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منيشا بانگر’ ايک تعرف

دوسرا سوال - آپ پيشے سے ڈاکٹر ہيں اور ساتھ ہی ايک سياسی رہنما بهی۔ کاليج کے دن اور موجودا مصروفيات کے بارے ميں بتائں۔ جواب - ابتدائي تعليم کے بعد ايم بی بی ايس کيا اور ايم ڈی بهی کيا۔ اسکے بعد پی جی آئی چنڈیگڑھ سے ڈی ايم (ڈاکٹريٹ ان ميڈِسن) کيا۔ يہ سارا وقت يوں تو پڑھائی ميں گزرہ ليکن يہی وه وقت بهی تها جب میں سماجی معاملات کو زمينی شکل ميں ديکھنے سمجهنے لگی تهی۔ وہ تمام مشکلات جنکا سامنا مجھے نہيں کرنا پڑا تها انکا سامنا کرتے ہوۓ نوجوانوں کو ديکهتی تهی۔ چهوآ چھوت عروج پر تھی۔ مزہب اور قوم کے نام پر لوگوں…

मनीषा बांगर, एक तअर्रुफ़

1942 में होने वाली कॉन्फ़्रेंस पसमांदा और बहुजन मआशरे के हक़ में बड़ी पहल थी। और इस कॉन्फ़्रेंस में औरतों के हुक़ूक़ के मुतल्लिक़ भी कई मुद्दों पर बात हुई। उस वक़्त काँग्रेस और महात्मा गांधी एक तरफ़ थे और मुख़्तलिफ़ ख़यालात रखते थे। यअनी औरतों के पढ़ने लिखने की तो वकालत करते थे लेकिन चाहते थे के वो काम मर्दों की क़यादत में ही करे। और महात्मा गांधी ने ख़ुद भी औरतों का इस्तेहसाल ही किया है 'हक़ की तलाश' के नाम पर। दांडी मार्च के दौरान भी औरतों का काम गांधी के पीछे पीछे चलना और उनकी मद्हो सना करना ही होता था। और एक जानिब जो…

منيشا بانگر’ ايک تعرف

۱۹۴۲ ميں ہونے والی کانفرينس پسماندہ اور بہوجن معاشره کے حق ميں ہونے والی بڑی پہل تهی۔ اور اس کانفرينس ميں عورتوں کے حقوق کےمتعلق بهی کئی مدعوں پر بات ہوئی۔ اس وقت کانگريس اور مہاتمہ گاندهی ايک طرف تهے اور مختلف خيالات رکهتے تهے۔ يعنی عورتوں کے پڑهنے لکھنے کی تو وکالت کرتے تهے ليکن اسے کام مردو کی قيادت ميں ہی کرنا ہوگا۔ اور مہاتمہ گاندھی نے خود بهی عورتوں کا استحصال ہی کيا ہے 'حق کی تلاش' کے نام پر۔ دانڈی مارچ کے دؤران بهی عورتوں کا کام گاندھی کے پيچھے پيچهے چلنا اور انکی مدح و ثنا کرنا ہی ہوتا تها۔ اور ايک…

मनीषा बांगर, एक तअर्रुफ़

मनीषा बांगर आज के वक़्त में एक जाना माना नाम है जो जाना जाता है अपनी मुख़्तलिफ़ सामाजी ख़िदमात की वजह से और जिस तरह अपना पूरा वक़्त दिया दिया एक ऐसे मआशरे को जिसके हक़ में बोलने वाले गिने चुने लोग ही थे। आज के वक़्त में मनीषा बांगर एक नाम भर नहीं रह गया है बल्कि एक आवाज़ बन गया है। आवाज़ उन दबे कुचले लोगों की जो आज़ादी के बाद भी आज़ाद नहीं हो सके हैं। जिनके पैरों में मज़हब की बेड़ियां तो गले में क़ौम की ज़ंजीर पड़ी हुई है। जिनकी बहुत सतही और बुनियादी ज़रूरतें भी पूरी नहीं की जा रहीं। जिनकी दस्तरस में तअलीम, सेहत…

तबरेज़ अंसारी, भीड़ का शिकार

भारत में भीड़ कितनी बेकाबू हो चुकी है इसके उदाहरण आये दिन देखने को मिलते ही रहते हैं। कभी किसी को धर्म के नाम पर मार दिया जाता है तो किसी को गाय के नाम पर। किसी को मनहूस बता कर मार दिया जाता है तो किसी को चोरी के इल्जाम में क़त्ल कर दिया जाता है। भीड़ का ताज़ा शिकार हुए झारखंड के तबरेज़ अंसारी जिन्हें सात घंटे तक खंबे से बांध कर इतना पीटा गया कि उसकी मौत हो गयी। उसे इतनी बेदर्दी से इसलिए पीटा गया क्योंकि लोगों को शक था कि उसने कोई मोटरसाईकल चुराई है। जब ये पता चला कि उसका नाम तबरेज़ है तो उससे जबरन जय श्री राम बुलवाया गया…

تبريز انصاری’ بهیڑ کا شکار

ہندوستان ميں بهيڑ کتنی بے قابو ہو چکی ہےاسکی مثاليں آۓ دن ديکهنے کو مل جاتی ہيں۔ کبهی کسی کومزہب کے نام پر سرعام مار ديا جاتاہےتوکسی کو قوم کے نام پر۔ کسی کو منحوس یا ڈائن بتا کرمار ديا جاتا ہےتو کسی کو چورکہہ کر مار ديا جاتا ہے۔ بهيڑ کا ايک اورشکار ہے جهارکهنڈ کا تبريز انصاری جسے چوری کے الزام ميں سات گهنٹے تک کهمبے سےباندھ کر اتنا پیٹا گیا کہ اسکی موت ہو گئی۔ اور نہ صرف اسے پیٹا گیا بلکہ جب لوگوں کو پتا چلا کہ وہ مسلمان ہے تو اس سے جبرًا جے شری رام کے نارے لگواے گيے۔ يقيناً ائسا کرنے سے رام خوش ہوۓ ہونگے۔…

कैसे होगा जाति का विनाश? कैसे भारत सभ्य बनेगा?

By- संजय श्रमण जोथे   जाति विनाश अगर सवर्णों से अपेक्षित है तो ये व्यर्थ का प्रोजेक्ट है। लेकिन जाति विनाश SC/ST-पिछड़ों से अपेक्षित है तो इस प्रोजेक्ट से बहुत उम्मीद की जा सकती है। जाति विनाश कैसे होगा? इसकी विस्तार से चर्चा करने से पहले दो वक्तव्य याद रखिये। एक बार किसी ने...महान आयरिश लेखक, विचारक और नाटककार जार्ज बर्नार्ड शॉ से पूछा था कि नेता कौन होता है? जार्ज बर्नार्ड शॉ ने...मजाकिया अंदाज में चुटकी लेते हुए बताया कि “भीड़ जिस दिशा में जा रही हो उसी दिशा में झंडा उठाकर सबसे आगे हो लेने वाला ही नेता होता है।” दूसरा…