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Bihar & Jharkhand

सभी मेनस्ट्रीम मीडिया के संपादकों को मनीषा बांगर का खुला पत्र, बहुजनो के मुद्दों पर चुप्पी साध कर लोकतंत्र को बचाया नहीं जा सकता।

मुमकिन है कि मेरे इसे खुले पत्र के पहले भी आप उस घटना से वाकिफ होंगे जो हाल ही में बिहार के सुदूर मोतिहारी जिले के महात्मा गांधी सेंट्रल यूनिवर्सिटी में घटित हुई। एक बार फिर मैं आपका ध्यान उसी घटना की तरफ आकर्षित करना चाहती हूं। सत्ता के मद में अंधे हो चुके लोगों ने एक भीड़ की शक्ल में संस्थान के असिस्टेंट प्रोफेसर संजय यादव के उपर हमला बोला। वह अपने कमरे में थे और मॉब खींचते हुए सड़क पर ले गयी। वे उनके उपर लात-घूंसे बरसा रहे थे। उनके शरीर के कपड़े फाड़ डाले और यहां तक कि उनके गुप्तांग पर भी प्रहार किया। वे लोग उनकी जान लेने…

जिन लोगों को लगता है कि एक थप्पड़ मारने पर SC/ST Act लग जाता है!

By- Umashankar  Yadav अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के सदस्यों को जबरन अखाद्य या घृणाजनक (मल मूत्र इत्यादि) पदार्थ खिलाना या पिलाना। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य को शारीरिक चोट पहुंचाना या उनके घर के आस-पास या परिवार में उन्हें अपमानित करने या क्षुब्ध करने की नीयत से कूड़ा-करकट, मल या मृत पशु का शव फेंक देना। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य के शरीर से बलपूर्वक कपड़ा उतारना या उसे नंगा करके या उसके चेहरें पर पेंट पोत कर सार्वजनिक रूप में घुमाना या इसी प्रकार का कोई ऐसा कार्य…

प्रोफेसर पर हमला, जातिवादी संकीर्ण सोच का खतरनाक परिचय

By-Rajeev Suman महात्मागांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा, में आज लगातार जिस तरह से एक प्रोफ़ेसर को एक ख़ास विचार वाले लोगों और छात्र समूह द्वारा ट्रोल किया जा रहा है वह बेहद शर्मनाक और निंदनीय है। यह चिंतनीय भी है कि वर्तमान राजनीति और सत्तारूढ़ पार्टी के वैचारिक रूप से कुंद और कुपोषित कार्यकर्ता और छात्र इकाई से जुड़े विद्यार्थी जिस तरह से विश्वविद्यालयों के बौद्धिक विमर्श के स्पेस को संक्रमित और संकुचित कर रहे हैं उसे किसी भी लिहाज से लोकतांत्रिक संस्थानों और अभिव्यक्ति के स्थलों के लिए स्वास्थ्यकर नहीं कहा जा…

जानें, अटलबिहारी वाजपेयी का असली कैरेक्टर

मृत्यु अटल है। अटलबिहारी वाजपेयी का निधन 93 वर्ष की उम्र में हुआ। करीब 12 वर्षों तक वे बीमार रहे। इस लिहाज से उनका निधन शोक के योग्य नहीं बल्कि यह मौका है उनके बारे में जानने-समझने का। अटलबिहारी वाजपेयी का कैरेक्टर अनेक मामलों में खास है। लेकिन बहुजनों के लिए नहीं। बहुजन दृष्टिकोण से बात करें तो उनके जीवन में कुछ भी ऐसा नहीं रहा जिसे याद कर बहुजन समाज शोक व्यक्त करे। बहुजन चिंतक और लेखक प्रेमकुमार मणि की यह टिप्पणी सटीक है। अपने पाठकों के बीच हम इसे साभार प्रकाशित कर रहे हैं - मनीषा बांगर, संपादक ब्राह्मण अटलबिहारी वाजपेयी…

टिस्स मुंबई : आयोग ने कहा, ST वर्ग के प्रति उदार बने टाटा, छोड़े कंजूसी

By: Santosh Yadav राष्ट्रीय अनुसूचित जऩजाति आयोग ने मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस को साफ-साफ शब्दों में निर्देश दिया है की वह आदिवासी छात्रों के प्रति उदारता बरते और उनसे छात्रावास शुल्क के अलावा आहार शुल्क ना वसूले। इसके लिए आयोग ने संस्थान को अपने अन्य संसाधनों से राशि का प्रबंध करने को कहा है। बताते चलें की संस्थान की ओर से इसी वर्ष अनुसूचित जनजाति के छात्रों को भी हॉस्टल की फीस तथा डाइनिंग फीस देने को कहा गया था। पूर्व में अनुसूचित जनजाति के छात्रों को इस से मुक्त रखा गया था। संस्थान के नए फरमान से छात्र…

उपेक्षित क्रांति के उपेक्षित नायक: तिलका माँझी

By-Kirti Kumar भारत के इतिहास में कई क्रांति हुई है, लेकिन जातिवादी मानसिकता से ग्रस्त ब्राह्मणवादी इतिहासकारो द्वारा षड्यंत्रपूर्वक इतिहास को दबाया है, या तो तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया है. इतिहासकार मुस्लिम और अंग्रेज के खिलाफ हुए युद्धों को ही स्वाधीनता की लड़ाई कहलाते है. जबकि, विदेशी आर्यों के आक्रमण के बाद जातिवाद के तहत अपने मुलभुत मानवीय हक़-अधिकार खो बैठे भारत के मूलनिवासी विदेशी आर्य ब्राह्मणों की जातिवादी व्यवस्था के खिलाफ 3500 साल से लड़ रहे है. भारत में बौद्ध और जैन विचारधारा का उद्भव भी जातिवाद के खिलाफ क्रांति ही…

राजपूतों का अहंकार छोड़ दशरथ मांझी से जुड़ा सच स्वीकार करिए हरिवंश जी!

By-Santosh Yadav विमर्श। राज्यसभा के नवनिर्वाचित उपसभापति अच्छे पत्रकार रहे हैं। एक प्रमाण तो इनके द्वारा अर्जित की गई करोड़ों की संपत्ति है। इसके अलावा भी प्रभात खबर के संपादक के रूप में मीडिया में जिस तरह का जातिवाद हरिबंश जी ने फैलाया है, उसका उदाहरण अन्यत्र देखने को नहीं मिलता है। हालांकि अन्य अखबारों में भी जातिवाद है लेकिन हरिबंश जी का जातिवाद सबसे अलहदा है। अलहदा यानी सबसे अलग इसलिए कि हरिबंश जी चाहे जिस ऊंचाई को प्राप्त कर लें, राजपूतानी कुंठा का परित्याग नहीं कर सकते हैं। हाल ही में जब उन्हें उपसभापति चुना गया तब…

कन्हैया कुमार झा का ब्राह्मणवादी, जातिवादी और झूठ से लैस चरित्र आया सामने, AISF जेएनयू युनिट के प्रभारी के पत्र में

By: Jayant Jigyasu सुधाकर रेड्डी जी, महासचिव, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया। प्रिय कॉमरेड, लाल सलाम! हमारा जनसंगठन एआइएसएफ और हमारी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी कुछ बुनियादी सिद्धांतों व लोकोन्मुखी नीतियों को लेकर वुजूद में आए। जन-अपेक्षाओं, जनाक्रोश व जनदबाव को समझना हमारा फर्ज़ रहा है। वैश्विक हलचल, जहाँ पूंजीवादी ताक़तें इस कदर हावी हैं कि जनपोषित विश्वविद्यालयों को ढाहने का इशारा है, 13 प्वाइंट रोस्टर के माध्यम से आरक्षण को चकनाचूर किया जा रहा है व मुल्क के अंदर लगातार लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमले किये जा रहे हैं;…

मुजफ्फरपुर कांड: भूमिहार बेदाग, कुशवाहों को कलंक!

By- Santosh Yadav मामला मुजफ्फरपुर सामुहिक बलात्कार कांड से जुड़ा है। इस मामले में ब्रजेश ठाकुर(भूमिहार) किंगपिन हैं। लेकिन इसका सारा दोष कुशवाहा जाति से संबंध रखने वाली पूर्व मंत्री मंजू वर्मा के माथे मढ़ दिया गया। यह विश्वास करने योग्य नहीं है कि बजेश ठाकुर केवल पूर्व मंत्री के पति को ही लड़कियां सप्लाई करता होगा। हालांकि अब इस मामले की जांच पटना हाईकोर्ट की निगहबानी में सीबीआई कर रही है, लिहाजा सनसनीखेज खुलासों के लिए बिहार की जनता को तैयार रहना चाहिए। बहरहाल बिहार सरकार में शामिल भूमिहार जाति के साझेदारों ने पूरे मामले…

समाजिक क्रांति के प्रहरी, आरक्षण के जनक, श्रमण संस्कृति के महाराजा शाहूजी महाराज

By -डॉ जयंत चंद्रपाल बाबासाहब डॉ अम्बेडकर सही कहते थे की जो कोम अपना इतिहास नहीं जानती वह अपने भविष्य का निर्माण नहीं कर सकती। हम ब्राह्मण संस्कृति के राजा राम के बारे में और रामराज्य के बारे में तो बहुत जानते है मगर श्रमण संस्कृति के महाराजा शाहूजी और उनके लोकाभिमुख शासन के बारे में बहुत ही कम। Let us recognize our heroes किसी भी महापुरुष की पहचान उनके द्वारा किये गए कार्यो से होती है। 26 जून 1874 के दिन शुद्र वर्ण की कुर्मी (पाटीदार) जाति में जन्मे बहुजन एवं श्रमण संस्कृति के छत्रपति शाहू जी महाराज ने जाति व्यवस्था और इस…