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महानायक बिरसा मुंडा कैसे बने भगवान!

आज बिरसा मुंडा की जयंती है और पूरा आदिवासी समाज जयंती मना रहा है. वही ट्वीटर पर भी धरती आबा-बिरसामुंडा ट्रेंडिंग पर चल रहा है. बिरसा मुंडा औपनिवेशिक शोषण के खिलाफ आदिवासी जनता के निर्णायक संघर्ष के प्रतीक माने जाते हैं. हालंकि कम लोग जानते है कि बिरसा मुंड़ा कौन है. तो आपको बता दें कि जिस वक्त राजनीति की मुख्यधारा का प्रतिनिधित्व करने वाली कांग्रेस अंग्रेजों की छत्रछाया में सीमित आंतरिक स्वशासन या होम रूल की मांग कर रही थी. उससे कई दशक पूर्व बिरसा मुंडा ने अंग्रेजों से मुक्ति के खिलाफ निर्णायक संघर्ष का ऐलान किया और पूरी

पतंजलि के प्रोडक्ट्स का बायकॉट ही कारगर उपाय है !

रामदेव ने आंबेडकर, पेरियार के विचारों को पढ़ने-गुनने वालों के खिलाफ जो जहर टीवी चैनल पर उल्टी किया था. अब वह हजारों लोगों के बीच भी प्रवचन देते हुए उसी नफरत के जहर की उल्टी कर रहा है. सरेआम! उसकी जुबान से निकली जहर का असर यह भी हो सकता है कि उसे सही मानने वालों की भीड़ आंबेडकर या पेरियार का नाम लेने वालों की हत्या कर दे और दंगा फैल जाए कत्लेआम मच जाए गृहयुद्ध छिड़ जाए. कायदे से एक ईमानदार लोकतांत्रिक शासन होता तो हिंसा भड़काने की कोशिश के लिए रामदेव को गिरफ्तार कर तुरंत जेल में बंद कर देता. नफरत और दंगा भड़काने के जुर्म

क्या जेएनयू की फीस बढाने के समर्थक सार्वजनिक धन की इस लूट पर भी खामोश बने रहेंगे?

आम खाताधारकों पर मिनिमम बैलेंस के लिए पेनाल्टी और ज्यादा ट्रांजेक्शन करने पर तुरंत चार्ज लगाने वाले एसबीआई ने पिछले पांच साल मे कुल 1 लाख 63 हजार 934 करोड़ रुपये का लोन राइट-ऑफ किया है. कि आम आदमी को लूटने ओर कारपोरेट को बांटने की नीति मोदी सरकार में खूब परवान चढ़ रही है. और सबसे बड़ी बात तो यह है कि इस 1 लाख 63 हजार 934 करोड़ रुपये का बड़ा हिस्सा पिछले दो साल में राइट-ऑफ किया गया है. देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक ने 2016-17 में 20 हजार,339 करोड़ रुपये के फंसे कर्ज को बट्टा खाते डाल दिया था उस वक्त भी यह

भारत की भुखमरी में मोदी सरकार ने तोड़ा दुनिया का रिकाॅर्ड

किसी भी देश में स्वास्थ्य का अधिकार जनता का सबसे पहला बुनियादी अधिकार होता है. लेकिन भारत में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में रोज़ाना हजारों लोग अपनी जान गंवा देते हैं. पृथ्वी पर हर एक इंसान का पेट भरने लायक पर्याप्त भोजन का उत्पादन हो रहा है. लेकिन फिर भी विश्व के कुछ हिस्सों में भुखमरी बढ़ती जा रही है और 82 करोड़ से ज़्यादा लोग "लगातार कुपोषण का शिकार" बने हुए हैं. दुनिया में हर इंसान को पर्याप्त भोजन मिले ये सुनिश्चित करने के लिए आख़िर क्या क़दम उठाए जा रहे हैं. 2019 के वैश्विक भुखमरी सूचकांक में भारत दुनिया के उन 45

मजदूरी और अशिक्षा के शिखर पर बहुजन बच्चों का कैसा ये बाल दिवस

ब्राह्मण ठाकुर और वैश्य समाज में गरीब होंगे. लेकिन उनके बच्चे मजदूरी नही करते उनके बच्चे बाल मजदूर नही हैं. बाल मजदूर सिर्फ ओबीसी एससी एसटी और मुसलमान समुदाय में मिलेंगे. मुसलमान में भी केवल भारतीय मूल के मुसलमान बेहद गरीब हैं. अशरफ(विदेशी मूल) समुदाय के मुसलमानों के बच्चे तो विदेशों में पढ़ते हैं. उनके बाप दादा हर बड़ी छोटी पार्टी में नेता हैं . भारत में 1,60,00,000 बाल मजदूर हैं. जिनकी उम्र 5 से 14 साल के बीच है. पढ़ाई लिखाई खेलने कूदने की उम्र में उन्हें श्रम करना होता है. तब जाकर उन्हें दो वक़्त की रोटी नसीब होती है .

बच्चे विश्वविद्यालयों में मारे जाते रहें, तो बाल-दिवस कैसे मनाएं?

आईआईटी मद्रास में एमए फस्ट ईयर की एक छात्रा ने रहस्यमयात्मक तौर से आत्महत्या कर ली है. आत्महत्या करने वाली छात्रा का नाम फातिमा लतीफ है. और केरल के कोल्लम जिले की रहने वाली थी और वो ह्यूमैनिटीज एंड डिवेलपमेंट स्टडीज इंटीग्रेटेड विषय में एमए फस्ट ईयर की छात्रा थी.और अपने क्लास में सबसे टॉपर थी. आशंका जताई जा रही है कि छात्रा ने एक प्रोफेसर के दबाव में आकर आत्महत्या की है. परिजनों के मुताबिक जिस प्रोफेसर पर आरोप है वो छात्रों को परेशान करता था. फातिमा लतीफ कोई आम लड़की नहीं थी. देश की प्रतिभा थी. एंट्रेंस टेस्ट की टॉपर

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ महाभियोग शुरु!

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जिनके खिलाफ महाभियोग की जांच शुरु की जा रही है. कि वो अपने राजनयिको को बदनाम कर रहे है. और ये राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के ख़िलाफ़ महाभियोग की जांच से जुड़ी पहली सार्वजनिक सुनवाई थी. जो कि बुधवार को वॉशिंगटन में हुई. जिसमें अमेरिका के शीर्ष राजनयिक बिल टेलर और जॉर्ज केंट हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स के सांसदों के सामने पेश होने वाले सबसे पहले गवाहों में शामिल हैं. जॉर्ज केंट अमरीका की यूक्रेन नीति के प्रभारी हैं.आपको बता दें. कि महाभियोग एक तरह की जांच है. जिसके ज़रिए अमरीकी राष्ट्रपति को

जंगल और ज़मीन बचाने की लड़ाई लड़ रहें आदिवासियों का संघर्ष!

आदिवासियों की पहचान जल, जंगल और ज़मीन से ज़रूर है. लेकिन प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन के कारण उन्हें इन दिनों अपने मूल स्थान से विस्थापित होना प़ड रहा है. हालांकि वे अपने अधिकारों के लिए आवाज़ बुलंद कर रहे हैं, लेकिन अफ़सोस कि उनकी आवाज़ नक्कारख़ाने में तूती की आवाज़ ही साबित हो रही है. विकास के नाम पर विगत कई वर्षों से झारखंड के आदिवासी विस्थापन का दर्द बहुत झेल रहे है वही छत्तीसगढ़ के उत्तरी भाग में करीब एक लाख सत्तर हजार हेक्टेयर में फैले हसदेव अरण्य के वन क्षेत्र में जंगलों पर उजड़ने का खतरा मंडरा रहा है. इन

जेएनयू जैसे संस्थानों को बचाना क्यों जरूरी है?

जेएनयू में मेरे कई दोस्त हैं जो बहुजन, ओबीसी और मुस्लिम समाज से आते हैं. 'बहुजन साहित्य संघ' में जब मैं पैनलिस्ट के तौर पर गई थी, तो वहां कई ऐसी बहुजन लड़कियों से मुलाक़ात हुई, जो हजारों साल से हो रहे अन्याय के खिलाफ़ मुखर होकर बोल रही थीं. वो सुना रही थी अपने साथ हुई उन कहानियों को, जिनमें संघर्ष ही संघर्ष था और जो बदस्तूर अभी भी जारी है. ज्यादातर लड़कियां मेरी ही तरह अपने घर-परिवार की पहली पीढ़ी थी, जो पढ़-लिखकर और संघर्ष कर यहां तक पहुंची थी. अब ये लड़कियां ना केवल बोल रही थीं, बल्कि ख़ुद के लिए और आने वाली पीढ़ियों के

सस्ती पढ़ाई का हक मांगने पर जेएनयू छात्रों को पड़ा मंहगा ?

दिल्ली के JNU में छात्रों ने प्रशासन को लेकर जंग शुरू करदी है... छात्रो के हिसाब से सरकार JNU को बंद करने में जुटी है. साथ ही सरकार छात्रों की अवाज दबाने में लगी हुई है. जिसे लेकर छात्रों ने धरना प्रदर्शन किया... जहां पुलिस और छात्रों में जंग का महौल देखा जा सकता है. पुलिस छात्रों को आतंकवाद की तरहा मिटाने में जुटी हुई है. मानें युनिवर्सिटी जंग का मैदान बन गई है. इसी को लेकर आज ट्वीटर पर भी काफी गरमा गरमी देखने को मिली. कई जाने माने हस्तियों ने छात्रो का पक्ष लेते हुए ट्वीट भी किया.