चंद्रशेखर के पार्टी ऐलान पर बवाल, प्रशासन ने की रोकने की कोशिश

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भीम आर्मी चीफ के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने बसपा के संस्थापक कांशीराम के जन्मदिन पर अपनी राजनीतिक पार्टी का ऐलान किया. चंद्रशेखर ने आजाद समाज पार्टी अपनी पार्टी का नाम रखा. पार्टी की घोषणा के दौरान उन्होंने यूपी के विधानसभा चुनाव में जोरो-शोरों से लड़ने की बात भी कही. उन्होंने आगे कहा कि वह अकेले ही अपने दम पर लड़ कर दिखाएंगे.

दरअसल, आजाद समाज पार्टी में बसपा, सपा, कांग्रेस और आरएलडी के कई पूर्व विधायकों ने सदस्यता ली. जिसमें आजाद समाज पार्टी की सदस्यता लेने वालों की संख्या कुल 100 विधायकों की रही. सदस्यता ग्रहण करने वाले सपा के 28 विधायक और 6 पूर्व सांसद शामिल रहे.

जिसके बाद बसपा प्रमुख मायावती ने चंद्रशेखर पर निशाना साधते हुए कहा कि टुकड़े-टुकड़े संगठन बनाने से कुछ नही होगा, इससे केवल उन्हे ही फायदा होगा जो बहुजनों की राजनीति करते है और उन्हे बांटना चाहते है. इसके साथ ही मायावती ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि वे ऐसे स्वार्थी लोगों से सचेत रहें. मायावती का कहना था कि कांशीराम जी ने निर्दोष दलितों, आदिवासियों, पिछड़ी जातियों के लोगों और अन्य दबे-कुचले तबके के लोगों को सचेत करने के लिए ही चमचा युग लिखा था.

बता दें कि चंद्रशेखर आजाद नोएडा सेक्टर 70 में जनसभा का आयोजन कर ऐलान करने वाले थे लेकिन प्रशासन की ओर से जनसभा की अनुमति नही मिली. प्रशासन ने कार्यक्रम को रोकने का कारण बताया कि कोरोना वायरस की वजह से लोगों को एकत्रित होने की अनुमति नही है. हालांकि चंद्रशेखर के समर्थन में इकट्ठा हुई भीड़ और कार्यक्रम के होने की जिद्द को देखते हुए प्रशासन ने जनसभा करने की अनुमति दे दी. जिसके बाद चंद्रशेखर ने रविवार को अपने पार्टी की घोषणा की और वहां से नई राजनीतिक दुनिया में कदम रखा.

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