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Uttar Pradesh & Uttarakhand

इंस्पेक्टर सुबोध कुमार के क़ातिलों को “भीड़” का नाम मत दीजिए, प्लीज़!

ख़ेराजे अक़ीदत शहीद सुबोध कुमार जी को इंस्पेक्टर सुबोध कुमार के क़ातिलों को "भीड़" का नाम मत दीजिए प्लीज़....वर्ना कई और सुबोध कुमार, कई और ज़ियाउल हक़ जैसे जम्हूरियत के रक्षक मौत के घाट उतारे जाते रहेंगे, और संविधान के क़ातिल भीड़ की "आड़" में छुपकर बचते रहेंगे। याद रखिए, दादरी में शहीद किए गए अख़लाक़ साहब के फ़्रिज में रखे गोश्त को जांच के लिए लैब तक पहुंचाने वाले उस केस के IO सुबोध कुमार ही थे. लैब की "पहली" रिपोर्ट में कहा गया था कि गोश्त गाय का "नहीं" था. उस वक़्त के युवा समाजवादी सीएम ने अपने जनेऊ की रक्षा के लिए केस…

ठग्स ऑफ भारतवर्ष पर कोई क्यों नहीं बोलता?

“रामोसी” भाषा बोलने वाले "ठग्स ऑफ़ हिन्दुस्तान" पर बनी फिल्म आमिर खान ला रहे हैं. लेकिन क्या आपको “संस्कृत” भाषा बोलने वाले "ठग्स ऑफ़ भारतवर्ष" के बारे में कुछ पता है? नहीं ना? उन ठगों पर हिन्दुस्तान में न कोई फिल्म बन सकती है न कोई ढंग का उपन्यास आ सकता है। लेकिन उन ठगों के बारे में क्रान्तिसूर्य ज्योतिबा फूले ने विस्तार से लिखा है. उनकी किताब गुलामगिरी ठीक से पढ़िए। रामोसी भाषा बोलने वाले ठग मुसाफिरों में घुल मिल जाते थे और उनके माल असबाब और ताकत का पूरा हिसाब लगाकर दूसरी टीम को सतर्क कर देते थे। दूसरी टीम इन्हें व्यापारियों…

2019 में भाजपा का हारना तय है!

2019 में भाजपा का हारना तय है. जनता भाजपा के फरेब से परिचित हो चुकी है. भाजपा को भी पता है कि लोग अब पहले की तरह बेवकूफ बनने वाले नहीं हैं. इसीलिए वह विकास का मुद्दा छोड़कर अपने मूल हथियार यानी साम्प्रदायिक राजनीति का प्रयोग करने के लिए माहौल बनाने लगी है. इसके लिए लगभग सभी न्यूज चैनल , ट्विटर , व्हाट्सएप और फेसबुक का प्रयोग शुरू हो चुका है. फेक न्यूज और प्लांटेड न्यूज से जनता को साम्प्रदायिक होने के लिए उकसाया जा रहा है. लेकिन इसका भी कोई खास असर होता नहीं दिख रहा है. प्रो-बीजेपी तमाम न्यूज चैनल्स और शोसल मीडिया ग्रुप्स/पेज…

अलवर में गौ तस्करी के शक में की गई हत्याओं की ज़िम्मेदार है एक घिनौनी मानसिकता!

By- आकिल रज़ा यह बात मैं बहुत ही ज़िम्मेदारी के साथ लिख रहा हूं.. कि मॉव_लिंचिंग का जो दर्द हम यहां बैठकर महसूस करते हैं, दरअसल वो उतना नहीं है बल्कि उससे कई गुनाह ज्यादा है, वैसे तो देश के कई राज्यों और शहरों में मॉव लिंचिंग की घटनांए हई हैं, लेकिन उन सबसे ऊपर लिस्ट में नाम आता है मेवात क्षेत्र का, मेवात भारत के उत्तरपश्चिम में हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में स्थित एक ऐतिहासिक व पारंपरिक क्षेत्र है। मोटेतौर पर इसकी सीमा में हरियाणा का मेवात जिला, राजस्थान के अलवर, भरतपुर और धौलपुर जिले और साथ ही उत्तर प्रदेश का कुछ…

किसानों का संदेश- अब आत्महत्या नहीं रण होगा, संघर्ष महाभीषण होगा!

By: Siddhartha Ramu इस बूढ़े किसान की लाठी ने सत्ता की लाठी को टक्कर दी है। इस लाठी की टकराहट की आवाज़ देश के किसानों को संदेश दे रही है, की टकराने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। देश के हुक्मरानों ने किसानों को तबाह कर उन्हें शहरों की झुग्गी-झोपनियों में भेजने और अमीरों की चाकरी में लगाने का निर्णय ले लिया है। किसानों की जमीनों पर कारपोरेट की निगाहें हैं। बीज, खाद, पानी और कीटनाशक के मालिक तो कारपोरेट काफ़ी हद तक पहले ही बन चुके हैं। खेती के पैदावर के देशी-विदेशी बाज़ार पर पहले ही कारपोरेट अपना नियंत्रण कर चुके हैं। अब सरकारे…

विवके तिवारी की हत्या के साथ उन 56 भाईयों की हत्या पर एक शोकगीत,जिन्हें यूपी पुलिस ने पिछले 10 महीनों में अपराधी कहकर मार डाला

By: Siddharth Ramu विवेक तिवारी आपकी हत्या पर जरूर दुख और अफसोस किया जान चाहिए, मुझे भी है। आपकी पत्नी कल्पना और आपकी मासूम बच्ची के आंसू किसी को भी रूलाने के लिए पर्याप्त हैं, लेकिन यही उचित समय है जब उन 56 नौजवानों के लिए भी रो लिया जाए, जिन्हें अपराधी कहकर उत्तर प्रदेश पुलिस ने पिछले 10 महीनों में मार डाला। क्या उनके लिए सिर्फ इसलिए न रोया जाए कि क्योंकि उनके नाम के आगे तिवारी नहीं लगा था, या विश्व कि सबसे नामी गिरामी कंपनी के एप्पल के एरिया मैंनेजर नहीं थे या वे उत्तर प्रदेश की राजनधानी में नहीं रहते थे या उनका चेहरा…

ताऊ देवीलाल: भारतीय सियासत का अनूठा चेहरा

दो बार हरियाणा के मुख्यमंत्री (77-79 & 87-89) और दो बार भारत के उपप्रधानमंत्री (वीपी सिंह और चंद्रशेखर के कार्यकाल में, 89-91) रहे देश के बड़े किसान नेता ताऊ देवीलाल जी (25 सितंबर 1915 - 6 अप्रैल 2001) की आज जयन्ती है। चौधरी देवीलाल की तुनकमिजाजी के बावजूद बिहार उनका सदा ऋणी रहेगा कि उन्होंने 90 के दशक में बिहार को एक ऐसा मुख्यमंत्री दिया जिन्होंने वंचितों को उच्च शिक्षा से जोड़ने के लिए पांच विश्वविद्यालय खोला। वे शरद जी को बहुत मानते थे और पहली बार केंद्र में कैबिनेट मंत्री (कपड़ा मंत्री) बनवाया और लालू प्रसाद के विधायक…

चंद्रशेखर रावण: हर रिहाई का मतलब आजादी नहीं होती

By- Santosh Yadav विमर्श। हंगामा और सियासत तो होनी ही थी। आखिरकार यह चंद्रशेखर रावण की रिहाई का मामला है। वहीं चंद्रशेखर रावण जिन्होंने उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में जहां ठाकुरों का घोषित और अघोषित दोनों राज कायम है, वहां 'द ग्रेट चमार' का नारा बुलंद किया। जाहिर तौर पर उनके उपर से रासुका हटाने का मामला इतना आसान नहीं है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आखिर क्यों भला रातों-रात चंद्रशेखर रावण के उपर से रासुका हटाने का निर्णय लिया? क्या उन्हें कोई सपना आया था जो आधी रात के बाद चंद्रशेखर को रिहा किया गया? क्या योगी सरकार इस बात से…

कृष्‍ण और यादवों का ब्राह्मणीकरण

By- चंद्रभूषण सिंह यादव इस देश की पिछड़ी जातियों में शुमार अहीर व यादव कृष्ण को अपना पूर्वज मानते हैं। इस जाति के बीच कृष्ण का नायकत्व ऐसा है कि अहीर और कृष्ण पर्यायवाची बन गए हैं। हिन्दू धर्मग्रंथों में इस यादव नायक का नाम कृष्ण, श्याम, गोपाल आदि आया है, जो यादवों के शारीरिक रंग एवं व्यवसाय से मेल खाने वाला है। बहुसंख्यक यादव सांवले या काले होते हैं, जो कि इस देश के मूल निवासियों अर्थात् अनार्यों का रंग है, के होंगे, तो निश्चय ही इनके महामानव या नायक का नाम कृष्ण या श्याम होगा, जिसका शाब्दिक अर्थ काला, करिया या करियवा होगा।…

ओबीसी आयोग : संवैधानिक अधिकार के नाम पर मिला झुनझुना

By- संतोष यादव संसद में यह कानून पारित हो चुका है कि राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को अनुसूचित जाति अायोग और अनुसूचित जनजाति आयोग के जैसे ही संवैधानिक अधिकार मिले। यानि यह एक मुकम्मल आयोग बने जिसके पास दांत और नाखून दोनों हों। केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत ने भी यही कहा जब वे इस कानून को संसद में पेश कर रहे थे। लेकिन अब कानून का जो स्वरूप सामने आया है वह महज ओबीसी को ठगने के लिए झुनझुना से अधिक कुछ भी नहीं है।   इस बारे में सामाजिक न्याय को लेकर पिछले 7 दशकों से सक्रिय भारत सरकार के पूर्व नौकरशाह पीएस कृष्णन ने सवाल उठाया है।…