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ब्राह्मणवादी-मनुवादी संस्कृति के बुनियादी लक्षण क्या हैं?
भारत में उत्तर से लेकर (एक हद तक) दक्षिण तक और पूरब ले लेकर पश्चिम तक आर.एस.एस. (संघ), भाजपा एवं अन्य आनुषांगिक संगठनों और कार्पोरेट घरानों की विजय और उनका वर्चस्व केवल एक राजनीतिक और आर्थिक परिघटना नहीं है, बल्कि उससे कहीं ज्यादा गहरे व्यापक स्तर पर यह एक सांस्कृतिक…
अधिक पढ़ें »जय श्रीराम के नारे का मुकाबला फुले, पेरियार और आंबेडकर की विचारधारा से ही किया जा सकता है।
भाजपा के राजनीतिक विस्तार में जय श्रीराम के नारे की सबसे निर्णायक भूमिका रही है। लालकृष्ण आडवाणी की सोमनाथ से अयोध्या तक के लिए शुरू की गई रथयात्रा का मुख्य नारा जय श्रीराम था। बाबरी मस्जिद का विध्वंस भी जय श्रीराम के नारे के साथ किया गया था। मंडल की…
अधिक पढ़ें »डॉ मनीषा बांगर को डॉ पायल तडवी की दुखद घटना सुनकर अपने मेडिकल पढ़ाई के वक्त का ये वाकया याद आया।
डॉ. पायल तडवी अब इस दुनिया में नहीं है। उसकी जान किसने ली, अब यह हम सभी जानते हैं। यह भी कि किस तरह द्विज जातियों की तीन महिलाएं जो कि स्वयं भी मेडिकल की छात्राएं हैं, के द्वारा जातिगत और विद्वेषपूर्ण आचरण के कारण डॉ पायल तडवी ने खुदकुशी…
अधिक पढ़ें »पायल तड़वी और उसके खूबसूरत सपनों की दास्तान
महाराष्ट्र समता और न्याय का सपना देखने वाले फुले, शाहू जी और डॉ. आंबेडकर की जन्मभूमि-कर्मभूमि है, लेकिन यह वर्ण-जाति व्यवस्था और इससे पैदा होने वाले अन्यायों के समर्थक रामदास, तिलक, सावरकर और गोडसे जैसे चितपावन ब्राह्मणों की जन्मभूमि- कर्मभूमि भी है। यह क्रूर पेशवा ब्राह्मणों की भूमि भी है,…
अधिक पढ़ें »महान सम्राट अशोक ने बौद्ध धम्म का कैसे किया था प्रचार, जानिए
सम्राट अशोक प्राचीन भारत के मौर्य सम्राट बिंदुसार का पुत्र था। जिसका जन्म लगभग 304 ई. पूर्व में माना जाता है। 272 ई. पूर्व अशोक को राजगद्दी मिली और 232 ई. पूर्व तक उसने शासन किया। अशोक ने 40 वर्ष राज्य किया। चंद्रगुप्त की सैनिक प्रसार की नीति ने वह…
अधिक पढ़ें »“रमाबाई अम्बेडकर के अथक संघर्ष।”
द्वारा प्रकाशित:गौरव तक:Obed Manwatkar~ Ramabai Bhimrao Ambedkar (7 फरवरी 1898 – 27 मई 1935; भी Ramai या माँ राम के रूप में जाना) बाबा साहेब डॉ की पहली पत्नी थी. B.R. अम्बेडकर ( भारत के संविधान के वास्तुकार) . उसकी अटूट समर्थन और बलिदान डॉ द्वारा श्रेय दिया जाता है. अम्बेडकर…
अधिक पढ़ें »10% आरक्षण के खिलाफ सप्रीम कोर्ट में बहुजन एक्टीविस्ट ने दायर की ‘जनहित याचिका’
By-Aqil Raza लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मोदी सरकार ने सामान्य वर्ग को आर्थिक आधार पर 10 फीसदी आरक्षण देने का फैसला लिया है जो कि अब दोनों सदनों से पास हो चुका है और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मुहर भी संविधान के इस 124वें अमेंडमेंट पर लग चुकी है।…
अधिक पढ़ें »मोदी सरकार द्वारा सवर्णों को आरक्षण दिए जाने का निर्णय सिर्फ एक लॉलीपॉप!
एक देश मे एक मानसिक चिकित्सालय में 100 मानसिक रोगी रहते थे, एक दिन उस देश के प्रधानमंत्री का उस चिकित्सालय में दौरा हुआ। प्रधानमंत्री ने दो घण्टे तक ओजस्वी भाषण दिया, मनो-रोगियों ने अपने जाने पहचाने अंदाज में लंबी लंबी छोड़ने वाले इस वक्ता को बड़े ध्यान से सुना।…
अधिक पढ़ें »सावित्री बाई फुले और फ़ातमा शेख ने कैसे महिला शिक्षा के लिए लड़ाई लड़ी, पढ़िए शानदार लेख
द्वारा: Zulaikha Jabeen अठारहवीं सदी के पेशवाई युग में ब्राह्मणों के दबाव में जोतिबा फुले के वालिद ने जब अपने शादीशुदा बेटे को घर से निकाल दिया तो सावित्री बाई भी अपने ख़ाविंद के हमराह घर से बाहर निकल आईं। जोतिबा के बचपन के दोस्त गंजपेठ (पुणे) के उस्मान शेख़…
अधिक पढ़ें »माता सावित्री बाई फुले जिनके संघर्ष ने खोले महिलाओं के लिए शिक्षा के द्वार
केवल एक ही शत्रु है अपना, मिलकर निकाल देंगे उसे बाहर, उसके सिवा कोई शत्रु नहीं, बताती हूँ उस शत्रु का नाम, सुनो ठीक से उस शत्रु का नाम, वो तो है अविद्यारूपी ‘अज्ञान’ देश की प्रथम महिला शिक्षिका माता सावित्री बाई फुले की उपरोक्त लाइन यह बताने के लिए काफी…
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