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भीमा कोरेगांव हिंसा में गिरफ्तारी, और घटना के पीछे की साजिश

भीमाकोरेगांव में हुई हिंसा के आरोप में आज यलगार परिषद और कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और उनके परिवारजनों के घर पर छापेमारी हुई जबकि इन दंगों के मुख्य आरोपी संभाजी भिड़े और मिलिंद एकबोटे सहित हिंदू गुंडा गैंग के लोग खुलेआम घूम रहे हैं। बल्कि चुनाव से पहले किसी दूसरे दंगे की फ़िराक में औरंगाबाद के आसपास गतिविधियां तेज़ की है। मोदी ख़ुद भिड़े को अपना गुरूजी मानता है, तो फड़नवीस सरकार तो भिड़े-एकबोटे के चरण में पड़ी हुई है। जबकि भिमाकोरेगांव में हुई हिंसा भिड़े-एकबोटे द्वारा प्रायोजित थी, इस मामले में एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था…

बीपी मंडल की शतवार्षिकी

By- प्रेमकुमार मणि 25 अगस्त उस विन्ध्येश्वरी प्रसाद मंडल का जन्मदिन है , जिनकी अध्यक्षता वाले आयोग के प्रस्तावित फलसफे को लेकर 1990 के आखिर में भारतीय राजनीति में एक भूचाल आया और उसने राजनीति की दशा -दिशा बदल दी . इस वर्ष का जन्मदिन कुछ खास है . आज उनके जन्म की सौवीं सालगिरह है . इसलिए आज उन्हें याद किया ही जाना चाहिए . लेकिन मैं अपने ही अंदाज़ में उन्हें याद करूँगा . मेरी कोशिश हालिया इतिहास के उस पूरे दौर पर एक विहंगम ही सही, नज़र डालने की होगी जिसने बीपी मंडल और उनकी राजनीति को आगे लाया . हाई स्कूल का छात्र था ,जब वीपी मंडल…

ओबीसी के अंदर क्यों नहीं है छटपटाहट?

By- संतोष यादव इतिहास साक्षी है इस बात का कि अपने हक-अधिकारों के लिए जितना भारत के अनुसूचित जाति के लोग जागरूक रहे हैं, उतना पिछड़ा वर्ग के लोग नहीं रहे। यह जागरूकता तब भी नहीं थी जब देश में अंग्रेज शासक थे। जोतिबा फुले जैसे महान समाज सुधारक से मिली विरासत को भी पिछड़ा वर्ग संभाल नहीं पाया। वहीं बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने द्विजों की सत्ता को नकारते हुए समाज के अंतिम पायदान पर रह रहे लोगों के लिए संघर्ष किया। जबकि उन दिनों ही देश की राजनीति में ओबीसी समाज के कई कद्दावर नेता कांग्रेस की द्विजपरक राजनीति के हाथों की…

बीपी मंडल, फूले शाहू अंबेडकर पेरियार विरासत के बहुजन नायक

By-Manisha Bangar भारत का इतिहास वैसे तो बहुत पुराना है खासकर द्विजों के नजरिए से लेकिन वंचितों के लिए लिहाज से बहुत नया है। खास बात यह कि बदलाव तभी हुए हैं जब शूद्र वर्ग एक साथ हुआ। पहले जोतिबा फुले ने शूद्रों के हक-अधिकार की बात कही। शूद्रों को पढ़ने का अधिकार दिलाया। फिर शाहू जी महाराज ने कोल्हापुर रियासत में शूद्रों के लिए आरक्षण का प्रावधान किया। उनका जोर भी शिक्षा पर था। बाद में बाबा साहब आंबेडकर ने इसी मार्ग पर चलते हुए संविधान में आरक्षण का अधिकार सुनिश्चित किया। हालांकि वह ओबीसी के लिए अलग से कोटा का प्रावधान नहीं कर…

सभी मेनस्ट्रीम मीडिया के संपादकों को मनीषा बांगर का खुला पत्र, बहुजनो के मुद्दों पर चुप्पी साध कर लोकतंत्र को बचाया नहीं जा सकता।

मुमकिन है कि मेरे इसे खुले पत्र के पहले भी आप उस घटना से वाकिफ होंगे जो हाल ही में बिहार के सुदूर मोतिहारी जिले के महात्मा गांधी सेंट्रल यूनिवर्सिटी में घटित हुई। एक बार फिर मैं आपका ध्यान उसी घटना की तरफ आकर्षित करना चाहती हूं। सत्ता के मद में अंधे हो चुके लोगों ने एक भीड़ की शक्ल में संस्थान के असिस्टेंट प्रोफेसर संजय यादव के उपर हमला बोला। वह अपने कमरे में थे और मॉब खींचते हुए सड़क पर ले गयी। वे उनके उपर लात-घूंसे बरसा रहे थे। उनके शरीर के कपड़े फाड़ डाले और यहां तक कि उनके गुप्तांग पर भी प्रहार किया। वे लोग उनकी जान लेने…

जिन लोगों को लगता है कि एक थप्पड़ मारने पर SC/ST Act लग जाता है!

By- Umashankar  Yadav अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के सदस्यों को जबरन अखाद्य या घृणाजनक (मल मूत्र इत्यादि) पदार्थ खिलाना या पिलाना। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को शारीरिक चोट पहुंचाना या उनके घर के आस-पास या परिवार में उन्हें अपमानित करने या क्षुब्ध करने की नीयत से कूड़ा-करकट, मल या मृत पशु का शव फेंक देना। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य के शरीर से बलपूर्वक कपड़ा उतारना या उसे नंगा करके या उसके चेहरें पर पेंट पोत कर सार्वजनिक रूप में घुमाना या इसी प्रकार का कोई ऐसा कार्य…

मछली बेचने वाली हनन हामिद ने केरल में 1.5 लाख रूपये देकर की मदद

By- Pradyumna Yadav केरल में बीएससी 3rd ईयर की छात्रा हनान हामिद ने 1.5 लाख रुपये मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा किये हैं।  हनान अपनी पढ़ाई मछली बेचकर करती हैं।  इसी पैसे से वो अपनी माँ और भाई का खर्चा भी चलाती हैं। आज उन्होंने मछली बेचने से हुई अपनी सारी कमाई बाढ़ पीड़ितों की मदत के लिए दान कर दी है। हनान इस काम को लेकर काफी चर्चा में हैं। लेकिन इससे पहले हनान तब चर्चा में आयी थीं जब उन्हें मछली बेचने के लिए ट्रोल किया गया था। लोगों को हनान की यह बात नागवार गुजरी थी कि वह स्कूल ड्रेस में मछली बेचती हैं। लोगों ने…

प्रोफेसर पर हमला, जातिवादी संकीर्ण सोच का खतरनाक परिचय

By-Rajeev Suman महात्मागांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा, में आज लगातार जिस तरह से एक प्रोफ़ेसर को एक ख़ास विचार वाले लोगों और छात्र समूह द्वारा ट्रोल किया जा रहा है वह बेहद शर्मनाक और निंदनीय है। यह चिंतनीय भी है कि वर्तमान राजनीति और सत्तारूढ़ पार्टी के वैचारिक रूप से कुंद और कुपोषित कार्यकर्ता और छात्र इकाई से जुड़े विद्यार्थी जिस तरह से विश्वविद्यालयों के बौद्धिक विमर्श के स्पेस को संक्रमित और संकुचित कर रहे हैं उसे किसी भी लिहाज से लोकतांत्रिक संस्थानों और अभिव्यक्ति के स्थलों के लिए स्वास्थ्यकर नहीं कहा जा…

घोर ओबीसी विरोधी थे अटल बिहारी वाजपेयी

By- Santosh Yadav भारत एक मिथक प्रधान देश है। यही वजह है कि यहां 33 करोड़ देवी-देवता हैं। आये दिन इस संख्या में वृद्धि ही हो रही है। अटल बिहारी वाजपेयी को भी एक मिथक बनाने की कोशिशें की जा रही हैं। बताया जा रहा है कि किस तरह उन्होंने देश को महान बनाया। उन्हें महिमामंडित करने वालों में संघी और सवर्ण तो शामिल हैं ही, दलित और पिछड़े वर्ग के सत्तालोलूप नेतागण भी हैं। जबकि वे भी इस बात को मानते हैं कि अटल बिहारी वाजपेयी ओबीसी और अन्य वंचित तबकों के घुर विरोधी रहे। संघी उन्हें जिन कार्यों के लिए महान बता रहे हैं उनमें एक अहम कार्य…

Bamcef International Network President Jayant Rangari pays tributes to the sterling persona of Raju Kamble

Dear Mulnivasi Elders, Brothers, Sisters & Young Ones Jai Bhim !!! Jai Mulnivasi !!! Namo Buddhay !!! Jai Bharat !!! It’s a time of deep sorrow and grief that we all are in, due to the untimely demise of BAMCEF KAMBLE Saheb (Mn. Raju Kamble Sir) Please accept my & from everyone at BAMCEF INTERNATIONAL NETWORK sincere heartfelt condolences to Mn. Raju Kamble Sir’s Family Members and All Phuley - Ambedkarite Samaj in India and across the World. Mn. Raju Kamble Sir was a, Simple, Honest, Benevolent, Committed, Strong,…