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क्या है ब्राह्मणवादी पितृसत्ता, क्यों हो रहा है इस पोस्टर का विरोध, पढिए!

पितृसत्ता वो सामाजिक व्यवस्था है जिसके तहत जीवन के हर क्षेत्र में पुरुषों का दबदबा क़ायम रहता है. फिर चाहे वो ख़ानदान का नाम उनके नाम पर चलना हो या सार्वजनिक जीवन में उनका वर्चस्व. वैसे तो पितृसत्ता तक़रीबन पूरी दुनिया पर हावी है लेकिन ब्राह्मणवादी पितृसत्ता भारतीय समाज की देन है.. ब्राह्मणवाद और ब्राह्मणवादी पितृसत्ता को समझने के लिए हमें भारत के इतिहास में झांकना होगा. वैदिक काल के बाद जब हिंदू धर्म में कट्टरता आई तो महिलाओं और शूद्रों (तथाकथित नीची जातियों) का दर्जा गिरा दिया गया.महिलाओं और शूद्रों से लगभग एक जैसा बर्ताव…

ठग्स ऑफ भारतवर्ष पर कोई क्यों नहीं बोलता?

“रामोसी” भाषा बोलने वाले "ठग्स ऑफ़ हिन्दुस्तान" पर बनी फिल्म आमिर खान ला रहे हैं. लेकिन क्या आपको “संस्कृत” भाषा बोलने वाले "ठग्स ऑफ़ भारतवर्ष" के बारे में कुछ पता है? नहीं ना? उन ठगों पर हिन्दुस्तान में न कोई फिल्म बन सकती है न कोई ढंग का उपन्यास आ सकता है। लेकिन उन ठगों के बारे में क्रान्तिसूर्य ज्योतिबा फूले ने विस्तार से लिखा है. उनकी किताब गुलामगिरी ठीक से पढ़िए। रामोसी भाषा बोलने वाले ठग मुसाफिरों में घुल मिल जाते थे और उनके माल असबाब और ताकत का पूरा हिसाब लगाकर दूसरी टीम को सतर्क कर देते थे। दूसरी टीम इन्हें व्यापारियों…

2019 में भाजपा का हारना तय है!

2019 में भाजपा का हारना तय है. जनता भाजपा के फरेब से परिचित हो चुकी है. भाजपा को भी पता है कि लोग अब पहले की तरह बेवकूफ बनने वाले नहीं हैं. इसीलिए वह विकास का मुद्दा छोड़कर अपने मूल हथियार यानी साम्प्रदायिक राजनीति का प्रयोग करने के लिए माहौल बनाने लगी है. इसके लिए लगभग सभी न्यूज चैनल , ट्विटर , व्हाट्सएप और फेसबुक का प्रयोग शुरू हो चुका है. फेक न्यूज और प्लांटेड न्यूज से जनता को साम्प्रदायिक होने के लिए उकसाया जा रहा है. लेकिन इसका भी कोई खास असर होता नहीं दिख रहा है. प्रो-बीजेपी तमाम न्यूज चैनल्स और शोसल मीडिया ग्रुप्स/पेज…

क्या धार्मिकआस्था कि वजह से बढ़ रहा दिल्ली का प्रदूषण?

By- संजय श्रमण जोथे, दिल्ली मे प्रदूषण की समस्या की जिम्मेदारी न तो पूरी तरह से कानून व्यवस्था से जुडी है न औद्योगीकरण से न पूंजीवाद से और न ही शहरीकरण से। आप माने या न मानें ये इस देश के धर्म और संस्कृति से पैदा हुई समस्या है। किसान खेत में खूंटी जला रहा है क्योंकि यह सस्ता पड़ता है भले ही उसे अगली फसल में ज्यादा उर्वरक और कीटनाशक डालकर पूरी फ़ूड चेन को प्रदूषित करना पड़े, लेकिन वो ऐसा करेगा क्योंकि पढा लिखा वर्ग उससे बात ही नहीं करता किसानों और पेशेवरों सहित नागरिक समाज में संवाद नहीं होता। धार्मिक लोग पटाखे जला रहे हैं…

#MeToo अभियान की सवर्ण महिलाओं को डॉ रामकृष्ण के इन प्रासंगिक सवालों का जवाब देना होगा!

भारतीय समाज में महिलाओं को कमजोर समझे जाने की मानसिकता के चलते आज भी पुरुषवादी सोच उन पर हावी है और उसी सोच के चलते महिलाओं के साथ शोषण बदस्तूर जारी है। लेकिन महिलाओं के उत्पीड़न का यह दौर कोई नया नहीं है, इसका बहुत लंबा इतिहास रहा है। यह उस मनुवादी और ब्राह्मणवादी व्यवस्था का नतीजा है जिसका महिलाओं ने भी कभी खुलकर विरोध नहीं किया है। आज जब मीटू कैंपेन के जरिए महिलाएं खुद को सशक्त और मजबूत महसूस कर रहीं है तो हमें कवयित्रि महादेवी वर्मा द्वारा लिखी एक कविता याद आती है...जिसमें वो लिखती हैं.... मै हैरान हूं यह सोचकर…

विजय दशमी का असली नाम “अशोक विजयदशमी” है। जानिए सम्राट अशोक का छुपाया गया इतिहास!

भारतीय लोगों के मस्तिष्क से सम्राट अशोक को बड़ी ही चतुराई और चालाकी से ब्राह्मणों ने भुला दिया है। बौद्ध धर्म अर्थात ‘समता, स्वतंत्रता, बंधुत्व और न्याय’ की शासन पद्धती अर्थात मानवकल्याण की समाज में व्यवस्था नष्ट करने के लए ब्राह्मणों को अशोक की यादें नष्ट करना बेहद जरुरी था। इस उद्देश्य पूर्ति के लिए उन्होंने अशोक से संबंधित दिनों को काल्पनिक राम के उत्सवों में तब्दील कर दिया। अशोक ने जिस दिन धम्मदीक्षा ली उस विजयादशमी को राम के दशहरा में बदल दिया और सम्राट अशोक के जन्म दिन को ब्राह्मणों ने  रामजन्म दिन के रुप में परिवर्तित…

#Me Too की आढ़ में भारत का अब कौनसा आर्थिक संकट छुपाया जा रहा है?

एक और बडा क़र्ज़दार विदेश भाग गया और सरकार बेख़बर रही? 31 साल तक आईएलएफ़एस कंपनी गुजरात का कर्ताधर्ता रहा रवि पार्थसारथी 92 हजार करोड़ के कर्ज डुबाने, डेढ़ लाख करोड़ के और बैंक कर्ज संकट में डालने और पूरी अर्थव्यवस्था में संकट पैदा करने के पश्चात देश छोडकर चला गया। वह भागा जुलाई 2018 में और लुकआउट नोटिस जारी हुई 1 अक्टूबर को। सरकार देश के सबसे बडे सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को कह रही है कि उसकी भरपाई करे। कहना नहीं आदेशित कर रही है! जो कुछ मुनाफ़े मे सरकारी कंपनियॉं चल रही है वे सब दबाब में है कि डूबती इन कंपनियों को बचाओ…

तो इस वजह से गनर महिपाल, जज की पत्नि और बेटे को गोली मारने पर हुआ था मजबूर!

By: SanJay Yadav एक दुखद घटना में दो दिन पहले गुड़गाँव में हरियाणा पुलिस के एक जवान महिपाल ने अतिरिक्त ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश की पत्नी और बेटे को गोली मार दी। बड़े जजों का समझ में आता है लेकिन ये जुडिशरी के सबसे निचले अधिकारियों को सुरक्षाकर्मी की क्या आवश्यकता है? महीपाल के केस में बताइये, हैड कॉन्सटेबल से गनमैन और ड्राइवर दोनों का काम लिया जा रहा था! कुछ अधिकारी, किसान पुत्र जवानों से जो ओहदें में सिपाही, हवलदार रहते है उनसे घरेलू नौकर और पारिवारिक बन्धुआ मज़दूर की तरह काम लेते है। आठों पहर उन्हें नौकरी से बर्खास्त करने…

MCD टीचर परिक्षा में जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल

नई दिल्‍ली: भारत का तथाकथित सवर्ण समाज चाहे जितना पढ़ ले लेकिन उसके दिमाग में जमीं जातिवाद की गंदगी इतनी आसानी से नहीं निकलेगी। दिल्ली नगर निगम में प्राइमरी टीचर की भर्ती के लिए हुई परीक्षा में एक सवाल में आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया है जिसके चलते विवाद खड़ा हो गया है और दिल्ली सरकार इस शब्द के इस्तेमाल से नाराज़ है। दरअसल दिल्ली में शनिवार को दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड में एमसीडी में प्राइमरी टीचर के लिए परीक्षा कराई जिसमें हिंदी भाषा और बोध वाले प्रश्‍नपत्र में एक सवाल पूछा गया कि "पंडित : पंडिताइन तो चमार :…

#MeToo मूवमेंट मे क्या हम (# WeToo )शामिल है? बहुजन महिलाओं का ब्राह्मण सवर्ण महिलाओं से यह सवाल!

विमर्श। किसी भी सामाजिक और समानता की लड़ाई के केंद्र में अगर बहुजन स्त्री नहीं तो वो लड़ाई जातीय और एलीट है। भारत के सन्दर्भ में देखे तो बहुजन स्त्रियाँ सवर्ण पुरुष, सवर्ण महिला और अपने वर्ग के पुरुष तीनों के द्वारा शोषण झेलती है, तो बहुजन स्त्री को ये पूरा #me_too इसी परिपेक्ष्य में देखना होगा। क्योंकि ये पूरा #me_too आन्दोलन स्त्रियों और उनके कार्य स्थल, घर के अंदर, सार्वजानिक स्थान पर होने वाले यौन शोषण के अनुभव पर है इसलिए सबसे पहले हमें ये समझना होगा शोषक वर्ग खासकर उस वर्ग की स्त्रियों (भारत में सवर्ण) का चरित्र, उनका…