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Opinions

जिग्नेश मेवनी तेज बहादुर के लिए वाराणसी क्यों नहीं गए?

जिग्नेश मेवानी गुजरात में कांग्रेस समर्थित एमएलए हैं। लेकिन उन्होंने गुजरात में चुनाव प्रचार नहीं किया। सिर्फ वोटिंग वाले दिन एक दिन के लिए गुजरात में रहे। जबकि गुजरात में सांप्रदायिकता की चुनौती बड़ी है। मोदी का गढ़ है। मेवानी ने सारा समय बेगूसराय में बिताया। बेगूसराय में बीजेपी सातों एमएलए सीटों पर हारी हुई है। यहाँ दंगे भी नहीं होते। पिछले तीस साल में तो नहीं ही हुए। मेवानी ने गुजरात के दलितों से नहीं कहा कि बीजेपी को हराओ। उन्होंने बेगूसराय के दलितों से कहा कि तनवीर हसन को हराओ। ये कौन की पॉलिटिक्स है पार्टनर? बिहार में…

तनवीर हसन-दो दशक से सामाजिक न्याय की मजबूत आवाज

By -Khalid Anis Ansari तनवीर हसन दो दशक से ज्यादा राजद के साथ रहे हैं लेकिन कभी मंत्रिपद नहीं मिला. आलोचनात्मक आवाज़ हैं, आवामी नेता हैं, चमचागिरी नहीं करते हैं सुप्रीमो की. एक बार आधा गाँधी मैदान भर दिया था पटना में तो सियासी हलचल मच गयी थी. बकौल #नूर हसन आज़ाद भाई, जो कि पसमांदा आन्दोलन के सीनियर और तजुर्बेकार एक्टिविस्ट हैं, तनवीर साहब ने विधान सभा में दलित मुसलमानों के आरक्षण के लिए भी कई बार आवाज़ उठाई है. एक बार जब बक्खो मुस्लिम समाज के विस्थापन का मुद्दा उठा था तब भी तनवीर साहब ने उनके अधिकारों के लिए संघर्ष किया था.…

महान सम्राट अशोक ने बौद्ध धम्म का कैसे किया था प्रचार, जानिए

सम्राट अशोक प्राचीन भारत के मौर्य सम्राट बिंदुसार का पुत्र था। जिसका जन्म लगभग 304 ई. पूर्व में माना जाता है। 272 ई. पूर्व अशोक को राजगद्दी मिली और 232 ई. पूर्व तक उसने शासन किया। अशोक ने 40 वर्ष राज्य किया। चंद्रगुप्त की सैनिक प्रसार की नीति ने वह स्थायी सफलता नहीं प्राप्त की, जो अशोक की धम्म विजय ने की थी। कलिंग के युद्ध के बाद अशोक ने व्यक्ति गत रूप से बौद्ध धर्म अपना लिया । अशोक के शासनकाल में ही पाटलिपुत्र में तृतीय बौद्ध संगीति का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता मोगाली पुत्र तिष्या ने की । इसी में अभिधम्मपिटक की रचना…

मोदी सरकार का व्यापारिक रक्त चरित्र

By-Gaurav डॉ मनीषा बांगर~ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार कहा था कि उनके खून में व्यापार है। यानी वे बनिया हैं। उन्होंने कल अपने इस रक्त चरित्र का सबूत भी दे दिया। कल वित्त मंत्री जेटली ने कहा कि भारत सरकार पाकिस्तान से आयात पर 200 फीसदी कर लगाएगी। साथ ही वे यह भी कह रहे हैं कि भारत सरकार पाकिस्तान को व्यापार की काली सूची में डाल देगी। बताया जा रहा है कि यह सब बदला लेने के लिए किया जा रहा है। 14 फरवरी 2019 को एक आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 42 जवान मारे गए थे। भारत सरकार इस घटना के पीछे पाकिस्तानी हुकूमत को जिम्मेदार बता…

पुलवामा- कश्मीर में राष्ट्रपति शासन लागू तो फिर इंटेलीलेंस ब्यूरो इस कदर बेखबर कैसे??

By-डॉ मनीषा बांगर~ जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के कितने जवान मारे गए हैं, इस संबंध में अखबार आदि बता रहे हैं कि मरने वाले सैनिकों की संख्या 40 है। कुछ अखबार वाले इससे अधिक की संख्या भी बता रहे हैं। सच क्या है वह तो भारतीय सेना ही बता सकती है और यह भी कि कितने घायल हुए हैं। कितने मौत के कगार पर हैं, यह भी अभी तक साफ-साफ नहीं बताया गया है। जाहिर तौर पर घटना कैसे घटित हुई, इसकी भी जानकारी मुकम्मिल तौर पर देश को नहीं दी गयी है। थोड़ी बहुत जो जानकारी दी गयी है, उसके हिसाब से एक आदमी जिसके बारे में कहा जा रहा है कि वह…

प्रेम और बहुजन विचारधारा

By-डॉ मनीषा बांगर प्रेम एक अनमोल अहसास है। प्रेम चाहे वह किसी भी रूप में क्यों न हो। चाहे वह माता-पिता का अपने बच्चों से प्यार हो या फिर पति-पत्नी के बीच का प्यार। प्यार न हो तो जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है और न ही समाज की। प्रेम की व्याख्या और ऐहसासात भी समय के साथ बदले है. आधुनिकता जागरूकता शैक्षणिक विकास के आते प्रेम की अनुभूति सिर्फ एक तरफा या पुरुष केंद्रित न होकर दोनों व्यक्तियों ने एक दुसरे का सम्मान करना सहयोग करना , एक दुसरे से ईर्ष्या जलन न करके एक दुसरे को अपने अपने व्यक्तिमत्व को फूलने फलने की स्वतंत्रता…

मोदी सरकार द्वारा सवर्णों को आरक्षण दिए जाने का निर्णय सिर्फ एक लॉलीपॉप!

एक देश मे एक मानसिक चिकित्सालय में 100 मानसिक रोगी रहते थे, एक दिन उस देश के प्रधानमंत्री का उस चिकित्सालय में दौरा हुआ। प्रधानमंत्री ने दो घण्टे तक ओजस्वी भाषण दिया, मनो-रोगियों ने अपने जाने पहचाने अंदाज में लंबी लंबी छोड़ने वाले इस वक्ता को बड़े ध्यान से सुना। प्रधानमंत्री श्रोताओं की इस एकाग्रता और अनुशासन से अत्यधिक प्रसन्न हुए। जाते जाते उन्होंने बड़ा उपकार करते हुए मानसिक चिकित्सालय में स्वीमिंग पूल बनाने की घोषणा कर दी। सभी मनोरोगियों ने ताली बजाई, पटाखे जलाए, नारे लगाए। देश विदेश में इस उदार निर्णय की बड़ी तारीफ हुई।…

आंध्र यूनिवर्स‍िटी के कुलपति का दावा, टेस्ट ट्यूब बेबी थे कौरव, पढ़िए VC की बखिया उधेड़ता लेख!

बीते दिनों आंध्र यूनिवर्स‍िटी के कुलपति जी नागेश्वर राव ने एक हैरानी भरा बयान जारी किया. जिसके मुताबिक, महाभारत काल में स्टेम सेल और टेस्ट ट्यूब तकनीक की खोज की जा चुकी थी और कौरव टेस्ट ट्यूब बेबी थे। पढ़िए उनके इस बयान पर  यह लेख... यह कैसे मुमकिन हो जाता है कि जिस विज्ञान कांग्रेस पर दुनिया भर की वैज्ञानिक बिरादरी की नजर होती है, उसमें सारे वैज्ञानिकों के सामने कोई व्यक्ति भारत की नुमाइंदगी करते हुए कैसे इस तरह के चुटकुले और गप्प परोस देता है कि सौ कौरव स्टेम सेल्स से पैदा हुए या रावण के पास दर्जनों हवाई अड्डे थे! यह सब…

सावित्री बाई फुले और फ़ातमा शेख ने कैसे महिला शिक्षा के लिए लड़ाई लड़ी, पढ़िए शानदार लेख

By: Zulaikha Jabeen अठारहवीं सदी के पेशवाई युग में ब्राह्मणों के दबाव में जोतिबा फुले के वालिद ने जब अपने शादीशुदा बेटे को घर से निकाल दिया तो सावित्री बाई भी अपने ख़ाविंद के हमराह घर से बाहर निकल आईं। जोतिबा के बचपन के दोस्त गंजपेठ (पुणे) के उस्मान शेख़ ने फुले दंपत्ति को अपने घर में न सिर्फ़ पनाह दी. बल्कि "आत्मनिर्भर गृहस्थी" बसाने की ज़रूरत का हर सामान भी मुहैया कराया. उनका हर तरह से ख़याल रखते हुए उस्मान शेख़ जोतिबा को उनके "मिशन" को आगे बढ़ाने का मशवरा भी देते रहे। लोगों को शिक्षित करने के जोतिबा फुले के ख़ाब को ताबीर…

माता सावित्री बाई फुले जिनके संघर्ष ने खोले महिलाओं के लिए शिक्षा के द्वार

केवल एक ही शत्रु है अपना, मिलकर निकाल देंगे उसे बाहर, उसके सिवा कोई शत्रु नहीं, बताती हूँ उस शत्रु का नाम, सुनो ठीक से उस शत्रु का नाम, वो तो है अविद्यारूपी 'अज्ञान' देश की प्रथम महिला शिक्षिका माता सावित्री बाई फुले की उपरोक्त लाइन यह बताने के लिए काफी हैं कि महिला शिक्षा के क्षेत्र में उनका कैसा योगदान रहा! भारत में सदियों से पुरुषों द्वारा महिलाओं को गुलाम बनाकर उनका शोषण होता रहा है। हमारे धार्मिक ग्रथों में भी महिलाओं की स्थिति को अत्यंत ही दयनीय रुप दर्शाया गया है। तुलसीदासजी ने तो यहां तक लिखा है कि ढोल, गंवार, शुद्र,…