जन्मदिन विशेष: जानिए ब्राह्म्णवाद की कब्र खोदने वाले पेरियार ई.वी.रामास्वामी नायकर कौन थे?

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BY- Siddharth Ramu

हम सभी जानते है कि तमिलनाडु उन चंद राज्यों में शामिल है, जहां ब्राह्म्णवाद को निर्णायक शिकस्त दी गई। यदि किसी एक व्यक्ति को इसका सबसे ज्यादा श्रेय जाता है तो, उस व्यक्ति का नाम है,ई.वी.रामास्वामी नायकर यानी पेरियार। हिंदी गाय पट्टी का ब्राह्मणवाद विरोधी आंदोलन जहां राजनीति दायरे तक ही कमोवेश सीमित रहा, उसके उलट द्रविड़ आंदोलन ने ब्राह्मणवाद को सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और कॉफी हद तक आर्थिक स्तर पर चुनौती दी।  उन्होंने अपने आत्मसम्मान आंदोलन के माध्यम से जाति व्यवस्था के खात्मे, ब्राह्मणी वर्चस्व के विरोध और स्त्री-पुरूष समानता के लिए संघर्ष किया। फुले और आंबेडकर की तरह ही उन्होंने हिंदू धर्म और ब्राह्मणवाद को एक दूसरे का पर्याय माना। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जब तक हिंदू धर्म है, तब जाति व्यवस्था है और तब तक ब्राह्मणवाद जिंदा रहेगा।

पेरियार ने ही द्रविड़ कडगम आंदोलन शूुरू किया। इस आंदोलन के उद्देश्य के बारे में उन्होंने लिखा “‘द्रविड़ कड़गम आंदोलन’  का एक ही उद्देश्य और  केवल एक ही निशाना है वह  आर्य ब्राह्मणवादी  वर्ण व्यवस्था का अंत कर देना, जिसके कारण समाज ऊंच और नीच जातियों में बांटा गया है. द्रविड़ कड़गम आंदोलन उन सभी शास्त्रों, पुराणों और देवी-देवताओं में आस्था नहीं रखता, जो वर्ण तथा जाति व्यवस्था के पक्ष में खड़े  हैं”। उन्होंने पूरे तमिलनाडु में मनुस्मृति और रामायण का दहन किया।

पेरियार डॉ. आंबेडकर तरह ही ब्राह्मणवाद और हिंदू धर्म को एक दूसरे का पर्याय मानते थे। उन्होंने लिखा है कि  “हिन्दू परजीवी हैं। हम कड़ी मेहनत करते हैं, वे हमारे श्रम का रस चूस लेते हैं। अगर आज़ादी इस शोषण का अंत नहीं कर सकती तो ऐसी आज़ादी मिले या न मिले कोई फर्क नहीं पड़ता। अगर आप इतिहास पर नज़र डालें, पुराणों को देखें, मनु के शास्त्र को पढ़ें या आर्यों के किसी भी साहित्य पर गहराई से नज़र डालें तो आप पाएँगे कि आर्य हिन्दू बिना मेहनत किए परजीवियों की भाँति दूसरों की मेहनत पर जीवित रहते थे। वे आज भी ऐसा ही कर रहे हैं।”

फुले, डॉ. आंबेडकर और पेरियार आधुनिक काल में ब्राह्मणवाद विरोधी आंदोलन के आधार स्तंभ है। इनके विचारों को अपनाए बिना ब्राह्मणवाद का गाय पट्टी से नाश नहीं किया जा सकता है। फुले और डॉ. आंबेडकर के विचारों से धीरे-धीरे गाय पट्टी परिचित हो रहा है, लेकिन पेरियार के विचार आज भी बहुत कम परिचय है।

~ Siddharth Ramu

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