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Delhi-NCR

आक्रोश मार्च में आंबेडकरवादी नारों के साथ बहुजनों, वामपंथियों की एकता का अद्भुत नज़ारा

By-  Siddharth Ramu   ~                बिरसा, फुले, आंबेडकर,  ब्राह्मणवाद की छाती पर          बिरसा, फुले, आंबेडकर, मनुवाद की छाती पर          बिरसा फुले आंबेडकर, आरएसएस की छाती पर                   जनेऊ रोस्टर नहीं, चलेगा                   ब्राह्मणवादी रोस्टर नहीं चलेगा                    मनुवादी रोस्टर नहीं चलेगा                जो अंबानी का यार है, देश का गद्दार है इन सभी नारों के बीच जय भीम का नारा बार-बार गूंज रहा था। SC/ST/OBC और वामपंथियों की एकता देखने  लायक थी। कल यानी 31 जनवरी को दिल्ली में मंडी हाऊस…

ये रोस्टर आखिर है क्या, जिसे लेकर मचा हुआ है देश में हंगामा

By-अरविन्द कुमार ~ "आरक्षण वहां पाहुंचा देंगे जहां निरर्थक होगा- स्वामी" इस बीजेपी सरकार ने जो कहा 13 पॉईंट रोस्टर के जरीए करके दिखाया। ये रोस्टर आखिर है क्या, जिसे लेकर मचा हुआ है देश में हंगामा रोस्टर एक विधि है, जिसके जरिये नौकरियों में आरक्षण लागू किया जाता है. लेकिन अगर इसे लागू न किया जाए या लागू करने में बेईमानी हो तो आरक्षण के संवैधानिक प्रावधानों की धज्जियां उड़ जाती हैं. संविधान निर्माताओं ने अनुच्छेद 16(4) के तहत पिछड़े वर्गों (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्ग) का पर्य़ाप्त प्रतिनिधित्व…

“13 प्वाइंट रोस्टर का क्रम-निर्धारण ही मनुवादी है”

By-Rajendra Prasad Singh विश्वविद्यालयों में स्वीकृत पदों के क्रम - निर्धारण को " रोस्टर " कहा जाता है। दरअसल रोस्टर का क्रम - निर्धारण ही मनुवादी है - पहले सामान्य, फिर ओबीसी, तब एससी और आखिर में एसटी। अर्थात हम पहले मजबूत तबकों को न्याय देकर फिर समाज के कमजोर तबकों को हिस्सेदारी दे रहे हैं। यह रोस्टर संविधानवादी तब होगा, जब हम सामाजिक न्याय/ राष्ट्रनिर्माण का ख्याल रखेंगे - पहले एसटी, फिर एससी, तब ओबीसी और आखिर में सामान्य। अर्थात हम पहले कमजोर तबकों को न्याय देकर फिर समाज के मजबूत तबकों को हिस्सेदारी देंगे। भारत की…

10% आरक्षण के खिलाफ सप्रीम कोर्ट में बहुजन एक्टीविस्ट ने दायर की ‘जनहित याचिका’

By-Aqil Raza लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मोदी सरकार ने सामान्य वर्ग को आर्थिक आधार पर 10 फीसदी आरक्षण देने का फैसला लिया है जो कि अब दोनों सदनों से पास हो चुका है और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मुहर भी संविधान के इस 124वें अमेंडमेंट पर लग चुकी है। सरकार के इस फैसले का बहुजन समाज ने विरोध किया है, कई जगहों पर सरकार के इस फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं और इस फैसले को संविधान विरोधी फैसला बताया है। वहीं 14 जनवरी को समाजिक कार्यकर्ता विपिन कुमार भारतीय ने आर्थिक आधार पर 10% आरक्षण को निरस्त करने के लिये सुप्रीम कोर्ट में…

मोदी सरकार द्वारा सवर्णों को आरक्षण दिए जाने का निर्णय सिर्फ एक लॉलीपॉप!

एक देश मे एक मानसिक चिकित्सालय में 100 मानसिक रोगी रहते थे, एक दिन उस देश के प्रधानमंत्री का उस चिकित्सालय में दौरा हुआ। प्रधानमंत्री ने दो घण्टे तक ओजस्वी भाषण दिया, मनो-रोगियों ने अपने जाने पहचाने अंदाज में लंबी लंबी छोड़ने वाले इस वक्ता को बड़े ध्यान से सुना। प्रधानमंत्री श्रोताओं की इस एकाग्रता और अनुशासन से अत्यधिक प्रसन्न हुए। जाते जाते उन्होंने बड़ा उपकार करते हुए मानसिक चिकित्सालय में स्वीमिंग पूल बनाने की घोषणा कर दी। सभी मनोरोगियों ने ताली बजाई, पटाखे जलाए, नारे लगाए। देश विदेश में इस उदार निर्णय की बड़ी तारीफ हुई।…

माता सावित्री बाई फुले जिनके संघर्ष ने खोले महिलाओं के लिए शिक्षा के द्वार

केवल एक ही शत्रु है अपना, मिलकर निकाल देंगे उसे बाहर, उसके सिवा कोई शत्रु नहीं, बताती हूँ उस शत्रु का नाम, सुनो ठीक से उस शत्रु का नाम, वो तो है अविद्यारूपी 'अज्ञान' देश की प्रथम महिला शिक्षिका माता सावित्री बाई फुले की उपरोक्त लाइन यह बताने के लिए काफी हैं कि महिला शिक्षा के क्षेत्र में उनका कैसा योगदान रहा! भारत में सदियों से पुरुषों द्वारा महिलाओं को गुलाम बनाकर उनका शोषण होता रहा है। हमारे धार्मिक ग्रथों में भी महिलाओं की स्थिति को अत्यंत ही दयनीय रुप दर्शाया गया है। तुलसीदासजी ने तो यहां तक लिखा है कि ढोल, गंवार, शुद्र,…

तो ईवीएम पवित्र सिद्ध हो गई???

चुनाव परिणाम ऐसे ही आने थे क्योंकि यही कांग्रेस और बीजेपी एक ही माला आरएसएस के मोती हैं। आज आरएसएस के द्वारा देश में जितना उन्माद-हिंसा और तबाही फैली है वह सब कांग्रेस के बूते ही आई है। ईवीएम को कांग्रेस ही लेकर आई। और कांग्रेस ने कभी भी ईवीएम को लेकर विरोध नहीं किया। क्योंकि बीजेपी और कांग्रेस दोनों को ही ईवीएम से फायदा है। कांग्रेस के जीतने से ईवीएम की पवित्रता को सिद्ध माना जायेगा। फिर 2019 के लोकसभा चुनावों में यही ईवीएम के भरोसे ब्राह्मणवादियों की सरकार बनेगी। बीच-बीच में छोटी-छोटी जीत-हार करानी पड़ती है क्योंकि इससे…

उर्जित पटेल!!! क्या भारतीय अर्थव्यवस्था के हालात इतने ज्यादा बिगड़ गए हैं???

नई दिल्ली। भारत के केंद्रीय बैंक आरबीआई के गवर्नर इस्तीफ़ा दे देता है, वजह सरकार चाहे जो भी बता रही हो पर ये इस्तीफा भयंकर तबाही का इशारा है। इस इशारे के पीछे कई सारे पुश फैक्टर हैं। नोटबन्दी और नए नोटों में किए गए घोटालों को पचा लेने वाले उर्जित पटेल ऐसे चले क्यों गए? क्या सबकुछ ठीक चल रहा है? उर्जित पटेल ने अर्थव्यवस्था की बर्बादी की हद तक मोदी का साथ दिया है। पर अब हालात इतने खराब हो गए हैं कि उर्जित पटेल भी खुद को बचाने लायक नहीं बचे हैं। आज केवल लंबे समय से मोदी सरकार और आरबीआई चीफ के बीच की तकरार का पटापेक्ष हुआ है।…

आरएसएस की शाखा में खड़े प्रोफेसर विवेक कुमार के फोटो का क्या है असली सच पढ़िये…

By~ अशोक दास, सोशल एक्टीविस्ट   बीते 48 घंटों से सोशल मीडिया पर एक बार फिर जवाहर लाल नेहरू युनिवर्सिटी के प्रोफेसर विवेक कुमार की एक फोटो घूम रही है। इस फोटो में विवेक कुमार आरएसएस के मंच से अपनी बात रख रहे हैं। इसके आधार पर दुष्प्रचार किया जा रहा है। कि प्रोफेसर विवेक कुमार आरएसएस के एजेंट हैं। यह तस्वीर पहली बार सामने नहीं आई है। बीते साल पहले भी कुछ लोगों ने उस तस्वीर को फेसबुक पर शेयर कर प्रोफेसर विवेक कुमार के बारे में दुष्प्रचार करने की कोशिश की थी।अमूमन मैं किसी मसले पर जल्दी कोई कमेंट करने से बचता हूं। लेकिन चूंकि…

इंस्पेक्टर सुबोध कुमार के क़ातिलों को “भीड़” का नाम मत दीजिए, प्लीज़!

ख़ेराजे अक़ीदत शहीद सुबोध कुमार जी को इंस्पेक्टर सुबोध कुमार के क़ातिलों को "भीड़" का नाम मत दीजिए प्लीज़....वर्ना कई और सुबोध कुमार, कई और ज़ियाउल हक़ जैसे जम्हूरियत के रक्षक मौत के घाट उतारे जाते रहेंगे, और संविधान के क़ातिल भीड़ की "आड़" में छुपकर बचते रहेंगे। याद रखिए, दादरी में शहीद किए गए अख़लाक़ साहब के फ़्रिज में रखे गोश्त को जांच के लिए लैब तक पहुंचाने वाले उस केस के IO सुबोध कुमार ही थे. लैब की "पहली" रिपोर्ट में कहा गया था कि गोश्त गाय का "नहीं" था. उस वक़्त के युवा समाजवादी सीएम ने अपने जनेऊ की रक्षा के लिए केस…