एकही रास्ता : EVM हटाओ लोकतंत्र बचाओ ! बहुजनों की आजादी का अंत : EVM हटाओ !

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By-श्रीकांत लोखंडे~

EVM के ब्रम्हास्त्र से बामण जाती संघ ने भारत कि लोकशाही पर अपना आखिरी धावा बोला है और पुरा लोकतंत्र हाथिया लिया है ! ऊनके पास यही साडेचार साल है जिसमे ऊन्है ब्राम्हणतंत्र को पुर्णता मजबुत और स्थाई करना है !
सबसे पहले ऊन्होने राजकीय सत्ता का दुरुपयोग करके लोकशाही के सारे स्तंभ हातिया लिए है ! शासन, प्रशासन, डिफेंस,सारी स्वायत्त संस्थाए, Judiciary, EC, NIA, ED, CBI, IB पर पुर्नता कब्जा होनेके कारण ईतिहासमे सबसे जादा ताकतवर जातीगँग बन चुके है! पहलेसेही मेडिया और प्रचारतंत्र पुर्णता हथिया चुके है ! बाभणोंके ईस प्रयास मे ऊन्हे वैश्य-बनिया-जैन लोगोंका पुर्ण समर्थन और आर्थिक बल मिला हुआ है ! काँग्रेस का पुरा अंदरुनी समर्थन और बाहर लढाई का दिखावा एक सेफ्टी वाँल्व का काम कर रहा है ! पुरी धांदली ऊजागर ना हो ईसलिए information के सारे सरकारी और गैर सरकारी स्तोत्र भी या तो हाथिया लिए है या अपने अनुकुल बदल दिये है !
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अब ऊनके सपनोंका ब्राम्हणराज्य बनाना है तो सर्वप्रथम ऊन्हे बहुजनोंके जिन जिन प्रबल जाती योंसे संघर्ष कि संभावना है ऊन्हे सबसे पहले कमजोर करनेका प्रथम टार्गेट रखा गया! मराठा, जाट, आहिर-यादव, रेड्डी, वोक्कालिगा, कापु जैसी कृषीप्रधान जातीयोंको सबसे पहले कमजोर करना यह लक्ष ऊन्होने पहले पाँच सालमे बखुबीसे पुरा किया है ! ईस काममे ईन जातीयोंके समकक्ष जातीयोंका पुरा ईस्तेमाल किया, धरम का गांजा खुब पिलाया और साथमे EVM का ब्रम्हास्त्र ईस्तेमाल करके पुर्ण निर्यंत्रन अपने हाथ मे लिया!
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दुसरे पाँचवर्ष ऊनके लिए निर्णायक है, जो भी सपना साकार करना है ऊसके लिए यही आखिरी वक्त बचा है ! ईसलिए aggressively अपने अजेंडे पे काम शुरु हुआ है ! ईकाँनाँमी को डुबाकर सारे समाजमे अस्थीरता निर्मान करना, ऊसी बहाने बचे खुचे सरकारी ऊपक्रम ऊनके निर्यंत्रन वाले प्रायव्हेट ऊद्ध्योगपतीयोंको सौंपकर बहुजनोंके 50% नौकरी के हक को तहस नहस करना, शिक्षा का निजिकरण करणा, स्वास्थ्य संस्था भी निजी हाथोंमे सौपना ऐसे बहोत सारे फ्रंट पर काम जोरोंसे है ! रेल्वे, एअरपोर्ट, बैंक, ordinance factories, oil &Gas psus सब ईसी पाँच सालमे निजि हाथोमे सौंपना है !
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ऐसे परीस्थितियोंमे जो भी बहुजनोंका नेतृत्व आक्रमकता दिखा सकता है ऊसे चारोओरसे घेरने का काम अब प्राथमिक बन चुका है ! ईससे समाज नेतृत्वहिन और दिशाहिन हि रहेगा और सफलता मे बाधा नही आयेगी! शरद पवार, मायावती, मुलायम:अखिलेश, चंद्राबाबु नायडु, स्टँलिन, देवे गौडा, तेजस्वी जैसे गिणेचुने बहुजन नेता ही प्रबल विरोध निर्माण करनेकी कुछ क्षमता रखते है !
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शरद पवार ईनमेसे सबसे सोर्सफुल और अनुभवी लोकनेता है ! पर ईनको घेरनेके लिए पर्याप्त सबुत जोडने के बाद भी ब्राम्हणसत्ता परिणाम ऊलटा होने की आशंका से डर रही है ! ईसलिए कुछ अँक्शण के पहले ऊनके शिपासालारों को प्रलोभण देके, दबाव देके ऊनसे दुर किया जा रहा है ! पर शरद पवार जींकी शक्ती लोंगोंसे है ना की बिचवाले नेताओंसे है ईसलिए ब्राम्हण अभीभी साशंक है ! पवार जींने EVM विरोध मे खुद भी बात की और अपने चेले राज ठाकरे को आंदोलन करनेके लिए आगे किया है !
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अब दो ही शक्यता है कि आरपार की राजनैतीक लढाई होगी या पवारजींको भी ऊनको सहयोग करना पडेगा! शिवशाही या पेशवाई का शिक्कामोर्तब आगर EVM से ही तय होगा तो कोई आशा नही बचती !
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EVM के खिलाप बहुजनोंने मिलजुलकर आगे आना होगा वर्ना यह ऐतिहासिक गलती होगी ! जो भी नेतागण EVM के खिलाप गत दिनोंमे बोले थे ऊन्हे अब खुलके आना होगा ! आपने चिल्रर विचार बाजुमे रखने होगे !
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आज दुसरोंका नंबर है कल तुम्हारा होगा , वो भी 100% पक्का! वैसे ईतिहास मे पहले ही बताया है कि पेशवा सबसे पहले गलेमे लोटा किसको भेंट करता है !

एकही रास्ता : EVM हटाओ लोकतंत्र बचाओ !

~श्रीकांत लोखंडे

सोशियो पॉलिटिकल एनलिस्ट और आईटी प्रोफेशनल दिल्ली

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