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मोदी सरकार द्वारा सवर्णों को आरक्षण दिए जाने का निर्णय सिर्फ एक लॉलीपॉप!

एक देश मे एक मानसिक चिकित्सालय में 100 मानसिक रोगी रहते थे, एक दिन उस देश के प्रधानमंत्री का उस चिकित्सालय में दौरा हुआ। प्रधानमंत्री ने दो घण्टे तक ओजस्वी भाषण दिया, मनो-रोगियों ने अपने जाने पहचाने अंदाज में लंबी लंबी छोड़ने वाले इस वक्ता को बड़े ध्यान से सुना। प्रधानमंत्री श्रोताओं की इस एकाग्रता और अनुशासन से अत्यधिक प्रसन्न हुए। जाते जाते उन्होंने बड़ा उपकार करते हुए मानसिक चिकित्सालय में स्वीमिंग पूल बनाने की घोषणा कर दी। सभी मनोरोगियों ने ताली बजाई, पटाखे जलाए, नारे लगाए। देश विदेश में इस उदार निर्णय की बड़ी तारीफ हुई।…

आंध्र यूनिवर्स‍िटी के कुलपति का दावा, टेस्ट ट्यूब बेबी थे कौरव, पढ़िए VC की बखिया उधेड़ता लेख!

बीते दिनों आंध्र यूनिवर्स‍िटी के कुलपति जी नागेश्वर राव ने एक हैरानी भरा बयान जारी किया. जिसके मुताबिक, महाभारत काल में स्टेम सेल और टेस्ट ट्यूब तकनीक की खोज की जा चुकी थी और कौरव टेस्ट ट्यूब बेबी थे। पढ़िए उनके इस बयान पर  यह लेख... यह कैसे मुमकिन हो जाता है कि जिस विज्ञान कांग्रेस पर दुनिया भर की वैज्ञानिक बिरादरी की नजर होती है, उसमें सारे वैज्ञानिकों के सामने कोई व्यक्ति भारत की नुमाइंदगी करते हुए कैसे इस तरह के चुटकुले और गप्प परोस देता है कि सौ कौरव स्टेम सेल्स से पैदा हुए या रावण के पास दर्जनों हवाई अड्डे थे! यह सब…

The Role of Caste in the ‘Asia Bibi Case’

By ~ Amen Jaffer, Dr. B. R. Ambedkar begins his undelivered speech of 1936, Annihilation of Caste, by arguing that the success of political and economic reform in India depends on social reform. He described an Indian society riven by caste oppression in which the upper caste sought to control the minutest details of the lives of the lowest castes - what they can wear, the food then can eat, the spaces where their bodies are allowed. This was a world in which the lowest castes are treated as untouchable, where their bodies,…

भारत में #Me Too अभिजात्य वर्ग का गेम है…

By-Dr Jayant Chandrapal आम समाज केवल प्रेक्षक है, आपको बता दें कि भारत के बाहरी मामलों (External Affairs) के मंत्री एम. जे. अकबर उर्फ़ मोबासर जावेद अकबर भी अब इस अंतर्राष्ट्रीय अभिजात्य गेम #MeToo में शामिल कर लिए गए है। और इस तरह से वे अपने ही आंतरिक मामलों (Internal Affairs) को सम्हालने में उलझ गए है। इसके पहले बॉलीवुड के नाना भी किसी को पटाकर एक लफड़े में इस गेम में अपना नामांकन करवा चुके है और अपने ही कद को नाना (गुजराती अर्थ “छोटा”) कर चुके है। और भी सेलिब्रिटीज है जैसे की आलोक नाथ, सुभाष घई, अभिजीत भट्टाचार्य, साजिद खान,…

क्या सम्राट अकबर को ब्राह्मणों ने विष्णु अवतार घोषित किया था ?

मुग़ल सम्राट अकबर को लेकर आज तगड़ा भ्रम फैला है | पुराने इतिहासकारों ने उसे धार्मिक रूप से सहिष्णु व सबको साथ लेकर चलने वाला महान बादशाह लिखा है | यह सच है कि यदि अकबर धार्मिक रूप से सहिष्णु नहीं होता तो राजपूतों राजाओं के साथ उसकी संधियाँ नहीं निभती | पर आजकल  भारत में धार्मिक तौर पर एक नया ट्रेंड चला है, दूसरे के धर्म, जाति को कठघरे में खड़ा कर उसका चरित्रहनन करने का | अकबर भी इस नए ट्रेंड का पूरा शिकार है | पहले विदेशी व वामपंथी इतिहासकारों ने उसे भारतियों का मनोबल तोड़ने के लिए जरुरत से ज्यादा महिमामंडित किया तो आज राजनैतिक,…

भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के बारे में डॉ. आंबेडकर की क्या राय…

आजादी से 1 वर्ष पहले 1946 में डॉ. आंबेडकर ने लिखा कि “ हिंदुओं और मुसलामनों की लालसा स्वाधीनता की आकांक्षा नहीं हैं. यह सत्ता संघर्ष है,जिसे स्वतंत्रता बताया जा रहा है.. कांग्रेस मध्यवर्गीय हिंदुओं की संस्था है, जिसकों हिदू पूंजीपतियों की समर्थन प्राप्त है, जिसका लक्ष्य भारतीयों की स्वतंत्रता नहीं, बल्कि ब्रिटेन के नियंत्रण से मुक्त होना और सत्ता प्राप्त कर लेना है, जो इस समय अंग्रेजों की मुट्ठी में हैं.” ( डॉ, आंबेडकर, संपूर्ण वाग्यमय, खंड-17, पृ.3 ). मुसलमान... मध्यवर्गीय हिंदुओं के वर्चस्व से मुक्ति के लिए अलग…

क्या वाकई में भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा है..?

किसी भी बात को अपने तर्क-विवेक और संशय आधारित वैचारिकता से बिना परखे अनुकरण करना हानिकारक हो सकता है। भारत में आजकल राष्ट्रवाद का झंडा लिए घूम रहे तथाकथित राष्ट्रवादी तरह तरह के नारों से राष्ट्रवाद का प्रचार कर रहे है। हर भारतीय को वे शक की नज़रों से देख रहे है। उनके राष्ट्रवाद की परिभाषा के मुताबिक़ अगर आप राष्ट्र के सवंविधानिक मूल्यों का आदर करते है लेकिन तथाकथित 'भारत माता' के नारे नहीं लगाते, या पड़ोसी मुल्क को गालियाँ नहीं देते है, तो आप उनकी नज़रों में राष्ट्रवादी नहीं बल्कि देशद्रोही माने जाएँगे! देश के हर…

लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज

क्या आपने कभी सोचा है कि देश के स्वंत्रता दिवस यानि 15 अगस्त को प्रधानमंत्री दिल्ली लाल क़िला पर ही क्यों राष्ट्रिय ध्वज फहराते हैं ? किसी अन्य ऐतिहासिक ईमारत या कोई बड़ी आधुनिक शासकीय बिल्डिंग या अपने कार्यालय पर ही क्यों नहीं ? 15 अगस्त पर लाल क़िले पर राष्ट्रिय ध्वज फहराए जाने के पीछे जन भावनायें, लाल क़िला का देश की सार्वभौमिकता और सम्प्रभुता का प्रतीक होना, ऐतिहासिक घटनाक्रम और सामाजिक मान्यताएँ हैं। किसी भौगोलिक क्षेत्र या जन समूह पर सत्ता या प्रभुत्व के सम्पूर्ण नियंत्रण पर अनन्य अधिकार को सम्प्रभुता (Sovereignty) कहा…

महाराजा छत्रपति शाहूजी ने आज ही के दिन लागू किया था आरक्षण

पिछले कुछ समय से भारत में विभिन्न समुदायों द्वारा आरक्षण की माँग हो रही है, कई समूहों द्वारा उग्र आंदोलन भी चलाए जा रहे है। लेकिन इनमे से ज़्यादातर संगठन के पास आरक्षण के बारे में पर्याप्त जानकारी का अभाव है। भारत में एससी-एसटी-ओबीसी को संविधान द्वारा दिए गए आरक्षण के ख़िलाफ़ भी कई समुदाय आरक्षण की माँग कर रहे है। जबकि बहुत कम लोग जानते है कि भारत में आरक्षण की शुरुआत कोल्हापुर संस्थान के महाराजा छत्रपति शाहूजी ने अपने राज्य में पिछड़े समुदाय को 50% आरक्षण देकर की थी। सैकडों रजवाड़ों में बंटे भारत में अखंड भारत की कल्पना…

हमारी मानसिकता ब्राह्मणवाद से ग्रस्त जो है, बहुत बड़ा सवाल..कौन बेहतर..?

-Dr. JD Chandrapal नजरिया। फ्रांस को फीफा विश्व कप की रोमांचक फाइनल जिताने वाला टीनऐजर फ़ॉरवर्ड किलियान एमबापे या फाइनल हारकर भी समूचे विश्व का दिल जितने वाले, दिल्ली के पांचवे हिस्से के बराबर आबादी वाले, 1991 में यूगोस्लोवाकिया के टूटने के बाद  दुनिया के नक्शे पर आने वाले, यूरोपीयन देश  दमदार  क्रोएशिया के कप्तान और शानदार मीडफ़ील्डर लूका मोद्रिच लूका मोद्रिच का अतीत बहुत ही दिलचस्प है। युद्ध- प्रभावित इलाके में रिफ्यूजी का जीवन बिताने वाले लुका का बचपन गोलियों-ग्रेनेड के धमाकों के बीच गुजरा, यहाँ तक की सर्बियाई विद्रोहियों…