हार के बाद BJP में तेज हुए बगावती सुर, विपक्ष ने भरी हुंकार

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By- Aqil Raza 

यूपी उपचुनाव में मिली करारी हार के बाद बीजेपी बिखरती हुई नजर आ रही है। बीजेपी के कई मंत्रियों ने अपने बगावती सुर दिखाने शुरू भी कर दिए है। जिसमें इस हार का कारण यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और जिप्टी सीएम केशव प्रसाद मोर्य को बताय़ा गया है। इस बड़ी हीर की जिम्मेदारी इन दोनों नेताओं को संभालनी भी पढ़ेगी, क्योंकि अगर बीजेपी उप चुनाव में ये दोनो सीटे जीतती तो इस जीत का ताज इन दोनों के सर ही सजाया जाता। पार्टी में इनका कद और भी बढ़ जाता लेकिन जनता को ये नागावार गुज़रा और सीएम योगी को गोरखपुर की जनता ने फिर से बेकफुट पर लाकर खड़ा कर दिया।

पार्टी के नेताओं का योगी को जिम्मेदार ठहराना गलत नहीं होगा क्योंकि सीएम योगी का कद मौजूदा वक्त में खासा ऊपर है और सीएम होने के साथ वहां के सांसद थे, बावजूद इसके वो अपनी सीट तक नहीं बचा पाए। जिससे ये साफ जाहिर होता है कि गोरखपुर कि जनता ने अपना जवाब दे दिया है कि वो उनके कार्यकाल से खुश नहीं है।

इस हार के कई फैक्ट माने जा रहे है, जिसमें यूपी का विकास, गोरखपुर में ऑक्सीजन न मिलने की वजह से मासूमों की मौत, और खुद सीएम योगी की बयानबाजी शामिल है। आपको याद होगा कि चुनाव से पहले सीएम योगी ने विधानसभा में बयान दिया था कि उन्हें गर्व है कि वो हिंदू हैं और वो ईद नहीं मनाते, जिसकी काफी ज्यादा अलोचना हुई थी। सीएम योगी के इस बयान को अहंकार के रूप में देखा जा रहा था, और इस बात का तर्क खुद हार के बाद सीएम योगी ने ये कहकर दे दिया कि ज्यादा आत्म विश्वास उनके हार की वजह बनी है।

ऐसा लगता है कि सीएम योगी जनता के फैसले को देखकर अपने स्वाभाव में बदलाव करने की कोशिश कर रहे हैं, और इस बदलाव की झलक उनके अगले बयान में देखने को मिली, जब उन्होंने कहा कि मुझे अगर मस्जिद में भी बुलाया जाएगा तो में जांउगा। यानी पहले ईद मनाने से भी सीएम परहेजड कर रहे थे लेकिन बाद में मस्जिद में जाने के लिए भी तैयार हो गए।

इन नतीजों से एक चींज़ और हमारे सामने निकलकर सामने आई है कि जनता को अब हिंदू या मुस्लमान की फिक्र होने से ज्यादा विकास कि फिक्र है, और यही वजह हो जो बीजेपी का हिंदुत्व कार्ड कम से कम इन दोनों सीटों पर तो पूरी तरहां से फेल हो गया। ये बात सही भी है कि अगर आप लोग ये समझने लग जाएगें की आपको क्या चाहिए, या फिर आप के लिए क्या चीज़ ज्यादा डजरूरी है तो फिर नेता भी उसी का जिक्र करेंगे और साथ ही गोदी मीडिया के कैमरे भी हिंदू मुस्लिम डिबेट छोड़कर। आपकी जरूरतों की तरफ मुड़ जाएंगे, ये समझना जरूरी है और इसे हमें समझना होगा।

उपचुनाव में मिली हार के बाद बीजेपी में आपसी कलह जरूर बढ़ी है, जिसका असर उस वक्त देखने को मिला जब योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के दामाद डा. नवल किशोर समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए हैं. पार्टी ज्वॉइन करने पर अखिलेश यादव ने गौतम बुद्ध की प्रतिमा देकर उनका स्वागत किया. इस दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि ऐसे बहुत से नेता हैं जो अपनी पार्टी छोड़कर सपा का दामन थामने वाले हैं.

हालकिं इससे पहले भी फरवरी में स्वामी प्रसाद मौर्य के भतीजे प्रमोद मौर्य ने सपा का दामन थामा था. उस दौरान उन्होंने कहा था कि बीजेपी पिछड़े वर्ग की विरोधी है, बीजेपी सरकार में उनके समाज का शोषण हो रहा है. जिसकी वजह से वो बीजेपी छोड़ एसपी में शामिल हो गए.

अब ऐसे में बीजेपी के नेताओं का पार्टी से एक्सिट करना विपक्षी दलों की ताकत बनता नजर आ रहा है। और यूपी उपचुनाव में एसपी और बीएसपी के सामने बीजेपी का हिंदुत्व कार्ड भी फेल हो गया। तो क्या फिर ये माना जाए की जिस लहर के सहारे बीजेपी चुनाव में जीतती आ रही थी जनता ने उसको ठुकरा दिया है। और अगर ऐसा होता है तो 2019 में बीजेपी को बाहर का रास्ता देखना पड़ सकता है।

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