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Culture

बुद्ध पूर्णिमा पर बुद्ध के दुश्मनों को पहचानिए

~ संजय श्रमण         बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर बुद्ध के सबसे पुराने और सबसे शातिर दुश्मनों को आप आसानी से पहचान सकते हैं। यह दिन बहुत ख़ास है इस दिन आँखें खोलकर चारों तरफ देखिये। बुद्ध की मूल शिक्षाओं को नष्ट करके उसमे आत्मा परमात्मा और पुनर्जन्म की बकवास भरने वाले बाबाओं को आप काम करता हुआ आसानी से देख सकेंगे। भारत में तो ऐसे त्यागियों, योगियों, रजिस्टर्ड भगवानों और स्वयं को बुद्ध का अवतार कहने वालों की कमी नहीं है। जैसे इन्होंने बुद्ध को उनके जीते जी बर्बाद करना चाहा था वैसे ही ढंग से आज तक ये पाखंडी बाबा लोग बुद्ध के पीछे…

महिलाओं के साथ बलात्कार संबंधी तथ्य भारतीय पुरूषों की विकृत मानसिकता का प्रमाण प्रस्तुत कर रहे हैं

~Siddharth Ramu अलवर में दलित महिला के साथ बलात्कार की रूह कंपा देने वाली घटना से अभी ऊबरा ही नहीं था, कि कश्मीर में तीन वर्षीय बच्ची के साथ बलात्कार की खबर आ गई। बलात्कार संबंधी तथ्य यह प्रमाणित करने के लिए काफी हैं कि भारतीय समाज जितना क्रूर-निर्मम दलितों के संदर्भ में है, उतना ही क्रूर-निर्मम महिलाओं के संदर्भ में है। दलित समाज की तो एक सामूहिक आवाज भी है, लेकिन दुखद यह है कि महिलाओं की कोई सशक्त सामूहिक आवाज सुनाई नहीं देती। https://www.youtube.com/watch?v=qd-2DKSk-iU&t=231s बलात्कार संबंधी बुनियादी तथ्य- बलात्कार पर…

राम का दर्शन और बलात्कार

Published By- Saddam Karimi By- नवल किशोर कुमार संयुक्त राष्ट्र संघ में कुल 193 सदस्य देश हैं। इनमें भारत उन देशों में शामिल है जहां महिलाओं के खिलाफ सबसे अधिक आपराधिक घटनाएं जिनमें बलात्कार मुख्य रूप से शामिल है। यहां तक कि अफगानिस्तान और सीरिया से भी अधिक। नेशनल क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो की एक रिपोर्ट के मुताबिक विश्व में सबसे अधिक बलात्कार की घटनाएं भारत में घटित होती हैं। घरेलू हिंसा के सबसे अधिक मामले भी पूरे एशिया में भारत में सबसे अधिक होते हैं। वर्ष 2017 में बलात्कार की 24,923 घटनाएं घटित हुईं। इनमें 98 फीसदी घटनाओं को…

बहुजन समाज से आती थी भारत देश की पहली महिला शासक

Published by- Aqil Raza   ~ भारत के इतिहास में बतौर पहली महिला शासक प्रभावती गुप्त, रानी दिद्दा और रूद्रम्मा देवी से लेकर रजिया सुल्तान के नाम आते रहे हैं। मगर रुकिए, .... भारत की पहली महिला शासक नाग कन्या नागनिका थी, जिसका शासन प्रथम सदी ईसा पूर्व में था, जिसके चाँदी के सिक्के महाराष्ट्र से मिले हैं। सिक्कों के ठीक बीचों - बीच रानी नागनिका का नाम लिखा है। इसकी लिपि ब्राह्मी और भाषा प्राकृत है। आप इसे चित्र दो में देख सकते हैं। लेखिका शुभांगी भडभडे ने मराठी भाषा में रानी नागनिका पर एक ऐतिहासिक उपन्यास लिखा है। उपन्यास में…

International Women’s day: भारतीय समाज, बहुजन महिला का जीवन और मुक्ति का मार्ग

Published by- Aqil Raza By- Dr. Manisha Bangar     ~ अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर -- #आजकाबहुजन_विचार भारतीय समाज बहुजन महिला का जीवन और मुक्ति का मार्ग --शिक्षा , आर्थिक स्वालंबन और ब्राह्मणवादी व्यवस्था के खिलाफ संघठित संघर्ष से ही बहुजन महिला अपनी गुलामी की जंजीरे तोड़ पायेगी :-- कहने की आवश्यकता नहीं है कि महिलाओं की दासता केवल यहाँ पनप रही ब्राह्मणवादी विचारधारा से है जो सहूलियत के अनुसार संस्कृति या परंपरा के नाम पर खुद के लिए आहार और पोषण प्राप्त करती रही और इस बहाने खत पानी न मिलने पर धर्म के नाम पर दिमागों पर कोड़े…

जिस भी सो कॉल्ड महान पर्सनालिटी से आप प्रभावित है।

जिस भी सो कॉल्ड महान पर्सनालिटी से आप प्रभावित है, लेकिन जब पता चले कि वो यौन उत्पीड़न कर रहा है/ किया है तो उसे खारिज करिए. …........ क्या करें, जब ये पता चले कि शानदार, मानवीय और प्रगतिशील फिल्में, किताबें, नाटक, पेंटिंग, कविताएं रचने वाले का निजी जीवन यौन अपराधों से कलंकित है. बोहेमियन राप्सोडी अपने समय के रॉक म्यूजिक सुपरस्टार फ्रेडी मर्करी (1946-1991) की जिंदगी की कहानी है. वे क्विन नाम के बैंड के लिए गाते थे और बोहेमेयिन राप्सोडी इसी ग्रुप का कंपोजिशन है. इस ग्रुप ने अपने समय में जो म्यूजिक बनाया, उसकी लोकप्रियता की…

فیض احمد فیض اور انکی شاعری

Published by- Aqil Raza By- Faiz ahmad Faiz   ~ فیض احمد فیض جن کی پیدائش 13 فروری 1911 کو تقسیمِ ہند سے پہلے سیالکوٹ میں ہوئی جیسا کہ قدیم زمانے میں ہوتا تھا فیض صاحب کی ابتدائی تعلیم کا آغاز بھی گھر سے ہی ہوا انہونے گھر میں ہی اردو فارسی اور عربی کی تعلیم حاصل کی اس کے بعد ان کا داخلہ انجمن اسلامیہ کے مدرسے میں کرا دیا گیا جس کے صدر خود ان کے والد تھے فیض صاحب نے  گورنمنٹ کالج لاہور سے 1931ء میں بی اے کے ساتھ عربی میں بی اے آنرز کی ڈگری بھی حاصل کی۔ 1933ء میں انگریزی ادب میں ایم اے اور پھر1934ء میں عربی زبان و ادب میں بھی…

प्रेम और बहुजन विचारधारा

By-डॉ मनीषा बांगर प्रेम एक अनमोल अहसास है। प्रेम चाहे वह किसी भी रूप में क्यों न हो। चाहे वह माता-पिता का अपने बच्चों से प्यार हो या फिर पति-पत्नी के बीच का प्यार। प्यार न हो तो जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है और न ही समाज की। प्रेम की व्याख्या और ऐहसासात भी समय के साथ बदले है. आधुनिकता जागरूकता शैक्षणिक विकास के आते प्रेम की अनुभूति सिर्फ एक तरफा या पुरुष केंद्रित न होकर दोनों व्यक्तियों ने एक दुसरे का सम्मान करना सहयोग करना , एक दुसरे से ईर्ष्या जलन न करके एक दुसरे को अपने अपने व्यक्तिमत्व को फूलने फलने की स्वतंत्रता…

ब्राह्मणवाद का प्रतीक है राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय

Published By– Aqil Raza By- अरविन्द गौड़    भारत में नाट्य प्रशिक्षण से जुड़ी जो सबसे कड़वी सच्चाई है, वह यह कि यहां नाट्य प्रशिक्षण सिर्फ एक संस्थान की परिधि तक सीमित रह गया है। ऐसी धारणा स्थापित कर दी गयी है कि आप यदि एनएसडी से प्रशिक्षित हैं तो ही आप प्रशिक्षित हैं, अन्यथा आप प्रशिक्षित नहीं हैं, आप अमैच्योर हैं। एक साजि़श के तौर पर स्थापित की गयी इस धारणा से पूरे हिन्दुस्तान के थियेटर का सबसे ज़्यादा नुकसान हुआ है। निस्संदेह राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय एक महत्वपूर्ण संस्था है, जिसने थियेटर की समझ बनाने में, उसके तकनीकी विकास…

“Relentless Struggle of Ramabai Ambedkar.”

Published By:Gaurav By:Obed Manwatkar~ Ramabai Bhimrao Ambedkar (7 February 1898 - 27 May 1935; also known as Ramai or Mother Rama) was the first wife of Babasaheb Dr. B.R. Ambedkar ( The Architect Of the Constitution Of India) . Her unwavering support and sacrifices have been credited by Dr. Ambedkar to have been instrumental in helping him achieve his pursuit of higher education and his true potential.She is also the subject of a number of biographical movies and books. A number of landmarks across India have been given…