम क्यों किया जा रहा है? डीएम का इस बारे में कहना है कि हिंदुओं में शादी एक भावना होती है, न कि कोई जुलूस. बहुजन परिवार इस मांग को लेकर बेवजह लड़ाई का मुद्दा बना रहे हैं. डीएम ने कहा कि वह गांव की परंपरा नहीं बदल सकते. दूसरी ओर क्षेत्रीय विधायक भी ठाकुरों के साथ खड़े नजर आ रहे हैं.

Did you find apk for android? You can find new Free Android Games and apps.

शयद आपको भी ये अच्छा लगे लेखक की ओर से अधिक