अटल बिहारी वाजपेयी के प्रति सोशल मीडिया पर बहुजन बुद्धिजीवियों की प्रतिक्रियाएं

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पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की निधन की खबर आते ही एकदम सोशल मीडिया पर उनके लिए प्रतिक्रियाओं की बाढ़ सी आ गई। पूर्व पीएम को श्रद्धांजली देने के साथ ही तमाम लोग उनके शासन काल में हुए कुछ कामों की आलोचना भी कर रहे हैं। हमने

ऐसे ही कुछ बहुजन बुद्धिजीवियों की फेसबुक से कुछ प्रतिक्रियाएं नीचे साझा की हैं..

सीनियर पत्रकार दिलीप मंडल अपनी फेसबुक वॉल पर लिखते हैं कि….

“एच.डी. देवेगौड़ा की सरकार ने जाति जनगणना कराने का फैसला कैबिनेट में किया था. अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने उस फैसले को पलट दिया.

इस तरह 2001 में जाति जनगणना नहीं हो पाई.

कुछ लोगों के लिए अटल बिहारी वाजपेयी इस वजह से भी महान हैं.

(मेरी समस्या यह है कि मेरी याददाश्त बहुत अच्छी है)”

एक दूसरी पोस्ट में वे लिखते हैं कि….

अगर देश के सारे सवर्ण लिखकर दें कि लालू यादव के निधन के दिन चारा घोटाले की बात नहीं करेंगे तो मैं वादा करता हूं कि अटल बिहारी वाजपेयी की बात करते हुए…

संविधान समीक्षा आयोग,
कंधार में आतंकवादियों की अदलाबदली,
गुजरात दंगों पर सात दिन की चुप्पी,
बाल्को और सेंटोर घोटाला,
डिसइनवेस्टमेंट मंत्रालय,
शौरी को मंत्री बनाने,
जाति जनगणना न कराने,
पेंशन योजना खत्म करने,
अपनी जमीन पर पाकिस्तान से लड़ने,
बाबरी मस्जिद गिराने का समर्थन करने…

और ऐसी ही तमाम बातों की चर्चा नहीं करूंगा।

इससे पहले उन्हें इस बात की माफी मांगनी होगी कि उन्होंने बीपी मंडल, वीपी सिंह, अर्जुन सिंह, फूलन देवी, जयललिता और करुणानिधि को गालियां दी थीं और अपशब्द कहे थे।”

दिलीप मंडल, मंडल कमीशन के वक्त को याद करके लिखते हैं कि….

“मंडल कमीशन के खिलाफ निकाली गई ‘सोमनाथ से अयोध्या रथ यात्रा’ को हरी झंडी बीजेपी के किस नेता ने दिखाई थी? इस रथ यात्रा मार्ग पर हुए दंगों में सैकड़ों निर्दोष लोग मारे गए थे।

वहीं बहुजन चिंतक डॉ मनीषा बांगर अपनी फेसबुक वॉल पर लिखती हैं कि…
समतल बनाई थी तुमने जमीं बाबरी का विध्वंस करके?
या मानवता को नीचे, या निचता के गुढ़ गर्भ में धंसा दिया था? अटल कवि म

 

एक कवि दंगे भी भड़का सकता है इस पर यकीं अटल जी के चरित्र और कृत्यों से होता है।
कवि भी killar होते हैं?

 

कविता सुना सुनाकर मारा और मरवाया!!

अलविदा अटल जी

 

कवि का कविता से एक कौम को नरसंहार के लिए उकसाना और फिर उस कृत्य को जस्टीफाई भी करना, दुनिया में अटल जी की मिसाल है कोई तो बताओ??

 

वहीं द वायर के रिपोर्टर प्रशांत कनोजिया अपनी फेसबुक वॉल पर लिखते हैं कि…

आज़ाद भारत में सांप्रदायिकता की नींव को बढ़ावा देने वाले और हिंदू-मुस्लिम के बीच दीवार खड़ा करने वाले अटल को श्रद्धांजलि जरूर दूंगा, लेकिन न तो मैं उनकी राजनीति का कायल था और न ही एक सभ्य समाज को कायल होना चाहिए.
#Atal

 

 दिल्ली युनिवर्सिटी में प्रोफेसर लक्ष्मन यादव लिखते हैं कि….

जमीन समतल करने को ललकारना, पेंशन बंद कर देना, 13 महीने की सरकार में ही जाति-जनगणना के खिलाफ़ दस्तख़त कर देना, सॉफ्ट हिंदुत्वा की ख़तरनाक सौम्य राजनीति करना जैसी बातें आज कही जा सकती हैं या आज केवल अच्छा अच्छा ही लिखना है।

वैसे हमारे गाँव तक में निधन के दिन सब अच्छा अच्छा ही लिखते हैं। सामाजिक राजनीतिक जीवन में रहे इंसान के लिए भी क्या यह लागू होना चाहिए? फेसबुक पर भी यही देख रहा हूँ। क्या असहमतियों के ज़ाहिर कर देने मात्र से अपमान हो जाया करता है?

मेरे हिसाब से नहीं, अलविदा अटल जी

 

सीनियर पत्रकार महेंद्र यादव अपनी फेसबुक वॉल पर लिखते हैं कि…
फरवरी, 1983,
7 घंटे में 2000 हत्याओं वाला दंगा कराने के लिए असम में नेल्ली ने किसने
चुनावी भाषण दिया था-“असम के लोग हैं जो झेल रहे हैं..वरना ये लोग अगर पंजाब में होते, तो इनके टुकड़े-टुकड़े कर दिए जाते!”
इस बयान के बाद देखते ही देखते असम में दंगे भड़क उठे थे…
और, आप कहते हैं कि वो उदारवादी नेता था???
वो कौन नेता था जिसके बयान से उसकी पार्टी ने ही किनारा कर लिया था..वैसे काम तो हो ही गया था…
28 मई 1996 को सीपीआई नेता इंद्रजीत गुप्ता ने लोकसभा में विश्वास मत पर बहस के दौरान उस नेता के भाषण को उद्धृत करके बताया था..ऑन रिकॉर्ड है…लोकसभा की कार्रवाई में चेक कर लीजिए.
 
 

वहीं प्रद्युम्न यादव अपनी फेसबुक वॉल पर लिखते हैं कि….

ब्राह्मण समाज के लिए आज भारी क्षति का दिन है. अटल जी ब्राह्मणों के सर्वमान्य नेता और उनकी जाति के गौरव थे. आज पूरा फेसबुक इसी तरह की पोस्ट से भरा पड़ा है.

ये सब देखकर मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं कि अटल बिहारी वाजपेयी देश के नेता कम और ब्राह्मणों के नेता अधिक थे. अफसोस की बात है कि समय की फूंक ने उनके कुल का महान चिराग बुझा दिया.

इसलिए आज का दिन सभी ब्राह्मणों को सांत्वना देने का दिन है.

मैं ब्राह्मणहंता , गुस्ताख़ समय की घोर निंदा करता हूँ और ब्राह्मण समाज के प्रति हार्दिक दुख और संवेदना प्रकट करता हूँ.

 

वहीं हरीशंकर शाही लिखते हैं कि…

मंदिर तमाशा, कॉर्पोरेट परस्त विनिवेश, कारगिल में हजारों को मरवाने वाले, तेल की कीमतों में जो आग लगी उसके लिए, अंबानी के लिए आईओसी और अडाणी के लिए मुंदड़ा पोर्ट उपलब्ध कराने का मार्ग खोलने…… और कितना बताऊँ ऐसे तमाम कार्यों के लिए अटल जी का योगदान परम और कार्पोरेट अक्षरों में लिखा जाएगा… वही कर्ज महानायक बनवाकर कार्पोरेट उतार रहा है…!!!

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