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आर्थिक मंदी का सामना कैसे करें!

By-दिलीप मंडल~ 1. घबराएं नहीं. तैयारी करें. 2. घर या महंगी कार खरीदने या ढेर सारे शेयर खरीदने जैसा कोई बड़ा वित्तीय फैसला हड़बड़ी में न करें. इसकी कीमत चुकाने में आप तबाह हो सकते हैं. 3. आप इस बात का आकलन करें कि कोई संकट आया तो क्या आप और आपका परिवार इसे झेल पाएगा. आपका अपना सुरक्षा बंदोबस्त कैसा है. 4. इस बात का आकलन करें कि बुरे दौर को आप कितने समय के लिए झेल सकते हैं. आपका निवेश अगर एक ही क्षेत्र में है, तो उसे अलग अलग क्षेत्रों में फैलाने पर विचार करें. 5. इस बात का आकलन करें कि आपकी जिम्मेदारियों किस तरह की हैं. परिवार…

संत रैदास मंदिर गिराने और रामंदिर बनाने के राष्ट्रव्यापी आंदोलन का निहितार्थ

By-Siddharth Ramu~ संत रैदास मंदिर गिराने और रामंदिर बनाने के राष्ट्रव्यापी आंदोलन का निहितार्थ रैदास या राम से तय होगा कि देश की सत्ता किसके हाथ में रहेगी। पूजहिं विप्र सकल गुणहीना, सूद्र न पूंजहिं ज्ञान प्रवीना ( तुलसीदास-रामचरित मानस) रैदास बाभन मत पूजिए जो होवे गुनहीन, पूजिए चरन चंडाल के जो हो गुन परवीन। ( संद रैदास) जिस समुदाय की जो हैसियत होती है, उनके नायकों के साथ भी वैसा ही व्यवहार किया जाता है। इस तथ्य को राम मंदिर बनाने के लिए देश व्यापी आंदोलन के माध्यम से देश की सत्ता पर कब्जा और करीब 500 वर्ष पुराने संत रैदास…

बहुजन छात्र संघ ने महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति से की महत्वपूर्ण मांगे।

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी के बहुजन छात्र संघ के छात्र नेता अरविंद कुमार(एम फिल- राजनीतिशास्त्र)के द्वारा विश्वविद्यालय के कुलपति महोदय को छात्रों कि मांग का ज्ञापन दिया गया। मुख्य मांगे इस प्रकार है - 1.वातानुकूलित लाइब्रेरी का निर्माण । 2.साईबर डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना । 3.लाइब्रेरी में पाठ्यक्रम के अनुसार नई किताबो की व्यवस्था किया जाना । 4.लाइब्रेरी द्वारा छात्रों को कम से कम एक बार में चार किताब दिया जाने का प्रावधान । 5.विश्वविद्यालय के सभी छात्रों को सभी प्रकार के निशुल्क उपचार की व्यवस्था हेतु स्वास्थ्य…

अटल बिहारी वाजपेयी और नेली नरसंहार का क्या है रिश्ता ?

असम के नेल्ली कांड और अटल बिहारी वाजपेयी का क्या रिश्ता हो सकता है, ये कई लोगों को समझ नहीं आएगा। बहुत सारे लोगों को अब 1983 के नेल्ली कांड की याद भी नहीं है या उसके बारे में कुछ पता भी नहीं है। हालांकि, ये ऐसा कांड है जिसका अटल बिहारी वाजपेयी से अटूट रिश्ता है। यह सही है कि अटल बिहारी वाजपेयी की भाजपाई होते हुए भी एक उदार छवि प्रचारित की जाती रही है, भले ही इसके अपने कारण हो सकते हैं। हालांकि असम के नेल्ली में 1983 के फरवरी माह में हुए दंगे एक ऐसा घटनाक्रम है जिसके बारे में जानकर कई लोगों की आंखें खुली रह…

स्वतंत्रता दिवस की बधाई और शुभकामनाएं!

स्वतंत्रता दिवस की बधाई और शुभकामनाएं! उन सभी महान् नेताओं-कार्यकर्ताओं और आम जन को सलाम, जिन्होंने आजादी हासिल करने के लिए संघर्ष किया! आज आजादी, लोकतंत्र और संविधान के सामने गंभीर चुनौतियां हैं! पर आम लोग क्या इन चुनौतियों और खतरों से वाक़िफ हैं? क्या आज देश के पास स्वतंत्रता आंदोलन के दौर जैसा प्रौढ़, ईमानदार और समझदार नेतृत्व है? हमारी तमाम समस्याओं के कई कारणों में एक कारण यह भी है कि आज उस तरह का नेतृत्व नहीं है ! बीते सात दशकों में हमने तरक्की तो की है लेकिन उसमें संतुलन और समावेशी स्वरुप का अभाव नजर आता है!…

BBC और मीना कोटवाल: बहुजन महिला पत्रकार के जातिगत प्रताड़ना की कहानी, पार्ट-10

आज मैं पिछला नहीं बल्कि कल की ही एक ताज़ा सूचना से शुरू करना चाहूंगी. कल मुझे पता चला कि मिस्टर झा ने बीबीसी से इस्तीफ़ा दे दिया है. जैसे ही मुझे पता चला चंद लोगों के लिए रही सही इज्जत भी मेरे दिल से खत्म हो गई. कुछ लोगों पर बहुत विश्वास किया था, जिन्हें मैंने अपनी परेशानी का हर मामला सबसे पहले बताया था और वो मुझे सिवाये आश्वासन के कुछ नहीं देते. हालांकि विश्वास और इज्जत की परत धीरे-धीरे उतरती गई और आज रही सही भी, सब पूरा साफ़ हो गया. इस सूचना का ज़िक्र इसलिए करना जरूरी है क्योंकि बीबीसी की तरफ़ से आधिकारिक बयान यही दिया जा…

BBC और मीना कोटवाल: बहुजन महिला पत्रकार के जातिगत प्रताड़ना की कहानी, पार्ट-9

मैं और बीबीसी- 9 ‘‘कहां से हो?’’ ‘‘दिल्ली से ही, जन्म-पढ़ाई सब दिल्ली से ही हुआ है, लेकिन राजस्थान से भी संबंध रखते हैं.’’ ‘‘राजस्थान..? राजस्थान में कहा से हो?’’ ‘‘बूंदी ज़िले से’’ ‘‘अच्छा... राजस्थान में क्या हो?’’ ‘‘दलित हैं मैम’’ (गर्दन हिलाते हुए शांति-सी छा जाती है) ............................................................. ये सब मुझ से शुरूआत के दिनों में ही पूछा गया था. वे भी ऑफिस में नई थीं और मैं तो थी ही. हां, उनको कई सालों का अनुभव जरूर था. एक जाने-माने हिंदी चैनल की रिपोर्टर रही हैं और बीबीसी में सीनियर…

BBC और मीना कोटवाल: बहुजन महिला पत्रकार के जातिगत प्रताड़ना की कहानी, पार्ट-8

मैं और बीबीसी- 8 समय के साथ-साथ मेरे मन में गुस्सा उत्पन्न होना शुरू हो गया. मुझे हमेशा से अपने आत्मसम्मान से बहुत प्यार रहा है. न्यूज़रूम में तीन बार जिस तरह राजेश प्रियदर्शी सर ने मुझे सबके सामने डांटा था, उससे मेरे आत्मसम्मान को गहरा धक्का लगा था. दूसरी बार जब उन्होंने मुझे डांटा था तो वो दो दिन बाद मुझे अकेले में ले जाकर सॉरी भी बोले थे. अगर वे सही थे तो सॉरी किस बात का और वो सही नहीं थे तो जिस तरह उन्होंने पूरे न्यूज़रूम में चिल्लाकर मुझे डांटा था वैसे ही सॉरी सबके सामने बोलना चाहिए था. खैर, ये बात तो मैं उनसे उस समय…

BBC और मीना कोटवाल: बहुजन महिला पत्रकार के जातिगत प्रताड़ना की कहानी, पार्ट-7

मैं और बीबीसी-7 मैं इतने तनाव में आ गई थी कि मेरा ऑफिस जाने का मन ही नहीं करता था. मन में हमेशा यही चलता रहता था कि मेरा एक्सीडेंट हो जाए, मुझे कुछ हो जाए... बस ऑफिस ना जाना पड़े. जब मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ तो इन सब के बारे में मैंने अपने संपादक मुकेश शर्मा, भारतीय भाषाओं की एडिटर रूपा झा और यहां तक कि रेडियो एडिटर राजेश जोशी को भी बताया. सबको लगा कि मुझे ही गलतफ़हमी हुई है, मैं ही जरूरत से ज्यादा सोच रही हूं. लेकिन वो दौर सिर्फ मैं जानती हूं कि मैं कैसे-कैसे उस भयावह स्थिति में थी. मेरे मन में इतना डर बैठ गया था कि कोई कुछ…

BBC और मीना कोटवाल: बहुजन महिला पत्रकार के जातिगत प्रताड़ना की कहानी, पार्ट-5

मैं और बीबीसी-5 Meena Kotwal डेस्क पर काम करते हुए मुझे नौ महीने हो गए थे. कुछ लोगों का रवैया मेरे प्रति बदलने लगा था. मेरे पीछे से मेरा मज़ाक बनाया जाने लगा, मुझे उल्टा-सीधा कहा जाने लगा. मेरे प्रति कुछ लोगों की बेरुखी साफ़ दिखाई देने लगी थी. मुझे इसका एक कारण ये भी लगा कि डेस्क के लोगों को मेरी ट्रांसलेशन से दिक्कत हो रही थी, इसलिए मेरी बनाई गई कॉपी कई बार चेक तक नहीं की जाती थी, लगाना तो दूर की बात. औरों के मुक़ाबले मेरी इंग्लिश कमजोर थी, इसलिए मुझ से कुछ ग़लती भी हो जाती थी और समय भी थोड़ा ज्यादा लगता था. लेकिन एक दिन एक…