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Opinion articles

पेरियार रामास्वामी परिनिर्वाण दिवस: पेरियार से हम क्या सीखें ?

BY: Sanjay Jhote आज पेरियार की विदाई तिथि है, आइये उन्हें नमन करें और उनके संबन्ध में कुछ जानें, ताकि उनके काम को हम मिल जुलकर आगे बढ़ा सकें। इस देश में भेदभाव और शोषण से भरी परम्पराओं का विरोध करने वाले अनेक विचारक और क्रांतिकारी हुए हैं जिनके बारे में हमें बार-बार पढ़ना और समझना चाहिए. दुर्भाग्य से इस देश के शोषक वर्गों के षड्यंत्र के कारण इन क्रांतिकारियों का जीवन परिचय और समग्र कर्तृत्व छुपाकर रखा जाता है. हमारी अनेकों पीढियां इसी षड्यंत्र में जीती आयीं हैं. किसी देश के उद्भट विचारकों और क्रान्तिकारियों को इस भाँती

देश में कोई डिटेंशन सेंटर नहीं है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह दावा कितना सच है?

BY: NAVAL KISHORE KUMAR कल एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश से झूठ बोला है। रामलीला मैदान में दिल्ली विधानसभा चुनाव अभियान की शुरुआत करते हुए उन्होंने कहा कि देश में कोई डिटेंशन कैंप नहीं है जहां उन लोगों को रखा जा रहा है जिनके पास भारतीय नागरिकता से संबंधित दस्तावेज नहीं हैं। मोदी ने यह भी कहा कि 2014 से लेकर अबतक उनकी सरकार ने किसी भी स्तर पर एनआरसी की बात नहीं कही है। असम में एनआरसी की चर्चा करते हुए उन्होंने यह जरूर कहा कि ऐसा सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर किया गया है। प्रधानमंत्री का झूठ बहुत देर तक नहीं

CAA: संविधान और आगे आने वाली पीढ़ी को बचाने के लिए BJP और RSS के एजेंडे को रोकना होगा

By: Shahnawaz Ansari सिटीजनशिप अमेंडमेंट एक्ट(CAA) और नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़न्स (NRC) का नाम तो आपने ज़रूर सुना होगा। मीडिया लगातार बता रही है कि ये मुसलमान विरोधी है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी तो खुद यह कह चुके हैं कि इसके विरोधियों को उनके कपड़े के आधार पर पहचान की जा सकती है। यदि आप भी ऐसा ही समझते हैं, तो थोड़ा सा समय निकाल कर इस पर्चे को ज़रूर पढ़ें। इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के अनुसार अब असम में NRC लिस्ट से बाहर हुए 19 लाख से ज्यादा लोगों के पास अब वोट देने का अधिकार नहीं होगा। असम NRC लिस्ट से बाहर हुए 19 लाख

नागरिकता संशोधन कानून बीजेपी के गैर संवैधानिक रवैये को जायज ठहराने वाला कानून है।

BY: Khalid Ansari यह भ्रम फैलाया जा रहा है की नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) तो ठीक है क्योंकि इससे नागरिकता दी जाती है ली नहीं जाती. इस कारण इससे देश के किसी नागरिक को घबराने heकी ज़रुरत नहीं है क्योंकि उनके ऊपर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा. बीजेपी इस तर्क को लेकर जनसंपर्क में निकलने वाली है. इस लाइन के समर्थन में अजमेर दरगाह के दीवान सैयद जैनुअल आबेदीन और जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी पहले ही उतर चुके हैं. जैसे की कई लेखक पहले आगाह कर चुके हैं इस कानून का मूल्यांकन सिर्फ तात्कालिक नफा-नुकसान के बजाय संवैधानिक

फूले से लेकर फूलन तक

मैं जब भी कभी महिलाओं के बारे में सोचती हूँ तो एक तरफ मुझे फूले दम्पत्ति-फातिमा शेख़ दिखते हैं और दूसरी तरफ फूलन दिखती हैं. ज्योतिबा फूले साहब- सावित्री बाई- फातिमा शेख ने महिलाओं के लिए शिक्षा का मार्ग प्रशस्त किया और उन्होंने महिलाओं को पढ़ाकर समाज को बेहतरी की तरफ ले जाने की कोशिश की. जहाँ पिछड़े वर्ग के माली समाज से आने वाले फूले साहब लड़कियों को अपने हिस्से का दावा करने के लिए एक उम्मीद प्रेरणा और हाथ में किताब देते हैं. वहीं पर जब हम लड़कियाँ फूलन को पढ़ती हैं तो मन में सवाल उठता है कि आखिर वो किस जाति किस समाज के

परिनिर्वाण दिवस ( 28 नवंबर 1890) भारत में देशज आधुनिकता के प्रवर्तक: जोतिराव फुले

By–डॉ सिद्धार्थ रामू~ आधुनिक भारत में शूद्रों-अतिशूद्रों, महिलाओं और किसानों के मुक्ति-संघर्ष के पहले नायक जोतीराव फुले हैं. जिन्हें ज्योतिबा फुले नाम से भी जाना जाता है. डॉ. आंबेडकर ने गौतम बुद्ध और कबीर के साथ ज्योतिबा फुले को अपना तीसरा गुरु माना है. अपनी किताब ‘शूद्र कौन थे?’ महात्मा फुले को समर्पित करते हुए बाबा साहेब ने लिखा है कि ‘जिन्होंने हिन्दू समाज की छोटी जातियों को उच्च वर्णों के प्रति उनकी ग़ुलामी की भावना के संबंध में जाग्रत किया और जिन्होंने सामाजिक लोकतंत्र की स्थापना को विदेशी शासन से मुक्ति पाने से

The Indian Renaissance was lighted up by Jyotirao Phule

~ Milind Patil He was the Executive Director of 'Pune Commercial & Contracting Company'. Jotiba was a successful businessman. His company made magnificent and costly constructions of canals, tunnels, bridges, buildings, textiles, palaces and roads. The important work done by Jotiba's company is the Katraj tunnel, the Yerwada Bridge and the canal of the Khadakwasla Dam. In the report of the British Government's Education Department, it was found that during 1850, he had arranged to provide industrial and agricultural

जेएनयू आपको थोड़ा और संवेदनशील मनुष्य बनाता है!

दिल्ली के जाने-मानेविश्विद्यालय में फीस वृद्धि को लेकर जेएनयू छात्रों ने विरोध प्रदर्शन कर रहे है. वही जेएनयू छात्र जयंत जिज्ञासु ने खत लिखा मुझे 5000 की फ़ेलोशिप मिलती है. रहने का खर्च लगभग नगण्य है. हॉस्टल में तीन वक़्त के भोजन पर 22-24 सौ रुपये खर्च होते हैं. हज़ार रुपये दोस्तों के साथ चाय-नाश्ते पर पांच सौ के आसपास यातायात पर और हज़ार रुपये कलम-काग़ज़-किताब पर. दोस्त अगर साथ लेकर चल पड़े तो कपड़े साल में एकाध बार ख़रीद लिए तो ठीक ही काम चल जाता है. साइकिल से चलता हूँ इसका अपना ही आनंद है. पिताजी मिड्ल स्कूल के टीचर के रूप में

मुफ्त नहीं, निशुल्क शिक्षा चाहिए!

मुफ्त शिक्षा किसी के खैरात की मांग जैसी है. जबकि निशुल्क शिक्षा मतलब बिना शुल्क लगाए शिक्षा पहला भीख जैसी मांग है. दूसरा प्राकृतिक अधिकार की मांग है. हम सभी जानते हैं कि सरकारों के पास जो पैसा आता है. उसके तीन मूल स्रोत हैं पहला जनता पर लगने वाले विभिन्न तरह के कर दूसरा देश के प्राकृतिक संसाधनों के इस्तेमाल या बिक्री से होने वाली आय. तीसरा दूसरे देशों को वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात से होने वाली आय. भारत में एक चौथा आय का स्रोत बची-खुची सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनिया हैं कुछ अन्य आय. इन सभी आयों की मालिक जनता है. जिसे

पतंजलि के प्रोडक्ट्स का बायकॉट ही कारगर उपाय है !

रामदेव ने आंबेडकर, पेरियार के विचारों को पढ़ने-गुनने वालों के खिलाफ जो जहर टीवी चैनल पर उल्टी किया था. अब वह हजारों लोगों के बीच भी प्रवचन देते हुए उसी नफरत के जहर की उल्टी कर रहा है. सरेआम! उसकी जुबान से निकली जहर का असर यह भी हो सकता है कि उसे सही मानने वालों की भीड़ आंबेडकर या पेरियार का नाम लेने वालों की हत्या कर दे और दंगा फैल जाए कत्लेआम मच जाए गृहयुद्ध छिड़ जाए. कायदे से एक ईमानदार लोकतांत्रिक शासन होता तो हिंसा भड़काने की कोशिश के लिए रामदेव को गिरफ्तार कर तुरंत जेल में बंद कर देता. नफरत और दंगा भड़काने के जुर्म