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लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज

क्या आपने कभी सोचा है कि देश के स्वंत्रता दिवस यानि 15 अगस्त को प्रधानमंत्री दिल्ली लाल क़िला पर ही क्यों राष्ट्रिय ध्वज फहराते हैं ? किसी अन्य ऐतिहासिक ईमारत या कोई बड़ी आधुनिक शासकीय बिल्डिंग या अपने कार्यालय पर ही क्यों नहीं ? 15 अगस्त पर लाल क़िले पर राष्ट्रिय ध्वज फहराए जाने के पीछे जन भावनायें, लाल क़िला का देश की सार्वभौमिकता और सम्प्रभुता का प्रतीक होना, ऐतिहासिक घटनाक्रम और सामाजिक मान्यताएँ हैं। किसी भौगोलिक क्षेत्र या जन समूह पर सत्ता या प्रभुत्व के सम्पूर्ण नियंत्रण पर अनन्य अधिकार को सम्प्रभुता (Sovereignty) कहा…

महाराजा छत्रपति शाहूजी ने आज ही के दिन लागू किया था आरक्षण

पिछले कुछ समय से भारत में विभिन्न समुदायों द्वारा आरक्षण की माँग हो रही है, कई समूहों द्वारा उग्र आंदोलन भी चलाए जा रहे है। लेकिन इनमे से ज़्यादातर संगठन के पास आरक्षण के बारे में पर्याप्त जानकारी का अभाव है। भारत में एससी-एसटी-ओबीसी को संविधान द्वारा दिए गए आरक्षण के ख़िलाफ़ भी कई समुदाय आरक्षण की माँग कर रहे है। जबकि बहुत कम लोग जानते है कि भारत में आरक्षण की शुरुआत कोल्हापुर संस्थान के महाराजा छत्रपति शाहूजी ने अपने राज्य में पिछड़े समुदाय को 50% आरक्षण देकर की थी। सैकडों रजवाड़ों में बंटे भारत में अखंड भारत की कल्पना…

हमारी मानसिकता ब्राह्मणवाद से ग्रस्त जो है, बहुत बड़ा सवाल..कौन बेहतर..?

-Dr. JD Chandrapal नजरिया। फ्रांस को फीफा विश्व कप की रोमांचक फाइनल जिताने वाला टीनऐजर फ़ॉरवर्ड किलियान एमबापे या फाइनल हारकर भी समूचे विश्व का दिल जितने वाले, दिल्ली के पांचवे हिस्से के बराबर आबादी वाले, 1991 में यूगोस्लोवाकिया के टूटने के बाद  दुनिया के नक्शे पर आने वाले, यूरोपीयन देश  दमदार  क्रोएशिया के कप्तान और शानदार मीडफ़ील्डर लूका मोद्रिच लूका मोद्रिच का अतीत बहुत ही दिलचस्प है। युद्ध- प्रभावित इलाके में रिफ्यूजी का जीवन बिताने वाले लुका का बचपन गोलियों-ग्रेनेड के धमाकों के बीच गुजरा, यहाँ तक की सर्बियाई विद्रोहियों…

एक और बहुजन बेटी ने रोशन किया नाम….

ये हैं तमिलनाडु के मदुरई की 23 साल काव्या रवि कुमार। काव्या देश की पहली बहुजन   महिला कॉमर्शियल पायलट है। इन्हें हाल ही में गवर्मेंट फ्लाइंग ट्रैनिंग स्कूल (GFTS) से कॉमर्शियल पायलेट का लाइसेंस औऱ बेस्ट स्टूडेंट अवॉर्ड भी मिला है। 21 साल के इंतज़ार के बाद ये उपलब्धि हासिल हो सकी है। देश में कई महिला कॉमर्शियल पायलट्स हैं। लेकिन सभी सवर्ण वर्ग की हैं और बेहद मजबूत परिवारिक पृष्ठभूमि की भी। जिन्हें ना पैसे की कमी हुई, ना प्रिवेलेज की। बल्कि सो कॉल्ड सुंदरता के पैमाने यानी सुकोमल, गोरे और नैन-नक्श आदि-आदि के पैमाने पर खरे…

“Shabaash” Hima Das !!

By- Dr. Manisha Bangar Your historical record victory is a tight slap on the brahmin-dwijas, their merit logic ,and their caste system :- Centuries of cornering of resources did not help the brahmin-dwija to produce single sportsperson athelete who could have won the race in the history of India. Dear friends !! We have all seen the awesome performance of Hima Das, the 18-year-old girl, who barely 18 months back, ran her first race in district level. Now, this young lass has done the country proud by winning a gold…

समाजिक क्रांति के प्रहरी, आरक्षण के जनक, श्रमण संस्कृति के महाराजा शाहूजी महाराज

By -डॉ जयंत चंद्रपाल बाबासाहब डॉ अम्बेडकर सही कहते थे की जो कोम अपना इतिहास नहीं जानती वह अपने भविष्य का निर्माण नहीं कर सकती। हम ब्राह्मण संस्कृति के राजा राम के बारे में और रामराज्य के बारे में तो बहुत जानते है मगर श्रमण संस्कृति के महाराजा शाहूजी और उनके लोकाभिमुख शासन के बारे में बहुत ही कम। Let us recognize our heroes किसी भी महापुरुष की पहचान उनके द्वारा किये गए कार्यो से होती है। 26 जून 1874 के दिन शुद्र वर्ण की कुर्मी (पाटीदार) जाति में जन्मे बहुजन एवं श्रमण संस्कृति के छत्रपति शाहू जी महाराज ने जाति व्यवस्था और इस…

विज्ञान के टॉपर बच्चे और बारिश के लिए हवन करता देश, पढ़िए शानदार लेख

-संजय शर्मन जोठे पिछले साल की बात है, एक मित्र के घर बारहवीं क्लास में टॉप किये एक बच्चे से बात हो रही थी। वो अपना कुत्ता लेकर उसके साथ खेल रहा था, अचानक उसका पैर एक किताब पर लगा और उसने “किताब के पैर छुए” कान भी पकड़े। खेलते हुए उसका पैर कुत्ते को भी लगा, उसने फिर कुत्ते के प्रति भी क्षमा व्यक्त की, मैंने पूछा कि ये क्यों? उसने कहा कि ये कुत्ता नहीं भेरू महाराज है। मैंने एक टीवी सीरियल में देखा था, एक देवता की तस्वीर में भी मैंने कुत्ते देखें हैं। मैंने उसकी किताब को गौर से देखा उसकी किताब पर नेम चिट में एक हवा में उड़ने वाले…

पहली बार किसी भारतीय पीएम का हुआ इतने बड़े स्तर पर विदेश में विरोध

~ आकिल रज़ा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों यूरोप के दौरे पर हैं। कठुआ गैंगरेप और हत्या को लेकर पीएम मोदी का लंदन में विरोध किया गया। प्रदर्शनकारियों ने मोबाइल वैन पर बड़े-बड़े होर्डिंग लगाकर और हाथों में तख्ती लेकर मोदी का विरोध कर रहे हैं। विरोधियों ने पीएम मोदी का विरोध करने के कारण भी बताए हैं। प्रदर्शनकारियों ने उन्हें मुसलमानों की हत्या करने वालों का संरक्षक, बलात्कारियों को बचाने वाला और बहुजनों की हत्या करने वालों का समर्थक करार दिया है। इतना हि नहीं कुछ प्रदर्शन कारियों ने पीएम मोदी को भारत के आतंक का चहरा तक…

जन्म दिन विशेष: बहुजनों के मसीहा बाबा साहेब के विचार, और कांशीराम के संघर्ष की यादें…

By- Aqil Raza दुनिया-भर में अलग अलग समय पर दुंखो और मसीबतों के खिलाफ बड़े स्तर पर संघर्ष होते रहे है। इन संघर्ष में अनेक बड़े नेता उभर कर सामने आते रहे हैं। जैस दक्षिण अफ्रीका में नस्लीय भेदभाव के खिलाफ नेल्सन मंडेला, अमेरिका में अब्राहम लिंकन और मारिन लूथर किंग। भारत में भी जात-पात, छुआछात और नस्लीए भेदवाव के खिलाफ बहुजनों के मसीहा बाबा साहेब भीम राव अंमेडकर ने बड़े पैमाने पर संघर्ष किया, और इस संघर्ष की बदौलत वो भारत में ही नहीं पूरी दुनिया में अपने विचार औऱ सिद्धांतो के लिए जाने जाते है। बाबा साहेब अंबेडकर की मृत्यु के…

पीएम मोदी का महिला सशक्तिकरण का नारा कितना जायज़ ?

By- Aqil Raza विश्व में कल महिला दिवस मनाया गया, कल के दिन सभी न्यूज़ पेपर में, मैनस्ट्रीम मिडिया में महिलाओं की बहादुरी.. उनके प्रति आत्म सम्मान, और समाज में उनके योगदान पर कसीदे पढ़ने की होड़ लगी रही थी.. हमारे देश के राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों से लेकर शहर शहर महिला सम्मान कार्यक्रमों में लोग महिलाओं के सशक्तिकरण पर बड़ी बड़ी बातें करते दिखाई दिए थे। तो चलिए आज महिलाओं की स्थिति हकीकत की रोशनी में टटोलने की कोशिश करते हैं। देश में महलाओं की स्थिति, खासकर ग्रामीण इलाकों की एसी है कि उनके दयनीय हालत…