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Raju Kamble: An ideal follower of Babasaheb Ambedkar

By-Mangesh Dahiwale New dehli: As the news is pouring in, Raju Kamble breathed his last at 2.10 am in Vancouver, Canada. His death is a great loss to the Ambedkarite movement. When the international reach of Ambedkarites was limited only to a few immigrants from Punjab to the western hemisphere, it was Raju Bhau, as we fondly called him, who spanned the North America, Europe, Middle East, and South East Asia to build what is now known as Ambedkar International Mission (AIM). His grasp of the philosophy of Babasaheb Ambedkar…

अम्बेडकर अंतर्राष्ट्रीय मिशन (AIM) के संस्थापक राजू कांबले सर का वैंकुवर कनाडा में निधन

नई दिल्ली। हम-आप जैसी बेहद सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाले राजू काम्बले जी ने "शिक्षित हो, संघर्ष करो, संगठित हो" के नारे को आत्मसात कर बहुत संघर्ष कर प्रोफेशनल और सोशल लाइफ में बुलंदियों को छुआ। वे आजीवन बाबासाहेब अम्बेडकर के विचारों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने के साथ-साथ अलग-अलग देशों में फैले दलितों को यूनिट के लिए उन्होंने आजीवन प्रयास किया। बहुत ऊंचाईयों पर पहुँचने पर भी वे कभी अपने समाज से नहीं कटे बल्कि समाज के लिए समर्पित रहे और ग्राउंड पर जाकर दलित एक्टिविज़्म के लिए कार्य किया। उन्होंने भारत के हर एक…

राष्ट्रध्वज ‘तिरंगा’ नहीं ‘चौरंगा’ है, पढ़कर समझिए?

नई दिल्ली। असलियत में भारत का राष्ट्रीय ध्वज 4 रंगों का होता है, न कि 3 का। यह तीन (केसरिया, सफेद और गहरे हरे) रंग की क्षैतिज पट्टियों के बीच नीले रंग के एक चक्र, जिसमें 24 तीलियाँ या आरे होते हैं, द्वारा सुशोभित है। नीले रंग के चक्र को सारनाथ स्थित अशोक स्तंभ से लिया गया है। इस राष्ट्रीय ध्वज को 22 जुलाई 1947 को आयोजित भारतीय संविधान सभा की बैठक में अपनाया गया था। उपर्युक्त विवरण से निसंदेह स्पष्ट है कि हमारे राष्ट्रीय ध्वज में चार रंग विद्यमान हैं केसरिया, सफेद, नीला और हरा। लेकिन फिर भी 71 साल से इसे जानबूझकर तिरंगा ही…

भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के बारे में डॉ. आंबेडकर की क्या राय…

आजादी से 1 वर्ष पहले 1946 में डॉ. आंबेडकर ने लिखा कि “ हिंदुओं और मुसलामनों की लालसा स्वाधीनता की आकांक्षा नहीं हैं. यह सत्ता संघर्ष है,जिसे स्वतंत्रता बताया जा रहा है.. कांग्रेस मध्यवर्गीय हिंदुओं की संस्था है, जिसकों हिदू पूंजीपतियों की समर्थन प्राप्त है, जिसका लक्ष्य भारतीयों की स्वतंत्रता नहीं, बल्कि ब्रिटेन के नियंत्रण से मुक्त होना और सत्ता प्राप्त कर लेना है, जो इस समय अंग्रेजों की मुट्ठी में हैं.” ( डॉ, आंबेडकर, संपूर्ण वाग्यमय, खंड-17, पृ.3 ). मुसलमान... मध्यवर्गीय हिंदुओं के वर्चस्व से मुक्ति के लिए अलग…

क्या वाकई में भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा है..?

किसी भी बात को अपने तर्क-विवेक और संशय आधारित वैचारिकता से बिना परखे अनुकरण करना हानिकारक हो सकता है। भारत में आजकल राष्ट्रवाद का झंडा लिए घूम रहे तथाकथित राष्ट्रवादी तरह तरह के नारों से राष्ट्रवाद का प्रचार कर रहे है। हर भारतीय को वे शक की नज़रों से देख रहे है। उनके राष्ट्रवाद की परिभाषा के मुताबिक़ अगर आप राष्ट्र के सवंविधानिक मूल्यों का आदर करते है लेकिन तथाकथित 'भारत माता' के नारे नहीं लगाते, या पड़ोसी मुल्क को गालियाँ नहीं देते है, तो आप उनकी नज़रों में राष्ट्रवादी नहीं बल्कि देशद्रोही माने जाएँगे! देश के हर…

लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज

क्या आपने कभी सोचा है कि देश के स्वंत्रता दिवस यानि 15 अगस्त को प्रधानमंत्री दिल्ली लाल क़िला पर ही क्यों राष्ट्रिय ध्वज फहराते हैं ? किसी अन्य ऐतिहासिक ईमारत या कोई बड़ी आधुनिक शासकीय बिल्डिंग या अपने कार्यालय पर ही क्यों नहीं ? 15 अगस्त पर लाल क़िले पर राष्ट्रिय ध्वज फहराए जाने के पीछे जन भावनायें, लाल क़िला का देश की सार्वभौमिकता और सम्प्रभुता का प्रतीक होना, ऐतिहासिक घटनाक्रम और सामाजिक मान्यताएँ हैं। किसी भौगोलिक क्षेत्र या जन समूह पर सत्ता या प्रभुत्व के सम्पूर्ण नियंत्रण पर अनन्य अधिकार को सम्प्रभुता (Sovereignty) कहा…

Why IIT students were unhappy when PM Narendra Modi was invited as Chief Guest of Convocation?

*Statement of IIT Bombay Students Against Invitation of Narendra Modi in Convocation” As IIT Bombay students, we are proud that this institution has now stepped in its Diamond Jubilee year and has occupied a prominent place among the other well-known institutes of learning in this world. However, invitation of Mr. Narendra Modi, the prime minister of India, as a guest of honour in the convocation of this year, has raised some concerns among several students which we would like to share with the larger body of students,…

मुजफ्फरपुर कांड: भूमिहार बेदाग, कुशवाहों को कलंक!

By- Santosh Yadav मामला मुजफ्फरपुर सामुहिक बलात्कार कांड से जुड़ा है। इस मामले में ब्रजेश ठाकुर(भूमिहार) किंगपिन हैं। लेकिन इसका सारा दोष कुशवाहा जाति से संबंध रखने वाली पूर्व मंत्री मंजू वर्मा के माथे मढ़ दिया गया। यह विश्वास करने योग्य नहीं है कि बजेश ठाकुर केवल पूर्व मंत्री के पति को ही लड़कियां सप्लाई करता होगा। हालांकि अब इस मामले की जांच पटना हाईकोर्ट की निगहबानी में सीबीआई कर रही है, लिहाजा सनसनीखेज खुलासों के लिए बिहार की जनता को तैयार रहना चाहिए। बहरहाल बिहार सरकार में शामिल भूमिहार जाति के साझेदारों ने पूरे मामले…

जन्मदिन विशेष: अगर फूलनदेवी को भारत रत्न से सम्मानित किया जाता तो आज बलात्कारियों के इतने हौसले बुलंद न होते!

विश्व इतिहास की श्रेष्ठ विद्रोही महिलाओं की सूची में “टाइम मैगजीन” ने फूलन देवी को चौथा स्थान दिया था। लंदन का ‘गार्डियन’ न्यूज़पेपर भारत के प्रधानमंत्री के मरने तक पर स्मृति लेख नहीं छापता, वह फूलन देवी पर बड़ा सा स्मृति लेख छाप चुका है। आज अमेरिका से लेकर ब्रिटेन में फूलन देवी का सम्मान किया जा रहा है। 'टाइम मैगजीन' से लेकर 'गार्डियन' न्यूज़पेपर तक में उनके नाम का डंका बज चुका है। भारत से ऐसा सम्मान पाने वाली फूलन अकेली महिला है। फूलन देवी ने पुरुष और जाति सत्ता से प्रतिशोध का जो तरीका चुना वो हिंसक होते हुए भी ग़लत नहीं लगता…

विश्व मूलनिवासी दिवस: हमारी विरासत, संस्कृति, पहचान और अधिकारों का दिवस।

By- DR. Manisha Bangar आज  9 August अर्थात विश्व मूलनिवासी दिन है आज यह दिन विरासत और संस्कृति को याद करने का दिन है। सदियों से खोई हुई पहचान को उजागर करने का  दिन है | अधिकार दिवस भी है | यह हमारी आन-बान और शान का दिन है | हमारे गर्व और गौरव का दिन है | हमारे लिये हर्षोल्लास का दिन  है | खूब नाचो खूब गाओं जश्न मनाओ | मैं भी तो पिछले कुछ दिनों से शासक जातियों से,  शेठजी-भट्टजी से विदेशी आर्यों से सवाल करते हुए, बार बारगुनगुना रहीं हूँ एक गीत... “तुम इतना क्यूँ घबरा रहे हो क्या डर है जिसको छुपा रहे हो” क्योंकि पूरी दुनिया जब…