Browsing Category

World

भारत में #Me Too अभिजात्य वर्ग का गेम है…

By-Dr Jayant Chandrapal आम समाज केवल प्रेक्षक है, आपको बता दें कि भारत के बाहरी मामलों (External Affairs) के मंत्री एम. जे. अकबर उर्फ़ मोबासर जावेद अकबर भी अब इस अंतर्राष्ट्रीय अभिजात्य गेम #MeToo में शामिल कर लिए गए है। और इस तरह से वे अपने ही आंतरिक मामलों (Internal Affairs) को सम्हालने में उलझ गए है। इसके पहले बॉलीवुड के नाना भी किसी को पटाकर एक लफड़े में इस गेम में अपना नामांकन करवा चुके है और अपने ही कद को नाना (गुजराती अर्थ “छोटा”) कर चुके है। और भी सेलिब्रिटीज है जैसे की आलोक नाथ, सुभाष घई, अभिजीत भट्टाचार्य, साजिद खान,…

क्या सम्राट अकबर को ब्राह्मणों ने विष्णु अवतार घोषित किया था ?

मुग़ल सम्राट अकबर को लेकर आज तगड़ा भ्रम फैला है | पुराने इतिहासकारों ने उसे धार्मिक रूप से सहिष्णु व सबको साथ लेकर चलने वाला महान बादशाह लिखा है | यह सच है कि यदि अकबर धार्मिक रूप से सहिष्णु नहीं होता तो राजपूतों राजाओं के साथ उसकी संधियाँ नहीं निभती | पर आजकल  भारत में धार्मिक तौर पर एक नया ट्रेंड चला है, दूसरे के धर्म, जाति को कठघरे में खड़ा कर उसका चरित्रहनन करने का | अकबर भी इस नए ट्रेंड का पूरा शिकार है | पहले विदेशी व वामपंथी इतिहासकारों ने उसे भारतियों का मनोबल तोड़ने के लिए जरुरत से ज्यादा महिमामंडित किया तो आज राजनैतिक,…

मछली बेचने वाली हनन हामिद ने केरल में 1.5 लाख रूपये देकर की मदद

By- Pradyumna Yadav केरल में बीएससी 3rd ईयर की छात्रा हनान हामिद ने 1.5 लाख रुपये मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा किये हैं।  हनान अपनी पढ़ाई मछली बेचकर करती हैं।  इसी पैसे से वो अपनी माँ और भाई का खर्चा भी चलाती हैं। आज उन्होंने मछली बेचने से हुई अपनी सारी कमाई बाढ़ पीड़ितों की मदत के लिए दान कर दी है। हनान इस काम को लेकर काफी चर्चा में हैं। लेकिन इससे पहले हनान तब चर्चा में आयी थीं जब उन्हें मछली बेचने के लिए ट्रोल किया गया था। लोगों को हनान की यह बात नागवार गुजरी थी कि वह स्कूल ड्रेस में मछली बेचती हैं। लोगों ने…

घोर ओबीसी विरोधी थे अटल बिहारी वाजपेयी

By- Santosh Yadav भारत एक मिथक प्रधान देश है। यही वजह है कि यहां 33 करोड़ देवी-देवता हैं। आये दिन इस संख्या में वृद्धि ही हो रही है। अटल बिहारी वाजपेयी को भी एक मिथक बनाने की कोशिशें की जा रही हैं। बताया जा रहा है कि किस तरह उन्होंने देश को महान बनाया। उन्हें महिमामंडित करने वालों में संघी और सवर्ण तो शामिल हैं ही, दलित और पिछड़े वर्ग के सत्तालोलूप नेतागण भी हैं। जबकि वे भी इस बात को मानते हैं कि अटल बिहारी वाजपेयी ओबीसी और अन्य वंचित तबकों के घुर विरोधी रहे। संघी उन्हें जिन कार्यों के लिए महान बता रहे हैं उनमें एक अहम कार्य…

Bamcef International Network President Jayant Rangari pays tributes to the sterling persona of Raju Kamble

Dear Mulnivasi Elders, Brothers, Sisters & Young Ones Jai Bhim !!! Jai Mulnivasi !!! Namo Buddhay !!! Jai Bharat !!! It’s a time of deep sorrow and grief that we all are in, due to the untimely demise of BAMCEF KAMBLE Saheb (Mn. Raju Kamble Sir) Please accept my & from everyone at BAMCEF INTERNATIONAL NETWORK sincere heartfelt condolences to Mn. Raju Kamble Sir’s Family Members and All Phuley - Ambedkarite Samaj in India and across the World. Mn. Raju Kamble Sir was a, Simple, Honest, Benevolent, Committed, Strong,…

अटल बिहारी वाजपेयी के प्रति सोशल मीडिया पर बहुजन बुद्धिजीवियों की प्रतिक्रियाएं

पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की निधन की खबर आते ही एकदम सोशल मीडिया पर उनके लिए प्रतिक्रियाओं की बाढ़ सी आ गई। पूर्व पीएम को श्रद्धांजली देने के साथ ही तमाम लोग उनके शासन काल में हुए कुछ कामों की आलोचना भी कर रहे हैं। हमने ऐसे ही कुछ बहुजन बुद्धिजीवियों की फेसबुक से कुछ प्रतिक्रियाएं नीचे साझा की हैं.. सीनियर पत्रकार दिलीप मंडल अपनी फेसबुक वॉल पर लिखते हैं कि.... "एच.डी. देवेगौड़ा की सरकार ने जाति जनगणना कराने का फैसला कैबिनेट में किया था. अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने उस फैसले को पलट दिया. इस तरह 2001 में जाति जनगणना नहीं…

जानें, अटलबिहारी वाजपेयी का असली कैरेक्टर

मृत्यु अटल है। अटलबिहारी वाजपेयी का निधन 93 वर्ष की उम्र में हुआ। करीब 12 वर्षों तक वे बीमार रहे। इस लिहाज से उनका निधन शोक के योग्य नहीं बल्कि यह मौका है उनके बारे में जानने-समझने का। अटलबिहारी वाजपेयी का कैरेक्टर अनेक मामलों में खास है। लेकिन बहुजनों के लिए नहीं। बहुजन दृष्टिकोण से बात करें तो उनके जीवन में कुछ भी ऐसा नहीं रहा जिसे याद कर बहुजन समाज शोक व्यक्त करे। बहुजन चिंतक और लेखक प्रेमकुमार मणि की यह टिप्पणी सटीक है। अपने पाठकों के बीच हम इसे साभार प्रकाशित कर रहे हैं - मनीषा बांगर, संपादक ब्राह्मण अटलबिहारी वाजपेयी…

Raju Kamble: An ideal follower of Babasaheb Ambedkar

By-Mangesh Dahiwale New dehli: As the news is pouring in, Raju Kamble breathed his last at 2.10 am in Vancouver, Canada. His death is a great loss to the Ambedkarite movement. When the international reach of Ambedkarites was limited only to a few immigrants from Punjab to the western hemisphere, it was Raju Bhau, as we fondly called him, who spanned the North America, Europe, Middle East, and South East Asia to build what is now known as Ambedkar International Mission (AIM). His grasp of the philosophy of Babasaheb Ambedkar…

अम्बेडकर अंतर्राष्ट्रीय मिशन (AIM) के संस्थापक राजू कांबले सर का वैंकुवर कनाडा में निधन

नई दिल्ली। हम-आप जैसी बेहद सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाले राजू काम्बले जी ने "शिक्षित हो, संघर्ष करो, संगठित हो" के नारे को आत्मसात कर बहुत संघर्ष कर प्रोफेशनल और सोशल लाइफ में बुलंदियों को छुआ। वे आजीवन बाबासाहेब अम्बेडकर के विचारों को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने के साथ-साथ अलग-अलग देशों में फैले दलितों को यूनिट के लिए उन्होंने आजीवन प्रयास किया। बहुत ऊंचाईयों पर पहुँचने पर भी वे कभी अपने समाज से नहीं कटे बल्कि समाज के लिए समर्पित रहे और ग्राउंड पर जाकर दलित एक्टिविज़्म के लिए कार्य किया। उन्होंने भारत के हर एक…

राष्ट्रध्वज ‘तिरंगा’ नहीं ‘चौरंगा’ है, पढ़कर समझिए?

नई दिल्ली। असलियत में भारत का राष्ट्रीय ध्वज 4 रंगों का होता है, न कि 3 का। यह तीन (केसरिया, सफेद और गहरे हरे) रंग की क्षैतिज पट्टियों के बीच नीले रंग के एक चक्र, जिसमें 24 तीलियाँ या आरे होते हैं, द्वारा सुशोभित है। नीले रंग के चक्र को सारनाथ स्थित अशोक स्तंभ से लिया गया है। इस राष्ट्रीय ध्वज को 22 जुलाई 1947 को आयोजित भारतीय संविधान सभा की बैठक में अपनाया गया था। उपर्युक्त विवरण से निसंदेह स्पष्ट है कि हमारे राष्ट्रीय ध्वज में चार रंग विद्यमान हैं केसरिया, सफेद, नीला और हरा। लेकिन फिर भी 71 साल से इसे जानबूझकर तिरंगा ही…