Browsing Category

Southern India

BJP मंत्री का विवादित बयान, “हिंदू लड़कियों को छूने पर काट दिए जाएंगे हाथ”

By- Aqil Raza   ~ बीजेपी नेताओं द्वारा एक के बाद एक विवादित बयान सामने आते रहे हैं। एक बार फिर केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार हेगड़े भड़काऊ बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि अगर कोई हिन्दू लड़की को छुए तो वो हाथ नहीं बचने चाहिए। कर्नाटक में एक कार्यक्रम के दौरान हेगड़े ने अपने सम्बोधन में कहा, “हमें अपने समाज की प्राथमिकताओं के बारे में विचार करना होगा। हमें जाति के बारे में नहीं सोचना चाहिए। यदि एक हिन्दू लड़की को कोई हाथ छूता है तो वह हाथ नहीं बचना चाहिए।” ऐसा नहीं है की अनंत कुमार हेगड़े ने इस प्रकार का विवादित बयान पहली मर्तबा…

रोहित कभी मरा नहीं करते… रोहित हमेशा ज़िंदा रहते हैं…

BY- डॉ. जयंत चंद्रपाल ~         रोहित कभी मरा नहीं करते ... रोहित हंमेशा जिन्दा रहते है संघर्ष के इतिहास के साथ… अब तू नहीं ... बस तेरी यादे है ... और संघर्ष से भरा हुआ तेरा इतिहास है | रोहित,..... जकजोर कर रख दिया है तेरे आखरी शब्दों ने “आदमी की कीमत तो बस उसकी फौरी पहचानमें सिमटकर रहगयी है | निकटतम सम्भावना ही पहचान तय करती है एक वोट से एक संख्यासे एक चीज से | आदमी को एक दिमाग की तरह तो देखा ही नहीं गया....” तेरे पत्र की कुछ बातों ने मुझे बहुत रुलाया... "मैं बचपन के अकेलेपन से कभी उबर नहीं पाया, बचपन में मुझे किसी का प्यार…

रोहित वेमुला और उनके संघर्षित जीवन को डॉ मनीषा बांगर की श्रद्धांजलि

By- Dr. Manisha Bangar    संघर्षरित परछाईयों से तारो की और जानेवाला रोहित सितारों में नहीं है ,वो करोडो बहुजन युवा के दिलो में मशाल बन धधक रहा है :- रोहित के जीवन की दांस्ता यह बयान करती है कि किस तरह एक होनहार, होशियार, न्याय और समता के लिए लड़ने वाले, वैज्ञानिक बनने का सपना देखने वाले, खुद के लिए ही नहीं तो सब के लिए एक हसीन दुनिया बनाने वाले रोहित को संस्थाओं में आरूढ़ ब्राह्मणी आतंक और जातिय उत्पीड़न ने हताश और मजबूर किया . ये कोई अनदेखी ताकत थोड़े ही है. ये बस रही है universities के ब्राह्मण द्विज प्रोफेसर , छात्र…

जन्मदिन विशेष: जानिए ब्राह्म्णवाद की कब्र खोदने वाले पेरियार ई.वी.रामास्वामी नायकर कौन थे?

BY- Siddharth Ramu हम सभी जानते है कि तमिलनाडु उन चंद राज्यों में शामिल है, जहां ब्राह्म्णवाद को निर्णायक शिकस्त दी गई। यदि किसी एक व्यक्ति को इसका सबसे ज्यादा श्रेय जाता है तो, उस व्यक्ति का नाम है,ई.वी.रामास्वामी नायकर यानी पेरियार। हिंदी गाय पट्टी का ब्राह्मणवाद विरोधी आंदोलन जहां राजनीति दायरे तक ही कमोवेश सीमित रहा, उसके उलट द्रविड़ आंदोलन ने ब्राह्मणवाद को सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और कॉफी हद तक आर्थिक स्तर पर चुनौती दी।  उन्होंने अपने आत्मसम्मान आंदोलन के माध्यम से जाति व्यवस्था के खात्मे, ब्राह्मणी वर्चस्व के…

भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के बारे में डॉ. आंबेडकर की क्या राय…

आजादी से 1 वर्ष पहले 1946 में डॉ. आंबेडकर ने लिखा कि “ हिंदुओं और मुसलामनों की लालसा स्वाधीनता की आकांक्षा नहीं हैं. यह सत्ता संघर्ष है,जिसे स्वतंत्रता बताया जा रहा है.. कांग्रेस मध्यवर्गीय हिंदुओं की संस्था है, जिसकों हिदू पूंजीपतियों की समर्थन प्राप्त है, जिसका लक्ष्य भारतीयों की स्वतंत्रता नहीं, बल्कि ब्रिटेन के नियंत्रण से मुक्त होना और सत्ता प्राप्त कर लेना है, जो इस समय अंग्रेजों की मुट्ठी में हैं.” ( डॉ, आंबेडकर, संपूर्ण वाग्यमय, खंड-17, पृ.3 ). मुसलमान... मध्यवर्गीय हिंदुओं के वर्चस्व से मुक्ति के लिए अलग…

पेरियार के विचारों का पैनापन आजीवन विचारों में साथ लेकर चले करुणानिधि…

नई दिल्ली। पेरियार से करुणानिधि बेहद प्रभावित थे और वे आजीवन जातिवाद, ब्राह्मणवाद और धार्मिक पाखंड के खिलाफ़ लड़ते रहेl वे भगवान जैसी किसी भी संरचना के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करते थेl सामाजिक न्याय, राज्यों की स्वायत्ता, क्षेत्रीय अस्मिता और द्रविड़ संस्कृति के लिए वे आजीवन प्रतिबद्ध रहेl उन्होंने जब पहली बार सरकार बनाई उस दौरान में ज़मीन की हदबंदी को 15 एकड़ तक सीमित कर दिया गया थाl इस निर्णय के बाद कोई भी 15 एकड़ से ज़्यादा ज़मीन का मालिक नहीं रह सकता थाl करुणानिधि ने शिक्षा और नौकरी में पिछड़ी जातियों को मिलने वाले आरक्षण…

एक और बहुजन बेटी ने रोशन किया नाम….

ये हैं तमिलनाडु के मदुरई की 23 साल काव्या रवि कुमार। काव्या देश की पहली बहुजन   महिला कॉमर्शियल पायलट है। इन्हें हाल ही में गवर्मेंट फ्लाइंग ट्रैनिंग स्कूल (GFTS) से कॉमर्शियल पायलेट का लाइसेंस औऱ बेस्ट स्टूडेंट अवॉर्ड भी मिला है। 21 साल के इंतज़ार के बाद ये उपलब्धि हासिल हो सकी है। देश में कई महिला कॉमर्शियल पायलट्स हैं। लेकिन सभी सवर्ण वर्ग की हैं और बेहद मजबूत परिवारिक पृष्ठभूमि की भी। जिन्हें ना पैसे की कमी हुई, ना प्रिवेलेज की। बल्कि सो कॉल्ड सुंदरता के पैमाने यानी सुकोमल, गोरे और नैन-नक्श आदि-आदि के पैमाने पर खरे…

कोविंद को धकियाया जाना आपत्ति से ज्यादा सीखने का मुद्दा है…

-Deepali Tayday भारतीय समाज में बहुजनों की कितनी औकात है ये बताती है यह सारी घटनाएं। तुम चाहे तलवे चाट-चाट कर राष्ट्रपति, मंत्री, संत्री, फलाना-ढिमका कुछ भी बन जाओ, लेकिन यहाँ तुम कहलाओगे नीच ही। नीच होने के कारण जो भौकाल एक ब्राह्मण का है तुम्हारा राष्ट्रपति बनके भी नहीं इसलिए एक अदना सा पंडा भारी पड़ा। फिर चाहे वो जगन्नाथपुरी का मंदिर हो, या पुष्कर का.....आगे और मट्टी-पलित करानी हो तो दक्षिण के मंदिरों में जाइये वहाँ और स्पेशल ट्रीटमेंट मिलेगा। कोविंद नहीं भारत के सभी बहुजनों जो कि अभी भी हिंदू धर्म को छाती से चिपटाये बैठे…