नितिन गडकरी के खिलाफ चुनाव लड़ेंगी डॉ. मनीषा बांगर

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By- अकील राजा

लोकसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी है। पूरे देश में इसे लेकर तमाम राजनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं। इस बार के चुनाव की खासियत यह है कि इस बार वंचित तबके के वे लोग भी आ रहे हैं जो बुद्धिजीवी हैं और किसी राजनीतिक परिवार के सदस्य नहीं हैं। इनमें डॉ. मनीषा बांगर भी एक हैं जो नागपुर में पीपीआई-डी के टिकट पर चुनाव लड़ेंगी और नीतिन गडकरी को चुनौती देंगी।

उनके द्वारा नागपुर से चुनाव लड़े जाने की घोषणा से नागपुर के बहुजन समाज के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई है।

डॉ. बांगर बहुजनों, अल्पसंख्यकों और सिक्ख समाज के लोगों के बीच में काफी लोकप्रिय हैं। पेशे से चिकित्सक और तन-मन-धन से बहुजनों के हितों की रक्षक डॉ. बांगर बामसेफ से जुड़ी रही हैं। साथ ही इन्होंने अंतराष्ट्रीय स्तर पर भी ओबीसी, महिलाओं, अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति और अल्पसंख्यकों के मसलों को उठाया है।

चुनाव लड़ने के उनके फैसले को सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग सराह रहे हैं। स्वयं डॉ. बांगर का मानना है कि वंचित समाज के लोगों को उनका अधिकार तभी मिलेगा जब राजनीति में उनकी प्रत्यक्ष हिस्सेदारी होगी। बाबा साहब डॉ. आंबेडकर ने भी यही कहा था कि राजनीति ही सत्ता की चाबी है और इसे तभी हासिल किया जा सकता है जब बहुजन समाज के लोग शिक्षित बनें और संगठित हों।

डॉ. बांगर के मुताबिक नागपुर न केवल उनका जन्म स्थल है बल्कि सही मायनों इसी धरती पर उन्होंने लोगों की सेवा करने की सीख ली। वे अभी भी मरीजों का इलाज करती हैं और व्यस्तता के बावजूद समाजिक सरोकारों को पुरजोर तरीके से उठाती हैं। फिर चाहे वह भीमा कोरेगांव में आरएसएस के गुंडों द्वारा हमला का सवाल हो या फिर द्विज वामपंथियों के द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम का। डॉ. बांगर ने हर मोर्चे पर बहुजनों के हितों को प्रमुखता दी है और सामंती व्यवस्था के पोषकों कांग्रेस और भाजपा को आड़े हाथों लिया है।

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