संस्कृति
ई. वी. रामासामी पेरियार जयंती विशेष : पेरियार से हम क्या सीखें?
इस देश में भेदभाव और शोषण से भरी परम्पराओं का विरोध करने वाले अनेक विचारक और क्रांतिकारी हुए हैं जिनके बारे में हमें बार-बार पढ़ना और समझना चाहिए. दुर्भाग्य से इस देश के शोषक वर्गों के षड्यंत्र के कारण इन क्रांतिकारियों का जीवन परिचय और समग्र कर्तृत्व छुपाकर रखा जाता…
अधिक पढ़ें »अमर चित्र कथा, नए युग के साथ हिंदू पौराणिक कथाओं को अद्यतन और सिंक्रनाइज़ करने के लिए एक परियोजना
प्रशांत नेमा एक लेखक और एक जाति-विरोधी कार्यकर्ता हैं. उन्होंने हाल ही में अमर चित्र कथा पर एक दिलचस्प दृश्य श्रृंखला समाप्त की, कॉमिक बुक्स जिसमें उन्होंने ग्राफिक नॉवेल और कॉमिक पब्लिशर की कट्टरता को सामने लाया। एक विदाई पोस्ट में, उन्होंने हाल ही में अमर चित्र कथा पर एक दिलचस्प दृश्य श्रृंखला समाप्त की, कॉमिक बुक्स जिसमें उन्होंने ग्राफिक नॉवेल और कॉमिक पब्लिशर की कट्टरता को सामने लाया। एक विदाई पोस्ट में…
अधिक पढ़ें »संत कबीर : अपने दोहों से जातिवाद, पाखंडवाद और ब्राह्मणवाद की खोलतें थे पोल
ब्राह्मणवाद के खिलाफ अपनी लेखनी से विद्रोह करने वाले महान संत कबीर दास जी की वाणी आज भी जातिवाद और भेदभाव के खिलाफ संघर्ष का रास्ता दिखाती है। बहुजन परंपरा में कबीर जैसे महानायकों का जीवन हम सबके लिए एक प्रेरणा है, कॉमिक बुक्स जिसमें उन्होंने ग्राफिक नॉवेल और कॉमिक पब्लिशर की कट्टरता को सामने लाया। एक विदाई पोस्ट में…
अधिक पढ़ें »विश्व कविता दिवस पर बयां हुआ दिल का हाल
दर्द-ए-दिल के वास्ते पैदा किया इंसान कोवर्ना ताअत के लिए कुछ कम न थे कर्र-ओ-बयाँ. कॉमिक बुक्स जिसमें उन्होंने ग्राफिक नॉवेल और कॉमिक पब्लिशर की कट्टरता को सामने लाया। एक विदाई पोस्ट में, कवियों की कुछ ख़ास कविताएं या शेर ही उनकी सारी शायरी का आईना बन जाते हैं। इन शेर और नज़्मों में उनका पूरा साहित्यिक अध्यवसाय परिलक्षित होता है। ख़ास…
अधिक पढ़ें »विश्व कविता दिवस पर लेखक की ये कविता जरुर पढियें
दर्द-ए-दिल के वास्ते पैदा किया इंसान कोवर्ना ताअत के लिए कुछ कम न थे कर्र-ओ-बयाँ. कॉमिक बुक्स जिसमें उन्होंने ग्राफिक नॉवेल और कॉमिक पब्लिशर की कट्टरता को सामने लाया। एक विदाई पोस्ट में, कवियों की कुछ ख़ास कविताएं या शेर ही उनकी सारी शायरी का आईना बन जाते हैं। इन शेर और नज़्मों में उनका पूरा साहित्यिक अध्यवसाय परिलक्षित होता है। ख़ास…
अधिक पढ़ें »पीएम मोदी के बातचीत के बाद बाइडेन ने लोकतांत्रिक संस्थानों की रक्षा पर दिया जोर
पीएम मोदी के साथ बातचीत में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने लोकतांत्रिक संस्थाओं और मानकों को बचाने पर जोर दिया है. ये ऐसे समय में हुआ है जब भारत में चल रहे किसान आंदोलन की दुनियाभर में चर्चा में है और कई विदेशी हस्तियों ने इस आंदोलन पर भारत सरकार…
अधिक पढ़ें »भारतीय ज्ञानोदय और पुनर्जागरण की पहली संस्था: सत्य-खोजी समाज
आज ही के दिन 24 सितंबर 1873 को सत्यशोधक समाज की स्थापना फुले दंपत्ति ने की थी। वर्ण-जाति व्यवस्था एवं ब्राह्मणवादी पितृसत्ता और उन्हें समर्थन देने वाले धर्म, धर्मग्रंथों और ईश्वर को खारिज किए बिना और इसकी जगह तर्क, समता, स्वतंत्रता और मनुष्य के विवेक को जगह दिए बिना भारत…
अधिक पढ़ें »बी.पी. मंडल ने मंडल कमीशन रिपोर्ट लिख कर बदल दी थी 60 करोड़ OBC की तकदीर !
स्वतंत्रता और मनुष्य के विवेक को जगह दिए बिना भारत 11 अप्रैल का दिन सामाजिक क्रांति के जनक महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती होने का कारण महत्वपूर्ण है, 14 अप्रैल का दिन सामाजिक क्रांति के जनक महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती होने का कारण महत्वपूर्ण है. भीमराव आंबेडकर का जन्मदिवस है और इसी बीच 13 भीमराव आंबेडकर का जन्मदिवस है और इसी बीच…
अधिक पढ़ें »नारायण गुरु के महान कार्य की नींव पर हुआ केरल भारत में सबसे साक्झार पढ़ा लिखा प्रदेश
आज भारत में सबसे ज्यादा साक्षरता दर वाला राज्य केरल जहाँ सिर्फ महिलाओं की साक्षरता दर राष्ट्रीय महिला साक्षरता दर की तुलना में कहीं अधिक है। जहाँ शिशुओं की मृत्यु दर भारत के और राज्यों की तुलना में सबसे कम है और महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक है। वहाँ…
अधिक पढ़ें »क्या RSS के इशारो पर काम कर रहा है सुप्रीम कोर्ट? संदर्भ प्रशांत भूषण को दोषी मानना!
संघ के आंगन में नाच रहा है, सुप्रीम कोर्ट- संदर्भ प्रशांत भूषण को दोषी ठहराना सुप्रीम कोर्ट की अवमानना मामले में सीनियर वकील प्रशांत भूषण दोषी ठहराया गया है। न्यायपालिका के प्रति कथित रूप से दो अपमानजनक ट्वीट करने को लेकर अधिवक्ता प्रशांत भूषण के खिलाफ स्वत: शुरू की गई…
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