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डॉ मनीषा बांगर को डॉ पायल तडवी की दुखद घटना सुनकर अपने मेडिकल पढ़ाई के वक्त का ये वाकया याद आया।

डॉ. पायल तडवी अब इस दुनिया में नहीं है। उसकी जान किसने ली, अब यह हम सभी जानते हैं। यह भी कि किस तरह द्विज जातियों की तीन महिलाएं जो कि स्वयं भी मेडिकल की छात्राएं हैं, के द्वारा जातिगत और विद्वेषपूर्ण आचरण के कारण डॉ पायल तडवी ने खुदकुशी कर ली। हालांकि पुलिस ने इन तीनों महिलाओं के खिलाफ एक्शन लिया है, लेकिन भारतीय न्यायिक व्यवस्था में कानूनी प्रावधानों को देखते हुए इन तीनों को सजा मिलेगी, यकीनी तौर पर नहीं कहा जा सकता है। मैं स्वयं चिकित्सक हूं और मैंने स्वयं उस पीड़ा को महसूस किया है जो डॉ. पायल तडवी को सहनी पड़ी होगी। बात…

पायल तड़वी और उसके खूबसूरत सपनों की दास्तान

महाराष्ट्र समता और न्याय का सपना देखने वाले फुले, शाहू जी और डॉ. आंबेडकर की जन्मभूमि-कर्मभूमि है, लेकिन यह वर्ण-जाति व्यवस्था और इससे पैदा होने वाले अन्यायों के समर्थक रामदास, तिलक, सावरकर और गोडसे जैसे चितपावन ब्राह्मणों की जन्मभूमि- कर्मभूमि भी है। यह क्रूर पेशवा ब्राह्मणों की भूमि भी है, जिन्होंने अतिशूद्रों को गले में हड़िया और कमर में झाडू बाधकर चलने के लिए बाध्य कर दिया। जो महारों, मांगों और चमारों का सिर काटकर गेंद बनाकर खेलते थे। इन्हीं चितपावन ब्राह्मणों की परंपरा ने एक आदिवासी लड़की और उसके खूबसूरत सपनों की हत्या कर…

क्यों जहरीले तीर की तरह सर्वणों के दिलों में चुभते हैं, डॉ. आंबेडकर!

By- सिद्धार्थ सहारनपुर से सटे गांव बादशाहपुर पिंजोरा में आंबेडकर की मूर्ति तोड़ दी गई है। बहुजनों में गहरा आक्रोश है। गांव में पीएसी तैनात कर दी गई। इस देश में सबसे ज्यादा यदि किसी व्यक्ति से सवर्ण नफरत करते हैं तो वह आंबेडकर हैं और सबसे ज्यादा किसी की मूर्ति तोड़ी जाती हैं, तो वह भी आंबेडकर की। आखिर सवर्णों को डॉ. आंबेडकर जहरीले तीर की तरह चुभते क्यों हैं? इसके निम्न कारण हैं- ● पहला सवर्णों का यह मानना है कि डॉ. आंबेडकर की आरक्षण की व्यवस्था के चलते उनके बेटों -बेटियों के करीब 50 प्रतिशत नौकरियों का हिस्सा एससी-एसटी…

बाबा साहेब को पढ़कर मिली प्रेरणा, और बन गईं पूजा आह्लयाण मिसेज हरियाणा

हांसी, हिसार: कोई पहाड़ कोई पर्वत अब आड़े आ सकता नहीं, घरेलू हिंसा हो या शोषण, अब रास्ता रोक सकता नहीं...यह कहना है बहुजन समाज से आने वाली पूजा आह्लयाण का जिन्होंने पुरुषवादी सोच से लड़ते हुए एक महीने के अंदर सौंदर्य के क्षेत्र में दूसरी बड़ी सफलता अर्जित की है। हरियाणा के हांसी शहर के उत्तम नगर की रहने वाली पूजा आह्लयाण ने मिसेज हरियाणा प्लेटिनम का ताज अपने नाम किया है। गुरुग्राम में आयोजित हुई इस प्रतियोगिता में 250 सुंदरियों को ज्ञान व सुंदरता में पछाड़ते हुए पूजा ने मिसेज हरियाणा का क्राउन जीता। पूजा ने बताया कि इस…

जस्टिस फॉर डॉ पायल: रोहित वेमुला के बाद एक और संस्थानिक हत्या!

By: Susheel Kumar पायल!! आपको ऐसा नहीं करना चाहिए था, हां मैं समझ सकता हूं कि जब किसी इंसान के सामने हालात बद से बद्तर कर दिए जाएं तो फिर जीना मुश्किल हो जाता है पर आप तो ऐसे समाज से आती हैं जिसका इतिहास ही बेहद कठिन और संघर्ष भरा रहा है, तो फिर इस जातिवादी समाज में आपको भी लड़ना चाहिए था, इतनी जल्दी हार नहीं माननी चाहिए थी, आपकी लड़ाई ज्यादा बड़ी थी क्योंकि आप एक तरफ जातिवादी मानसिकता से लड़ रहीं थी तो वहीं दूसरी ओर पुरषवादी सोच को चुनौती दे रहीं थी!! जातिवाद की गंदगी भरे दिमाग में सड़ी हुई सोच की वजह से किसी को जब मौत गले…

भारत मे गरीबों के हित में सामाजिक और राजनीतिक बदलाव क्यों नहीं होते??

- संजय श्रमण ~ क्या ये सवाल आपको पीड़ित करता है? अगर करता है तो आपको समाज और राजनीति में इसके कारण नहीं खोजने चाहिए। जिस मुद्दे को आप समझना चाहते हैं उसे उसी के विश्लेषण से नहीं समझा जा सकता बल्कि उस मुद्दे को जन्म देने वाली परिस्थितियों और कारकों के विश्लेषण से समझा जा सकता है। अगर आप गरीबी को समझना चाहते हैं तो आपकी उन कारकों को समझना होगा जो गरीबी को पैदा करके बनाये रखते हैं। इसी तरह अगर आप भारत मे असमानता, जातीय हिंसा, शोषण और जहालत को समझना चाहते हैं तो इसे इस देश की संस्कृति और धर्म के विश्लेषण से समझिए। इस संस्कृति और…

जीतने वाले भी डरे हुये हैं !

~ krishan kalpit ~ इस प्रचंड बहुमत के बुलडोजर ने सभी को कुचल दिया है । बुलडोजर जब चलता है तो अपना पराया नहीं देखता । इस बुलडोजर ने इस अपूर्व बहुमत की आधारशिला रखने वालों को भी कुचल दिया है । इस बहुमत की राजधानी अब नागपुर नहीं मुम्बई हो गई है । नागपुर वालों के पास थोड़े दिन बाद Z Plus सुरक्षा में बैठकर संतरे चूसने के अलावा कोई काम नहीं रहने वाला । खेल उनके हाथ से निकल चुका है । अल्पसंख्यक ही नहीं बहुसंख्यक भी इस बहुमत से डर गये हैं । गुजराती भी गुजराती से डरा हुआ है । ताक़तवर मंत्री-संतरी भी डरे हुये हैं । पता नहीं कब कौन…

रामविलास के चिराग पर संकट गहराया

~ नवल किशोर कुमार ~ लोकसभा चुनाव 2019 में भले ही केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने भाग नहीं लिया हो लेकिन उन्होंने अपनी विरासत अपने बेटे चिराग पासवान और दोनों भाइयों पशुपति पारस और रामचंद्र पासवान को सौंप दी है। परंतु, इस बार उनके बेटे चिराग पासवान जो कि बिहार के जमुई क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं, उनके उपर संकट के बादल नजर आ रहे हैं। दरअसल, उनके सामने संकट यह नहीं है कि उनकी हार होगी या जीत, बल्कि संकट उनकी जन्मतिथि को लेकर है जो उन्होंने शपथ पत्र के माध्यम से चुनाव आयोग को बताया है। उनकी उम्मीदवारी पर सवाल उपेंद्र…

लोकसभा चुनाव : 2004 की तस्वीर दिखा रहे एक्जिट पोल

- नवल किशोर कुमार लोकसभा चुनाव 2019 के तहत सभी सात चरणों के मतदान समाप्त हो चुके हैं और इसके साथ ही कयासबाजियों का दौर शुरू हो चुका है कि कौन पार्टी कितनी सीटें जीतेगी और 23 मई को ताज किसके माथे पर होगा। अभी तक दस सर्वेक्षणों के परिणाम सामने आए हैं और इनमें से 9 एजेंसियों ने नरेंद्र मोदी को विजेता बताया है और मात्र एक ने इसकी अंदेशा जाहिर की है कि इस बार त्रिशकु सरकार बन सकती है। एक्जिट पोल के परिणामों को आधार मानकर किसी ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता है। मसलन, 2004 में जब अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए ने…

मोदी के पक्ष में उतरा कारपोरेट और संघ, जीत का श्रेय लेने की कोशिश

~ नवल किशोर कुमार द इकोनॉमिस्ट ने एक रिपोर्ट प्रकाशित किया है। इसके मुताबिक नरेंद्र मोदी जीत सुनिश्चित है। रिपोर्ट का शीर्षक है - "नेशनलिस्ट फर्वर इज लाइकली टू सेक्योर अ सेकेंड टर्म फॉर मोदी"। यानी राष्ट्रवाद के सहारे नरेंद्र मोदी को दुबारा मौका मिलना लगभग तय। कुछ ऐसे ही संकेत हाल ही में संयुक्त राष्ट्रसंघ द्वारा अजहर मसूद को आतंकी माने जाने और उसके खिलाफ वैश्विक स्तर पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भी मिलते हैं। इन सबके अलावा आरएसएस भी अब खुलकर नरेंद्र मोदी के समर्थन में नारे लगाने लगा है जो कि चौथे चरण के पहले एकदम खामोश था।…