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Opinions

आख़िर क्या है पसमांदा मूवमेंट…जानिए!

By: Deepaly Tayday #पसमांदा, जो कि एक फारसी शब्द है, का अर्थ होता है ‘वह जो पीछे छूट गया’। बिहार में 1998 में अली अनवर के नेतृत्व में ‘ऑल इण्डिया पसमांदा मुस्लिम महाज़’ के गठन और उनकी लिखी किताब ‘मसावात की जंग (2001)’ के चलते यह शब्द काफी लोकप्रिय हुआ। इसके पहले डॉ. एजाज़ अली के नेतृत्व में ‘ऑल इंडिया बैकवर्ड मुस्लिम मोर्चा’ दलित मुसलमान शब्द चर्चा में ला चुका था. अली अनवर की किताब ने बिहार के पसमांदा मुसलमानों की दयनीय स्थिति के बारे में ज़ोरदार बहस को पैदा किया और पसमांदा राजनीति की ज़मीन तैयार की। बेशक मुस्लिम समाज में…

#MeToo अभियान की सवर्ण महिलाओं को डॉ रामकृष्ण के इन प्रासंगिक सवालों का जवाब देना होगा!

भारतीय समाज में महिलाओं को कमजोर समझे जाने की मानसिकता के चलते आज भी पुरुषवादी सोच उन पर हावी है और उसी सोच के चलते महिलाओं के साथ शोषण बदस्तूर जारी है। लेकिन महिलाओं के उत्पीड़न का यह दौर कोई नया नहीं है, इसका बहुत लंबा इतिहास रहा है। यह उस मनुवादी और ब्राह्मणवादी व्यवस्था का नतीजा है जिसका महिलाओं ने भी कभी खुलकर विरोध नहीं किया है। आज जब मीटू कैंपेन के जरिए महिलाएं खुद को सशक्त और मजबूत महसूस कर रहीं है तो हमें कवयित्रि महादेवी वर्मा द्वारा लिखी एक कविता याद आती है...जिसमें वो लिखती हैं.... मै हैरान हूं यह सोचकर…

विजय दशमी का असली नाम “अशोक विजयदशमी” है। जानिए सम्राट अशोक का छुपाया गया इतिहास!

भारतीय लोगों के मस्तिष्क से सम्राट अशोक को बड़ी ही चतुराई और चालाकी से ब्राह्मणों ने भुला दिया है। बौद्ध धर्म अर्थात ‘समता, स्वतंत्रता, बंधुत्व और न्याय’ की शासन पद्धती अर्थात मानवकल्याण की समाज में व्यवस्था नष्ट करने के लए ब्राह्मणों को अशोक की यादें नष्ट करना बेहद जरुरी था। इस उद्देश्य पूर्ति के लिए उन्होंने अशोक से संबंधित दिनों को काल्पनिक राम के उत्सवों में तब्दील कर दिया। अशोक ने जिस दिन धम्मदीक्षा ली उस विजयादशमी को राम के दशहरा में बदल दिया और सम्राट अशोक के जन्म दिन को ब्राह्मणों ने  रामजन्म दिन के रुप में परिवर्तित…

#Me Too की आढ़ में भारत का अब कौनसा आर्थिक संकट छुपाया जा रहा है?

एक और बडा क़र्ज़दार विदेश भाग गया और सरकार बेख़बर रही? 31 साल तक आईएलएफ़एस कंपनी गुजरात का कर्ताधर्ता रहा रवि पार्थसारथी 92 हजार करोड़ के कर्ज डुबाने, डेढ़ लाख करोड़ के और बैंक कर्ज संकट में डालने और पूरी अर्थव्यवस्था में संकट पैदा करने के पश्चात देश छोडकर चला गया। वह भागा जुलाई 2018 में और लुकआउट नोटिस जारी हुई 1 अक्टूबर को। सरकार देश के सबसे बडे सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को कह रही है कि उसकी भरपाई करे। कहना नहीं आदेशित कर रही है! जो कुछ मुनाफ़े मे सरकारी कंपनियॉं चल रही है वे सब दबाब में है कि डूबती इन कंपनियों को बचाओ…

तो इस वजह से गनर महिपाल, जज की पत्नि और बेटे को गोली मारने पर हुआ था मजबूर!

By: SanJay Yadav एक दुखद घटना में दो दिन पहले गुड़गाँव में हरियाणा पुलिस के एक जवान महिपाल ने अतिरिक्त ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश की पत्नी और बेटे को गोली मार दी। बड़े जजों का समझ में आता है लेकिन ये जुडिशरी के सबसे निचले अधिकारियों को सुरक्षाकर्मी की क्या आवश्यकता है? महीपाल के केस में बताइये, हैड कॉन्सटेबल से गनमैन और ड्राइवर दोनों का काम लिया जा रहा था! कुछ अधिकारी, किसान पुत्र जवानों से जो ओहदें में सिपाही, हवलदार रहते है उनसे घरेलू नौकर और पारिवारिक बन्धुआ मज़दूर की तरह काम लेते है। आठों पहर उन्हें नौकरी से बर्खास्त करने…

MCD टीचर परिक्षा में जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल

नई दिल्‍ली: भारत का तथाकथित सवर्ण समाज चाहे जितना पढ़ ले लेकिन उसके दिमाग में जमीं जातिवाद की गंदगी इतनी आसानी से नहीं निकलेगी। दिल्ली नगर निगम में प्राइमरी टीचर की भर्ती के लिए हुई परीक्षा में एक सवाल में आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया है जिसके चलते विवाद खड़ा हो गया है और दिल्ली सरकार इस शब्द के इस्तेमाल से नाराज़ है। दरअसल दिल्ली में शनिवार को दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड में एमसीडी में प्राइमरी टीचर के लिए परीक्षा कराई जिसमें हिंदी भाषा और बोध वाले प्रश्‍नपत्र में एक सवाल पूछा गया कि "पंडित : पंडिताइन तो चमार :…

भारत में #Me Too अभिजात्य वर्ग का गेम है…

By-Dr Jayant Chandrapal आम समाज केवल प्रेक्षक है, आपको बता दें कि भारत के बाहरी मामलों (External Affairs) के मंत्री एम. जे. अकबर उर्फ़ मोबासर जावेद अकबर भी अब इस अंतर्राष्ट्रीय अभिजात्य गेम #MeToo में शामिल कर लिए गए है। और इस तरह से वे अपने ही आंतरिक मामलों (Internal Affairs) को सम्हालने में उलझ गए है। इसके पहले बॉलीवुड के नाना भी किसी को पटाकर एक लफड़े में इस गेम में अपना नामांकन करवा चुके है और अपने ही कद को नाना (गुजराती अर्थ “छोटा”) कर चुके है। और भी सेलिब्रिटीज है जैसे की आलोक नाथ, सुभाष घई, अभिजीत भट्टाचार्य, साजिद खान,…

#MeToo मूवमेंट मे क्या हम (# WeToo )शामिल है? बहुजन महिलाओं का ब्राह्मण सवर्ण महिलाओं से यह सवाल!

विमर्श। किसी भी सामाजिक और समानता की लड़ाई के केंद्र में अगर बहुजन स्त्री नहीं तो वो लड़ाई जातीय और एलीट है। भारत के सन्दर्भ में देखे तो बहुजन स्त्रियाँ सवर्ण पुरुष, सवर्ण महिला और अपने वर्ग के पुरुष तीनों के द्वारा शोषण झेलती है, तो बहुजन स्त्री को ये पूरा #me_too इसी परिपेक्ष्य में देखना होगा। क्योंकि ये पूरा #me_too आन्दोलन स्त्रियों और उनके कार्य स्थल, घर के अंदर, सार्वजानिक स्थान पर होने वाले यौन शोषण के अनुभव पर है इसलिए सबसे पहले हमें ये समझना होगा शोषक वर्ग खासकर उस वर्ग की स्त्रियों (भारत में सवर्ण) का चरित्र, उनका…

क्या सम्राट अकबर को ब्राह्मणों ने विष्णु अवतार घोषित किया था ?

मुग़ल सम्राट अकबर को लेकर आज तगड़ा भ्रम फैला है | पुराने इतिहासकारों ने उसे धार्मिक रूप से सहिष्णु व सबको साथ लेकर चलने वाला महान बादशाह लिखा है | यह सच है कि यदि अकबर धार्मिक रूप से सहिष्णु नहीं होता तो राजपूतों राजाओं के साथ उसकी संधियाँ नहीं निभती | पर आजकल  भारत में धार्मिक तौर पर एक नया ट्रेंड चला है, दूसरे के धर्म, जाति को कठघरे में खड़ा कर उसका चरित्रहनन करने का | अकबर भी इस नए ट्रेंड का पूरा शिकार है | पहले विदेशी व वामपंथी इतिहासकारों ने उसे भारतियों का मनोबल तोड़ने के लिए जरुरत से ज्यादा महिमामंडित किया तो आज राजनैतिक,…

उच्च शिक्षा: सवर्णों के पक्ष में केंद्र सरकार नहीं लायेगी अध्यादेश

-संतोष यादव केंद्र सरकार विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर सवर्णों के पक्ष में अब खुल्लम खुल्ला उतर गई है। यही वजह है की वाह अध्यादेश लाने से इंकार कर रही है जिसके लागू होने से इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा विश्वविद्यालयों में विश्वविद्यालय के बजाय विभाग को इकाई मानकर आरक्षण का रोस्टर बनाने संबंधी आदेश पर पूर्ण विराम लग जाता। अध्यादेश का लाभ बहुजन समाज  के अभ्यर्थियों को मिलता जैसा कि 5 मार्च 2018 के पहले था। लेकिन इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के आधार पर यूजीसी द्वारा अधिसूचना जारी किए जाने के बाद इस पर ग्रहण लग…