SC-ST एक्ट को लेकर भारत बंद, देखिए अलग-अलग हिस्सों में बहुजनो का भारी प्रदर्शन

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BY: Ankur sethi

एससी/एसटी एक्ट को लेकर आए सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के विरोध में बहुजनों संगठनों ने आज भारत बंद का ऐलान किया है. बहुजन संगठन के लोगों द्वारा भारत के प्रत्येक राज्य में भारी प्रर्दशन किया जा रहा है. कई पार्टियों और संगठनों के कार्यकर्ता सोमवार को सड़कों पर उतरे हैं. ओडिशा और बिहार में ट्रेनें रोककर विरोध भी जाहिर किया जा रहा है तो साथ ही अनेकों जगह सड़कों पर प्रर्दशन किया जा रहा है.

भारत की राजधानी दिल्ली में प्रर्दशन सुबह 9 बजे शुरू हो गया था जो दिल्ली के अलग अलग इलाके में बढ़ता चला गया. लक्ष्मी नगर, मंडी हाउस, संसद मार्ग, जंतर मंतर पर उग्र प्रर्दशन किया गया.

 

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद, अमरोहा, हसनपुर, मेरठ, हापुड़, लखनऊ, इलाहाबाद, नोएडा से भी प्रदर्शन की तस्वीरें सामने आयी जहां हजारों की भीड़ के साथ प्रशासनिक आधिकारियों को ज्ञापन दिये गये.

संगठन से जुड़े लोगों ने सोमवार तड़के उड़ीसा के संभलपुर में रेल पटरियों पर जमा हो गए और ट्रेनों की आवाजाही रोक दी.

कानून को कमजोर बनाये जाने के विरोध में कड़ी सुरक्षा के बीच बहुजनों ने पंजाब के जालंधर, होशियारपुर, रोपड़, बठिंडा, अमृतसर और फिरोजपुर में प्रदर्शन किए. प्रदर्शनकारी नारेबाजी करते हुए जालंधर कैंट रेलवे स्टेशन के अंदर भी दाखिल हो गए. उन्होंने ट्रैक पर पुतले भी जलाए. कुछ राजमार्गो व सड़कों को भी जाम कर दिया गया है,

पड़ोसी राज्य हरियाणा के रोहतक व दूसरे शहरों में भी विरोध प्रदर्शनों की खबरें मिली हैं. राज्य में दुकानें, शैक्षिक संस्थान व अन्य प्रतिष्ठान बंद हैं. पंजाब स्कूल एजुकेशन बोर्ड की 10वीं व 12वीं कक्षाओं की अंतिम प्रेक्टिकल परीक्षा सोमवार (2 अप्रैल) को होनी निर्धारित थी, लेकिन अब इसे 11 अप्रैल को आयोजित किया जाएगा.

बिहार में दिख रहा है असर

भारत बंद को लेकर उतर बिहार को राजधानी पटना से जोड़ने वाले गांधी सेतु हाइवे को हाजीपुर के पासवान चौक के पास जाम कर दिया गया है. सड़क पर गाड़ियों की कतार लगी हुई है. खबर के मुताबिक बंदी के दौरान यातायात व्यवस्था पूरी तरह से ठप कर दी गई है, लेकिन एंबुलेंस को बंद से दूर रखा गया है. भाकपा माले के कार्यकर्ताओं ने लहेरियासराय स्टेशन पर दरभंगा-पटना इंटरसिटी ट्रेन को रोक दिया और फैसले के विरोध में नारेबाजी की.

दरभंगा-समस्तीपुर रेलखंड पर ट्रेनों का आवागमन पूरी तरह ठप है. बंद से लंबी दूरी के यात्रा कर रहे मुसाफिरों को काफी परेशानियों सामना करना पड़ रहा है. बाढ़ में भारत बंद के दौरान अथमलगोला स्टेशन रेलवे लाइन पर बहुजन सेना और भीम आर्मी सेना के कार्यकर्ताओं ने पत्थर का स्लीपर रख कर अपना विरेध जताया. अरवल में विभिन्न दलों के बहुजन संगठन, राजद और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने पटना औरंगाबाद मुख्य पथ को किया जाम कर दिया. नवादा में भी बंद समर्थकों ने गया-जमालपुर पैसेंजर ट्रेन को रोक दिया.

भिंड में आपस में भिड़े भीम सेना और बजरंग दल के कार्यकर्ता

भिंड में भी बंद का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। यहां भीम सेना और बजरंग दल के कार्यकर्ता आमने-सामने हो गए। दोनों दलों के समर्थकों के बीच जमकर पथराव हुआ। उग्र होते प्रदर्शन को काबू में करने के लिए पुलिस को गोलियां दागनी पड़ीं, इससे पांच लोगों के घायल होने की सूचना है। मुरैना की तरह भिंड में भी बंद समर्थकों ने नेशनल हाइवे जाम कर दिया। वहां पर गाडियों को रोक कर उसके शीशे तोड़े गए। हिंसा रोकने के लिए पुलिस ने हवाई फायरिंग भी की है। मालनपुर में हाइवे जाम कर दिया है, जिसके बाद दोनों और सैकड़ों वाहन फंस गए है। साढ़े तीन घंटे से वहां पर जाम लगा हुआ है

लियर, भिंड और मुरैना में हिंसा के दौरान दर्जन भर से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। इन जिलों में बंद के दौरान जमकर पथराव और तोड़फोड़ की गई। ट्रेनों को रोका गया और नेशनल हाइवे जाम कर दिए गए। भिंड में नेशनल हाइवे जाम कर वाहनों के शीशे तोड़ दिए गए, मुरैना में रेलवे ट्रैक पर पत्थर रखकर ट्रेनों को रोक दिया गया है।

भारत में अलग अलग राज्यों में प्रदर्शन पर एक नजर-

उत्तराखंड के देहरादून में प्रदर्शनकारियों द्वारा दुकानों को बंद कराया गया।

उत्तर प्रदेश के आगरा में भी प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतरे, सड़क की जाम। आगरा समेत ब्रज में लोग सड़कों पर उतर आए हैं। शहर में जगह-जगह रोड जाम कर दिया गया है। पुलिस ने हवाई फायरिंग की।

मध्य प्रदेश के मुरैना में प्रदर्शन का हिन्दू संगठनो द्वारा विरोध, इलाके में कर्फ्यू लगा दिया गया है। भिंड में हिन्दू संगठनो के विरोध के बाद बवाल, धारा 144 लागू, मुरैना में रेलवे ट्रैक किया जाम

 

जयपुर में प्रदर्शन कर रहे लोगों ने रोकी ट्रेन

राजस्थान के बाड़मेर में कड़े विरोध प्रदर्शन की खबर है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक करणी सेना और बहुजन संगठनों के बीच पथराव हो गया जिसमें 25 लोग घायल हो गए। भारतपुर में बच्चे और महिलाएं सड़कों पर लाठी-डंडों के साथ प्रदर्शन करने के लिए उतरे, नाराज महिलाओं ने ट्रेन भी रोकी।

बिहार के जहानाबाद में भी बंद समर्थकों ने एनएच-83 और एनएच-110 को जाम कर दिया साथ ही बंद समर्थकों ने पटना गया रेल खंड पर पैसेंजर ट्रेन को भी रोक दिया है। विभिन्न बहुजन संगठनों ने एससी एसटी एक्ट में बदलाव को लेकर प्रदर्शन किया, बिहार के आरा में ट्रेन रोकी गई। साथ ही सुपौल, दरभंगा, मोतिहारी और अररिया में भी प्रदर्शन की खबर है।

तमिलनाडू के कांचीपुरम में सरकारी कर्मचारियों का बंद का ऐलान

गुजरात के जामनगर, राजकोट, अहमदाबाद, वाडनगर में बहुजन समाज सड़को पर उतरा

क्या है नए नियम?

– ऐसे मामलों में निर्दोष लोगों को बचाने के लिए कोई भी शिकायत मिलने पर तुरंत मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा. सबसे पहले शिकायत की जांच डीएसपी लेवल के पुलिस अफसर द्वारा शुरुआती जांच की जाएगी. यह जांच समयबद्ध होनी चाहिए.

– जांच किसी भी सूरत में 7 दिन से ज्यादा समय तक न हो. डीएसपी शुरुआती जांच कर नतीजा निकालेंगे कि शिकायत के मुताबिक क्या कोई मामला बनता है या फिर तरीके से झूठे आरोप लगाकर फंसाया जा रहा है?

– सुप्रीम कोर्ट ने इस एक्ट के बड़े पैमाने पर गलत इस्तेमाल की बात को मानते हुए कहा कि इस मामले में सरकारी कर्मचारी अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं.

– एससी/एसटी एक्ट के तहत जातिसूचक शब्द इस्तेमाल करने के आरोपी को जब मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाए, तो उस वक्त उन्हें आरोपी की हिरासत बढ़ाने का फैसला लेने से पहले गिरफ्तारी की वजहों की समीक्षा करनी चाहिए.

– सबसे बड़ी बात ऐसे मामलों में तुरंत गिरफ्तारी नहीं की जाएगी. सरकारी कर्मचारियों की गिरफ्तारी सिर्फ सक्षम अथॉरिटी की इजाजत के बाद ही हो सकती है.

– सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक, इन दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने वाले अफसरों को विभागीय कार्रवाई के साथ अदालत की अवमानना की कार्रवाही का भी सामना करना होगा.

 

पहले थे ये नियम?

– एससी/एसटी एक्ट में जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल संबंधी शिकायत पर तुरंत मामला दर्ज होता था.

– ऐसे मामलों में जांच केवल इंस्पेक्टर रैंक के पुलिस अफसर ही करते थे.

– इन मामलों में केस दर्ज होने के बाद तुरंत गिरफ्तारी का भी प्रावधान था.

– इस तरह के मामलों में अग्रिम जमानत नहीं मिलती थी. सिर्फ हाईकोर्ट से ही नियमित जमानत मिल सकती थी.

– सरकारी कर्मचारी के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दायर करने से पहले जांच एजेंसी को अथॉरिटी से इजाजत नहीं लेनी होती थी.

– एससी/एसटी मामलों की सुनवाई सिर्फ स्पेशल कोर्ट में होती थी.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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