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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ महाभियोग शुरु!

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जिनके खिलाफ महाभियोग की जांच शुरु की जा रही है. कि वो अपने राजनयिको को बदनाम कर रहे है. और ये राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के ख़िलाफ़ महाभियोग की जांच से जुड़ी पहली सार्वजनिक सुनवाई थी. जो कि बुधवार को वॉशिंगटन में हुई. जिसमें अमेरिका के शीर्ष राजनयिक बिल टेलर और जॉर्ज केंट हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स के सांसदों के सामने पेश होने वाले सबसे पहले गवाहों में शामिल हैं. जॉर्ज केंट अमरीका की यूक्रेन नीति के प्रभारी हैं.आपको बता दें. कि महाभियोग एक तरह की जांच है. जिसके ज़रिए अमरीकी राष्ट्रपति को

जंगल और ज़मीन बचाने की लड़ाई लड़ रहें आदिवासियों का संघर्ष!

आदिवासियों की पहचान जल, जंगल और ज़मीन से ज़रूर है. लेकिन प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन के कारण उन्हें इन दिनों अपने मूल स्थान से विस्थापित होना प़ड रहा है. हालांकि वे अपने अधिकारों के लिए आवाज़ बुलंद कर रहे हैं, लेकिन अफ़सोस कि उनकी आवाज़ नक्कारख़ाने में तूती की आवाज़ ही साबित हो रही है. विकास के नाम पर विगत कई वर्षों से झारखंड के आदिवासी विस्थापन का दर्द बहुत झेल रहे है वही छत्तीसगढ़ के उत्तरी भाग में करीब एक लाख सत्तर हजार हेक्टेयर में फैले हसदेव अरण्य के वन क्षेत्र में जंगलों पर उजड़ने का खतरा मंडरा रहा है. इन

जेएनयू जैसे संस्थानों को बचाना क्यों जरूरी है?

जेएनयू में मेरे कई दोस्त हैं जो बहुजन, ओबीसी और मुस्लिम समाज से आते हैं. 'बहुजन साहित्य संघ' में जब मैं पैनलिस्ट के तौर पर गई थी, तो वहां कई ऐसी बहुजन लड़कियों से मुलाक़ात हुई, जो हजारों साल से हो रहे अन्याय के खिलाफ़ मुखर होकर बोल रही थीं. वो सुना रही थी अपने साथ हुई उन कहानियों को, जिनमें संघर्ष ही संघर्ष था और जो बदस्तूर अभी भी जारी है. ज्यादातर लड़कियां मेरी ही तरह अपने घर-परिवार की पहली पीढ़ी थी, जो पढ़-लिखकर और संघर्ष कर यहां तक पहुंची थी. अब ये लड़कियां ना केवल बोल रही थीं, बल्कि ख़ुद के लिए और आने वाली पीढ़ियों के

सस्ती पढ़ाई का हक मांगने पर जेएनयू छात्रों को पड़ा मंहगा ?

दिल्ली के JNU में छात्रों ने प्रशासन को लेकर जंग शुरू करदी है... छात्रो के हिसाब से सरकार JNU को बंद करने में जुटी है. साथ ही सरकार छात्रों की अवाज दबाने में लगी हुई है. जिसे लेकर छात्रों ने धरना प्रदर्शन किया... जहां पुलिस और छात्रों में जंग का महौल देखा जा सकता है. पुलिस छात्रों को आतंकवाद की तरहा मिटाने में जुटी हुई है. मानें युनिवर्सिटी जंग का मैदान बन गई है. इसी को लेकर आज ट्वीटर पर भी काफी गरमा गरमी देखने को मिली. कई जाने माने हस्तियों ने छात्रो का पक्ष लेते हुए ट्वीट भी किया.

गुरु नानक देव और धार्मिक-सामाजिक क्रांति

गुरु नानक इस देश में एक नयी ही धार्मिक-सामाजिक क्रान्ति और जागरण के प्रस्तोता हैं। पूरे मध्यकालीन संत साहित्य में जिन श्रेष्ठताओं का दर्शन बिखरे हुए रूप में होता है उन सबको नानक एकसाथ एक मंच पर ले आते हैं। उनकी परम्परा में बना गुरु ग्रन्थ साहिब इतना इन्क्लूसिव और ज़िंदा ग्रन्थ है कि उसकी मिसाल किसी अन्य धर्म या सम्प्रदाय में नहीं है। आज नानक जयन्ती पर नानक को परम्परावादी प्रशंसा या अहोभाव की मुद्रा से परे जाकर एक समाज क्रान्ति के मसीहा के रूप में देखने का दिन है। हमारे अधिकाँश संत और महापुरुष - जो सम्प्रदायों की चादरों

गुरु नानक देव जी ने संगठित समाज की नींव रख कैसे धर्म-जाति के बंधन को तोड़ा

सिख धर्म के संस्थापक और सिखों के पहले गुरू गुरुनानक देव की आज 550वीं जयंती है जिसे देशभर में सिख समुदाय के लोग प्रकाश पर्व के तौर पर मनाते है. सिख समुदाय इस दिन को खास मानकर गुरुद्वारा जाते है और सरोवर में स्नान करते है. इसके अलावा हर गुरुद्वारे को सजाया जाता है, कार्यक्रम होता है और लंगर भी लगाए जाते है. प्रकाश पर्व के दिन सुबह से ही गुरुद्वारों में धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला शुरू हो जाता है, जो देर रात तक चलता है.यह पर्व समाज के हर व्यक्ति को साथ रहने, खाने और मेहनत की कमाई करने का संदेश देता है. वही इस जंयती के

अयोध्या केस पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना आखिरी फैसला सुनाया !

सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की पीठ ने आज 9 nov 2019 को अयोध्या केस पर फैसला सुनाया. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने 45 मिनट तक फैसला पढ़ा और कहा कि मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाया जाए और इसकी योजना 3 महीने में तैयार की जाए. कोर्ट ने 2.77 एकड़ की विवादित जमीन रामलला विराजमान को देने का आदेश दिया और कहा कि मुस्लिम पक्ष को मस्जिद निर्माण के लिए 5 एकड़ वैकल्पिक जमीन आवंटित की जाए. वहीं वरिष्ठ पर्कार प्रोफेसर दिलीप मंडल ट्विटर पर लिखते हैं कि . आज मंदिर की बात न करें. मंदिर उनका एजेंडा है. उनके मैदान में न खेलें. न पक्ष में, न विपक्ष

अयोध्या जन्मभूमि विवाद पर आज फैसला हुआ खत्म!

अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद पर 5 जजों की अगुवाई में आज बड़ा फैसला सुना दिया है. शिया वक्फ बोर्ड और निर्मोही अखाड़े के दावे को खारिज कर दिया गाया है. सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद के लिये किसी मुनासिब जगह पर पांच एकड़ जमीन दी जाए. केंद्र और उप्र सरकार के साथ मिलकर 2.77 एकड़ जमीन को राममंदिर निर्माण के लिए प्राधिकार को तीन महीने तक का आदेश दिया हैं. वही इतिहासकारों के मुताबिक सन् 1526 में बाबर इब्राहिम लोदी से जंग लड़ने भारत आया था. बाबर के सूबेदार मीरबाकी ने 1528 में अयोध्या में मस्जिद बनवाई. बाबर के सम्मान