आंध्र यूनिवर्स‍िटी के कुलपति का दावा, टेस्ट ट्यूब बेबी थे कौरव, पढ़िए VC की बखिया उधेड़ता लेख!

मुझे यह जानने में दिलचस्पी है कि इतनी बेशर्मी की हिम्मत का स्रोत कहां है!

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बीते दिनों आंध्र यूनिवर्स‍िटी के कुलपति जी नागेश्वर राव ने एक हैरानी भरा बयान जारी किया. जिसके मुताबिक, महाभारत काल में स्टेम सेल और टेस्ट ट्यूब तकनीक की खोज की जा चुकी थी और कौरव टेस्ट ट्यूब बेबी थे। पढ़िए उनके इस बयान पर  यह लेख…

यह कैसे मुमकिन हो जाता है कि जिस विज्ञान कांग्रेस पर दुनिया भर की वैज्ञानिक बिरादरी की नजर होती है, उसमें सारे वैज्ञानिकों के सामने कोई व्यक्ति भारत की नुमाइंदगी करते हुए कैसे इस तरह के चुटकुले और गप्प परोस देता है कि सौ कौरव स्टेम सेल्स से पैदा हुए या रावण के पास दर्जनों हवाई अड्डे थे! यह सब सुनने के बाद दुनिया भर में भारत को किस नजर से देखा जा रहा होगा? सारी दुनिया में थू-थू करवाने वाले इन लोगों को भारतीय विज्ञान कांग्रेस के मंच पर ससम्मान जगह कैसे मिलती है और इनके इस तरह की मूर्खताओं पर ताली बजाने वाले वे लोग कौन होते हैं? लेकिन ऐसा नहीं है कि केवल इस विज्ञान कांग्रेस में ये हड़बोंग परोसे गए और तालियां बटोरी गईं। यही बातें इस देश के प्रधानमंत्री पद पर बैठे नरेंद्र मोदी कभी ठसके से कह चुके हैं और उस पर तालियों की गड़गड़हाट ही हुई थी।

लेकिन दुनिया कैसे देखती है इस तरह की हरकतों को? 2001 में जर्मनी में भौतिक विज्ञान में नोबेल सम्मानित वैज्ञानिकों के सम्मेलन में तथागत तुलसी के बाप नारायण ने वहां के 500 वैज्ञानिकों को एक पर्चे के जरिए यह बताया था कि उसने तथागत तुलसी को अप्रतिम प्रतिभा सहित पैदा करने के लिए पत्नी के गर्भधारण के साथ ही ‘पोरोलॉजी’ की तंत्रसाधना की थी। तब जर्मनी में एक वैज्ञानिक ने उसके पर्चे को वापस फेंक दिया और बाकी जोर-जोर से हंस रहे थे।

2001 में भाजपा की सरकार थी और तथागत और उसके बाप को किसके दबाव में भारतीय टीम के साथ भेजा गया था, इसका पता नहीं चला। तो भाजपाइयों-संघियों का विज्ञान कांग्रेस में देश की वैज्ञानिक कामयाबियों और गरिमा की ताजा फजीहत कराने का धंधा नया नहीं है…! वे वैसी तमाम वैज्ञानिकता को अंधविश्वासों और मूर्खताओं के अंधेरे कुएं में झोंक देंगे, जो दबाए-सताए और वंचित तबकों को थोड़ी रोशनी देता है और सामाजिक सत्ताधारी जातियों की शातिर राजनीति को कमजोर करता है।

दरअसल, जगहंसाई और खिल्ली उड़वा कर ही किसी समाज के मनोबल को तोड़ा जा सकता है, ताकि पनचानवे फीसद लोग मानसिक और बौद्धिक रूप से गुलाम बने रहें और उन सब पर चंद सत्ताधारी जाति-वर्गों का कब्जा बरकरार रहे! तो देश और समूचे समाज की खिल्ली उड़वाने का दूरगामी राजनीतिक एजेंडा यह भी है और इसे हल्के में न लीजिए!

अब सड़क किनारे पेशाबखानों में वशीकरण मंत्र का प्रचार करने वाले किसी बंगाली फकीर बाबा का विज्ञापन देखिएगा तो उसे ठग कहने और उस पर हंसने से पहले अपने देश की इस सरकार और इसके आका संगठन आरएसएस के तहत किए गए उन इंतजामों को याद कर लीजिएगा, जो यहां के अविकसित दिमाग वाले लोगों को ठगी के जाल में उलझाने, सामंती मानस में सड़ाने और अंधविश्वासों के गंदे नाले में डुबो कर मारने जा रही है।

जब तक गुलाम और सामंती माइंडसेट में घुले अंधविश्वासों का राज रहेगा, तभी तक निठल्ले पंडे-बाबाओं की दुकानदारी चलती रहेगी, मुफ्त में खटने वाले मजदूर मिलते रहेंगे और ऊंच-नीच की जात-व्यवस्था भी कायम रहेगी। यह सरकार और उसके मालिक यही चाहते हैं!

By-Arvind Shesh

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