ब्राउजिंग श्रेणी

Education

CAA के खिलाफ प्रदर्शनों में हिस्सा लेने पर ITT मद्रास में पढ़ने वाले जर्मनी के छात्र को पड़ा भारी

नए नागरिकता कानून का विरोध कर सुर्खियों में आए आईआईटी मद्रास के एक जर्मन छात्र को देश छोड़ना पड़ा है. खबरें हैं कि जैकब लिंडेनथल को पिछले हफ्ते सरकार विरोधी एक प्रदर्शन में शामिल होने के चलते आव्रजन विभाग से चेतावनी मिली थी. जैकब ने अपने ट्विटर हैंडल से कुछ तस्वीरें पोस्ट की थीं. इनमें वे कुछ नारे लिखी तख्तियां लिए दिख रहे थे. इनमें से एक तख्ती पर लिखा था, ‘1933 से 1943 तक हमने भी ये दौर देखा है.’ आईआईटी मद्रास ने स्‍टूडेंट प्रोग्राम के तहत पढ़ाई करने के लिए भारत आए जर्मन के एक छात्र जैकोब लिंडेंथल को अपने देश वापस जाने

जामिया की छात्रा ने रोते हुए सुनाई आपबीती, कहा- मैं मुस्लिम नहीं हूं फिर भी पहले दिन से लड़ रही

जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी (Jamia Millia Islamia University) के छात्रों द्वारा नागरिक संशोधन कानून (Citizenship Amendment Act) के विरोध का मामला तूल पकड़ चुका है. रविवार शाम दिल्ली के जामिया नगर से लगे सराय जुलैना के पास डीटीसी की तीन बसों को आग लगाने से बात शुरू हुई और फिर राजधानी दहल उठी. जामिया के छात्रों का आरोप है कि पुलिस ने यूनिवर्सिटी में घुसकर उनसे मारपीट की. झारखंड के रांची की रहने वाली एक छात्रा मीडिया के सामने आई और रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई. छात्रा ने कहा, 'जब ये सब शुरू हुआ तो हम लाइब्रेरी में

मजदूरी और अशिक्षा के शिखर पर बहुजन बच्चों का कैसा ये बाल दिवस

ब्राह्मण ठाकुर और वैश्य समाज में गरीब होंगे. लेकिन उनके बच्चे मजदूरी नही करते उनके बच्चे बाल मजदूर नही हैं. बाल मजदूर सिर्फ ओबीसी एससी एसटी और मुसलमान समुदाय में मिलेंगे. मुसलमान में भी केवल भारतीय मूल के मुसलमान बेहद गरीब हैं. अशरफ(विदेशी मूल) समुदाय के मुसलमानों के बच्चे तो विदेशों में पढ़ते हैं. उनके बाप दादा हर बड़ी छोटी पार्टी में नेता हैं . भारत में 1,60,00,000 बाल मजदूर हैं. जिनकी उम्र 5 से 14 साल के बीच है. पढ़ाई लिखाई खेलने कूदने की उम्र में उन्हें श्रम करना होता है. तब जाकर उन्हें दो वक़्त की रोटी नसीब होती है .

जेएनयू जैसे संस्थानों को बचाना क्यों जरूरी है?

जेएनयू में मेरे कई दोस्त हैं जो बहुजन, ओबीसी और मुस्लिम समाज से आते हैं. 'बहुजन साहित्य संघ' में जब मैं पैनलिस्ट के तौर पर गई थी, तो वहां कई ऐसी बहुजन लड़कियों से मुलाक़ात हुई, जो हजारों साल से हो रहे अन्याय के खिलाफ़ मुखर होकर बोल रही थीं. वो सुना रही थी अपने साथ हुई उन कहानियों को, जिनमें संघर्ष ही संघर्ष था और जो बदस्तूर अभी भी जारी है. ज्यादातर लड़कियां मेरी ही तरह अपने घर-परिवार की पहली पीढ़ी थी, जो पढ़-लिखकर और संघर्ष कर यहां तक पहुंची थी. अब ये लड़कियां ना केवल बोल रही थीं, बल्कि ख़ुद के लिए और आने वाली पीढ़ियों के

सस्ती पढ़ाई का हक मांगने पर जेएनयू छात्रों को पड़ा मंहगा ?

दिल्ली के JNU में छात्रों ने प्रशासन को लेकर जंग शुरू करदी है... छात्रो के हिसाब से सरकार JNU को बंद करने में जुटी है. साथ ही सरकार छात्रों की अवाज दबाने में लगी हुई है. जिसे लेकर छात्रों ने धरना प्रदर्शन किया... जहां पुलिस और छात्रों में जंग का महौल देखा जा सकता है. पुलिस छात्रों को आतंकवाद की तरहा मिटाने में जुटी हुई है. मानें युनिवर्सिटी जंग का मैदान बन गई है. इसी को लेकर आज ट्वीटर पर भी काफी गरमा गरमी देखने को मिली. कई जाने माने हस्तियों ने छात्रो का पक्ष लेते हुए ट्वीट भी किया.

बीएचयू होल्कर भवन का घेराव,असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्तियों के खिलाफ छात्रों ने किया प्रदर्शन

BY: JYOTI KUMARI कभी शिक्षा के लिए जाने वाला बीएचयू आज कल आये दिन मीडिया में विवादों के लिए बना रहता है. एक बार फिर विश्वविद्यालय असंवैधानिक कारनामा के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है. बीएचयू में एक बार फिर जातिवाद का खेल अनारक्षित पदों के लिए शुरू हो गया है जिसमें SC\ST\OBC के आवेदकों को अयोग्य ठहराया गया है.जिसपर छात्रों ने होल्कर भवन का घेराव करते हुए धरना-प्रदर्शन कर रहे है. दरअसल बीएचयू के Performing Arts विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति के इंटरव्यू में SC/ST\OBC के कैंडिडेटस को इसलिए अयोग्य करार दे