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कश्मीर की बेटी से शादी करने की इच्छा अपने मन में पालने वालो, सुनों…

By- Aqil Raza ~ जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35 ए हटाने के बाद देश में खुशी की लहर है। यह खुशी की वाकई लहर है या फिर ऐसा हमें दिखाया जा रहा है। क्या जिन लोगों के लिए यह फैसला आया है उन्हें भी इस बात से खुशी है? क्या जम्मू कश्मीर के लोग वहां की आवाम इस फैसले का समर्थन करती है? इन सवालों का जवाब आपको नहीं पता होगा, क्योंकि आपको वो सब दिखाया ही नहीं गया है। बहरहाल अब हम उन लोगों की बात करेंगे जो सोशल मीडिया पर खुशी तो मना रहे हैं लेकिन किस बात की यह अभी उन लोगों को भी नहीं पता है। आप जैसे सेशल मीडिया पर जाएंगे तो देखेंगे की…

तेज तर्रार अद्भूत वक्ता, कवि, लेखक, ब्राह्मणवाद विरोधी आन्दोलनकारी और प्रखर राजनेता: मुथुवेल करुणानिधि को सलाम

मुथुवेल करुणानिधि. 'मु का का' एवम कलाईनार (तमिल: கலைஞர், "कला का विद्वान") के नाम से पहचाने जाते थे | वे महानतम कलाकार (साहित्य, संगीत और रंगमंच) थे। उनके भीतर कला और राजनीति का बेजोड़ संगम था। साउथ इंडिया की करीब 50 फिल्मों की कहानियां और संवाद लिखने वाले करुणानिधि की पहचान एक ऐसे सियासतदान की थी, जिसने अपनी लेखनी से तमिलनाडु की तकदीर लिखी। एम करुणानिधि का जन्म 3 जून, 1924 को नागपट्टिनम जिले के तिरुवुवालाईयूर में मुथुवेल्लू (पिताजी) और अंजुगम अम्मल (माताजी) के यहाँ हुए था। किशोरावस्था से ही वे द्रविड़ आंदोलन से प्रेरित थे।…

डॉक्टर हर्षदीप काम्बले ने सूरज के अंधेरे जीवन को रोशनी से जगमगाया

किसी की मुस्कराहटों पे हो निसार, किसी का दर्द मिल सके तो ले उधार, जीना इसी का नाम है, ज़िन्दगी के ये फलसफा अगर हर कोई आजमा ले तो ये दुनिया कितनी खुशनमा हो सकती है, दुनिया में ऐसे लोग काफी कम होते है जो अपने लिए नहीं सोसाइटी के लिए जीते है, इन्ही लोगों में से एक नाम है डॉ. हर्षदीप काम्बले. इस सीनियर IAS ऑफिसर की दानभावना तथा निरतंर प्रयासों से महाराष्ट्र के यवतमाल जैसे बैकवर्ड कहे जाने वाले एरिया से सूरज डांगे नाम का यह लड़का आज अमेरिका में उच्च शिक्षा की पढाई करने जा रहा है। डॉ. हर्षदीप काम्बले 2007 में जब यवतमाल के कलेक्टर…

BBC और मीना कोटवाल: बहुजन महिला पत्रकार के जातिगत प्रताड़ना की कहानी, पार्ट-3

मैं और बीबीसी- 3 ट्रेनिंग खत्म हो चुकी थी. दो अक्टूबर को मैं और मेरे साथ जॉइन करने वाले सभी ऑफ़िस पहुंच चुके थे. न्यूज़रूम में ये हमारा पहला दिन था. बीबीसी के लिए ये दिन बहुत ख़ास था क्योंकि इस दिन बीबीसी हिंदी का टीवी बुलेटिन शुरू हो रहा था, जिसके उपलक्ष्य में बीबीसी के डायरेक्टर जनरल टॉनी हॉल दिल्ली ऑफिस आए थे. ऑफिस में माहौल किसी त्यौहार से कम नहीं था. टॉनी हॉल ने सभी से एक-एक कर हाथ मिलाया. उनका इस तरह मिलने का अंदाज अच्छा लगा. न्यूज़रूम में माहौल एकदम ‘कूल’ बनाया हुआ था. सभी जगह हाहा-हीही की आवाज सुनाई पड़ रही थी. देखने…

BBC और मीना कोटवाल: बहुजन महिला पत्रकार के जातिगत प्रताड़ना की कहानी, पार्ट-2

मैं और बीबीसी- 2 ऑफ़िस के कुछ दिन ट्रेनिंग में ही बीते. जब तक ट्रेंनिंग थी तब तक तो सब कुछ कितना अच्छा था. ऑफ़िस के कई लोग आकर बताते भी थे कि ये तुम्हारा हनीमून पीरियड है, जिसे बस एंजॉय करो. ऑफ़िशियल ट्रेनिंग में अभी कुछ दिन का समय था इसलिए ऑफ़िस में कई अधिकारी, संपादक और वरिष्ठ पत्रकार हमसे मिलने आते रहते थे. इसी तरह एक बार ऑफ़िस के वरिष्ठ पत्रकार हमसे हमारे परिचय के लिए आए थे. पहले उन्होंने अपना परिचय दिया और फिर हमसे एक-एक कर हमारा परिचय लिया. जब हम सब अपना परिचय दे रहे थे, तब वे एक जगह कहते हैं कि अरे आप को कौन नहीं…

BBC और मीना कोटवाल: बहुजन महिला पत्रकार के जातिगत प्रताड़ना की कहानी, पार्ट-1

चार सितम्बर, 2017 का दिन यानि बीबीसी में ऑफिस का पहला दिन. रातभर नींद नहीं आई थी, बस सुबह का इंतज़ार था. लग रहा था मानो एक सपना पूरा होने जा रहा है. क्योंकि आज तक घर में तो छोड़ो पूरे परिवार में भी कोई इस तरह बड़े-बड़े ऑफिस में काम नहीं किया था. परिवार में कोई इतना पढ़ा लिखा ही नहीं है. एक चचेरा भाई पढ़ा लिखा है लेकिन वो भी सिर्फ बारहवीं तक. घर परिवार की बेटियों की तो बात ही छोड़ो. मेरी बहनें आठवीं तक जरूर पढ़ी हैं. इसलिए किसी ने भी इतने बड़े संस्थान में काम करना तो दूर करीब से देखा तक नहीं है. मेरा इतना पढ़ना और इतनी अच्छी…

बिहार में 50 साल पहले घट चुकी है सोनभद्र जैसी घटना।

50 साल पहले ऐसी ही घटना घटी थी बिहार में जैसी आज सोनभद्र उत्तरप्रदेश में घटी है। 24 मई 1967 को पूर्णिया जिले के रूपसपुर चंदवा में 14 आदिवासी बटाईदारों की हत्या कर दी गई थी। यह बिहार का पहला बड़ा नरसंहार था। एक भूमि विवाद को लेकर आदिवासियों को उनके झोपड़ों सहित आग के हवाले कर दिया गया था। तब के कांग्रेस के बड़े नेता और विधानसभाध्यक्ष रूपनारायण सिंह का नाम आया था इस कांड के मास्टरमाइंड के रूप में ...खैर। जमींदार घराने से आने वाले विन्देशरी प्रसाद मंडल तब खांटी कांग्रेसी हुवा करते थे, पर आदिवासियों पर हुवे इस नृशंस अत्याचार के…

सोनभद्र:आदिवासियों का नरसंहार, क्या नेताओं, अधिकारियों और ताकतवर लोगों की मिली-भगत?

By- सिद्धार्थ रामू ~ सोनभद्र में आदिवासियों का नरसंहार, कुछ नहीं कर सकते दो बूंद आंसू तो बहा ही लीजिए। वे भी आपके अपने ही हैं। थोड़े देर के लिए ही सही उन्हें अपना मान लीजिए। जान लीजिए, देख लीजिए कितनी निर्ममता से उन्हें गोलियों से भूना गया है। कैसे एक महान आईएएस अफ़सर ने उनके खेत, अपनी बीबी और मां के नाम कराया। कैसे उसे एक बर्बर प्रधान को बेचा। https://www.youtube.com/watch?v=Nc80yxcTlbA&t=99s क्या यह सबकुछ नेताओं, अधिकारियों और ताकतवर लोगों की मिली-भगत के बिना हो सकता था। वक़्त निकाल कर ताकतवर लोगों के असली चेहरे को…

सोनभद्र नरसंहार कांड का सच

बनारस से सटे सोनभद्र जनपद में 16 जुलाई 2019 को दबंग भूमाफिया ने अवैध तरीके से आदिवासियों की जमीन हथियाने के लिए खूनी खेल खेला। हथियारबंद 300 लोगों ने निर्दोष वनवासियों पर करीब आधे घंटे तक अंधाधुंध फायरिंग की। इस घटना में 10 वनवासी मौके पर मारे गए और 25 से ज्यादा अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। बड़ी बात यह है की घटना के समय वनवासियों ने सोनभद्र के एसपी व कलेक्टर से लेकर सभी आला अफसरों को फोन किए। सभी के मोबाइल बंद मिले। 100 डायल पुलिस आई, पर तमाशबीन बनी रही। इस पुलिस के सामने ही चार वनवासियों को गोलियों से छलनी किया गया। घोरावल…

सोनभद्र में आदिवासियों की हत्या मैला आँचल की नजर से:

सोनभद्र में आदिवासियों की हत्या पिछड़ी जाति से आने वाले गुर्जरों ने की है। मैला आँचल ब्राह्मणवाद के इस खेल को बखूबी चिह्नित करता है कि कैसे अपने वर्गीय हित में पिछड़ी और दलित जातियों को वर्गशत्रु के विरुद्ध इस्तेमाल किया जाता है। 2005 के नया ज्ञानोदय के इस लेख में इसका जिक्र मैंने किया था। आपस में लड़ने और प्रतिस्पर्धा करने वाली गांव की सभी जातियां संथालो के खिलाफ एकजूट हो जाती हैं। कई संथाल मारे जाते हैं। मैला आँचल में जाति, वर्ग और जेंडर संबंध पर मेरे लेख का एक अंश: वर्गीय संकट के समय कायस्थ, राजपूत मिलकर पंचायत का षड़यंत्र…