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ठग्स ऑफ भारतवर्ष पर कोई क्यों नहीं बोलता?

“रामोसी” भाषा बोलने वाले "ठग्स ऑफ़ हिन्दुस्तान" पर बनी फिल्म आमिर खान ला रहे हैं. लेकिन क्या आपको “संस्कृत” भाषा बोलने वाले "ठग्स ऑफ़ भारतवर्ष" के बारे में कुछ पता है? नहीं ना? उन ठगों पर हिन्दुस्तान में न कोई फिल्म बन सकती है न कोई ढंग का उपन्यास आ सकता है। लेकिन उन ठगों के बारे में क्रान्तिसूर्य ज्योतिबा फूले ने विस्तार से लिखा है. उनकी किताब गुलामगिरी ठीक से पढ़िए। रामोसी भाषा बोलने वाले ठग मुसाफिरों में घुल मिल जाते थे और उनके माल असबाब और ताकत का पूरा हिसाब लगाकर दूसरी टीम को सतर्क कर देते थे। दूसरी टीम इन्हें व्यापारियों…

2019 में भाजपा का हारना तय है!

2019 में भाजपा का हारना तय है. जनता भाजपा के फरेब से परिचित हो चुकी है. भाजपा को भी पता है कि लोग अब पहले की तरह बेवकूफ बनने वाले नहीं हैं. इसीलिए वह विकास का मुद्दा छोड़कर अपने मूल हथियार यानी साम्प्रदायिक राजनीति का प्रयोग करने के लिए माहौल बनाने लगी है. इसके लिए लगभग सभी न्यूज चैनल , ट्विटर , व्हाट्सएप और फेसबुक का प्रयोग शुरू हो चुका है. फेक न्यूज और प्लांटेड न्यूज से जनता को साम्प्रदायिक होने के लिए उकसाया जा रहा है. लेकिन इसका भी कोई खास असर होता नहीं दिख रहा है. प्रो-बीजेपी तमाम न्यूज चैनल्स और शोसल मीडिया ग्रुप्स/पेज…

जानिए बिरसा मुंडा के जन्मदिन पर उनके जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें

आज धरती के आबा जननायक बिरसा मुंडा का जन्मदिन है। सुगना मुंडा और करमी हातू के पुत्र, बिरसा मुंडा का जन्म १५ नवम्बर १८७५ को झारखंड प्रदेश में राँची के उलीहातू गाँव में हुआ था। और इनकी तस्वीर में इनके परंपरागत पहनावे से पता भी नहीं चलता की वे चाईबासा इंग्लिश मिडिल स्कूल में पढे होंगे। बिरसा मुंडा का मन हमेशा अपने समाज की ब्रिटिश शासकों एवं शेठजी भटजी द्वारा की गयी बुरी दशा पर सोचता रहता था। वे ऐसे महानायक हैं, जिन्होंने शक्तिशाली दिकू अर्थात विदेशी अर्थात ब्रिटिश साम्राज्य और शेठजी भटजी जो जमींदार जागीरदार थे उनके अमानवीय शोषण…

मीडिया का जातिवादी चहरा!

By- Jayant Jigyasu, प्रो. देवकुमार जी बताते हैं कि "जडेजा का राजपुताना प्रदर्शन" टाइप बातों का ही जिक्र इसी शैली में एक समय प्रभाष जोशी ने जनसत्ता में रोहित शर्मा और इशांत शर्मा को लेकर अपने लेख में किया था। मने जातिगत बोध से विभोर होता हुआ। सन और तिथि मुझे याद नहीं और न ही कटिंग सहेजकर रखी वरना प्रमाण यहाँ लगा देता। कहने का मतलब पढ़े-लिखे तथाकथित बुद्धिजीवियों (उच्च) ने भी इस तरह की हरकत की है। एक सच यह भी है कि आज आप लालू प्रसाद के बारे में कुछ ढंग का लिखो, शरद यादव का बस नाम ले लो मंडल के सन्दर्भ में, तो जाने-माने…

नेहरू जयंती पर “आईडिया ऑफ इंडिया” का सच और झूठ

By- दिलीप मंडल, सच को स्वीकार कीजिए. हमारी कोई साझा विरासत नहीं है. हम आपस में धर्म, जाति, भाषा, चमड़ी के रंग आदि के आधार पर एक दूसरे से लड़ने-भिड़ने और एक दूसरे से नफरत करने वाले लोग हैं जो इतिहास के संयोग से एक भौगोलिक इलाके के अंदर रह रहे हैं. हजारों साल का हमारा जो इतिहास है, उसमें गर्व करने लायक कुछ नहीं है. इतिहास के किसी भी दौर में देश का ये नक्शा नहीं रहा. इतिहास में कभी ऐसा समय नहीं था जब कन्याकुमारी, मणिपुर, गुजरात और कश्मीर एक साथ किसी एक शासन के तले रहे. भारत एक नया देश है. इसलिए संविधान निर्माताओं ने भारत…

क्या धार्मिकआस्था कि वजह से बढ़ रहा दिल्ली का प्रदूषण?

By- संजय श्रमण जोथे, दिल्ली मे प्रदूषण की समस्या की जिम्मेदारी न तो पूरी तरह से कानून व्यवस्था से जुडी है न औद्योगीकरण से न पूंजीवाद से और न ही शहरीकरण से। आप माने या न मानें ये इस देश के धर्म और संस्कृति से पैदा हुई समस्या है। किसान खेत में खूंटी जला रहा है क्योंकि यह सस्ता पड़ता है भले ही उसे अगली फसल में ज्यादा उर्वरक और कीटनाशक डालकर पूरी फ़ूड चेन को प्रदूषित करना पड़े, लेकिन वो ऐसा करेगा क्योंकि पढा लिखा वर्ग उससे बात ही नहीं करता किसानों और पेशेवरों सहित नागरिक समाज में संवाद नहीं होता। धार्मिक लोग पटाखे जला रहे हैं…

The Role of Caste in the ‘Asia Bibi Case’

By ~ Amen Jaffer, Dr. B. R. Ambedkar begins his undelivered speech of 1936, Annihilation of Caste, by arguing that the success of political and economic reform in India depends on social reform. He described an Indian society riven by caste oppression in which the upper caste sought to control the minutest details of the lives of the lowest castes - what they can wear, the food then can eat, the spaces where their bodies are allowed. This was a world in which the lowest castes are treated as untouchable, where their bodies,…

कमजोर पर ज़ोर, यह है सवर्ण फेमिनिज़्म का दौर!

By- Deepali Tayday "कमजोर पर ज़ोर... यह है सवर्ण फेमिनिज़्म का दौर" इस बात का ताज़ा उदाहरण दिखा, मुम्बई के ओशिवरा में जब रात के एक बजे शराब के नशे में धुत सो कॉल्ड मॉडल मेघा शर्मा अपार्टमेंट में रात में ड्यूटी कर रहे गार्ड के साथ बेहद मारपीट-गालीगलौच और झूमा-झटकी की......। मेघा शर्मा यहीं पर नहीं रुकी, बल्कि गार्ड पर असॉल्ट करने का झूठा इल्ज़ाम लगाकर 100 नम्बर डायल करके पुलिस को भी बुला लिया। और फिर चीखते-चिल्लाते हंगामा करते हुए पुलिस, गार्ड और अपार्टमेंट के लोगों के बीच में सरेआम कपड़े उतारकर ब्रा-पेंटी में खड़ी हो गईं। दरअसल,…

अलवर में गौ तस्करी के शक में की गई हत्याओं की ज़िम्मेदार है एक घिनौनी मानसिकता!

By- आकिल रज़ा यह बात मैं बहुत ही ज़िम्मेदारी के साथ लिख रहा हूं.. कि मॉव_लिंचिंग का जो दर्द हम यहां बैठकर महसूस करते हैं, दरअसल वो उतना नहीं है बल्कि उससे कई गुनाह ज्यादा है, वैसे तो देश के कई राज्यों और शहरों में मॉव लिंचिंग की घटनांए हई हैं, लेकिन उन सबसे ऊपर लिस्ट में नाम आता है मेवात क्षेत्र का, मेवात भारत के उत्तरपश्चिम में हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में स्थित एक ऐतिहासिक व पारंपरिक क्षेत्र है। मोटेतौर पर इसकी सीमा में हरियाणा का मेवात जिला, राजस्थान के अलवर, भरतपुर और धौलपुर जिले और साथ ही उत्तर प्रदेश का कुछ…

मैं आपसे पूछता हूं धर्म परिवर्तन करके अपना नाम स्थाई रूप से क्यों नहीं बदल लेते-डॉ बीआर अंबेडकर

धर्म परिवर्तन कोई बच्चों का खेल नहीं है। यह ‘मनुष्य के जीवन को सफल कैसे बनाया जाए’ इस सरोकार से जुड़ा प्रश्न है...इसको समझे बिना आप धर्म परिवर्तन के संबंध में मेरी घोषणा के वास्तविक निहितार्थ का अहसास कर पाने में समर्थ नहीं होंगे। छुआछूत की स्पष्ट समझ और वास्तविक जीवन में इसके अमल का अहसास कराने के लिए मैं आप लोगों के खिलाफ किये जाने वाले अन्याय और अत्याचारों की दास्तान का स्मरण कराना चाहता हूं। सरकारी स्कूलों में बच्चों का दाखिला कराने का हक जताने पर या सार्वजनिक कुंओं से पानी भरने का अधिकार जताने पर या घोड़ी पर दूल्हे को…