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India

ब्राह्मणवाद का प्रतीक है राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय

Published By– Aqil Raza By- अरविन्द गौड़    भारत में नाट्य प्रशिक्षण से जुड़ी जो सबसे कड़वी सच्चाई है, वह यह कि यहां नाट्य प्रशिक्षण सिर्फ एक संस्थान की परिधि तक सीमित रह गया है। ऐसी धारणा स्थापित कर दी गयी है कि आप यदि एनएसडी से प्रशिक्षित हैं तो ही आप प्रशिक्षित हैं, अन्यथा आप प्रशिक्षित नहीं हैं, आप अमैच्योर हैं। एक साजि़श के तौर पर स्थापित की गयी इस धारणा से पूरे हिन्दुस्तान के थियेटर का सबसे ज़्यादा नुकसान हुआ है। निस्संदेह राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय एक महत्वपूर्ण संस्था है, जिसने थियेटर की समझ बनाने में, उसके तकनीकी विकास…

“Relentless Struggle of Ramabai Ambedkar.”

Published By:Gaurav By:Obed Manwatkar~ Ramabai Bhimrao Ambedkar (7 February 1898 - 27 May 1935; also known as Ramai or Mother Rama) was the first wife of Babasaheb Dr. B.R. Ambedkar ( The Architect Of the Constitution Of India) . Her unwavering support and sacrifices have been credited by Dr. Ambedkar to have been instrumental in helping him achieve his pursuit of higher education and his true potential.She is also the subject of a number of biographical movies and books. A number of landmarks across India have been given…

पश्चिम बंगाल में रार से सीख ये है कि सभी बहुजन समय रहते मुकाबले को तैयार हो जाएं

Published by- Aqil Raza By- Dr. Manisha Banagar   ~ लोकसभा चुनाव सिर पर है। सो लोहा गर्म है। केंद्र में सत्तासीन सरकार हथौड़ा मारने को बेताब है। लेकिन राजनीति में कोई भी चीज एकतरफा नहीं होती। राजनीतिक लोहा पलटकर वार भी करता है। कल पश्चिम बंगाल में जो हुआ, वह इसी का परिणाम है। ममता बनर्जी ने सीबीआई के अधिकारियों को थाने में बंदकर एक तरफ भाजपा को तमाचा मारा है तो इसका एक दूसरा पहलू भी है। इस एक घटना ने भारतीय संघीय व्यवस्था की समीक्षा के दरवाजे खोल दिए हैं। https://www.youtube.com/watch?v=7qlIcmGDiqw&t=21s यानी केंद्र और…

ब्राह्मणवादी शक्तियां विश्वविद्यालय में प्रतिनिधित्व से बहुत ज़्यादा परेशान क्यों हैं?

Published by- Aqil Raza By- रमाशंकर   ~ IAS/IPS/MP/MLA में आरक्षण से ब्राह्मणवादी शक्तियां कम परेशान है लेकिन... शिक्षा में..विश्वविद्यालय में.. बहुजनों के प्रतिनिधित्व से बहुत परेशान है, क्योंकि... यहां से मूलनिवासी बहुजन आंदोलन को खुराक मिलती है, ताकत मिलती है... ब्राह्मणवादी शक्तिया का शिक्षण संस्थाओं पर सदियों से नियंत्रण कायम है और इसी नियंत्रण के आधार पर वह मूलनिवासी बहुजन समाज के मन मस्तिक पर नियंत्रण करती हैं। उन्हें लगता है कि... यहां से... अर्थात शिक्षा से नियंत्रण हट जाएगा तो फिर वो समाज को नियंत्रित नहीं कर पाएगी…

अंतरिम बजट समीक्षा: केवल कार्पोरेट घरानो के लिए सौगात, लुभावनी घोषणाओं की है बाढ़!

By- डा. मनीषा बांगर कल 1 फरवरी 2019 को कार्यकारी वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने लोकसभा में अंतरिम बजट पेश किया। बजट के नाम पर घोषणाएं अधिक हैं। समाज के सभी तबकों को खुश करने की कोशिश की गई है। मसलन, पांच लाख रुपये तक की आय पर कर में पूरी छूट दी गई है। बताया जा रहा है कि इससे लघु और मध्‍यवर्ग के करीब तीन करोड़ करदाताओं को 23,000 करोड़ रुपये से अधिक की राहत मिलेगी। फसल की उचित कीमत नहीं मिलने से नाराज किसानों को खुश करने के लिए सरकार ने अहम घोषणा की है। बजट में कहा गया है कि छोटे एवं सीमांत किसानों को सालाना 6,000 रुपये की न्यूनतम…

जन्म दिन विशेष: जानिए कौन थे भारत के लेनिन, “बाबू जगदेव प्रसाद”

Published By- Aqil Raza By- Sunil Janardhan Yadav    ~ रूस के महान मजदूरों के नेता लेनिन जो पूरे विश्व में प्रसिद्द है, उनके बारे में तो आपने बहुत सुना होगा | लेकिन क्या आप भारत के लेनिन बाबू जगदेव प्रसाद के बारे में जानते है जिन्होंने भारत के शोषित वर्ग के खातिर अपनी जान न्योछावर कर दी | जिनके विचारो का आज भी लोहा माना जाता है| भारत के लेनिन बाबू जगदेव प्रसाद कहते थे कि "पहली पीड़ी के मारे जाएंगे,दूसरी पीड़ी के जेल जायेंगे,तीसरी पीड़ी के लोग राज करेंगे| " अपने ऐसे विचारो को लेकर बिहार में जन्मे बाबू जगदीश प्रसाद आज पूरे देश…

जन्म दिन विशेष: बिहार लेनिन अमर शहीद बाबू जगदेव कुशवाहा के जन्म दिवस पर बामसेफ संगठन की तरफ से मूलनिवासी बहुजन समाज को बहुत-बहुत बधाई

By- Rama Shankar Ram, CEC member Bamcef लोहिया जी कहा करते थे कि समाजवाद का उद्देश्य समाज मे समता लाना है। इस पर महामना राम स्वरूप वर्मा ने कहा कि समाज मे समता स्थापित करने के लिए जीवन के चार मुख्य क्षेत्रो मे समता लानी पड़ेगी। सांस्कृतिक समता सामाजिक समता III. राजनीतिक समता आर्थिक समता महामना राम स्वरूप वर्मा ने कहा कि लोहिया जी यदि आप राजनीतिक समता चाहते है तो राजनीतिक समता से पूर्व सांस्कृतिक समता एवं सामाजिक समता स्थापित होनी चाहिए। सांस्कृतिक समता एवं सामाजिक समता के बाद ही राजनीतिक समता एवं उसके बाद आर्थिक समता स्थापित…

आक्रोश मार्च में आंबेडकरवादी नारों के साथ बहुजनों, वामपंथियों की एकता का अद्भुत नज़ारा

By-  Siddharth Ramu   ~                बिरसा, फुले, आंबेडकर,  ब्राह्मणवाद की छाती पर          बिरसा, फुले, आंबेडकर, मनुवाद की छाती पर          बिरसा फुले आंबेडकर, आरएसएस की छाती पर                   जनेऊ रोस्टर नहीं, चलेगा                   ब्राह्मणवादी रोस्टर नहीं चलेगा                    मनुवादी रोस्टर नहीं चलेगा                जो अंबानी का यार है, देश का गद्दार है इन सभी नारों के बीच जय भीम का नारा बार-बार गूंज रहा था। SC/ST/OBC और वामपंथियों की एकता देखने  लायक थी। कल यानी 31 जनवरी को दिल्ली में मंडी हाऊस…

भगाना कांड: पीड़ित बहुजनों के हाथ में थमी है आज भी इंसाफ की तख्ती, जानिए क्या है भागाना कांड?

By- Kanaklata Yadav   ~ भगाना कांड को बहुत से लोग भूल गए होंगे। आज जब हम मंडी हाउस पर प्रोटेस्ट मार्च कोआर्डिनेट कर रहे थे तो अचानक  मेरी नज़र तीन व्यक्तियों के ऊपर पड़ी जो चुपचाप भगाना कांड सँघर्ष समिति का बैनर लेकर खड़े थे और उसमें 13 पॉइंट रोस्टर का विरोध लिखा हुआ है, ये देख कर मुझे क्या महसूस हुआ उसके लिए मेरे पास शब्द नहीं है। भगाना के SC/ST के साथ जितना अत्याचार हुआ और 8 सालों से वो अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। आज सभी अत्याचारों के बावजूद उन्होंने आने वाली पीढ़ियों के लिये वो बैनर हाथ में पकड़ रखा था। जब मैंने बातचीत…

مہا گٹھبندھن کا مسلم معاشرے پر اثر

نعيم سرمد ~ اتر پردیش میں بسپا اور سپا گٹھ بندھن لوک سبھا انتخابات سے چند مہینے پہلے ہو چکا ہے۔ حالانکہ اس کے آثار بہت پہلے سے ہی نظر آ گئے تھے لیکن اکھیلیش یادو اور مایاوتی کے ایکجا ہوکر اس اہم فیصلے کا اعلان کرنے کے بعد اس بات کی تصدیق ہو گئی ہے اتر پردیش کی سیاست میں اب تک مسلم اس تماشا دیکھنے والی بھیڑ کی طرح رہا ہے جو ٹکروں میں بنٹ کر   مداری اور بندر پر نگاہیں نہیں رکھ پاتی۔ بلکہ ڈگڈگی کی آواز سے زیادہ متاثر ہوتی ہے یا مسلم وؤٹ بینک جو کہ اتر پردیش میں ۱۹ فیصد ہے۔ جس کی دوسری مثال اب تک چرواہے کے اس گلے کی طرح رہی ہے …