Browsing Category

Opinions

क्या है ब्राह्मणवादी पितृसत्ता, क्यों हो रहा है इस पोस्टर का विरोध, पढिए!

पितृसत्ता वो सामाजिक व्यवस्था है जिसके तहत जीवन के हर क्षेत्र में पुरुषों का दबदबा क़ायम रहता है. फिर चाहे वो ख़ानदान का नाम उनके नाम पर चलना हो या सार्वजनिक जीवन में उनका वर्चस्व. वैसे तो पितृसत्ता तक़रीबन पूरी दुनिया पर हावी है लेकिन ब्राह्मणवादी पितृसत्ता भारतीय समाज की देन है.. ब्राह्मणवाद और ब्राह्मणवादी पितृसत्ता को समझने के लिए हमें भारत के इतिहास में झांकना होगा. वैदिक काल के बाद जब हिंदू धर्म में कट्टरता आई तो महिलाओं और शूद्रों (तथाकथित नीची जातियों) का दर्जा गिरा दिया गया.महिलाओं और शूद्रों से लगभग एक जैसा बर्ताव…

‘उदा देवी पासी’ एक ऐसी बहुजन वीरांगना जिसने प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए।

"हेट्स ऑफ ब्लैक टाइग्रेस..... उदा देवी पासी की अद्भुत और स्तब्ध कर देने वाली वीरता से अभिभूत होकर जनरल कॉल्विन केम्बैल ने अपना हेट उतारकर उनके सम्मान में श्रद्धांजलि देते हुए ये शब्द कहे थे।" आज उदा देवी पासी का शहीदी दिवस है.....💐 सिर्फ़ अछूत जाति की होने की वजह से इतिहास में उदा देवी पासी को यथोचित स्थान नहीं मिला। सवर्णों का लिखा हुआ इतिहास भी जातिवादी है लेकिन आपको पता होना चाहिए कि आपके नायक-नायिका कौन हैं? उदा देवी पासी भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों के छक्के छुड़ा देने वाली महान वीरांगना है। अवध के नवाब…

ठग्स ऑफ भारतवर्ष पर कोई क्यों नहीं बोलता?

“रामोसी” भाषा बोलने वाले "ठग्स ऑफ़ हिन्दुस्तान" पर बनी फिल्म आमिर खान ला रहे हैं. लेकिन क्या आपको “संस्कृत” भाषा बोलने वाले "ठग्स ऑफ़ भारतवर्ष" के बारे में कुछ पता है? नहीं ना? उन ठगों पर हिन्दुस्तान में न कोई फिल्म बन सकती है न कोई ढंग का उपन्यास आ सकता है। लेकिन उन ठगों के बारे में क्रान्तिसूर्य ज्योतिबा फूले ने विस्तार से लिखा है. उनकी किताब गुलामगिरी ठीक से पढ़िए। रामोसी भाषा बोलने वाले ठग मुसाफिरों में घुल मिल जाते थे और उनके माल असबाब और ताकत का पूरा हिसाब लगाकर दूसरी टीम को सतर्क कर देते थे। दूसरी टीम इन्हें व्यापारियों…

अलवर में गौ तस्करी के शक में की गई हत्याओं की ज़िम्मेदार है एक घिनौनी मानसिकता!

By- आकिल रज़ा यह बात मैं बहुत ही ज़िम्मेदारी के साथ लिख रहा हूं.. कि मॉव_लिंचिंग का जो दर्द हम यहां बैठकर महसूस करते हैं, दरअसल वो उतना नहीं है बल्कि उससे कई गुनाह ज्यादा है, वैसे तो देश के कई राज्यों और शहरों में मॉव लिंचिंग की घटनांए हई हैं, लेकिन उन सबसे ऊपर लिस्ट में नाम आता है मेवात क्षेत्र का, मेवात भारत के उत्तरपश्चिम में हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में स्थित एक ऐतिहासिक व पारंपरिक क्षेत्र है। मोटेतौर पर इसकी सीमा में हरियाणा का मेवात जिला, राजस्थान के अलवर, भरतपुर और धौलपुर जिले और साथ ही उत्तर प्रदेश का कुछ…

मैं आपसे पूछता हूं धर्म परिवर्तन करके अपना नाम स्थाई रूप से क्यों नहीं बदल लेते-डॉ बीआर अंबेडकर

धर्म परिवर्तन कोई बच्चों का खेल नहीं है। यह ‘मनुष्य के जीवन को सफल कैसे बनाया जाए’ इस सरोकार से जुड़ा प्रश्न है...इसको समझे बिना आप धर्म परिवर्तन के संबंध में मेरी घोषणा के वास्तविक निहितार्थ का अहसास कर पाने में समर्थ नहीं होंगे। छुआछूत की स्पष्ट समझ और वास्तविक जीवन में इसके अमल का अहसास कराने के लिए मैं आप लोगों के खिलाफ किये जाने वाले अन्याय और अत्याचारों की दास्तान का स्मरण कराना चाहता हूं। सरकारी स्कूलों में बच्चों का दाखिला कराने का हक जताने पर या सार्वजनिक कुंओं से पानी भरने का अधिकार जताने पर या घोड़ी पर दूल्हे को…

#MeToo में बहुजन औरतें क्यों नहीं ????

22 सितंबर 1992 को राजस्थान के जयपुर से लगभग 50 किलोमीटर दूर भटेरी गांव में सवर्णों ने एक बहुजन महिला भँवरी देवी प्रजापति के साथ सामूहिक बलात्कार किया सिर्फ इसलिए क्योंकि 'साथिन' पद पर पदस्थ सरकारी कर्मचारी की ड्यूटी निभाते हुए भँवरी ने एक नौ महीने की बच्ची की शादी रोकी थी। सवर्ण वर्ग उनसे बेहद नाराज़ था कि एक कुम्हारिन की हिम्मत कैसी हुई हमारी परंपरा और संस्कृति में टांग अड़ाने की।इसका बदला भँवरी देवी के पति को मारपीट करके बांधकर उसके ही सामने ही खेत में 5 सवर्णों ने बारी-बारी से बलात्कार करके लिया। भँवरी ने जब अपनी आप बीती…

आख़िर क्या है पसमांदा मूवमेंट…जानिए!

By: Deepaly Tayday #पसमांदा, जो कि एक फारसी शब्द है, का अर्थ होता है ‘वह जो पीछे छूट गया’। बिहार में 1998 में अली अनवर के नेतृत्व में ‘ऑल इण्डिया पसमांदा मुस्लिम महाज़’ के गठन और उनकी लिखी किताब ‘मसावात की जंग (2001)’ के चलते यह शब्द काफी लोकप्रिय हुआ। इसके पहले डॉ. एजाज़ अली के नेतृत्व में ‘ऑल इंडिया बैकवर्ड मुस्लिम मोर्चा’ दलित मुसलमान शब्द चर्चा में ला चुका था. अली अनवर की किताब ने बिहार के पसमांदा मुसलमानों की दयनीय स्थिति के बारे में ज़ोरदार बहस को पैदा किया और पसमांदा राजनीति की ज़मीन तैयार की। बेशक मुस्लिम समाज में…

#MeToo अभियान की सवर्ण महिलाओं को डॉ रामकृष्ण के इन प्रासंगिक सवालों का जवाब देना होगा!

भारतीय समाज में महिलाओं को कमजोर समझे जाने की मानसिकता के चलते आज भी पुरुषवादी सोच उन पर हावी है और उसी सोच के चलते महिलाओं के साथ शोषण बदस्तूर जारी है। लेकिन महिलाओं के उत्पीड़न का यह दौर कोई नया नहीं है, इसका बहुत लंबा इतिहास रहा है। यह उस मनुवादी और ब्राह्मणवादी व्यवस्था का नतीजा है जिसका महिलाओं ने भी कभी खुलकर विरोध नहीं किया है। आज जब मीटू कैंपेन के जरिए महिलाएं खुद को सशक्त और मजबूत महसूस कर रहीं है तो हमें कवयित्रि महादेवी वर्मा द्वारा लिखी एक कविता याद आती है...जिसमें वो लिखती हैं.... मै हैरान हूं यह सोचकर…

विजय दशमी का असली नाम “अशोक विजयदशमी” है। जानिए सम्राट अशोक का छुपाया गया इतिहास!

भारतीय लोगों के मस्तिष्क से सम्राट अशोक को बड़ी ही चतुराई और चालाकी से ब्राह्मणों ने भुला दिया है। बौद्ध धर्म अर्थात ‘समता, स्वतंत्रता, बंधुत्व और न्याय’ की शासन पद्धती अर्थात मानवकल्याण की समाज में व्यवस्था नष्ट करने के लए ब्राह्मणों को अशोक की यादें नष्ट करना बेहद जरुरी था। इस उद्देश्य पूर्ति के लिए उन्होंने अशोक से संबंधित दिनों को काल्पनिक राम के उत्सवों में तब्दील कर दिया। अशोक ने जिस दिन धम्मदीक्षा ली उस विजयादशमी को राम के दशहरा में बदल दिया और सम्राट अशोक के जन्म दिन को ब्राह्मणों ने  रामजन्म दिन के रुप में परिवर्तित…

#Me Too की आढ़ में भारत का अब कौनसा आर्थिक संकट छुपाया जा रहा है?

एक और बडा क़र्ज़दार विदेश भाग गया और सरकार बेख़बर रही? 31 साल तक आईएलएफ़एस कंपनी गुजरात का कर्ताधर्ता रहा रवि पार्थसारथी 92 हजार करोड़ के कर्ज डुबाने, डेढ़ लाख करोड़ के और बैंक कर्ज संकट में डालने और पूरी अर्थव्यवस्था में संकट पैदा करने के पश्चात देश छोडकर चला गया। वह भागा जुलाई 2018 में और लुकआउट नोटिस जारी हुई 1 अक्टूबर को। सरकार देश के सबसे बडे सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को कह रही है कि उसकी भरपाई करे। कहना नहीं आदेशित कर रही है! जो कुछ मुनाफ़े मे सरकारी कंपनियॉं चल रही है वे सब दबाब में है कि डूबती इन कंपनियों को बचाओ…