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Documentary

ईवीआर पेरियार:जिन्हें एशिया का सुकरात कहा जाता है

By-डॉ सिद्धार्थ रामू~ भारतीय समाज और व्यक्ति का मुकम्मल आधुनिकीकरण जिन चिंतकों के विचारों के आधार पर होना है, उनमें ई.वी. रामासामी पेरियार अग्रणी हैं. पेरियार ने उन सभी बिंदुओं को चिह्नित और रेखांकित किया है जिनका खात्मा भारतीय समाज के आधुनिकीकरण की अनिवार्य शर्त है. ई.वी. रामासामी नायकर ‘पेरियार’ भारत की प्रगतिशील श्रमण बहुजन-परंपरा के ऐसे लेखक हैं जिन्होंने उत्तर भारत के द्विजों की आर्य श्रेष्ठता और मर्दवादी दंभ, राष्ट्रवाद, ब्राह्मणवाद, वर्ण-जाति व्यवस्था, ब्राह्मणवादी पितृसत्ता और शोषण-अन्याय के सभी रूपों को चुनौती

सामाजिक क्रांति के योद्धा ललई सिंह यादव जन्मदिन विशेष

पेरियार की चर्चित किताब 'सच्ची रामायण' को हिंदी में लाने और उसे पाबंदी से बचाने के लिए सुप्रीमकोर्ट तक लड़ाई लड़ने वाले मान्यवर ललई सिंह यादव सामाजिक क्रांति के योद्धा थे. ऑर्गेनिक इंटेलेक्चुअल मान्यवर यादव जी का आज जन्मदिवस है. एक सितंबर 1911 को उत्तरप्रदेश के कानपुर देहात में उनका जन्म हुआ था. द्रविड़ आंदोलन के अग्रणी, सामाजिक क्रांतिकारी पेरियार ईवी रामासामी नायकर की किताब सच्ची रामायण का हिंदी में अनुवाद करते ही उत्तर भारत में तूफान उठ खड़ा हुआ था. 1968 में ही ललई सिंह ने ‘द रामायना: ए ट्रू रीडिंग’ का हिन्दी अनुवाद करा…

BBC और मीना कोटवाल: बहुजन महिला पत्रकार के जातिगत प्रताड़ना की कहानी, पार्ट-10

आज मैं पिछला नहीं बल्कि कल की ही एक ताज़ा सूचना से शुरू करना चाहूंगी. कल मुझे पता चला कि मिस्टर झा ने बीबीसी से इस्तीफ़ा दे दिया है. जैसे ही मुझे पता चला चंद लोगों के लिए रही सही इज्जत भी मेरे दिल से खत्म हो गई. कुछ लोगों पर बहुत विश्वास किया था, जिन्हें मैंने अपनी परेशानी का हर मामला सबसे पहले बताया था और वो मुझे सिवाये आश्वासन के कुछ नहीं देते. हालांकि विश्वास और इज्जत की परत धीरे-धीरे उतरती गई और आज रही सही भी, सब पूरा साफ़ हो गया. इस सूचना का ज़िक्र इसलिए करना जरूरी है क्योंकि बीबीसी की तरफ़ से आधिकारिक बयान यही दिया जा…

BBC और मीना कोटवाल: बहुजन महिला पत्रकार के जातिगत प्रताड़ना की कहानी, पार्ट-9

मैं और बीबीसी- 9 ‘‘कहां से हो?’’ ‘‘दिल्ली से ही, जन्म-पढ़ाई सब दिल्ली से ही हुआ है, लेकिन राजस्थान से भी संबंध रखते हैं.’’ ‘‘राजस्थान..? राजस्थान में कहा से हो?’’ ‘‘बूंदी ज़िले से’’ ‘‘अच्छा... राजस्थान में क्या हो?’’ ‘‘दलित हैं मैम’’ (गर्दन हिलाते हुए शांति-सी छा जाती है) ............................................................. ये सब मुझ से शुरूआत के दिनों में ही पूछा गया था. वे भी ऑफिस में नई थीं और मैं तो थी ही. हां, उनको कई सालों का अनुभव जरूर था. एक जाने-माने हिंदी चैनल की रिपोर्टर रही हैं और बीबीसी में सीनियर…

BBC और मीना कोटवाल: बहुजन महिला पत्रकार के जातिगत प्रताड़ना की कहानी, पार्ट-8

मैं और बीबीसी- 8 समय के साथ-साथ मेरे मन में गुस्सा उत्पन्न होना शुरू हो गया. मुझे हमेशा से अपने आत्मसम्मान से बहुत प्यार रहा है. न्यूज़रूम में तीन बार जिस तरह राजेश प्रियदर्शी सर ने मुझे सबके सामने डांटा था, उससे मेरे आत्मसम्मान को गहरा धक्का लगा था. दूसरी बार जब उन्होंने मुझे डांटा था तो वो दो दिन बाद मुझे अकेले में ले जाकर सॉरी भी बोले थे. अगर वे सही थे तो सॉरी किस बात का और वो सही नहीं थे तो जिस तरह उन्होंने पूरे न्यूज़रूम में चिल्लाकर मुझे डांटा था वैसे ही सॉरी सबके सामने बोलना चाहिए था. खैर, ये बात तो मैं उनसे उस समय…

BBC और मीना कोटवाल: बहुजन महिला पत्रकार के जातिगत प्रताड़ना की कहानी, पार्ट-7

मैं और बीबीसी-7 मैं इतने तनाव में आ गई थी कि मेरा ऑफिस जाने का मन ही नहीं करता था. मन में हमेशा यही चलता रहता था कि मेरा एक्सीडेंट हो जाए, मुझे कुछ हो जाए... बस ऑफिस ना जाना पड़े. जब मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ तो इन सब के बारे में मैंने अपने संपादक मुकेश शर्मा, भारतीय भाषाओं की एडिटर रूपा झा और यहां तक कि रेडियो एडिटर राजेश जोशी को भी बताया. सबको लगा कि मुझे ही गलतफ़हमी हुई है, मैं ही जरूरत से ज्यादा सोच रही हूं. लेकिन वो दौर सिर्फ मैं जानती हूं कि मैं कैसे-कैसे उस भयावह स्थिति में थी. मेरे मन में इतना डर बैठ गया था कि कोई कुछ…

BBC और मीना कोटवाल: बहुजन महिला पत्रकार के जातिगत प्रताड़ना की कहानी, पार्ट-6

मैं और बीबीसी-6 मॉर्निंग मीटिंग में ज़्यादातर चर्चा स्टोरी आइडिया को लेकर होती है. अधिकतर स्टोरी राजेश प्रियदर्शी सर ही अप्रूव करते थे, जो बीबीसी हिंदी के डिजिटल संपादक हैं और मीटिंग में अधिकतर समय मौजूद होते थे. मैं भी उस मीटिंग में स्टोरी आइडिया लेकर पहुंचती, लेकिन अधिकतर आइडिया रिजेक्ट कर दिए जाते. शुरू में जब मेरी स्टोरी रिजेक्ट होती तो मुझे लगता शायद मैं ही उस लेवल का नहीं सोच रही हूं, जो यहां का है. धीरे-धीरे स्टोरी कैसे पेश करनी है और कैसी स्टोरी होनी चाहिए, यह समझने की कोशिश कर रही थी. मैंने खुद के अंदर कई बदलाव भी…

प्रेम और बहुजन विचारधारा

By-डॉ मनीषा बांगर प्रेम एक अनमोल अहसास है। प्रेम चाहे वह किसी भी रूप में क्यों न हो। चाहे वह माता-पिता का अपने बच्चों से प्यार हो या फिर पति-पत्नी के बीच का प्यार। प्यार न हो तो जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है और न ही समाज की। प्रेम की व्याख्या और ऐहसासात भी समय के साथ बदले है. आधुनिकता जागरूकता शैक्षणिक विकास के आते प्रेम की अनुभूति सिर्फ एक तरफा या पुरुष केंद्रित न होकर दोनों व्यक्तियों ने एक दुसरे का सम्मान करना सहयोग करना , एक दुसरे से ईर्ष्या जलन न करके एक दुसरे को अपने अपने व्यक्तिमत्व को फूलने फलने की स्वतंत्रता…

“Relentless Struggle of Ramabai Ambedkar.”

Published By:Gaurav By:Obed Manwatkar~ Ramabai Bhimrao Ambedkar (7 February 1898 - 27 May 1935; also known as Ramai or Mother Rama) was the first wife of Babasaheb Dr. B.R. Ambedkar ( The Architect Of the Constitution Of India) . Her unwavering support and sacrifices have been credited by Dr. Ambedkar to have been instrumental in helping him achieve his pursuit of higher education and his true potential.She is also the subject of a number of biographical movies and books. A number of landmarks across India have been given…

क्या सम्राट अकबर को ब्राह्मणों ने विष्णु अवतार घोषित किया था ?

मुग़ल सम्राट अकबर को लेकर आज तगड़ा भ्रम फैला है | पुराने इतिहासकारों ने उसे धार्मिक रूप से सहिष्णु व सबको साथ लेकर चलने वाला महान बादशाह लिखा है | यह सच है कि यदि अकबर धार्मिक रूप से सहिष्णु नहीं होता तो राजपूतों राजाओं के साथ उसकी संधियाँ नहीं निभती | पर आजकल भारत में धार्मिक तौर पर एक नया ट्रेंड चला है, दूसरे के धर्म, जाति को कठघरे में खड़ा कर उसका चरित्रहनन करने का | अकबर भी इस नए ट्रेंड का पूरा शिकार है | पहले विदेशी व वामपंथी इतिहासकारों ने उसे भारतियों का मनोबल तोड़ने के लिए जरुरत से ज्यादा महिमामंडित किया तो आज राजनैतिक,…