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स्कूल की दीवारों पर लिखी अश्लील बातों का विरोध करने पर छात्राओं पर गुंडो का हमला!

बारह-चौदह साल की लड़कियां फब्तियां कसने, स्कूल हॉस्टल की दीवारों पर गालियां और दूसरी वीभत्स अश्लील बातें लिखने का विरोध करती हैं और इसके बदले वह सब करने वाले लड़के और उनके मां-बाप इकट्ठा होकर स्कूल में घुस कर लड़कियों को बर्बरता से मारते-पीटते हैं! पैंतीस लड़कियों को अस्पताल पहुंचने की हालत में ला देने तक..! यह किसी सामंती अपराधी मानस वाले के लिए कोई साधारण घटना हो सकती है! लेकिन क्या इस घटना की त्रासदी यहीं तक सीमित है! भदेसपन के नाम पर गालियों यानी मौखिक बलात्कार का समर्थन या बचाव कौन करता है? लड़कियों पर फब्तियां कसने को…

किसानों का संदेश- अब आत्महत्या नहीं रण होगा, संघर्ष महाभीषण होगा!

By: Siddhartha Ramu इस बूढ़े किसान की लाठी ने सत्ता की लाठी को टक्कर दी है। इस लाठी की टकराहट की आवाज़ देश के किसानों को संदेश दे रही है, की टकराने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। देश के हुक्मरानों ने किसानों को तबाह कर उन्हें शहरों की झुग्गी-झोपनियों में भेजने और अमीरों की चाकरी में लगाने का निर्णय ले लिया है। किसानों की जमीनों पर कारपोरेट की निगाहें हैं। बीज, खाद, पानी और कीटनाशक के मालिक तो कारपोरेट काफ़ी हद तक पहले ही बन चुके हैं। खेती के पैदावर के देशी-विदेशी बाज़ार पर पहले ही कारपोरेट अपना नियंत्रण कर चुके हैं। अब सरकारे…

जिस गौ हिंसा से लहूलुहान हैं पसमांदा-बहुजन, उसी गौ आतंक का लाभार्थी है सय्यैद ब्राह्मण

लेखक: नाज़ खैर, जेंडर और पसमांदा एक्टीविस्ट अनुवादक: डॉ जयंत चंद्रपाल, सामाजिक चिंतक अनुकूल जलवायु और स्थलाकृति के कारण, पशु पालन, डेयरी और मत्सयपालन आदि क्षेत्रों ने भारत में प्रमुख सामाजिक-आर्थिक भूमिका निभाई है। इसके अलावा, पारंपिरक, सांस्कृतिक एवं घार्मिक मान्यताओं ने भी इन गतिविधियों की निरंतरता में अपना योगदान दिया है। वैसे देखा जाए तो लाख लोग को सस्ते एवं पोस्टिक भोजन प्रदान करने के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में (खासकर भूमिहीन छोटो एवं सीमांत किसान एवं महिलाओं में) लाभकारी रोजगार पैदान करने में भी इन क्षेत्रों की विशेष…

‘Voice of Peoples’ पुरस्कार से डॉ मनीषा बांगर को किया गया सम्मानित

14 सिंतबर को दिल्ली में एवान-ए-गालिब ऑडिटोरियम में आयोजित एक कार्यक्रम बहुजन नेत्री डॉ मनीषा बांगर को सम्मानित किया गया। यह कार्यक्रम पल-पल न्यूज वेब पोर्टल की तरफ से आयोजित किया गया था, कार्यक्रम में तमाम बुद्धिजीवी, पत्रकार, लेखक और समाजिक कार्यकर्ताओं ने शिरकत की थी। कार्यक्रम में बामसेफ की पूर्व उपाध्यक्ष, समाजिक कार्यकर्ता और बहुजन नेत्री, पेशे से एमबीबीएस डॉक्टर मनीषा बांगर को ‘Voice of Peoples’ नाम के आवर्ड से सम्मानित किया गया। यह आवर्ड मनीषा बांगर को समाज में उनके काम की सराहना के लिए दिया गया। जिस बेबाक अंदाज में…

बहुजन हो! ज़िंदा रहते सम्मानजनक ज़िंदगी नहीं और मरने के बाद दो गज जमीन के भी लाले हैं…

बिहार के मधेपुरा जिले के केवटगामा गाँव में एक बहुजन भूमिहीन मजदूर हरिनारायण की पत्नी सहोगिया देवी की डायरिया से मौत हो गई। पहले जीते जी अच्छा इलाज न मिल सका और बाद में दो गज जमीन भी नसीब नहीं हुई। हरिनारायण जब पत्नी की अंतिम क्रिया करने की तैयारी में लगा तो गाँव के तथाकथित ऊँची जाति के भूमिहार और राजपूत लोगों ने हरिनारायण को उसकी पत्नी का अंतिम संस्कार ऊंची जात वाले श्मशान घाट में करने देने से मना कर दिया। यही नहीं उस पर दबाव बनाया गया कि गांव की बाहरी ज़मीन पर भी वह अपनी पत्नी की अंतिम क्रिया नहीं कर सकता। हारकर उसे अपनी…

गणपति मौर्य ही क्यों ??!!

By: Kirti Kumar भारत की उत्सव प्रिय जनता गणेशोत्सव को बहुत ही धूमधाम से मनाती है, लेकिन पहले गणपति के बारे में जानना भी जरूरी हो जाता है। सामान्य भाषा में समझने का प्रयास करे तो गण याने समूह और पति याने स्वामी-प्रमुख, यह दो शब्दों से गणपति शब्द बना है। आज हमारे सामने गणपति के दो स्वरूप है, एक वास्तविक है तो दूसरा काल्पनिक है। भारत में लोग वास्तविक गणपति की उपेक्षा कर काल्पनिक गणपति में ही ज्यादा विश्वास करते है, या ऐसा करने के लिए उन्हें भ्रमित किया गया है। दोनों में से पहले वास्तविक गणपति की चर्चा करते है। प्राचीन काल में…

प्यार से खूबसूरत शै कुछ भी नहीं। और इस दुनिया में जातिवाद-ब्राह्मणवाद से बदत्तर, निर्मम,घिनोनि व्यवस्था भी कोई और नहीं। जाति के चलते एक और…

By: Deepali Tayday तेलंगाना के नलगोंडा के 24 साल का बहुजन युवक प्रणय सिर्फ इसलिए मार दिया गया क्योंकि उसने एक अपर कास्ट सवर्ण वैश्य लड़की अमृथा से प्यार किया था। एक साल के बचपन की दोस्ती फिर अफेयर के बाद 8 महीने पहले दोनों ने शादी करके ज़िंदगी भर साथ रहने का फैसला किया था। पर अमृथा के ऊंच जात माँ-बाप को बहुजन लड़के से रिश्ता कतई मंजूर नहीं हुआ। लड़की के परिवार की धमकियों और जान के खतरे को देखते हुए दोनों अपने शहर से दूर दूसरी जगह भी रहने चले गए थे। शादी के बाद से ही लड़की के पैरेंट्स ने प्रणय और उसके परिवार को लगातार टॉर्चर करना…

मान्यवर कांशीराम और पसमांदा मुस्लिम

“मुसलमानों में मैंने नेत्रत्व के स्तर से जाना ठीक समझा. उनके 50 नेताओं से मैं मिला इनमें भी ब्राहम्ण्वाद देखकर मैं दंग रह गया. इस्लाम तो बराबरी और अन्याय के खिलाफ लड़ना सिखाता है लेकिन मुसलमानों का नेत्रत्व शेख़, सय्यद, मुग़ल, पठान यानि अपने को ऊंची जाती का मानने वाले लोगों के हाथ में है, वह यह नहीं चाहते कि अंसारी, धुनिया, कुरैशी उनकी बराबरी में आयें. इलाहाबाद के उपचुनाव (1988) में यह बात एक दम साफ तौर पर उभरकर आई. विश्व हिन्दू परिषद, आरएसएस, बजरंग दल, भाजपा और राम जन्म भूमि मुक्ति समिति यानि हिन्दू कट्टरवादी और मुस्लिम…

चंद्रशेखर रावण: हर रिहाई का मतलब आजादी नहीं होती

By- Santosh Yadav विमर्श। हंगामा और सियासत तो होनी ही थी। आखिरकार यह चंद्रशेखर रावण की रिहाई का मामला है। वहीं चंद्रशेखर रावण जिन्होंने उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में जहां ठाकुरों का घोषित और अघोषित दोनों राज कायम है, वहां 'द ग्रेट चमार' का नारा बुलंद किया। जाहिर तौर पर उनके उपर से रासुका हटाने का मामला इतना आसान नहीं है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आखिर क्यों भला रातों-रात चंद्रशेखर रावण के उपर से रासुका हटाने का निर्णय लिया? क्या उन्हें कोई सपना आया था जो आधी रात के बाद चंद्रशेखर को रिहा किया गया? क्या योगी सरकार इस बात से…

बीपी मंडल, फूले शाहू अंबेडकर पेरियार विरासत के बहुजन नायक

By-Manisha Bangar भारत का इतिहास वैसे तो बहुत पुराना है खासकर द्विजों के नजरिए से लेकिन वंचितों के लिए लिहाज से बहुत नया है। खास बात यह कि बदलाव तभी हुए हैं जब शूद्र वर्ग एक साथ हुआ। पहले जोतिबा फुले ने शूद्रों के हक-अधिकार की बात कही। शूद्रों को पढ़ने का अधिकार दिलाया। फिर शाहू जी महाराज ने कोल्हापुर रियासत में शूद्रों के लिए आरक्षण का प्रावधान किया। उनका जोर भी शिक्षा पर था। बाद में बाबा साहब आंबेडकर ने इसी मार्ग पर चलते हुए संविधान में आरक्षण का अधिकार सुनिश्चित किया। हालांकि वह ओबीसी के लिए अलग से कोटा का प्रावधान नहीं कर…