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कैसे होगा जाति का विनाश? कैसे भारत सभ्य बनेगा?

By- संजय श्रमण जोथे जाति विनाश अगर सवर्णों से अपेक्षित है तो ये व्यर्थ का प्रोजेक्ट है। लेकिन जाति विनाश SC/ST-पिछड़ों से अपेक्षित है तो इस प्रोजेक्ट से बहुत उम्मीद की जा सकती है। जाति विनाश कैसे होगा? इसकी विस्तार से चर्चा करने से पहले दो वक्तव्य याद रखिये। एक बार किसी ने...महान आयरिश लेखक, विचारक और नाटककार जार्ज बर्नार्ड शॉ से पूछा था कि नेता कौन होता है? जार्ज बर्नार्ड शॉ ने...मजाकिया अंदाज में चुटकी लेते हुए बताया कि “भीड़ जिस दिशा में जा रही हो उसी दिशा में झंडा उठाकर सबसे आगे हो लेने वाला ही नेता होता है।” दूसरा…

मोदी सरकार इस काम को अंजाम दे, तो हो जाएगा देश का हर तपका खुशहाल

By- Siddharth Ramu ~ सभी बुनियादी समस्याओं का समाधान देश के खरबपतियों पर 1 प्रतिशत संपत्ति कर एवं विरासत कर लगा कर किया जा सकता है? क्या आप यह तथ्य जानते हैं? नहीं जानते हैं, तो जरूर जान लीजिए, क्योंकि देश के बहुसंख्यक जनता की जिंदगी से जुड़ा प्रश्न है? यदि देश के सभी बिलनेयरों की संपत्ति पर 1 प्रतिशत कर लगा दिया जाए और प्रतिवर्ष अपने वारिसों को संपत्ति हस्तांतरित करने वाले 5 प्रतिशत बेलनेयरों पर विरासत टैक्स लगा दिया जाए तो देश की व्यापक जनता की सभी बुनियादी समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। देश के सभी बिलनेयरों की कुल…

आर्टिकल 15 -समता के लिफाफे में गैरबराबरी के विपरीत मजमून के साथ पेश की गई फिल्म

By ~ संजीव चंदन, अर्टिकिल 15 : सदाशयी गांधीवाद , सांगठनिक बहुजन प्रतिरोध का नकार और जाति-उत्पीड़न का कल्पनारहित व्यवसायिक दोहन अर्टिकिल 15 बदनीयत से बनी या लिखी फ़िल्म न भी हो तो भी एक आउटसाइडर की ऐसी सदिच्छा से बनी फ़िल्म है जिसे न अपने टारगेट समाज की समझ है और न उसके पास वह कल्पनाशीलता है, जिससे पीड़ा और संघर्ष की वास्तविकता की कल्पना भी कर सके। यह विशुद्ध व्यवसायिक दोहन के लिए बनी फिल्म है-जिसने हाल में घटी बलात्कार और बहुजन उत्पीड़न की घटनाओं का कोलाज एक स्थान विशेष में बनाकर चमत्कार पैदा करने की कोशिश की है। आइये फ़िल्म के…

कॉलेजियम सिस्टम के खिलाफ बोलने लगे न्यायधीश

By- Rama Shankar Ram ~ न्यायपालिका के अंदर से ही अब जवाबदेही और पारदर्शिता की आवाज उठने लगी है। इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायाधीश रंगनाथ पांडेय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर न्यायपालिका में व्याप्त विसंगतियों से अवगत कराया है। उन्होंने कोलेजियम व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया, 'हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति में परिवारवाद और जातिवाद का बोलबाला है। यहां न्यायाधीश के परिवार का सदस्य होना ही अगला न्यायाधीश होना सुनिश्चित करता है।' ध्यान रहे कि कोलेजियम व्यवस्था में बदलाव को लेकर एक…

डॉ मनीषा बांगर एक शानदार समर्पित शख्सियत…

By- Dr. Jayant Chandrapal मुझे नहीं लगता की मनीषाजी की शख्शियत आज किसीके द्वारा दी गई पहचान की मोहताज है... उनके विचार, उनके कार्य, उनके आन्दोलन ने ही उनकी शख्सियत को समाजजीवन में उभारा है. आज सोशल मीडिया के जमाने में लोग जब हवा-हवाई में वाह वाही लूटने की फ़िराक में लगे रहते है; जिनका जमीनी स्तर पर कुछ भी कॉन्ट्रिब्यूशन नहीं होता ऐसे समय में मनीषाजी हमें दिखाई देती है जमीनी स्तर पर गुर्राते हुए आन्दोलन करती हुई... वह हमें नज़र आती है... कभी स्त्री सन्मान पर तो कभी मूलनिवासी पहचान पर बहुजन आन्दोलन पर राजनितिक वर्तमान पर धर्म…

जाति है कि जाती नहीं…

-चन्द्रभूषण सिंह यादव ~ उफ यह जाति कितनी क्रूर,मगरूर,बेशऊर है कि इसकी गिरफ्त में आया तथाकथित अभिजात्य व्यक्ति जालिमाना,बहशियाना,जंगलीपना स्वभाव का हो जाता है तो सोकाल्ड अवर्ण मेमने की तरह मिमियाता, थरथराता,कंपकपाता नजर आता है। देश मे रामराज्य परिषद वाले साथियो की सरकार प्रचंड मत से सत्तासीन हो चुकी है।विजय के बाद सोकाल्ड पिछड़े प्रधानमंत्री मोदी जी ने अपने प्रथम सम्बोधन में कहा है कि देश मे अब केवल दो जातियां रहेंगी एक गरीब की और दूसरी गरीबो की मदद करने वालों की।यदि ऐसा है तो मृत डॉ पायल तड़वी किस जाति की मानी जायेगी?डॉ पायल…

मनीषा बांगर, एक परिचय

मनीषा बांगर आज के समय में एक जाना माना नाम है जो जाना जाता है अपनी अनेकों सामाजिक गतिविधियों के कारण। और जिस प्रकार अपना पूर्ण जीवन दे दिया एक ऐसे समाज को जिसके पक्ष में बोलने वाले गिने चुने लोग ही थे। आज के समय में मनीषा बांगर एक नाम भर नहीं रह गया है बल्कि एक आवाज़ बन गया है। आवाज़ उन दबे कुचले लोगों की जो आज़ादी के बाद भी आज़ाद नहीं हो सके हैं। जिनके पैरों में मज़हब की बेड़ियां तो गले में जाति की ज़ंजीर पड़ी हुई है। जिनकी बहुत सतही और बुनियादी ज़रूरतें भी पूरी नहीं की जा रहीं। जिनके पास शिक्षा, स्वास्थ और रोज़गार…

منيشا بانگر’ ايک تعارف۔

منيشا بانگر آج کے وقت ميں ايک جانا مانا نام ہے۔ جو جانا جاتا ہے اپنی تمام سماجی خدمات کے ليے۔ اور جس طرح سے اپنی زندگی کو وقف کر ديا اس معاشرہ کے ليے جس کی آواز اٹھانے والا کویٔی نہيں تھا۔ منيشا بانگر سرف ايک نام بهر نہيں ره گیا ہے بلکہ آواز بن گیا ہے' آواز ان دبے کچلے لوگوں کی جو آزادی کے بعد بھی آزاد نہيں ہو سکے ہيں۔ جنکے پاؤں ميں مزہب کی بيڑياں تو گلے ميں جاتی کا طوق پڑا ہؤا ہے۔ جنکی بنيادی ضرورتوں يعنی صحت' روزگار اور علاج پر بهی بات کرنے والا کوئی نہيں ہے۔ اور جو انکے ليے آواز اٹهاتا ہے اسکی آواز دبانے کی ہر…

Supreme Court orders UP government to pay dues to Dr Khan

In what is being seen as a source of relief for Gorakhpur's Dr Kafeel Khan and his family, a double bench of the Hon’ble Supreme Court of India comprising Justice Sanjay Kishan Kaul and Justice Indira Banerjee has ordered timely conclusion of the enquiry regarding his suspension. Dr. Kafeel Khan- the suspended Assistant Professor, Department of Paediatrics, at BRD Medical College, Gorakhpur- and further directed the Yogi Govt. to pay all the subsistence allowance to Dr. Kafeel Khan pending since his suspension. The Allahabad…

कौन है आतिश तासीर? जिसने दुनिया को 2019 के मोदी से पहचान कराई

~ उर्मिलेश हिन्दी के न्यूज चैनल कृपया हिन्दी भाषी समाज को ग़लत सूचना यानी फेक न्यूज मत परोसिए! टाइम मैगजीन की कवर स्टोरी: 'India's divider in chief' के लेखक आतिश तासीर पाकिस्तानी नहीं हैं। कुछ चैनल इस तरह की झूठी सूचना प्रसारित कर रहे हैं! आतिश भारत की वरिष्ठ पत्रकार तवलीन सिंह के सुपुत्र हैं। तवलीन को मीडिया और सियासी हलके में बीते पांच-छह सालों से मोदी जी और उनकी ज्यादातर नीतियों का समर्थक माना जाता है। तासीर के पिता सलमान तासीर एक पाकिस्तानी सियासतदां थे। बाद के दिनों में तवलीन और सलमान तासीर अलग-अलग हो गए! सलमान तासीर…