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Culture

अमर स्वतंत्रता सेनानी शहीद रामफल मंडल को उनके शहादत दिवस पर नमन

By-प्रशांत निहाल~ सन 1942 में गांधी के आह्वाहन पर अंग्रेज़ों के खिलाफ छेड़े गए भारत छोड़ो आंदोलन का बिहार में काफी प्रभाव था. युवाओं ने इस आंदोलन में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया और इस आंदोलन को एक क्रन्तिकारी आंदोलन में तब्दील करने में कोई कसर नहीं छोड़ा. जगह-जगह सरकारी दफ्तरों, थानों पर कब्ज़ा किया गया और उन जगहों को आजाद घोषित किया गया. ये घोषित आज़ादी भले ही कुछ दिन टिकी हो पर अपने पिछे एक क्रान्तिकारी विरासत छोड़ गया है और उस वक़्त अंग्रेज़ो को यह बता गया कि हिन्दुस्तान में उनके आखिरी दिन चल रहे हैं. शहीद रामफल मंडल भारत छोड़ो आंदोलन के…

मुख्यधारा की मीडिया को राम से इतनी भक्ति और रैदास से इतनी घृणा क्यों है?

By-डॉ सिद्धार्थ रामू~ मुख्य धारा की मीडिया की नजर में राम मंदिर के लिए दंगा करने वाले और न्यायालयों को ठेंगा पर रखकर बाबरी मस्जिद तोड़ने वाले रामभक्त और कार सेवक होते हैं और रैदास मंदिर के लिए संघर्ष करने वाले दंगाई होते हैं। सबको याद होगा कि किस तरह राम मंदिर को आंदोलन को जनांदोलन बनाने में मुख्य धारा की मीडिया की अहम भूमिका रही है। मीडिया ने राम मंदिर के लिए आडवाणी की रथयात्रा, बजरंगदलियों के उत्पात और मस्जिद तोड़ने वालों को कार सेवक पुकार ऐसा माहौल बनाया जैसे ये लोग राष्ट्र निर्माण का कोई महान कार्य कर रहे हैं।…

रविदास मंदिर का टूटना और मोदी सरकार

~दिलीप मंड़ल एससी-एसटी एक्ट को बेअसर करने का सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला जस्टिस आदर्श गोयल और ललित की बेंच ने दिया था। मोदी सरकार ने रिटायर होते ही जस्टिस गोयल को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के चेयरमैन जैसे शानदार पद पर बैठाकर पुरस्कृत किया। इसका विरोध ख़ुद केंद्रीय मंत्रियों ने किया। लेकिन सरकार मन बना चुकी थी कि एससी-एसटी एक्ट के खिलाफ फ़ैसला देने वाले जज को इनाम देना है। इसके बाद कोई भी जज एससी-एसटी मामलों में सामाजिक न्याय के पक्ष में फ़ैसला क्यों देगा? दिल्ली के संत रविदास ऐतिहासिक मंदिर मामले में केंद्र सरकार की यही भूमिका है।…

जै भीम के नारे से जै श्रीराम के नारे को पराजित करना जरूरी क्यों है

By-डॉ सिद्धार्थ रामू~ जब तक जै भीम का नारा पूरी तरह से जै श्रीराम के नारे को पराजित नहीं कर देता, तब तक इस देश में वास्तविक अर्थों में स्वतंत्रता, समता, भाईचारा, न्याय और लोकतंत्र की स्थापना नहीं हो सकती है। सार्वजनिक जीवन में दो नारे गूंज रहे हैं। पहला नारा जै श्रीराम का है और दूसरा नारा जै भीम का है। जै श्रीराम का नारा भारत की सत्ता पर द्विजों के कब्जे का नारा बन चुका है। इस नारे के माध्यम से संघ-भाजपा ने हिंदू राष्ट्र की अपनी कल्पना को साकार किया है। यह ब्राह्मणवाद, वर्ण-जाति व्यवस्था और स्त्रियों पर पुरूषों के प्रभुत्व…

संत रैदास मंदिर गिराने और रामंदिर बनाने के राष्ट्रव्यापी आंदोलन का निहितार्थ

By-Siddharth Ramu~ संत रैदास मंदिर गिराने और रामंदिर बनाने के राष्ट्रव्यापी आंदोलन का निहितार्थ रैदास या राम से तय होगा कि देश की सत्ता किसके हाथ में रहेगी। पूजहिं विप्र सकल गुणहीना, सूद्र न पूंजहिं ज्ञान प्रवीना ( तुलसीदास-रामचरित मानस) रैदास बाभन मत पूजिए जो होवे गुनहीन, पूजिए चरन चंडाल के जो हो गुन परवीन। ( संद रैदास) जिस समुदाय की जो हैसियत होती है, उनके नायकों के साथ भी वैसा ही व्यवहार किया जाता है। इस तथ्य को राम मंदिर बनाने के लिए देश व्यापी आंदोलन के माध्यम से देश की सत्ता पर कब्जा और करीब 500 वर्ष पुराने संत रैदास…

अटल बिहारी वाजपेयी और नेली नरसंहार का क्या है रिश्ता ?

असम के नेल्ली कांड और अटल बिहारी वाजपेयी का क्या रिश्ता हो सकता है, ये कई लोगों को समझ नहीं आएगा। बहुत सारे लोगों को अब 1983 के नेल्ली कांड की याद भी नहीं है या उसके बारे में कुछ पता भी नहीं है। हालांकि, ये ऐसा कांड है जिसका अटल बिहारी वाजपेयी से अटूट रिश्ता है। यह सही है कि अटल बिहारी वाजपेयी की भाजपाई होते हुए भी एक उदार छवि प्रचारित की जाती रही है, भले ही इसके अपने कारण हो सकते हैं। हालांकि असम के नेल्ली में 1983 के फरवरी माह में हुए दंगे एक ऐसा घटनाक्रम है जिसके बारे में जानकर कई लोगों की आंखें खुली रह…

BBC और मीना कोटवाल: बहुजन महिला पत्रकार के जातिगत प्रताड़ना की कहानी, पार्ट-10

आज मैं पिछला नहीं बल्कि कल की ही एक ताज़ा सूचना से शुरू करना चाहूंगी. कल मुझे पता चला कि मिस्टर झा ने बीबीसी से इस्तीफ़ा दे दिया है. जैसे ही मुझे पता चला चंद लोगों के लिए रही सही इज्जत भी मेरे दिल से खत्म हो गई. कुछ लोगों पर बहुत विश्वास किया था, जिन्हें मैंने अपनी परेशानी का हर मामला सबसे पहले बताया था और वो मुझे सिवाये आश्वासन के कुछ नहीं देते. हालांकि विश्वास और इज्जत की परत धीरे-धीरे उतरती गई और आज रही सही भी, सब पूरा साफ़ हो गया. इस सूचना का ज़िक्र इसलिए करना जरूरी है क्योंकि बीबीसी की तरफ़ से आधिकारिक बयान यही दिया जा…

BBC और मीना कोटवाल: बहुजन महिला पत्रकार के जातिगत प्रताड़ना की कहानी, पार्ट-9

मैं और बीबीसी- 9 ‘‘कहां से हो?’’ ‘‘दिल्ली से ही, जन्म-पढ़ाई सब दिल्ली से ही हुआ है, लेकिन राजस्थान से भी संबंध रखते हैं.’’ ‘‘राजस्थान..? राजस्थान में कहा से हो?’’ ‘‘बूंदी ज़िले से’’ ‘‘अच्छा... राजस्थान में क्या हो?’’ ‘‘दलित हैं मैम’’ (गर्दन हिलाते हुए शांति-सी छा जाती है) ............................................................. ये सब मुझ से शुरूआत के दिनों में ही पूछा गया था. वे भी ऑफिस में नई थीं और मैं तो थी ही. हां, उनको कई सालों का अनुभव जरूर था. एक जाने-माने हिंदी चैनल की रिपोर्टर रही हैं और बीबीसी में सीनियर…

BBC और मीना कोटवाल: बहुजन महिला पत्रकार के जातिगत प्रताड़ना की कहानी, पार्ट-8

मैं और बीबीसी- 8 समय के साथ-साथ मेरे मन में गुस्सा उत्पन्न होना शुरू हो गया. मुझे हमेशा से अपने आत्मसम्मान से बहुत प्यार रहा है. न्यूज़रूम में तीन बार जिस तरह राजेश प्रियदर्शी सर ने मुझे सबके सामने डांटा था, उससे मेरे आत्मसम्मान को गहरा धक्का लगा था. दूसरी बार जब उन्होंने मुझे डांटा था तो वो दो दिन बाद मुझे अकेले में ले जाकर सॉरी भी बोले थे. अगर वे सही थे तो सॉरी किस बात का और वो सही नहीं थे तो जिस तरह उन्होंने पूरे न्यूज़रूम में चिल्लाकर मुझे डांटा था वैसे ही सॉरी सबके सामने बोलना चाहिए था. खैर, ये बात तो मैं उनसे उस समय…

BBC और मीना कोटवाल: बहुजन महिला पत्रकार के जातिगत प्रताड़ना की कहानी, पार्ट-7

मैं और बीबीसी-7 मैं इतने तनाव में आ गई थी कि मेरा ऑफिस जाने का मन ही नहीं करता था. मन में हमेशा यही चलता रहता था कि मेरा एक्सीडेंट हो जाए, मुझे कुछ हो जाए... बस ऑफिस ना जाना पड़े. जब मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ तो इन सब के बारे में मैंने अपने संपादक मुकेश शर्मा, भारतीय भाषाओं की एडिटर रूपा झा और यहां तक कि रेडियो एडिटर राजेश जोशी को भी बताया. सबको लगा कि मुझे ही गलतफ़हमी हुई है, मैं ही जरूरत से ज्यादा सोच रही हूं. लेकिन वो दौर सिर्फ मैं जानती हूं कि मैं कैसे-कैसे उस भयावह स्थिति में थी. मेरे मन में इतना डर बैठ गया था कि कोई कुछ…