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Politics

ब्राह्मणवादी-मनुवादी संस्कृति के बुनियादी लक्षण क्या हैं?

भारत में उत्तर से लेकर (एक हद  तक) दक्षिण तक और पूरब ले लेकर पश्चिम तक आर.एस.एस. (संघ), भाजपा एवं अन्य आनुषांगिक संगठनों और कार्पोरेट घरानों की विजय और उनका वर्चस्व केवल एक राजनीतिक और आर्थिक परिघटना नहीं है, बल्कि उससे कहीं ज्यादा गहरे व्यापक स्तर पर यह एक सांस्कृतिक परिघटना भी है, जिसने उस मनःस्थिति और चेतना का निर्माण किया, जिसके चलते   सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के नाम पर देश के  हिंदूकरण (ब्राह्मणीकरण)  और विकास के नाम पर कार्पोरेटाइजेशन (पूंजी की लूट को खुली छूट) का मार्ग प्रशस्त हुआ। आखिर ब्राह्मणवादी-मनुवादी संस्कृति या…

जय श्रीराम के नारे का मुकाबला फुले, पेरियार और आंबेडकर की विचारधारा से ही किया जा सकता है।

भाजपा के राजनीतिक विस्तार में जय श्रीराम के नारे की सबसे निर्णायक भूमिका रही है। लालकृष्ण आडवाणी की सोमनाथ से अयोध्या तक के लिए शुरू की गई रथयात्रा का मुख्य नारा जय श्रीराम था। बाबरी मस्जिद का विध्वंस भी जय श्रीराम के नारे के साथ किया गया था। मंडल की राजनीति को पराजित करने के लिए यह नारा व्यापक पैमाने पर उछाला गया। गुजरात नरसंहार का भी मूल नारा जय श्रीराम था। जय श्रीराम के नारे, विचार और एजेंडे की भाजपा को 2 सांसदों की पार्टी से 300 से अधिक सांसदों की पार्टी बनाने में अहम भूमिका रही है। जिसने वर्ण-जाति आधारित हिंदू राष्ट्र…

क्यों जहरीले तीर की तरह सर्वणों के दिलों में चुभते हैं, डॉ. आंबेडकर!

By- सिद्धार्थ सहारनपुर से सटे गांव बादशाहपुर पिंजोरा में आंबेडकर की मूर्ति तोड़ दी गई है। बहुजनों में गहरा आक्रोश है। गांव में पीएसी तैनात कर दी गई। इस देश में सबसे ज्यादा यदि किसी व्यक्ति से सवर्ण नफरत करते हैं तो वह आंबेडकर हैं और सबसे ज्यादा किसी की मूर्ति तोड़ी जाती हैं, तो वह भी आंबेडकर की। आखिर सवर्णों को डॉ. आंबेडकर जहरीले तीर की तरह चुभते क्यों हैं? इसके निम्न कारण हैं- ● पहला सवर्णों का यह मानना है कि डॉ. आंबेडकर की आरक्षण की व्यवस्था के चलते उनके बेटों -बेटियों के करीब 50 प्रतिशत नौकरियों का हिस्सा एससी-एसटी…

भारत मे गरीबों के हित में सामाजिक और राजनीतिक बदलाव क्यों नहीं होते??

- संजय श्रमण ~ क्या ये सवाल आपको पीड़ित करता है? अगर करता है तो आपको समाज और राजनीति में इसके कारण नहीं खोजने चाहिए। जिस मुद्दे को आप समझना चाहते हैं उसे उसी के विश्लेषण से नहीं समझा जा सकता बल्कि उस मुद्दे को जन्म देने वाली परिस्थितियों और कारकों के विश्लेषण से समझा जा सकता है। अगर आप गरीबी को समझना चाहते हैं तो आपकी उन कारकों को समझना होगा जो गरीबी को पैदा करके बनाये रखते हैं। इसी तरह अगर आप भारत मे असमानता, जातीय हिंसा, शोषण और जहालत को समझना चाहते हैं तो इसे इस देश की संस्कृति और धर्म के विश्लेषण से समझिए। इस संस्कृति और…

जीतने वाले भी डरे हुये हैं !

~ krishan kalpit  ~ इस प्रचंड बहुमत के बुलडोजर ने सभी को कुचल दिया है । बुलडोजर जब चलता है तो अपना पराया नहीं देखता । इस बुलडोजर ने इस अपूर्व बहुमत की आधारशिला रखने वालों को भी कुचल दिया है । इस बहुमत की राजधानी अब नागपुर नहीं मुम्बई हो गई है । नागपुर वालों के पास थोड़े दिन बाद Z Plus सुरक्षा में बैठकर संतरे चूसने के अलावा कोई काम नहीं रहने वाला । खेल उनके हाथ से निकल चुका है । अल्पसंख्यक ही नहीं बहुसंख्यक भी इस बहुमत से डर गये हैं । गुजराती भी गुजराती से डरा हुआ है । ताक़तवर मंत्री-संतरी भी डरे हुये हैं । पता नहीं कब कौन…

आरएसएस की जीत नहीं है यह, इत्मीनान के साथ पूर्वाग्रह से मुक्त होकर पढिए क्यों?

~ नवल किशोर कुमार  ~ यह किसकी जीत है? आप में कई कहेंगे कि यह आरएसएस की जीत है। कई यह भी कहेंगे कि यह नरेंद्र मोदी की जीत है। लेकिन यह जीत न तो आरएसएस की है और न ही नरेंद्र मोदी की। क्रिस्टोफर जैफरलोट ने इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित अपने आज के लेख में इस सवाल का जवाब तो नहीं दिया है लेकिन उन्होंने उन कारणों की व्याख्या अवश्य की है जिसके कारण भाजपा गठबंधन को पूरे देश में अपेक्षा से अधिक सफलता मिली। उनके कारणों में हिंदू राष्ट्रवाद, हिंदुत्व और राष्ट्रीय सुरक्षा शामिल हैं। लेकिन मुझे लगता है कि क्रिस्टोफर जैफरलोट न तो भारत को…

نوجوت سنگھ سِدّهو کا مودی کے خلاف بڑا بيان۔

نوجوت سنگھ کا مودی کے خلاف ايک بڑا بيان ہم مضمون ميں تحرير کر رہے ہيں۔ جس ميں وه ثبوتوں اور دليلوں کے ساتھ مودی سرکار کی پول کھول رہے ہيں۔اور ايسے سخت سوال اٹھا رہے ہيں جنکا جواب مودی يا انکی پارٹی سے جڑے کسی شخص کے پاس نہيں۔ نوجوت سنگھ مودی کے تمام غير ملکی دؤروں کی پول کھولتے ہؤے کہتے ہيں کہ مودی صاحب نے اب تک ۵۵ ممالک کے دورے کيے۔ اور اسکے بدلے ملک کے ہاتھ کچھ نہيں آيا اور آی تو صرف دھاندلے بازی۔ وه سلسلےوار ان تمام دوروں کا تذکرہ کرتےہوے کہتے ہيں کہ ان ۵۵ دوروں ميں امبانی کو ساتھ لے کر ۱۸ بڑے معاہده کيے گيے۔ وه معاہدے جو…

پیپلس پارٹی آف انڈيا کی ناگپور سے لؤکسبھا اميدوار ڈاکٹر منيشا بانگر

: پیپلس پارٹی آف انڈيا کی ناگپور سے لؤکسبھا اميدوار ڈاکٹر منيشا بانگر نے راز کھولا کہ چناؤ کے دوران ان پر کيی علاقوں سے دباؤ ڈالا گیا کہ وہ چناؤ ميدان سے باہر ہو جايں۔ ايک خاص گفتگو ميں ڈاکٹر منيشا بانگر نے کہا کہ انہوں نے ان تمام دباؤ کی فکر کيے بغير چناؤ کی تياری جاری رکھی اور بھاجپا کے اميدوار نتن گڈکری اور کانگريس کے نانا پٹولے کو مضبوط ٹکر دينے کے اپنے فيصلہ پر قائم رہيں۔ منيشا بانگر نے کہا کہ کہ ۱۱ اپريل کو ہوے انتخابات ميں اميدواروں کا سياسی مستقبل ای وی ايم ميں قيد ہو کر ره گيا ہے۔ اور اب ۲۳ ميی کو نتيجہ آيگا۔ اسليے…

रामविलास के चिराग पर संकट गहराया

~ नवल किशोर कुमार    ~ लोकसभा चुनाव 2019 में भले ही केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने भाग नहीं लिया हो लेकिन उन्होंने अपनी विरासत अपने बेटे चिराग पासवान और दोनों भाइयों पशुपति पारस और रामचंद्र पासवान को सौंप दी है। परंतु, इस बार उनके बेटे चिराग पासवान जो कि बिहार के जमुई क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं, उनके उपर संकट के बादल नजर आ रहे हैं। दरअसल, उनके सामने संकट यह नहीं है कि उनकी हार होगी या जीत, बल्कि संकट उनकी जन्मतिथि को लेकर है जो उन्होंने शपथ पत्र के माध्यम से चुनाव आयोग को बताया है। उनकी उम्मीदवारी पर सवाल उपेंद्र…

लोकसभा चुनाव : 2004 की तस्वीर दिखा रहे एक्जिट पोल

- नवल किशोर कुमार लोकसभा चुनाव 2019 के तहत सभी सात चरणों के मतदान समाप्त हो चुके हैं और इसके साथ ही कयासबाजियों का दौर शुरू हो चुका है कि कौन पार्टी कितनी सीटें जीतेगी और 23 मई को ताज किसके माथे पर होगा। अभी तक दस सर्वेक्षणों के परिणाम सामने आए हैं और इनमें से 9 एजेंसियों ने नरेंद्र मोदी को विजेता बताया है और मात्र एक ने इसकी अंदेशा जाहिर की है कि इस बार त्रिशकु सरकार बन सकती है। एक्जिट पोल के परिणामों को आधार मानकर किसी ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता है। मसलन, 2004 में जब अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए ने…