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Bihar & Jharkhand

ये रोस्टर आखिर है क्या, जिसे लेकर मचा हुआ है देश में हंगामा

By-अरविन्द कुमार ~ "आरक्षण वहां पाहुंचा देंगे जहां निरर्थक होगा- स्वामी" इस बीजेपी सरकार ने जो कहा 13 पॉईंट रोस्टर के जरीए करके दिखाया। ये रोस्टर आखिर है क्या, जिसे लेकर मचा हुआ है देश में हंगामा रोस्टर एक विधि है, जिसके जरिये नौकरियों में आरक्षण लागू किया जाता है. लेकिन अगर इसे लागू न किया जाए या लागू करने में बेईमानी हो तो आरक्षण के संवैधानिक प्रावधानों की धज्जियां उड़ जाती हैं. संविधान निर्माताओं ने अनुच्छेद 16(4) के तहत पिछड़े वर्गों (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्ग) का पर्य़ाप्त प्रतिनिधित्व…

ठग्स ऑफ भारतवर्ष पर कोई क्यों नहीं बोलता?

“रामोसी” भाषा बोलने वाले "ठग्स ऑफ़ हिन्दुस्तान" पर बनी फिल्म आमिर खान ला रहे हैं. लेकिन क्या आपको “संस्कृत” भाषा बोलने वाले "ठग्स ऑफ़ भारतवर्ष" के बारे में कुछ पता है? नहीं ना? उन ठगों पर हिन्दुस्तान में न कोई फिल्म बन सकती है न कोई ढंग का उपन्यास आ सकता है। लेकिन उन ठगों के बारे में क्रान्तिसूर्य ज्योतिबा फूले ने विस्तार से लिखा है. उनकी किताब गुलामगिरी ठीक से पढ़िए। रामोसी भाषा बोलने वाले ठग मुसाफिरों में घुल मिल जाते थे और उनके माल असबाब और ताकत का पूरा हिसाब लगाकर दूसरी टीम को सतर्क कर देते थे। दूसरी टीम इन्हें व्यापारियों…

2019 में भाजपा का हारना तय है!

2019 में भाजपा का हारना तय है. जनता भाजपा के फरेब से परिचित हो चुकी है. भाजपा को भी पता है कि लोग अब पहले की तरह बेवकूफ बनने वाले नहीं हैं. इसीलिए वह विकास का मुद्दा छोड़कर अपने मूल हथियार यानी साम्प्रदायिक राजनीति का प्रयोग करने के लिए माहौल बनाने लगी है. इसके लिए लगभग सभी न्यूज चैनल , ट्विटर , व्हाट्सएप और फेसबुक का प्रयोग शुरू हो चुका है. फेक न्यूज और प्लांटेड न्यूज से जनता को साम्प्रदायिक होने के लिए उकसाया जा रहा है. लेकिन इसका भी कोई खास असर होता नहीं दिख रहा है. प्रो-बीजेपी तमाम न्यूज चैनल्स और शोसल मीडिया ग्रुप्स/पेज…

जानिए बिरसा मुंडा के जन्मदिन पर उनके जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें

आज धरती के आबा जननायक बिरसा मुंडा का जन्मदिन है। सुगना मुंडा और करमी हातू के पुत्र, बिरसा मुंडा का जन्म १५ नवम्बर १८७५ को झारखंड प्रदेश में राँची के उलीहातू गाँव में हुआ था। और इनकी तस्वीर में इनके परंपरागत पहनावे से पता भी नहीं चलता की वे चाईबासा इंग्लिश मिडिल स्कूल में पढे होंगे। बिरसा मुंडा का मन हमेशा अपने समाज की ब्रिटिश शासकों एवं शेठजी भटजी द्वारा की गयी बुरी दशा पर सोचता रहता था। वे ऐसे महानायक हैं, जिन्होंने शक्तिशाली दिकू अर्थात विदेशी अर्थात ब्रिटिश साम्राज्य और शेठजी भटजी जो जमींदार जागीरदार थे उनके अमानवीय शोषण…

#MeToo में बहुजन औरतें क्यों नहीं ????

22 सितंबर 1992 को राजस्थान के जयपुर से लगभग 50 किलोमीटर दूर भटेरी गांव में सवर्णों ने एक बहुजन महिला भँवरी देवी प्रजापति के साथ सामूहिक बलात्कार किया सिर्फ इसलिए क्योंकि 'साथिन' पद पर पदस्थ सरकारी कर्मचारी की ड्यूटी निभाते हुए भँवरी ने एक नौ महीने की बच्ची की शादी रोकी थी। सवर्ण वर्ग उनसे बेहद नाराज़ था कि एक कुम्हारिन की हिम्मत कैसी हुई हमारी परंपरा और संस्कृति में टांग अड़ाने की।इसका बदला भँवरी देवी के पति को मारपीट करके बांधकर उसके ही सामने ही खेत में 5 सवर्णों ने बारी-बारी से बलात्कार करके लिया। भँवरी ने जब अपनी आप बीती…

आख़िर क्या है पसमांदा मूवमेंट…जानिए!

By: Deepaly Tayday #पसमांदा, जो कि एक फारसी शब्द है, का अर्थ होता है ‘वह जो पीछे छूट गया’। बिहार में 1998 में अली अनवर के नेतृत्व में ‘ऑल इण्डिया पसमांदा मुस्लिम महाज़’ के गठन और उनकी लिखी किताब ‘मसावात की जंग (2001)’ के चलते यह शब्द काफी लोकप्रिय हुआ। इसके पहले डॉ. एजाज़ अली के नेतृत्व में ‘ऑल इंडिया बैकवर्ड मुस्लिम मोर्चा’ दलित मुसलमान शब्द चर्चा में ला चुका था. अली अनवर की किताब ने बिहार के पसमांदा मुसलमानों की दयनीय स्थिति के बारे में ज़ोरदार बहस को पैदा किया और पसमांदा राजनीति की ज़मीन तैयार की। बेशक मुस्लिम समाज में…

स्कूल की दीवारों पर लिखी अश्लील बातों का विरोध करने पर छात्राओं पर गुंडो का हमला!

बारह-चौदह साल की लड़कियां फब्तियां कसने, स्कूल हॉस्टल की दीवारों पर गालियां और दूसरी वीभत्स अश्लील बातें लिखने का विरोध करती हैं और इसके बदले वह सब करने वाले लड़के और उनके मां-बाप इकट्ठा होकर स्कूल में घुस कर लड़कियों को बर्बरता से मारते-पीटते हैं! पैंतीस लड़कियों को अस्पताल पहुंचने की हालत में ला देने तक..! यह किसी सामंती अपराधी मानस वाले के लिए कोई साधारण घटना हो सकती है! लेकिन क्या इस घटना की त्रासदी यहीं तक सीमित है! भदेसपन के नाम पर गालियों यानी मौखिक बलात्कार का समर्थन या बचाव कौन करता है? लड़कियों पर फब्तियां कसने को…

‘Voice of Peoples’ पुरस्कार से डॉ मनीषा बांगर को किया गया सम्मानित

14 सिंतबर को दिल्ली में एवान-ए-गालिब ऑडिटोरियम में आयोजित एक कार्यक्रम बहुजन नेत्री डॉ मनीषा बांगर को सम्मानित किया गया। यह कार्यक्रम पल-पल न्यूज वेब पोर्टल की तरफ से आयोजित किया गया था, कार्यक्रम में तमाम बुद्धिजीवी, पत्रकार, लेखक और समाजिक कार्यकर्ताओं ने शिरकत की थी। कार्यक्रम में बामसेफ की पूर्व उपाध्यक्ष, समाजिक कार्यकर्ता और बहुजन नेत्री, पेशे से एमबीबीएस डॉक्टर मनीषा बांगर को ‘Voice of Peoples’ नाम के आवर्ड से सम्मानित किया गया। यह आवर्ड मनीषा बांगर को समाज में उनके काम की सराहना के लिए दिया गया। जिस बेबाक अंदाज में…

बहुजन हो! ज़िंदा रहते सम्मानजनक ज़िंदगी नहीं और मरने के बाद दो गज जमीन के भी लाले हैं…

बिहार के मधेपुरा जिले के केवटगामा गाँव में एक बहुजन भूमिहीन मजदूर हरिनारायण की पत्नी सहोगिया देवी की डायरिया से मौत हो गई। पहले जीते जी अच्छा इलाज न मिल सका और बाद में दो गज जमीन भी नसीब नहीं हुई। हरिनारायण जब पत्नी की अंतिम क्रिया करने की तैयारी में लगा तो गाँव के तथाकथित ऊँची जाति के भूमिहार और राजपूत लोगों ने हरिनारायण को उसकी पत्नी का अंतिम संस्कार ऊंची जात वाले श्मशान घाट में करने देने से मना कर दिया। यही नहीं उस पर दबाव बनाया गया कि गांव की बाहरी ज़मीन पर भी वह अपनी पत्नी की अंतिम क्रिया नहीं कर सकता। हारकर उसे अपनी…

ओबीसी आयोग : संवैधानिक अधिकार के नाम पर मिला झुनझुना

By- संतोष यादव संसद में यह कानून पारित हो चुका है कि राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को अनुसूचित जाति अायोग और अनुसूचित जनजाति आयोग के जैसे ही संवैधानिक अधिकार मिले। यानि यह एक मुकम्मल आयोग बने जिसके पास दांत और नाखून दोनों हों। केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत ने भी यही कहा जब वे इस कानून को संसद में पेश कर रहे थे। लेकिन अब कानून का जो स्वरूप सामने आया है वह महज ओबीसी को ठगने के लिए झुनझुना से अधिक कुछ भी नहीं है। इस बारे में सामाजिक न्याय को लेकर पिछले 7 दशकों से सक्रिय भारत सरकार के पूर्व नौकरशाह पीएस कृष्णन ने सवाल उठाया है।…