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बीफ खाने वाले से नहीं ‘मुस्लिम’ नाम से ही चिड़ती है BJP!

By- Aqil Raza ~   यह बात अब बताने की ज़रूरत तो नहीं है कि अब जितना चुनाव करीब आता जाएगा नेताओं कि बयानबाज़ी और वोटो के तुष्टिकरण के लिए नफरतों का बज़ार भी उतनी ही मुस्तेदी से सजाया जाएगा। इस बाज़ार को सजाने के लिए कुछ कथित नेता आपके धर्म, आपकी जाति, आपकी देशभक्ति यहां तक कि आपके अधिकार और अभिव्यक्ति की आज़ादी तक पर वार करेंगे। इसमें कोई दोहराए नहीं कि ऐसा करने के लिए BJP के नेता हमेशा से अपना ज्यादा से ज्यादा योगदान देते आए हैं। फिर चाहें वो यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ हों, कर्नाटक से आने वाले अनंद कुमार हेगड़े हों, त्रिपुरा…

सवाल दस लाख आदिवासी परिवारों का नहीं पचास लाख आदिवासियों का है

Published by- Aqil Raza By - डॉ. मनीषा बांगर  ~ सुप्रीम कोर्ट ने 13 फरवरी 2019 को अहम फैसला सुनाया है। इस फैसले के मुताबिक केंद्र व 21 राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करना है कि दस लाख से अधिक आदिवासी परिवार उस जमीन को छोड़ दें, जहां वे पीढ़ियों से रहते आए हैं। कोर्ट ने यह बात अपने मन से नहीं कही है। उसके सामने 21 राज्यों की सरकारों ने शपथ पत्र दाखिल कर कहा है कि दस लाख से अधिक आदिवासी परिवार यह सबूत नहीं पेश कर सका है कि वह जमीन का मालिक है। पहले तो यह समझें कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का असर क्या होगा यदि इसे लागू किया गया।…

ज़मीनों से बेदखल किए जाएंगे लाखों आदिवासी!

Published By- Aqil Raza By- सुदीप ठाकुर   ~ युद्धोन्माद और राष्ट्रवाद के उफनते दौर में यह खबर शायद सनसनी पैदा न करे। सुप्रीम कोर्ट के हाल के एक आदेश से 16 राज्यों में दस लाख से भी अधिक आदिवासियों और अन्य वनवासियों को जंगल से बेदखल किया जा सकता है, क्योंकि केंद्र सरकार वनाधिकार अधिनियम 2006 के तहत उनके अधिकारों की रक्षा करने में नाकाम रही है। बिजनेस स्टैंडर्ड (https://goo.gl/qY1Eqm) https://www.youtube.com/watch?v=jqdaxsjL8vo&t=52s केंद्र सरकार ने आदिवासियों को तकरीबन 80 साल बाद मिले इस महत्वपूर्ण अधिकार से संबंधित…

فیض احمد فیض اور انکی شاعری

Published by- Aqil Raza By- Faiz ahmad Faiz   ~ فیض احمد فیض جن کی پیدائش 13 فروری 1911 کو تقسیمِ ہند سے پہلے سیالکوٹ میں ہوئی جیسا کہ قدیم زمانے میں ہوتا تھا فیض صاحب کی ابتدائی تعلیم کا آغاز بھی گھر سے ہی ہوا انہونے گھر میں ہی اردو فارسی اور عربی کی تعلیم حاصل کی اس کے بعد ان کا داخلہ انجمن اسلامیہ کے مدرسے میں کرا دیا گیا جس کے صدر خود ان کے والد تھے فیض صاحب نے  گورنمنٹ کالج لاہور سے 1931ء میں بی اے کے ساتھ عربی میں بی اے آنرز کی ڈگری بھی حاصل کی۔ 1933ء میں انگریزی ادب میں ایم اے اور پھر1934ء میں عربی زبان و ادب میں بھی…

भीमा कोरेगाव युद्धातील 500 शूरवीर मावळ्यांचा अभिमान का बाळगावा ?

Published By- Aqil Raza By-  श्रीमंत कोकाटे   ~ छत्रपती शिवाजी राजांनी सुरू केलेला शिवशक पेशव्यांनी बंद पाडला आणि मुस्लिमांचा फसली शक सुरु केला. पेशव्यांनी छत्रपती संभाजीराजांना तीन वेळा मारण्याचा कट केला आणि शेवटी संस्कृतवरती प्रभुत्व मिळविल्यामुळे औरंगजेबाच्या ताब्यात देऊन ब्राह्मणीधर्मानुसार त्यांना हाल हाल करून ठार मारले. पहिल्या बाजीराव पेशव्यांनी मराठा सरसेनापती उमाबाई दाभाडे यांना तह करण्यासाठी बोलावून कैदेत टाकले आणि त्यांना कैदेत मारले. तिसऱ्या पानिपताच्या वेळेस अब्दाली युद्धाचे नियोजन करत होता तर पेशवे यज्ञ,याग,होम…

केवल सीमा पर मरने के लिए पैदा नहीं हुए हैं देश के OBC/SC/ST और अल्पसंख्यक

Published by- Aqil Raza~     पिछले 14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के 40 जवानों की मौत आतंकी हमले में हो गई। यह एक ऐसी घटना है जिससे हर भारतीय आहत है। हालांकि कई राजनीतिक दलों के नेता इसी युद्धोन्माद फैला रहे हैं। भाजपा के नेताओं ने तो इसे चुनाव का मास्टर स्ट्रोक करार दिया है। लेकिन इन सबके बीच जो बात सबसे उल्लेखनीय है , वह शहीद जवानों की सामाजिक पृष्ठभूमि है। इनमें से 19 ओबीसी हैं। SC 7, आदिवासी 5, सवर्ण 3 और मुसलमान 1 हैं। शहीद जवानों में 4 सिक्ख और 2 राजपूत हैं। ब्राह्मण की संख्या केवल 1 है। इस…

नहीं रहे हिंदी जगत के मशहूर साहित्यकार और विख्यात आलोचक डॉ नामवर सिंह

By- Aqil Raza ~       हिंदी जगत के मशहूर साहित्यकार और आलोचना की विधा के शिखर पुरुष नामवर सिंह नहीं रहे. मंगलवार देर रात दिल्ली के AIIMS में उन्होंने आखिरी सांस ली. नामवर सिंह पिछले एक महीने से एम्स ट्रामा सेंटर में भर्ती थे. ब्रेन हैमरेज की वजह से उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया था. 92 साल के नामवर सिंह का डॉक्टर लंबे समय से इलाज कर रहे थे. डॉ नामवर सिंह के निधन से साहित्य जगत में गहरा शोक है. साहित्य और पत्रकारिता जगत के दिग्गजों ने उनके निधन पर शोक जताया है. https://www.youtube.com/watch?v=kHmh-UaA7cc वरिष्ठ पत्रकार…

डोभाल एंड संस का पाकिस्तानी बिज़नस और पुलवामा की चर्चा क्यों नहीं हो रही ??

Published by- Aqil Raza By- Dr. Manisha Bangar      ~ अजीत डोभाल देश के ऐसे नौकरशाह बन चुके हैं जो 'शाहों' से बढ़कर हैसियत रखते हैं। जब हम शाहों की बात कर रहे हैं तो हमारा पर्याय उनसे है जो सत्ता के गलियारे में खुद को रसूखवाला मानते हैं। वे एक बार फिर चर्चा में हैं। https://www.youtube.com/watch?v=QxezNG_tDQg&t=20s ताजा मामला यह है कि जहां एक तरफ देश में भाजपा और संघ के लोग युद्धोन्माद फैला रहे हैं ताकि लोकसभा चुनाव में फायदा मिल सके वहीं दूसरी ओर अजीत डोभाल जो कि देश के राष्ट्रीय सुरक्षा आयुक्त हैं, उनके पुत्र कथित…

कैसे रोका जाए छत्रपति शिवाजी का ब्राह्मनिकरण?

Published By- Aqil Raza By- Panjab Rao Meshram कोई भी सामाजिक क्रांति अचानक आसमान से नहीं टपकती। उसके लिए स्थितियां उत्तरदायी होती हैं। छत्रपति शिवाजी के पिताजी मुस्लिम शासकों के सरदार हुआ करते थे। माता जीजाबाई ने स्वयं का स्वराज्य बनाने का सोचा और उसी तरह की ट्रेनिंग बालक शिवाजी को दी। बालक शिवाजी ने अठारह पगड़ अर्थात बहुजन मुस्लिम जाति के बचपन के जान से प्यारे मित्रों की सहायता से अपने स्वप्न की पूर्ती की। येशाजी नाक महार भी उनमें शामिल थे। इस तरह इतिहास में नाग महार पुनः सैनिक बन गए। मराठा राज हड़पने और पेशवाई आने के…

سورنو کا دس فيسد مالی بنياد پر رزرويشن کس طرح بہوجنوں اور پسماندا کے خلاف ہے۔

By-  Naeem Sharmad   ~   گزشتہ دنوں مودی سرکار نے اعلیٰ ذات طبقات کو 10 فیصد ریزرویشن دینے کا فیصلہ کیا ہے اعلیٰ ذات کے طبقات کو ملازمتوں اور تعلیمی اداروں میں یہ ریزرویشن ملنا طے ہوا ہے جس کے لئے آئین میں 124 ویں  ترمیم کی گئی ہے لوکسبھا انتخابات سے کچھ قبل اس قانون کا بننا اس بات کی پوری تصدیق کرتا ہے کہ بی جے پی نے  نوکریوں بےروزگاری اور مندر پر کئے گئے فرضی وعدوں سے خائف اعلیٰ ذات کے اپنے ووٹروں کو لبھانے کے لئے اس ریزرویشن کو عملی صورت دی ہے ورنہ چار سال نو مہینے مرکزی حکومت میں بنے رہنے کے بعد مودی سرکار کو اب جاکر…