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ब्राह्मण द्विज पुरुष खुद को प्रगतिशील कहने के पहले ये करे

BY_Dr. Manisha Bangar ब्राह्मण सवर्ण पुरुषों ने आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर फेमिनिस्ट का चोला पहनकर ज्ञान बाटने और खुद महिलाओं से भी दो कदम ज्यादा क्रांतिकारी बताने के बजाय ' ब्राह्मण ' होना ही कितना क्रूर है ये बताना ज्यादा ठीक होगा. ब्राह्मण शब्द ही असमानता , वर्चस्व, दमन का सूचक है इस बात को गांव गांव, शहर शहर, गली गली, हर मुलाकात, हर वार्तालाप, हर भाषण, हर मजलिस में बताना शुरू करे. ये शब्द और इससे जुड़ा दमनकारी वर्चस्व एक कबिलाई आक्रमणकारी अमानवीय असभ्य गुट की खुराफात है जो आज भी बरकरार है ये बताना होगा.

महिला दिवस पर डॉ. मनीषा बांगर का भारतीय महिलाओं को संदेश

BY_Dr. Manisha Bangar आप सभी को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की बधाई ! खैर, कहने की आवश्यकता नहीं है कि महिलाओं की दास्तां केवल यहाँ पनप रही ब्राह्मणवादी विचारधारा से है जो सहूलियत के अनुसार संस्कृति या परंपरा के नाम पर खुद के लिए आहार और पोषण प्राप्त करती रही और इस बहाने खाद पानी न मिलने पर धर्म के नाम पर दिमागों पर कोड़े बरसते रही. इस विचारधारा ने एक व्यवस्था बनायीं उसमे में से बने रीती रिवाज़ साहित्य और संघठन जिन्होंने अपने पर इस दमनकारी षड़यंत्र को अमलीजामा पहनाने का जिम्मा ले लिया . ये सभी मिलकर पुरुषों के मस्तिष्क और

Delhi Violence: Genesis of Carnage

BY_ Ram Puniyani They say ‘history repeats itself first as a tragedy and then as a farce’. In case of India, communal violence not only keeps repeating itself, the pattern of the tragedy keeps changing every next time. Some features of the violence are constant, but they are under the wraps mostly. The same can be said about the Delhi violence (February 2020). The interpretations, the causative factors are very discernible, but those who are generally the perpetrators have a knack of shifting the blame on the victim

यस बैंक की चपेट में मंदिर, बैंक में फंसे 592 करोड़ रुपये

यस बैंक आर्थिक मंदी से जूझ रहा है जिसके कारण बैंक के शेयर में लगभग 85 फिसदी गिरावट आई है. बैंक की स्थिती को ध्यान में रखते हुए RBI ने 50,00 रुपये निकालने की सीमा रखी है. लोगों के बीच इस मामले को लेकर उथल-पुथल मची हुई है. लेकिन अब ताज्जुब वाला मामला यह है कि यस बैंक के इस संकट की चपेट में इंसान ही नहीं बल्कि भगवान भी आ गए हैं. यस बैंक में पुरी के सदियों पुराने भगवान जगन्नाथ मंदिर का 545 करोड़ रुपया फंस गया है. बैंक में मंदिर का पैसा फंसने से पुजारी और श्रद्धालु चिंतित हैं. जिसके बाद इन लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र

सत्ताधारी सरकार की एक और मनमानी, 2 मलयाली न्यूज बैन

क्या सरकार अपनी सत्ता में सही लोगों के साथ अन्याय करती रहेगी ? क्या सही खबरे जनता तक पहुंचाना गलत है ? क्या सही काम करने की कीमत चुकानी पड़ेगी ? जी हां ऐसे ही एक सही काम करने की कीमत दो न्यूज चैनल को उनके चैनल बंद करके चुकानी पड़ी है. सरकार ने मलयाली न्यूज चैनल एशियानेट और मीडिया वन न्यूज को दंगे की कवरेज दिखाने पर बैन कर दिया है. दोनो ही न्यूज चैनल पर यह आरोप था कि वे एकतरफा न्यूज दिखा रहे है. बता दें कि चैनलों का प्रसारण 6 मार्च की शाम से अगले 48 घंटों के लिए रोक दिया गया है. मंत्रालय ने ऐसा इसलिए किया क्योकि दोनों

हिन्दू शब्द भारत के अल्पजन जन्मजात शोषक वर्ग का सुरक्षा कवच है

हिन्दू कौन ?अंबेडकरवादी और मुस्लिम लिबरल अक्सर हिंदुओं की आलोचना करते रहते हैं। लेकिन ऐसे लोगों से जब कोई प्र्तिप्र्श्न करते हुये पूछता है कि हिन्दू कौन? वे बगले झाँकने लगते हैं। जवाब भी देते हैं तो मुझे उनपर करुणा ही होती है। वास्तव मे हिन्दू कौन, इसका सटीक उत्तर सामने आना जरूरी है। क्योंकि ' हिन्दू' शब्द की आड़ मे ही भारत का अत्यंत अल्पजन जन्मजात शोषक वर्ग खुद को प्रोटेक्ट करने मे सफल हो जाता है: हिन्दू की सही समझ न होने के कारण ही गैर-हिन्दू उन लोगों को भी टार्गेट कर लेते हैं, जो वास्तव मे हिन्दू नहीं हैं। यह सही है कि

हामिद अंसारी का पीएम मोदी पर वार, कहा-हिंसा रोकने की कोशिश नहीं की

CAA और NRC को लेकर बीते कई महीनों से लगातार विरोध प्रदर्शन चल रहे है. जिसके बाद शाहीन बाग में भी जमकर आंदोलन हुए. जाफराबाद में भी महिलाओं ने प्रदर्शन किया. जिसके बाद दो गुट समर्थकों और विपक्षों के बीच तीखी झड़प हुई. भारत की राजधानी में उग्र प्रदर्शन हुए जिससे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा. आंदोलनकारियों ने सरकारी संपत्ति को आग के हवाले किया. गाड़ियों में तोड़-फोड़ की और उत्तरी पूर्वी दिल्ली में जान माल के भी काफी नुकसान हुए. जिसके बाद दुनिया भर में केंद्र सरकार का घेराव किया गया है. सरकार पर आरोप लगाया

75 मामलों का आरोपी भाजपा नेता फंसा बलात्कार के मामले में

महाराष्ट्र में भाजपा के सत्ता से हटने के बाद से उसके नेताओं और विधायकों के काले कारनामे सामने आने लगे हैं। इसकी चपेट में पूर्व विधायक नरेंद्र मेहता भी आ गया है जिसके ऊपर बलात्कार का आरोप था लेकिन सत्ता के कारण वह बचता आ रहा था। अब शिवसेना-एनसीपी और कांग्रेस की सरकार आई तो महिला की शिकायत पर मेहता और उसके साथी के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज किया गया है और मेहता भागा-भागा फिर रहा है। गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वाले नरेंद्र मेहता पर करीब 75 मामले दर्ज हैं जिनका जिक्र उसने 2019 के विधानसभा चुनाव के नामांकन के साथ दिए शपथपत्र

नागौर के बहुजन युवक ने बताई अपनी आपबीती

बीते महीने ही राजस्थान के नागौर से एक सनसनीखेज मामला सामने आया था. जहां एक बहुजन युवक के साथ बर्बरता की गई. चोरी के आरोप में बहुजन युवक के गुप्तांग में पेट्रोल डाल दिया गया. गौरतलब है कि बीते 16 फरवरी को 24 वर्षीय विसाराम के साथ इस बर्बरता को अंजाम दिया गया. चोरी के इल्ज़ाम में घंटों तक इनके साथ बर्बरता से मारपीट की गई और उनके गुप्तांग में पेट्रोल डाला गया.जिसके बाद इस खौफनाक घटना की वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई. इस वीडियों को देखते ही देखनेवालों के पैरों तले जमीन खिसक गई. हर कोई हैरान परेशान था, कि कोई किसी

दिल्ली से सटे गुरुग्राम में भी हिंसा की संभावना

बीते कई दिनों से भले ही राजधानी दिल्ली बुरी तरह से झुलस रही हो लेकिन इससे सरकार, कानून और प्रशासन को कोई फर्क नही पड़ रहा है. उनकी नींद तो अब भी नही टूटी है. लगातार ऐसे विरोध को नजरअंदाज किया जा रहा है. जिससे देश के हालात बेकाबू हो गए है. ऐसे में 42 जाने जा चुकी है और दर्जनों से ज्यादा लोग घायल हो चुके है. इन सबके बाद प्रशासन और सरकार को जहां चौकन्ना हो जाना चाहिए वहीं सरकार और ज्यादा लापरवाह हो चुकी है. इसके बाद दिल्ली के साथ-साथ अब गुड़गांव से भी खबर आई है कि वहां मार्च निकाला गया और भडकाऊ नारे लगाए गए. नारेबाजी में