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Opinions

सभी मेनस्ट्रीम मीडिया के संपादकों को मनीषा बांगर का खुला पत्र, बहुजनो के मुद्दों पर चुप्पी साध कर लोकतंत्र को बचाया नहीं जा सकता।

मुमकिन है कि मेरे इसे खुले पत्र के पहले भी आप उस घटना से वाकिफ होंगे जो हाल ही में बिहार के सुदूर मोतिहारी जिले के महात्मा गांधी सेंट्रल यूनिवर्सिटी में घटित हुई। एक बार फिर मैं आपका ध्यान उसी घटना की तरफ आकर्षित करना चाहती हूं। सत्ता के मद में अंधे हो चुके लोगों ने एक भीड़ की शक्ल में संस्थान के असिस्टेंट प्रोफेसर संजय यादव के उपर हमला बोला। वह अपने कमरे में थे और मॉब खींचते हुए सड़क पर ले गयी। वे उनके उपर लात-घूंसे बरसा रहे थे। उनके शरीर के कपड़े फाड़ डाले और यहां तक कि उनके गुप्तांग पर भी प्रहार किया। वे लोग उनकी जान लेने…

जिन लोगों को लगता है कि एक थप्पड़ मारने पर SC/ST Act लग जाता है!

By- Umashankar  Yadav अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के सदस्यों को जबरन अखाद्य या घृणाजनक (मल मूत्र इत्यादि) पदार्थ खिलाना या पिलाना। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को शारीरिक चोट पहुंचाना या उनके घर के आस-पास या परिवार में उन्हें अपमानित करने या क्षुब्ध करने की नीयत से कूड़ा-करकट, मल या मृत पशु का शव फेंक देना। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य के शरीर से बलपूर्वक कपड़ा उतारना या उसे नंगा करके या उसके चेहरें पर पेंट पोत कर सार्वजनिक रूप में घुमाना या इसी प्रकार का कोई ऐसा कार्य…

मछली बेचने वाली हनन हामिद ने केरल में 1.5 लाख रूपये देकर की मदद

By- Pradyumna Yadav केरल में बीएससी 3rd ईयर की छात्रा हनान हामिद ने 1.5 लाख रुपये मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा किये हैं।  हनान अपनी पढ़ाई मछली बेचकर करती हैं।  इसी पैसे से वो अपनी माँ और भाई का खर्चा भी चलाती हैं। आज उन्होंने मछली बेचने से हुई अपनी सारी कमाई बाढ़ पीड़ितों की मदत के लिए दान कर दी है। हनान इस काम को लेकर काफी चर्चा में हैं। लेकिन इससे पहले हनान तब चर्चा में आयी थीं जब उन्हें मछली बेचने के लिए ट्रोल किया गया था। लोगों को हनान की यह बात नागवार गुजरी थी कि वह स्कूल ड्रेस में मछली बेचती हैं। लोगों ने…

घोर ओबीसी विरोधी थे अटल बिहारी वाजपेयी

By- Santosh Yadav भारत एक मिथक प्रधान देश है। यही वजह है कि यहां 33 करोड़ देवी-देवता हैं। आये दिन इस संख्या में वृद्धि ही हो रही है। अटल बिहारी वाजपेयी को भी एक मिथक बनाने की कोशिशें की जा रही हैं। बताया जा रहा है कि किस तरह उन्होंने देश को महान बनाया। उन्हें महिमामंडित करने वालों में संघी और सवर्ण तो शामिल हैं ही, दलित और पिछड़े वर्ग के सत्तालोलूप नेतागण भी हैं। जबकि वे भी इस बात को मानते हैं कि अटल बिहारी वाजपेयी ओबीसी और अन्य वंचित तबकों के घुर विरोधी रहे। संघी उन्हें जिन कार्यों के लिए महान बता रहे हैं उनमें एक अहम कार्य…

Bamcef International Network President Jayant Rangari pays tributes to the sterling persona of Raju Kamble

Dear Mulnivasi Elders, Brothers, Sisters & Young Ones Jai Bhim !!! Jai Mulnivasi !!! Namo Buddhay !!! Jai Bharat !!! It’s a time of deep sorrow and grief that we all are in, due to the untimely demise of BAMCEF KAMBLE Saheb (Mn. Raju Kamble Sir) Please accept my & from everyone at BAMCEF INTERNATIONAL NETWORK sincere heartfelt condolences to Mn. Raju Kamble Sir’s Family Members and All Phuley - Ambedkarite Samaj in India and across the World. Mn. Raju Kamble Sir was a, Simple, Honest, Benevolent, Committed, Strong,…

अटल बिहारी वाजपेयी के प्रति सोशल मीडिया पर बहुजन बुद्धिजीवियों की प्रतिक्रियाएं

पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की निधन की खबर आते ही एकदम सोशल मीडिया पर उनके लिए प्रतिक्रियाओं की बाढ़ सी आ गई। पूर्व पीएम को श्रद्धांजली देने के साथ ही तमाम लोग उनके शासन काल में हुए कुछ कामों की आलोचना भी कर रहे हैं। हमने ऐसे ही कुछ बहुजन बुद्धिजीवियों की फेसबुक से कुछ प्रतिक्रियाएं नीचे साझा की हैं.. सीनियर पत्रकार दिलीप मंडल अपनी फेसबुक वॉल पर लिखते हैं कि.... "एच.डी. देवेगौड़ा की सरकार ने जाति जनगणना कराने का फैसला कैबिनेट में किया था. अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने उस फैसले को पलट दिया. इस तरह 2001 में जाति जनगणना नहीं…

बहुजनों के लिए हमेशा खलनायक के रुप में याद किए जाएंगे अटल बिहारी वाजपेयी

By-Siddartha Ramu 1- अटल बिहारी बाजपेयी 1 अप्रैल 2004 के बाद भर्ती होने वाले सरकारी कर्मचारियों की पेंशन खत्म कर दी थी। सांसदों- विधायकों की पेंशन छोड़कर अन्य सभी सरकारी कर्मचारियों की पेंशन उन्होंने खत्म कर दी थी 2- अटल बिहारी बाजपेयी ने 1999 में देश के सरकारी और सार्वजिनक सार्वजनिक संस्थाओं को देशी-विदेशी पूंजीपंतियों को बेचने के लिए विनिवेश मंत्रालय बनाया। 3-अटल बिहारी वाजपेयी ही गुजरात में मुसलानों के नरसंहार के समय प्रधानमंत्री थे। उन्होंने राजधर्म निभाना चाहिए कह कर पल्ला झाड़ लिया और मुसलमानों का कत्लेआम देखते रहे। 4-…

जानें, अटलबिहारी वाजपेयी का असली कैरेक्टर

मृत्यु अटल है। अटलबिहारी वाजपेयी का निधन 93 वर्ष की उम्र में हुआ। करीब 12 वर्षों तक वे बीमार रहे। इस लिहाज से उनका निधन शोक के योग्य नहीं बल्कि यह मौका है उनके बारे में जानने-समझने का। अटलबिहारी वाजपेयी का कैरेक्टर अनेक मामलों में खास है। लेकिन बहुजनों के लिए नहीं। बहुजन दृष्टिकोण से बात करें तो उनके जीवन में कुछ भी ऐसा नहीं रहा जिसे याद कर बहुजन समाज शोक व्यक्त करे। बहुजन चिंतक और लेखक प्रेमकुमार मणि की यह टिप्पणी सटीक है। अपने पाठकों के बीच हम इसे साभार प्रकाशित कर रहे हैं - मनीषा बांगर, संपादक ब्राह्मण अटलबिहारी वाजपेयी…

Raju Kamble: An ideal follower of Babasaheb Ambedkar

By-Mangesh Dahiwale New dehli: As the news is pouring in, Raju Kamble breathed his last at 2.10 am in Vancouver, Canada. His death is a great loss to the Ambedkarite movement. When the international reach of Ambedkarites was limited only to a few immigrants from Punjab to the western hemisphere, it was Raju Bhau, as we fondly called him, who spanned the North America, Europe, Middle East, and South East Asia to build what is now known as Ambedkar International Mission (AIM). His grasp of the philosophy of Babasaheb Ambedkar…

अम्बेडकर अंतर्राष्ट्रीय मिशन (AIM) के संस्थापक राजू कांबले सर का वैंकुवर कनाडा में निधन

नई दिल्ली। हम-आप जैसी बेहद सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाले राजू काम्बले जी ने "शिक्षित हो, संघर्ष करो, संगठित हो" के नारे को आत्मसात कर बहुत संघर्ष कर प्रोफेशनल और सोशल लाइफ में बुलंदियों को छुआ। वे आजीवन बाबासाहेब अम्बेडकर के विचारों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने के साथ-साथ अलग-अलग देशों में फैले दलितों को यूनिट के लिए उन्होंने आजीवन प्रयास किया। बहुत ऊंचाईयों पर पहुँचने पर भी वे कभी अपने समाज से नहीं कटे बल्कि समाज के लिए समर्पित रहे और ग्राउंड पर जाकर दलित एक्टिविज़्म के लिए कार्य किया। उन्होंने भारत के हर एक…