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पतंजलि के प्रोडक्ट्स का बायकॉट ही कारगर उपाय है !

रामदेव ने आंबेडकर, पेरियार के विचारों को पढ़ने-गुनने वालों के खिलाफ जो जहर टीवी चैनल पर उल्टी किया था. अब वह हजारों लोगों के बीच भी प्रवचन देते हुए उसी नफरत के जहर की उल्टी कर रहा है. सरेआम! उसकी जुबान से निकली जहर का असर यह भी हो सकता है कि उसे सही मानने वालों की भीड़ आंबेडकर या पेरियार का नाम लेने वालों की हत्या कर दे और दंगा फैल जाए कत्लेआम मच जाए गृहयुद्ध छिड़ जाए. कायदे से एक ईमानदार लोकतांत्रिक शासन होता तो हिंसा भड़काने की कोशिश के लिए रामदेव को गिरफ्तार कर तुरंत जेल में बंद कर देता. नफरत और दंगा भड़काने के जुर्म

क्या जेएनयू की फीस बढाने के समर्थक सार्वजनिक धन की इस लूट पर भी खामोश बने रहेंगे?

आम खाताधारकों पर मिनिमम बैलेंस के लिए पेनाल्टी और ज्यादा ट्रांजेक्शन करने पर तुरंत चार्ज लगाने वाले एसबीआई ने पिछले पांच साल मे कुल 1 लाख 63 हजार 934 करोड़ रुपये का लोन राइट-ऑफ किया है. कि आम आदमी को लूटने ओर कारपोरेट को बांटने की नीति मोदी सरकार में खूब परवान चढ़ रही है. और सबसे बड़ी बात तो यह है कि इस 1 लाख 63 हजार 934 करोड़ रुपये का बड़ा हिस्सा पिछले दो साल में राइट-ऑफ किया गया है. देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक ने 2016-17 में 20 हजार,339 करोड़ रुपये के फंसे कर्ज को बट्टा खाते डाल दिया था उस वक्त भी यह