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भारतीय न्यूजरूम को कैसे जाति ने आकार दिया!

1996 में कुछ समय के लिए एक विदेशी संवाददाता ने पत्रकार BN Uniyal से पूछा कि क्या वह किसी दलित पत्रकार को जानते हैं. दोस्तों और सहकर्मियों से बात करने के बाद Uniyal को कोई भी दलित पत्रकार नहीं मिला. 2017 में 10 से अधिक वर्षों तक एक समान खोज के बाद पत्रकार sudipta mondal ने कहा कि वह केवल भारत में 8 दलित पत्रकार खोजने में सक्षम रहे और उनमें से केवल 2 ही उसके लिए जोखिम उठाने के लिए तैयार हुए. इसके बाद अक्टूबर 2018 और मार्च 2019 के बीच भारतीय मीडिया में हाशिए के कलाकारों के प्रतिनिधित्व के बारे में अधिक जानकारी

तेलंगाना सरकार डॉ. मनीषा बांगर को इसलिए इश्वरी बाई मेमोरियल अवार्ड से नवाज़ रही है

प्रतिष्ठित सामाजिक न्याय क्रूसेडर डॉ. मनीषा बांगर के नाम इस साल (2020) का तेलंगाना सरकार और ईश्वरी बाई मेमोरियल ट्रस्ट द्वारा दिए जाने वाला इश्वरी बाई मेमोरियल अवार्ड घोषीत किया गया है वहीं उत्पीड़ित बहुमत से मुक्ति के लिए डॉ. मनीषा बागर सामाजिक और राजनीतिक अभियान हम सभी के लिए प्रेरणा की गाथा रहा है। 2019 के लोकसभा चुनावों में, मनीषा बांगर ने हैदराबाद से नागपुर तक की यात्रा की और बीजेपी के जाने माने चेहरे नितिन गडकरी के खिलाफ जमकर चुनाव लड़ा। कौन हैं डॉ। मनीषा बांगर? शायद उसे भारत में किसी परिचय की आवश्यकता नहीं है।

वास्तविक “महिला दिवस शिक्षक दिवस” की शुभकामनाएं

आज सावित्रीबाई फुले का जन्मदिन है, भारत को सभ्य बनाने वाली एक महान महिला को याद करने का दिन है। सावित्रीबाई फुले वो महिला हैं जिन्होंने ब्राह्मणों के द्वारा कीचड़ और गंदगी फेंके जाने के बावजूद ओबीसी और दलित लड़कियों के लिए स्कूल खोला। सावित्रीबाई वो महिला हैं जो फूल और सब्जियां बेचकर, गद्दे, रजाई और कपड़े सिलकर अपना परिवार चलातीं थीं। सावित्रीबाई जब ओबीसी बहुजनों की बेटियों को पढ़ाने जाती थीं तब दो साड़ियाँ लेकर निकलती थीं। रास्ते मे ब्राह्मण उनपर कीचड़, गोबर आदि फेंकते थे। सावित्रीबाई स्कूल पहुंचकर साड़ी बदलकर

अब जनसंख्या नियंत्रण पर बिल लाने की तैयारी? पीएम मोदी के आह्वान के 4 महीने बाद रोडमैप बनाने में जुटा नीति आयोग

केंद्र सरकार अब देश में जनसंख्या स्थिरीकरण पर नया कानून ला सकती है। इसके लिए रोडमैप बनाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। इस दिशा में कदम उठाते हुए नीति आयोग ने आज (20 दिसंबर) को ‘जनसंख्या स्थिरीकरण की दृष्टि को साकार करना: किसी को पीछे नहीं छोड़ना’ विषय पर राष्ट्रीय विचार-विमर्श का आयोजन किया है। आयोग की यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान के चार महीने बाद शुरू हुई है। आयोग के मुताबिक, विचार-विमर्श के निष्कर्षों और सिफारिशों के आधार पर इस दिशा में वर्किंग पेपर तैयार किया जाएगा ताकि सरकार जनसंख्या स्थिरीकरण की तरफ ठोस कदम

महानायक बिरसा मुंडा कैसे बने भगवान!

आज बिरसा मुंडा की जयंती है और पूरा आदिवासी समाज जयंती मना रहा है. वही ट्वीटर पर भी धरती आबा-बिरसामुंडा ट्रेंडिंग पर चल रहा है. बिरसा मुंडा औपनिवेशिक शोषण के खिलाफ आदिवासी जनता के निर्णायक संघर्ष के प्रतीक माने जाते हैं. हालंकि कम लोग जानते है कि बिरसा मुंड़ा कौन है. तो आपको बता दें कि जिस वक्त राजनीति की मुख्यधारा का प्रतिनिधित्व करने वाली कांग्रेस अंग्रेजों की छत्रछाया में सीमित आंतरिक स्वशासन या होम रूल की मांग कर रही थी. उससे कई दशक पूर्व बिरसा मुंडा ने अंग्रेजों से मुक्ति के खिलाफ निर्णायक संघर्ष का ऐलान किया और पूरी

गुरु नानक देव और धार्मिक-सामाजिक क्रांति

गुरु नानक इस देश में एक नयी ही धार्मिक-सामाजिक क्रान्ति और जागरण के प्रस्तोता हैं। पूरे मध्यकालीन संत साहित्य में जिन श्रेष्ठताओं का दर्शन बिखरे हुए रूप में होता है उन सबको नानक एकसाथ एक मंच पर ले आते हैं। उनकी परम्परा में बना गुरु ग्रन्थ साहिब इतना इन्क्लूसिव और ज़िंदा ग्रन्थ है कि उसकी मिसाल किसी अन्य धर्म या सम्प्रदाय में नहीं है। आज नानक जयन्ती पर नानक को परम्परावादी प्रशंसा या अहोभाव की मुद्रा से परे जाकर एक समाज क्रान्ति के मसीहा के रूप में देखने का दिन है। हमारे अधिकाँश संत और महापुरुष - जो सम्प्रदायों की

गुरु नानक देव जी ने संगठित समाज की नींव रख कैसे धर्म-जाति के बंधन को तोड़ा

सिख धर्म के संस्थापक और सिखों के पहले गुरू गुरुनानक देव की आज 550वीं जयंती है जिसे देशभर में सिख समुदाय के लोग प्रकाश पर्व के तौर पर मनाते है. सिख समुदाय इस दिन को खास मानकर गुरुद्वारा जाते है और सरोवर में स्नान करते है. इसके अलावा हर गुरुद्वारे को सजाया जाता है, कार्यक्रम होता है और लंगर भी लगाए जाते है. प्रकाश पर्व के दिन सुबह से ही गुरुद्वारों में धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला शुरू हो जाता है, जो देर रात तक चलता है.यह पर्व समाज के हर व्यक्ति को साथ रहने, खाने और मेहनत की कमाई करने का संदेश देता है. वही इस जंयती

रविदास मंदिर को लेकर जारी हुआ नया फरमान जानिए क्या है वो?

BY_सद्दाम करिमी दिल्ली के तुगलकाबाद इलाके में मंगलवार 10 सितंबर को लोगों ने रविदास मंदिर स्थल पर जाकर पूजा अर्चना करने की कोशिश की है। हालांकि, पुलिस ने उन्हें पहले वहां पहुंचने से रोक दिया था। बता दें कि इस मंदिर को करीब एक महीने पहले उच्चतम न्यायालय के आदेश पर ध्वस्त कर दिया गया था। पुलिस के मुताबिक करीब 100 लोग गुरु रविदास मार्ग पर जमा हुए और मंदिर की तरफ मार्च किया लेकिन रोके जाने के बाद उन्होंने सड़क पर ही अनुष्ठान किया। संयुक्त पुलिस आयुक्त दक्षिणी क्षेत्र देवेश श्रीवास्तव ने कहा, हमने पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था की…

क्यों संत रैदास को संघ एवं हिंदू दल और भाजपा अपना नायक नहीं मानते ?

By-डॉ सिद्धार्थ रामू~ क्यों संत रैदास को संघ, बजरंग दल, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, विश्व हिंदू परिषद और भाजपा हिंदू एवं अपना नायक नहीं मानते ? रैदास मंंदिर तोड़ने, उसके बाद उसके विरोध मेंं देश-दुनिया के दलित-बहुजनों के सैलाब के उमड़ने और उसके बाद के सारे घटनाक्रम पर संघ-भाजपा और उसके अन्य आनुषांगिक संगठनों की चुप्पी क्या साफ-साफ इस बात की घोषणा नहीं है कि ये लोग रैदास को न तो हिंदू मानते हैं और न ही अपना नायक मानते हैं। कल्पना कीजिए यदि आदि शंकराचार्य, तुलदीदास, सावरकर, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, दीनदयाल उपाध्याय का…

अमर स्वतंत्रता सेनानी शहीद रामफल मंडल को उनके शहादत दिवस पर नमन

By-प्रशांत निहाल~ सन 1942 में गांधी के आह्वाहन पर अंग्रेज़ों के खिलाफ छेड़े गए भारत छोड़ो आंदोलन का बिहार में काफी प्रभाव था. युवाओं ने इस आंदोलन में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया और इस आंदोलन को एक क्रन्तिकारी आंदोलन में तब्दील करने में कोई कसर नहीं छोड़ा. जगह-जगह सरकारी दफ्तरों, थानों पर कब्ज़ा किया गया और उन जगहों को आजाद घोषित किया गया. ये घोषित आज़ादी भले ही कुछ दिन टिकी हो पर अपने पिछे एक क्रान्तिकारी विरासत छोड़ गया है और उस वक़्त अंग्रेज़ो को यह बता गया कि हिन्दुस्तान में उनके आखिरी दिन चल रहे हैं. शहीद रामफल मंडल भारत छोड़ो आंदोलन…