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महाराष्ट्र

जिन लोगों को लगता है कि एक थप्पड़ मारने पर SC/ST Act लग जाता है!

By- Umashankar Yadav अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के सदस्यों को जबरन अखाद्य या घृणाजनक (मल मूत्र इत्यादि) पदार्थ खिलाना या पिलाना। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को शारीरिक चोट पहुंचाना या उनके घर के आस-पास या परिवार में उन्हें अपमानित करने या क्षुब्ध करने की नीयत से कूड़ा-करकट, मल या मृत पशु का शव फेंक देना। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य के शरीर से बलपूर्वक कपड़ा उतारना या उसे नंगा करके या उसके चेहरें पर पेंट पोत कर सार्वजनिक रूप में घुमाना या इसी प्रकार का कोई ऐसा कार्य…

प्रोफेसर पर हमला, जातिवादी संकीर्ण सोच का खतरनाक परिचय

By-Rajeev Suman महात्मागांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा, में आज लगातार जिस तरह से एक प्रोफ़ेसर को एक ख़ास विचार वाले लोगों और छात्र समूह द्वारा ट्रोल किया जा रहा है वह बेहद शर्मनाक और निंदनीय है। यह चिंतनीय भी है कि वर्तमान राजनीति और सत्तारूढ़ पार्टी के वैचारिक रूप से कुंद और कुपोषित कार्यकर्ता और छात्र इकाई से जुड़े विद्यार्थी जिस तरह से विश्वविद्यालयों के बौद्धिक विमर्श के स्पेस को संक्रमित और संकुचित कर रहे हैं उसे किसी भी लिहाज से लोकतांत्रिक संस्थानों और अभिव्यक्ति के स्थलों के लिए स्वास्थ्यकर नहीं कहा जा…

Bamcef International Network President Jayant Rangari pays tributes to the sterling persona of Raju Kamble

Dear Mulnivasi Elders, Brothers, Sisters & Young Ones Jai Bhim !!! Jai Mulnivasi !!! Namo Buddhay !!! Jai Bharat !!! It’s a time of deep sorrow and grief that we all are in, due to the untimely demise of BAMCEF KAMBLE Saheb (Mn. Raju Kamble Sir) Please accept my & from everyone at BAMCEF INTERNATIONAL NETWORK sincere heartfelt condolences to Mn. Raju Kamble Sir’s Family Members and All Phuley - Ambedkarite Samaj in India and across the World. Mn. Raju Kamble Sir was a, Simple, Honest, Benevolent, Committed, Strong,…

बहुजनों के लिए हमेशा खलनायक के रुप में याद किए जाएंगे अटल बिहारी वाजपेयी

By-Siddartha Ramu 1- अटल बिहारी बाजपेयी 1 अप्रैल 2004 के बाद भर्ती होने वाले सरकारी कर्मचारियों की पेंशन खत्म कर दी थी। सांसदों- विधायकों की पेंशन छोड़कर अन्य सभी सरकारी कर्मचारियों की पेंशन उन्होंने खत्म कर दी थी 2- अटल बिहारी बाजपेयी ने 1999 में देश के सरकारी और सार्वजिनक सार्वजनिक संस्थाओं को देशी-विदेशी पूंजीपंतियों को बेचने के लिए विनिवेश मंत्रालय बनाया। 3-अटल बिहारी वाजपेयी ही गुजरात में मुसलानों के नरसंहार के समय प्रधानमंत्री थे। उन्होंने राजधर्म निभाना चाहिए कह कर पल्ला झाड़ लिया और मुसलमानों का कत्लेआम देखते रहे। 4-…

Raju Kamble: An ideal follower of Babasaheb Ambedkar

By-Mangesh Dahiwale New dehli: As the news is pouring in, Raju Kamble breathed his last at 2.10 am in Vancouver, Canada. His death is a great loss to the Ambedkarite movement. When the international reach of Ambedkarites was limited only to a few immigrants from Punjab to the western hemisphere, it was Raju Bhau, as we fondly called him, who spanned the North America, Europe, Middle East, and South East Asia to build what is now known as Ambedkar International Mission (AIM). His grasp of the philosophy of Babasaheb Ambedkar…

अम्बेडकर अंतर्राष्ट्रीय मिशन (AIM) के संस्थापक राजू कांबले सर का वैंकुवर कनाडा में निधन

नई दिल्ली। हम-आप जैसी बेहद सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाले राजू काम्बले जी ने "शिक्षित हो, संघर्ष करो, संगठित हो" के नारे को आत्मसात कर बहुत संघर्ष कर प्रोफेशनल और सोशल लाइफ में बुलंदियों को छुआ। वे आजीवन बाबासाहेब अम्बेडकर के विचारों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने के साथ-साथ अलग-अलग देशों में फैले दलितों को यूनिट के लिए उन्होंने आजीवन प्रयास किया। बहुत ऊंचाईयों पर पहुँचने पर भी वे कभी अपने समाज से नहीं कटे बल्कि समाज के लिए समर्पित रहे और ग्राउंड पर जाकर दलित एक्टिविज़्म के लिए कार्य किया। उन्होंने भारत के हर एक…

टिस्स मुंबई : आयोग ने कहा, ST वर्ग के प्रति उदार बने टाटा, छोड़े कंजूसी

By: Santosh Yadav राष्ट्रीय अनुसूचित जऩजाति आयोग ने मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस को साफ-साफ शब्दों में निर्देश दिया है की वह आदिवासी छात्रों के प्रति उदारता बरते और उनसे छात्रावास शुल्क के अलावा आहार शुल्क ना वसूले। इसके लिए आयोग ने संस्थान को अपने अन्य संसाधनों से राशि का प्रबंध करने को कहा है। बताते चलें की संस्थान की ओर से इसी वर्ष अनुसूचित जनजाति के छात्रों को भी हॉस्टल की फीस तथा डाइनिंग फीस देने को कहा गया था। पूर्व में अनुसूचित जनजाति के छात्रों को इस से मुक्त रखा गया था। संस्थान के नए फरमान से छात्र…

विश्व मूलनिवासी दिवस: हमारी विरासत, संस्कृति, पहचान और अधिकारों का दिवस।

By- DR. Manisha Bangar आज 9 August अर्थात विश्व मूलनिवासी दिन है आज यह दिन विरासत और संस्कृति को याद करने का दिन है। सदियों से खोई हुई पहचान को उजागर करने का दिन है | अधिकार दिवस भी है | यह हमारी आन-बान और शान का दिन है | हमारे गर्व और गौरव का दिन है | हमारे लिये हर्षोल्लास का दिन है | खूब नाचो खूब गाओं जश्न मनाओ | मैं भी तो पिछले कुछ दिनों से शासक जातियों से, शेठजी-भट्टजी से विदेशी आर्यों से सवाल करते हुए, बार बारगुनगुना रहीं हूँ एक गीत... “तुम इतना क्यूँ घबरा रहे हो क्या डर है जिसको छुपा रहे हो” क्योंकि पूरी दुनिया जब…

उपेक्षित नायक: करशनदास मुलजी…

By: Kirti Kumar विमर्श। जब वैष्णव समाज की बात आती है तो हमारी ज़ुबान पर एक ही नाम आ जाता है, मोहनदास करमचंद गांधी! और गांधी जी का नाम आते ही हमारे मन के रेडियो में गांधी जी की वो प्रिय धुन बजने लगती है, 'वैष्णव जन तो तेने रे कहिए..' लेकिन हक़ीक़त यह है कि वैष्णव जन की वेदना को करशनदास मुलजी नामक एक वैष्णव जन ने गांधीजी के जन्म से काफ़ी पहले समझा और उसे दूर भी किया। करशनदास मुलजी...यह वो नाम है, जिसने भारत के समाजिक परिवर्तन और समाज सुधार के दौर में काफ़ी सुर्ख़ियाँ बटोरी। लेकिन फिर गुमनामी के अंधेरो में खो गया या फिर उनकी…

महाराजा छत्रपति शाहूजी ने आज ही के दिन लागू किया था आरक्षण

पिछले कुछ समय से भारत में विभिन्न समुदायों द्वारा आरक्षण की माँग हो रही है, कई समूहों द्वारा उग्र आंदोलन भी चलाए जा रहे है। लेकिन इनमे से ज़्यादातर संगठन के पास आरक्षण के बारे में पर्याप्त जानकारी का अभाव है। भारत में एससी-एसटी-ओबीसी को संविधान द्वारा दिए गए आरक्षण के ख़िलाफ़ भी कई समुदाय आरक्षण की माँग कर रहे है। जबकि बहुत कम लोग जानते है कि भारत में आरक्षण की शुरुआत कोल्हापुर संस्थान के महाराजा छत्रपति शाहूजी ने अपने राज्य में पिछड़े समुदाय को 50% आरक्षण देकर की थी। सैकडों रजवाड़ों में बंटे भारत में अखंड भारत की कल्पना…