कैसे रोका जाए छत्रपति शिवाजी का ब्राह्मनिकरण?

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Published By- Aqil Raza
By- Panjab Rao Meshram

 

कोई भी सामाजिक क्रांति अचानक आसमान से नहीं टपकती। उसके लिए स्थितियां उत्तरदायी होती हैं। छत्रपति शिवाजी के पिताजी मुस्लिम शासकों के सरदार हुआ करते थे। माता जीजाबाई ने स्वयं का स्वराज्य बनाने का सोचा और उसी तरह की ट्रेनिंग बालक शिवाजी को दी।

बालक शिवाजी ने अठारह पगड़ अर्थात बहुजन मुस्लिम जाति के बचपन के जान से प्यारे मित्रों की सहायता से अपने स्वप्न की पूर्ती की। येशाजी नाक महार भी उनमें शामिल थे। इस तरह इतिहास में नाग महार पुनः सैनिक बन गए। मराठा राज हड़पने और पेशवाई आने के बाद पेशवा ने महारों नागों को भयंकर सजा दी।

अंग्रेजों ने इसी लड़ाका प्रवृति , मार्शल रेस के इतिहास का पता लगाकर उन्हें अपनी सेना में मौका दिया। इस तरह पेशवा की मनुस्मृति का राज ख़त्म हुआ और आधुनिक भारत की नींव डली। भारत की तमाम जातिवादी व्यवस्थाओं में आमूल चूल परिवर्तन हुए। आगे चलकर अंग्रेज सैनिक पुत्र होने के कारण बाबासाहेब का एजुकेशन कम्पलसरी था।

मार्शल रेस या सैनिक प्रवृति ही अछूतों के उत्थान का कारण बनी। महाराष्ट्र के महार नागों में जो छत्रपति शिवाजी की वजह से पुनः वजूद में आयी। बाबासाहेब डॉ आंबेडकर के गुरु महात्मा जोतीराव फुले के गुरु अर्थात बाबासाहेब के गुरु के गुरु कुलवाड़ी कुलभूषण बहुजन प्रतिपालक छत्रपति शिवाजी महाराज की ३८९ वीं जयंती पर सादर नमन।

उनके जीवन कार्यों से हमें यह भी शिक्षा मिलती है कि चाहे जो भी हो बहुजन नेताओं को किसी भी कीमत पर जातिवादी ब्राह्मणों का न तो अष्टप्रधान मंडल बनाना चाहिए और न ही उन्हें अपना पेशवा बनाना चाहिए। क्योंकि कालांतर में गौ-ब्राह्मण प्रतिपालक पेशवा महत्वपूर्ण हो जाता है और बहुजन प्रतिपालक की विचारधारा गौण होकर ख़त्म हो जाती है। पुनः बहुजन प्रतिपालक छत्रपति शिवाजी महाराज को सादर नमन।

~ Panjab Rao Meshram  

(लेखक के विचारों को बदला नहीं गया है)

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