ब्राउजिंग श्रेणी

Culture

बीजेपी की घिनौनी राजनीति, स्कूली छात्रों को दिला दी सदस्यता!

भले ही हमारे देश को एकता में अनकेता का देश कहा गया हो लेकिन वो धरातल पर दिखता नजर नहीं आ रहा हैं। हिन्दू मुस्लमान पर राजनीति हो रही हैं, कब्रीस्तान शमशान पर राजनीति हो रही हैं, अली बजरंगबली पर राजनीति हो रही है। लेकिन अब स्कूली बच्चों पर राजनीति होने लगी हैं। इतना ही नहीं अब स्कूली बच्चों को बीजेपी की सदस्ता दिलाया जा रही हैं।बीजेपी विधायक सुशील सिंह ने स्कूल पहुंचकर छात्रों को सदस्यता दिलाई। दरअसल वाराणसी के सैयदराजा गांव से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया। सैयदराजा में बीजेपी विधायक सुशील सिंह ने नेशनल इंटर कॉलेज में…

सिंधु सभ्यता से ब्राह्मणों ने चुराया है योग, बुधनमा

By: Nawal Kishor Kumar कोई भी धर्म तभी लोककल्याणकारी हो सकता है जब समानता और सम्मान उसके बुनियादी मूल्य हों। और लोककल्यणकारी धर्म की सबसे पहली शर्त तो यह है कि वह यथार्थपरक हो। लेकिन हिंदू धर्म में इसका सर्वथा अभाव है। समझे बुधनमा भाई। नवल भाई, मेरा सवाल योग को लेकर है। क्या आप योग को भी पाखंड मानते हैं? मैं योग की ही बात कर रहा हूं बुधनमा भाई। लेकिन पूरी बात समझ में आए, इसलिए सबसे पहले धर्म से जुड़ी कुछ बुनियादी बातें कह रहा हूं। अच्छा यह बताओ कि धर्म का मतलब क्या केवल पूजा-पाठ होता है या कुछ और भी। हमको लगता है कि धर्म जो…

रामराज और आदर्शराज का अंतर समझो बुधनमा

By- Nawal Kishor Kumar आज भोरे-भोरे एतना काहे चवनिया मुस्की मार रहे हो बुधनमा भाई। कोई खास बात है का? आउर दिन तो मुंह से ताड़ी के बास आता रहता है। आप भी न नवल भाई। आप एक नंबर के चालू आदमी हैं। हमको खुश होने का एको गो मौका नहीं देना चाहते हैं। आज का खबर नहीं देखे। कौन सी खबर बुधनमा भाई। नयका सरकार ने आते ही काम कर दिया। तीन तलाक वाला जो कानून है, उसको कैबिनेट ने पास कर दिया है। अब सब मुस्लिम महिलाओं के अधिकार की रक्षा हो सकेगी। इ काम तो ठीक किया है ई मोदी। अब तो रामराज आ ही गया। बुधनमा भाई। आप न एक नंबर के मासूम इंसान हैं।…

ब्राह्मणवादी-मनुवादी संस्कृति के बुनियादी लक्षण क्या हैं?

भारत में उत्तर से लेकर (एक हद तक) दक्षिण तक और पूरब ले लेकर पश्चिम तक आर.एस.एस. (संघ), भाजपा एवं अन्य आनुषांगिक संगठनों और कार्पोरेट घरानों की विजय और उनका वर्चस्व केवल एक राजनीतिक और आर्थिक परिघटना नहीं है, बल्कि उससे कहीं ज्यादा गहरे व्यापक स्तर पर यह एक सांस्कृतिक परिघटना भी है, जिसने उस मनःस्थिति और चेतना का निर्माण किया, जिसके चलते सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के नाम पर देश के हिंदूकरण (ब्राह्मणीकरण) और विकास के नाम पर कार्पोरेटाइजेशन (पूंजी की लूट को खुली छूट) का मार्ग प्रशस्त हुआ। आखिर ब्राह्मणवादी-मनुवादी संस्कृति या…

सरस्वती को आराध्य देवी न मानने के चलते बहुजन प्राचार्य को जेल, क्या है, सरस्वती का सच ?

By- Sidharth ~ फुले और आंबेडकर ‘रिडल्स ऑफ हिंदुज्म’ में भी सरस्वती को देवी मानने से इंकार करते हैं और उनके बहुजन विरोधी चरित्र को उजागर करते हैं। क्या शूद्रों-अतिशूद्रों को सरस्वती से मुक्ति पा, सावित्रीबाई फुले को नहीं अपनाना क्या प्राचार्य डॉ. एस.एस. गौतम ने सरस्वती को देवी मानने से इंकार करके कुछ गलत किया। ऐसा करके उन्होंने क्या फुले-पेरियार और डॉ. आंबेडकर के विचारों का ही पालन नहीं किया है? आज के इंडियन एक्सप्रेस की सूचना के अनुसार मध्य प्रदेश के दतिया जिले के राजकीय महाविद्यालय के प्राचार्य को सरस्वती का अपमान करने के…

फुले की ‘गुलामगिरी’ : ब्राह्मणवाद से मुक्ति का पहला घोषणापत्र

1 जून 1873 को जोतिराव फुले (11अप्रैल 1827 - 28 नवम्बर 1890) की रचना ‘गुलामगिरी’ का प्रकाशन हुआ था। यह किताब मराठी में लिखी गयी। इसकी प्रस्तावना फुले ने अंग्रेजी में और भूमिका मराठी में लिखी है। इस किताब को लिखने का मूल उद्देश्य बताते हुए फुले ने लिखा है कि ‘इस किताब को लिखने का एकमात्र उद्देश्य सभी उत्पीड़ित लोगों को उनकी गुलामी का अहसास दिलाना, उनको इस योग्य बनाना कि वे अपनी इस हालात के कारणों को पूरी तरह समझ सकें और अपने आप को ब्राह्मणों की गुलामी, उत्पीड़न एवं अन्याय से मुक्त करने के लिए सक्षम बना सकें (गुलामगिरी की…

बुद्ध पूर्णिमा पर बुद्ध के दुश्मनों को पहचानिए

~ संजय श्रमण बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर बुद्ध के सबसे पुराने और सबसे शातिर दुश्मनों को आप आसानी से पहचान सकते हैं। यह दिन बहुत ख़ास है इस दिन आँखें खोलकर चारों तरफ देखिये। बुद्ध की मूल शिक्षाओं को नष्ट करके उसमे आत्मा परमात्मा और पुनर्जन्म की बकवास भरने वाले बाबाओं को आप काम करता हुआ आसानी से देख सकेंगे। भारत में तो ऐसे त्यागियों, योगियों, रजिस्टर्ड भगवानों और स्वयं को बुद्ध का अवतार कहने वालों की कमी नहीं है। जैसे इन्होंने बुद्ध को उनके जीते जी बर्बाद करना चाहा था वैसे ही ढंग से आज तक ये पाखंडी बाबा लोग बुद्ध के पीछे…

महिलाओं के साथ बलात्कार संबंधी तथ्य भारतीय पुरूषों की विकृत मानसिकता का प्रमाण प्रस्तुत कर रहे हैं

~Siddharth Ramu अलवर में दलित महिला के साथ बलात्कार की रूह कंपा देने वाली घटना से अभी ऊबरा ही नहीं था, कि कश्मीर में तीन वर्षीय बच्ची के साथ बलात्कार की खबर आ गई। बलात्कार संबंधी तथ्य यह प्रमाणित करने के लिए काफी हैं कि भारतीय समाज जितना क्रूर-निर्मम दलितों के संदर्भ में है, उतना ही क्रूर-निर्मम महिलाओं के संदर्भ में है। दलित समाज की तो एक सामूहिक आवाज भी है, लेकिन दुखद यह है कि महिलाओं की कोई सशक्त सामूहिक आवाज सुनाई नहीं देती। https://www.youtube.com/watch?v=qd-2DKSk-iU&t=231s बलात्कार संबंधी बुनियादी तथ्य- बलात्कार पर…

राम का दर्शन और बलात्कार

Published By- Saddam Karimi By- नवल किशोर कुमार संयुक्त राष्ट्र संघ में कुल 193 सदस्य देश हैं। इनमें भारत उन देशों में शामिल है जहां महिलाओं के खिलाफ सबसे अधिक आपराधिक घटनाएं जिनमें बलात्कार मुख्य रूप से शामिल है। यहां तक कि अफगानिस्तान और सीरिया से भी अधिक। नेशनल क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो की एक रिपोर्ट के मुताबिक विश्व में सबसे अधिक बलात्कार की घटनाएं भारत में घटित होती हैं। घरेलू हिंसा के सबसे अधिक मामले भी पूरे एशिया में भारत में सबसे अधिक होते हैं। वर्ष 2017 में बलात्कार की 24,923 घटनाएं घटित हुईं। इनमें 98 फीसदी घटनाओं को…

बहुजन समाज से आती थी भारत देश की पहली महिला शासक

Published by- Aqil Raza ~ भारत के इतिहास में बतौर पहली महिला शासक प्रभावती गुप्त, रानी दिद्दा और रूद्रम्मा देवी से लेकर रजिया सुल्तान के नाम आते रहे हैं। मगर रुकिए, .... भारत की पहली महिला शासक नाग कन्या नागनिका थी, जिसका शासन प्रथम सदी ईसा पूर्व में था, जिसके चाँदी के सिक्के महाराष्ट्र से मिले हैं। सिक्कों के ठीक बीचों - बीच रानी नागनिका का नाम लिखा है। इसकी लिपि ब्राह्मी और भाषा प्राकृत है। आप इसे चित्र दो में देख सकते हैं। लेखिका शुभांगी भडभडे ने मराठी भाषा में रानी नागनिका पर एक ऐतिहासिक उपन्यास लिखा है। उपन्यास में…