यूपी लोकसभा उपचुनाव: चुनावी गणित ने बिगाड़ा BJP का खेल, गठबंधन पड़ा भारी!

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By- Aqil Raza

यूपी की फूलपुर और गोरखर की सीटों पर लोकशभा उपचुनाव का मतदान हो चुका है। जैसे की आप जानते है कि एसपी बिएसपी गठबंधन और बीजेपी के लिए ये चुनाव नाक और साख का सवाल बना हुआ है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 23 साल से राजनीति में सपा—बसपा के बीच चूहे बिल्ली की ​दुश्मनी भी दोस्ती में बदल गई है।

हालांकि यह कहना गलत नहीं होगा कि अगर इस गठबंधन के वोटरों ने अपनी परंपरागत पार्टी पर ही विश्वास दिखाया तो बीजेपी की मुश्किल बढ़ सकती है। इतना ही नहीं 2017 के विधानसभा चुनाव में बीएसपी को मिले वोट एसपी कैंडिडेट को ट्रांसफर होते हैं तो भी बीजेपी के लिए दोनों सीटें जीतना असंभव हो सकता है।

अब आपको विस्तार से बताते हैं कि फूलपुर और गोरखपुर का चुनावी गणित क्या कहता है। सबसे पहले फूलपुर लोकसभा क्षेत्र की बात करते हैं… फूलपुर लोकसभा सीट में इलाहाबाद की 5 विधानसभा सीटें आती हैं। इनमें फूलपुर, इलाहाबाद उत्तरी, इलाहाबाद पश्चिमी, फाफामऊ और सोरांव शामिल हैं।

2017 विधानसभा चुनाव में ये पांचों सीटें बीजेपी गठबंधन के पास थीं। वहीं, अगर एसपी और बिएसपी को 2017 में मिले वोटों को जोड़ दिया जाए, तो बीजेपी पांच में से चार विधानसभाओं में पीछे रह जाती है। सिर्फ इलाहाबाद उत्तरी सीट पर बीजेपी को बढ़त मिलती है। जिससे साफ ये जाहिर हो रहा है कि अगर एसपी और बीएसपी के वोट मिलाए जाए तो फूलपुर में बीजेपी काफी पीछे छूट रही है।

वहीं अब गोरखपुर के चुनावी गणित पर नजर डालते हैं। गोरखपुर लोकसभा सीट में जिले की 5 विधानसभा सीटें आती हैं। इनमें गोरखपुर सदर, गोरखपुर रुरल, पिपराइच, कैम्पियरगंज और सहजनवा शामिल हैं। 2017 विधानसभा चुनाव में ये पांचों सीटें बीजेपी के पास थीं। वहीं, अगर यहां पर भी एसपी और बिएसपी को 2017 में मिले वोटों को जोड़ दिंया जाए तो बीजेपी पांच में से चार विधानसभाओं में पीछे रह जाती है। सिर्फ गोरखपुर सदर सीट पर बीजेपी को बढ़त मिलती है। यानी गोरखपुर में भी गणित ये कहता है कि बीएसपी और एसपी का ये गठबंधन बीजेपी के होश पाख्ता कर रहा है।

इस चुनाव का तीसरा पहलू ये है कि निर्दलीय उम्मीदवार अतीक अहमद, एसपी के टिकट पर सांसद रह चुके हैं, जेल से चुनाव लड़ रहे हैं, एसपी के वोट काट सकते हैं। साल 2002 से लेकर 2007 तक हुए चार चुनावों में केशव प्रसाद मौर्य की उग्र हिन्दूवादी छवि के कारण मतों का ध्रुवीकरण हुआ और उसका सीधा लाभ अतीक़ अहमद या फिर उनके भाई को मिला। अब आज जब बीजेपी सत्ता में है और अतीक़ अहमद के ‘बुरे दिन’ चल रहे हैं तो केशव का एहसान चुकाने का उनके लिए ये अच्छा मौक़ा है।

जिस तरीक़े से आख़िरी दिन सारी औपचारिकताएं पूरी करके अतीक़ अहमद ने नामांकन किया, वो बिना सरकारी मदद के संभव नहीं हो सकता। और ये सब जानते हैं कि अतीक अहमद के चुनाव में उतरने से फ़ायदा किसका होने वाला है। फिलहाल बिएसपी और एसपी के एक साथ आने से जहां इन दोनों दलों के नेताओं की उम्मीदें जाग गई हैं, वहीं कार्यकर्ताओं में भी काफी जोश है।

अब इस चुनाव के आखिरी पहलू पर नज़र डालते हैं वो है ईवीएम….. पिछले हुए चुनावों में इवीएम और चुनाव आयोग पर लगातार सवाल खड़े होते रहे हैं, और अब इन दोनों सीटों पर हो रहे मतदान के दौरान इवीएम में गड़बड़ी का मामला सामने आया है।

बताया गया कि फूलपुर में इलाहाबाद शहर पश्चिमी के किदवई कॉलेज में वोटिंग मशीन खराब हो गई और मतदान रुक गया। वहीं गोरखपुर में भी चुनाव को लेकर जिला प्रशासन की तैयारियों की पोल खुलती गई। कई बूथों पर ईवीएम खराब हो गई। इनको बदलने के बाद मतदान प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।

लेकिन ऐसे में सवाल इस बात का है कि वोटिंग के दौरान इवीएम को बदलने का क्या मकसद हो सकता है। जबकि हमें भूलना नहीं चाहिए की पिछले हुए यूपी के विधानसभा चुनावों से लेकर अब तक इवीएम पर सवाल खड़े होते रहे हैं। मतदान के दौरान इसतरह से EVM खराब होना और EVM को बदले जाना चुनाव आयोग पर सवाल खड़े करता है। लेकिन देखना होगी कि चुनावी गणित में भारी दिख रहा बीएसपी और एसपी का घठबंधन, नतीजों में क्या निकलकर सामने आता है।

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