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Bihar & Jharkhand

जस्टिस फॉर डॉ पायल: रोहित वेमुला के बाद एक और संस्थानिक हत्या!

By: Susheel Kumar पायल!! आपको ऐसा नहीं करना चाहिए था, हां मैं समझ सकता हूं कि जब किसी इंसान के सामने हालात बद से बद्तर कर दिए जाएं तो फिर जीना मुश्किल हो जाता है पर आप तो ऐसे समाज से आती हैं जिसका इतिहास ही बेहद कठिन और संघर्ष भरा रहा है, तो फिर इस जातिवादी समाज में आपको भी लड़ना चाहिए था, इतनी जल्दी हार नहीं माननी चाहिए थी, आपकी लड़ाई ज्यादा बड़ी थी क्योंकि आप एक तरफ जातिवादी मानसिकता से लड़ रहीं थी तो वहीं दूसरी ओर पुरषवादी सोच को चुनौती दे रहीं थी!! जातिवाद की गंदगी भरे दिमाग में सड़ी हुई सोच की वजह से किसी को जब मौत गले…

राबड़ी देवी जी को “ट्विटर” कहना नही आएगा,ऐसा “आज तक” के निशांत “चतुर्वेदी” जी बोलते हैं…

By-चन्द्रभूषण सिंह यादव जाति का दम्भ कितनी दूर तक हिलोरे मारता है इसकी एक बानगी भर है श्रीमान निशांत "चतुर्वेदी" जी का ट्वीट जिसमे वे आदरणीय राबड़ी देवी जी(पूर्व मुख्यमंत्री-बिहार) के बारे में लिखते हैं कि "अच्छा जी राबड़ी देवी जी भी ट्वीट करती हैं😊कोई इनसे बोले कि ये बस तीन बार ट्विटर बोल कर बता दें😊।" ये निशांत चतुर्वेदी जी "चतुर्वेदी" हैं।चतुर्वेदी मतलब चतुर हैं चारो वेदों के जानने वाले हैं।भई चतुर्वेदी जी!होंगे आप चारो वेदों के ज्ञाता या नही होंगे ज्ञाता,इससे हमें क्या लेकिन राबड़ी देवी जी के पासंग में भी आप नही होंगे,यह…

तनवीर हसन-दो दशक से सामाजिक न्याय की मजबूत आवाज

By -Khalid Anis Ansari तनवीर हसन दो दशक से ज्यादा राजद के साथ रहे हैं लेकिन कभी मंत्रिपद नहीं मिला. आलोचनात्मक आवाज़ हैं, आवामी नेता हैं, चमचागिरी नहीं करते हैं सुप्रीमो की. एक बार आधा गाँधी मैदान भर दिया था पटना में तो सियासी हलचल मच गयी थी. बकौल #नूर हसन आज़ाद भाई, जो कि पसमांदा आन्दोलन के सीनियर और तजुर्बेकार एक्टिविस्ट हैं, तनवीर साहब ने विधान सभा में दलित मुसलमानों के आरक्षण के लिए भी कई बार आवाज़ उठाई है. एक बार जब बक्खो मुस्लिम समाज के विस्थापन का मुद्दा उठा था तब भी तनवीर साहब ने उनके अधिकारों के लिए संघर्ष किया था.…

लालू यादव को ललुआ कहने की मानसिकता क्या है?

Published By- Aqil Raza By- Prashant Tandon लालू यादव की राजनीति क्या है. तमाम राजनीति विज्ञान के जानकारों से साफ और एक लाइन में मुझे मेट्रो स्टेशन और अपने घर के बीच बिहार के रहने वाले एक रिक्शा चालक ने कुछ साल पहले समझा दी थी. उसने कहा लालू जी ने हमे क्या दिया है आप लोग कभी नहीं समझ पाएंगे. सामने से कोई बड़ा आदमी (सवर्ण) आ जाये तो हम साइकिल से उतर कर पैर छूते थे. लालू जी के आने के बाद अब हम किसी के पैर नहीं छूते हैं हाथ मिलाते हैं. इस वाकये को दोबारा लिख रहा हूँ क्योंकि लालू की राजनीति को इससे बेहतर कोई और नहीं बता पाया.…

देशभक्ति के नाम पर कहीं मोदी इमरजेंसी तो नहीं थोपना चाहते?

Published by- Aqil Raza By- Dr. Manisha Bangar भारत द्वारा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में घुसकर आतंकवादियों के कैंपों को तबाह किए जाने का समाचार आज दूसरे दिन भी सुर्खियों में है। भारतीय मीडिया ने इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया है। भाजपा के नेतागण भारतीय वायु सेना के इस हमले को नरेंद्र मोदी की बहादुरी साबित कर रहे हैं। उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने तो यहां तक कह दिया है कि अब पाकिस्तान भविष्य में पुलवामा जैसी घटना को अंजाम देने से पहले सौ बार सोचेगा। सबकुछ ऐसा बताया जा रहा है कि यह हमला वायु सेना ने नहीं,…

सवाल दस लाख आदिवासी परिवारों का नहीं पचास लाख आदिवासियों का है

Published by- Aqil Raza By - डॉ. मनीषा बांगर ~ सुप्रीम कोर्ट ने 13 फरवरी 2019 को अहम फैसला सुनाया है। इस फैसले के मुताबिक केंद्र व 21 राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करना है कि दस लाख से अधिक आदिवासी परिवार उस जमीन को छोड़ दें, जहां वे पीढ़ियों से रहते आए हैं। कोर्ट ने यह बात अपने मन से नहीं कही है। उसके सामने 21 राज्यों की सरकारों ने शपथ पत्र दाखिल कर कहा है कि दस लाख से अधिक आदिवासी परिवार यह सबूत नहीं पेश कर सका है कि वह जमीन का मालिक है। पहले तो यह समझें कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का असर क्या होगा यदि इसे लागू किया गया।…

ज़मीनों से बेदखल किए जाएंगे लाखों आदिवासी!

Published By- Aqil Raza By- सुदीप ठाकुर ~ युद्धोन्माद और राष्ट्रवाद के उफनते दौर में यह खबर शायद सनसनी पैदा न करे। सुप्रीम कोर्ट के हाल के एक आदेश से 16 राज्यों में दस लाख से भी अधिक आदिवासियों और अन्य वनवासियों को जंगल से बेदखल किया जा सकता है, क्योंकि केंद्र सरकार वनाधिकार अधिनियम 2006 के तहत उनके अधिकारों की रक्षा करने में नाकाम रही है। बिजनेस स्टैंडर्ड (https://goo.gl/qY1Eqm) https://www.youtube.com/watch?v=jqdaxsjL8vo&t=52s केंद्र सरकार ने आदिवासियों को तकरीबन 80 साल बाद मिले इस महत्वपूर्ण अधिकार से संबंधित…

“Relentless Struggle of Ramabai Ambedkar.”

Published By:Gaurav By:Obed Manwatkar~ Ramabai Bhimrao Ambedkar (7 February 1898 - 27 May 1935; also known as Ramai or Mother Rama) was the first wife of Babasaheb Dr. B.R. Ambedkar ( The Architect Of the Constitution Of India) . Her unwavering support and sacrifices have been credited by Dr. Ambedkar to have been instrumental in helping him achieve his pursuit of higher education and his true potential.She is also the subject of a number of biographical movies and books. A number of landmarks across India have been given…

जन्म दिन विशेष: जानिए कौन थे भारत के लेनिन, “बाबू जगदेव प्रसाद”

Published By- Aqil Raza By- Sunil Janardhan Yadav ~ रूस के महान मजदूरों के नेता लेनिन जो पूरे विश्व में प्रसिद्द है, उनके बारे में तो आपने बहुत सुना होगा | लेकिन क्या आप भारत के लेनिन बाबू जगदेव प्रसाद के बारे में जानते है जिन्होंने भारत के शोषित वर्ग के खातिर अपनी जान न्योछावर कर दी | जिनके विचारो का आज भी लोहा माना जाता है| भारत के लेनिन बाबू जगदेव प्रसाद कहते थे कि "पहली पीड़ी के मारे जाएंगे,दूसरी पीड़ी के जेल जायेंगे,तीसरी पीड़ी के लोग राज करेंगे| " अपने ऐसे विचारो को लेकर बिहार में जन्मे बाबू जगदीश प्रसाद आज पूरे देश…

जन्म दिन विशेष: बिहार लेनिन अमर शहीद बाबू जगदेव कुशवाहा के जन्म दिवस पर बामसेफ संगठन की तरफ से मूलनिवासी बहुजन समाज को बहुत-बहुत बधाई

By- Rama Shankar Ram, CEC member Bamcef लोहिया जी कहा करते थे कि समाजवाद का उद्देश्य समाज मे समता लाना है। इस पर महामना राम स्वरूप वर्मा ने कहा कि समाज मे समता स्थापित करने के लिए जीवन के चार मुख्य क्षेत्रो मे समता लानी पड़ेगी। सांस्कृतिक समता सामाजिक समता III. राजनीतिक समता आर्थिक समता महामना राम स्वरूप वर्मा ने कहा कि लोहिया जी यदि आप राजनीतिक समता चाहते है तो राजनीतिक समता से पूर्व सांस्कृतिक समता एवं सामाजिक समता स्थापित होनी चाहिए। सांस्कृतिक समता एवं सामाजिक समता के बाद ही राजनीतिक समता एवं उसके बाद आर्थिक समता स्थापित…