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Culture

From S(e)oul to the land of sambar

By Mirah Zamin Chennai:  Boxed between two buildings, hidden behind the façade of billboards and banners in the dark corridors of Kaveri complex, Osaka food’s situated in Nungambakkam sells some of the most traditional food ingredients for Korean cuisines. Shekar the manager of the shop says ‘Shin Ramyum’, is the favourite noodle brand amongst the Koreans. Chennai has four more such outlets that import Korean food items such as sticky rice, tuna fish, dried seaweeds, silkworms and rice paper for sushi. The oldest is one…

Re-visiting nostalgia over coffee

The first sight that any visitor lays eyes upon is the wooden framed photo of Jawahar Lal Nehru hanging right in front of the entrance. The coffee house here is like any other coffee house operated by the Workers Cooperative society with an only difference that it still has life unlike the one back in my hometown (Lucknow) which has lost its charms with the springing culture of branded foreign chains.

शहीद दिवस: भगत सिंह और राष्ट्रवाद…पढ़िए झकझोर देने वाला विमर्श

By: Keerti Kumar विमर्श। 23 साल की उम्र में आज युवा किसी मूवी का रिव्यू पूछता है या क्रिकेट का स्कोर!! ज्यादा पढ़ाकु होगा तो किसी धर्म स्थान में अपने उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए मिल जाएगा! लेकिन इस उम्र में संशयात्मक विवेक बुद्धिवादी वैचारिक क्षमता शायद ही कहीं देखी जा सकती है। भगत सिंह कुछ दंभी पाखंडी राष्ट्रवादीयों द्वारा सिर्फ फांसी के लिए ही याद किये जाते है। भगत सिंह का फांसी पर चढ़ने का निर्णय वाकई में क्रांतिकारी था। कम उम्र में राष्ट्र के लिए प्राण न्योछावर कर देना बहुत बड़ी बात है। लेकिन इससे भी अधिक क्रांतिकारी…

STEARS; Kashmiri guy campaigned to create safe space women and third gender

The campaign comprises of two phases, in the first stage or the questioning phase women and transgender individuals will ask questions or share their thoughts on stereotypes and generalizations plaguing their society. In the second stage, also known as the response stage, men will answer the questions posed. This entire campaign is aimed at creating a medium to discuss, openly and freely, the issues that concern our society. The first phase saw over 300 volunteers from 55 countries participated

Holi – A Festival to Commomorate Bahujan Burning

By-  Dr. K. Jamanadas It is well known that Holi forms one of the important festivals among the Hindus. It is supposed to be festival of Shudras, and is one of the three most important ones in India, the others being Dasera and Diwali. The Dasera is in honour of killing of Ravana and Divali is in honour of killing of Narakasur and noted pesant king Bali. The purpose of Holi, indirectly, is concerned with killing of Hiranyakashyap. The important elements of the festival of Holi are as follows:- A pyre is burnt. Abuses are…

जितना डरोगे उतना मरोगे – कलकत्ता के पैदल रिक्शा खीचनेवाले की कहानी

"भईया, ये बात नही है...मारने को तो यहां भी लोग मार ही देते है। लेकिन वो कहते है न कि "जितना डरोगे उतना मरोगे" बस इसी बात पर हम टिक गए है...ज़िन्दगी एक ही है, कब ख़त्म हो जाए क्या मालूम, लेकिन जब तक जिएंगे शान से लोगो से आँखों मे आँखे डाल कर बात करके जीएंगें। हम रिक्शा चलाते है, गरीब है तो इसका ये मतलब थोड़ी है कोई भी हमे पेल कर चला जाएगा।"

मनुस्मृति दहन दिवस: बहुजनों की ब्राह्मणों के खिलाफ महासंघर्ष की कहानी

नई दिल्ली। 25 दिसंबर 1927 यानी की आज ही के दिन बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर ने हमारे समाज में ऊंच- नीच, जात-पात की खाई पैदा करने वाला ब्राह्मणों द्वारा बनाया गया शास्त्र मनुस्मृति का दहन किया था। अपने समाज के लाखों लोगों के साथ बाबा साहेब ने इस काम को अंजाम दिया था। और हिंदू धर्म में जातिभेद को न मानने की शपथ दिलाई थी। बाबा साहेब ने महाड़ तालाब के महासंघर्ष के अवसर पर खुलेतौर पर मनुसमृति जलाई थी। ब्राह्मणों के खिलाफ बहुजनों की यह सबसे बड़ी लड़ाई कही जाती है. इसलिए इसे गर्व से याद किया जाता है। बताया जाता है कि बाबा साहेब के…