जन्मदिन विशेष: अगर फूलनदेवी को भारत रत्न से सम्मानित किया जाता तो आज बलात्कारियों के इतने हौसले बुलंद न होते!

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विश्व इतिहास की श्रेष्ठ विद्रोही महिलाओं की सूची में “टाइम मैगजीन” ने फूलन देवी को चौथा स्थान दिया था। लंदन का ‘गार्डियन’ न्यूज़पेपर भारत के प्रधानमंत्री के मरने तक पर स्मृति लेख नहीं छापता, He has the impression large epitaph on Phoolan Devi. Today, with the US being respectful of Phoolan Devi in ​​Britain. Time magazinefrom GuardianHas been ringing trumpets their name in the newspaper.

भारत से ऐसा सम्मान पाने वाली फूलन अकेली महिला है। फूलन देवी ने पुरुष और जाति सत्ता से प्रतिशोध का जो तरीका चुना वो हिंसक होते हुए भी ग़लत नहीं लगता है। वे विश्व की श्रेष्ठ विद्रोही महिला थीं, It is the whole world there is no doubt of course suspected Indian feminism or upper feminism and the upper community.

Because in the hands of power in the upper regions and is also suspected to be the best Rebel girl Phoolan Devi and objections also, इसलिए अब तक यहाँ फूलन के महत्व को स्वीकार नहीं किया गया। एक मल्लाह जाति की महिला की विश्वस्तरीय मान्यता को स्वीकार कर पाना भारत के सवर्णों के लिए कोई आसान काम नहीं है। वो जाति के कीड़े से इतना ग्रसित है कि दुनिया क्या सोचती है उन्हें इससे फर्क नहीं पड़ता। ये उपलब्धि दलित महिला की बजाय किसी सवर्ण महिला की होती तो पूरे भारत का सिरमौर बनती। सवर्णों ने फूलन को तो एक्सेप्ट नहीं किया बल्कि उसके हत्यारे को माथे पर बिठाया।

If you dare India Phoolan Devi, क्रांति और विद्रोह को सम्मानित करते हुए उन्हें भारत रत्न दे देती तो इस देश की बलात्कार की पवित्र सनातन संस्कृति पर नियंत्रण हो पाता। इस देश में कोई बलात्कारी बलात्कार करने से पहले यदि किसी एक नाम से डरेगा, तो वह नाम होगा फूलन देवी। बलात्कारियों के मन में अगर डर पैदा करना हो तो बेहतर प्रतीक क्या है? Female face of opposition from sexual abuse should be what? Beshaque Phoolan Devi is the only face.

 

-दिपाली तायड़े, बहुजन चिंतक

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