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Hindi - Opinions - January 25, 2021

स्क्रिप्टेड स्पीच में नही बाहर आती है देश की सच्चाई

आज शाम में राष्ट्रपति देश को संबोधित करेंगे. उनकी स्क्रिप्टेड स्पीच में क्या बोला जाएगा इसका अनुमान बहुतांश लोगो को है| मगर शायद राष्ट्रपति वह नहीं बोलेंगे, या देश के लिए वो दिशा नहीं दिखाएंगे जिसकी आज देश को जरूरत है यह बात भी सुनिश्चित है|

शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का राष्ट्रिकरण , जाति जनगणना , बहूजनो का बैकलॉग भरना, प्राइवेट सेक्टर में बहुजन का प्रतिनिधित्व, भूमि वितरण, कृषि उद्योग का राष्ट्रीकरण ये तमाम समाधानों की देश को सख्त जरूरत है. देश की उन्नति इन सवालों के समाधान से होकर ही आगे बढ़ सकती है|मगर वीभत्स मीडिया प्रोपगंडा और न्यायालय के वीभत्स रवैय्ये इस कोशिश में बहुत बड़ा रोड़ा बने बैठे है|

वे गणतंत्र को सही मायने मै हयात में अवतरित होने नहीं दे रहे . वो इसलिए क्योंकि ये दोनों संस्थाएं एक ही विशिष्ट जाति और वर्ण – अर्थात ब्राह्मण बनिया वर्ण के नियंत्रण में है| जब परंपरागत रूप से दमनकारी वर्ग ही लोकतांत्रिक संथाओं में जा कर बैठेगा तो वह उन संस्थाओं के जरिए लोकतंत्र मजबूत करने के बजाए अपने वर्ग का वर्चस्व कायम रखने का काम करेगा|

आज वही हो रहा है| सभी संस्थानों मे और उच्च हौदों को काबिज करके बैठे ब्राह्मण सवर्ण लोग है| खुद को अपने ही जाति के लोगो से संरक्षण मिलने का कॉन्फिडेंस इस वर्ग के लोगो मे होता है तभी अर्णब , शर्मा, माल्या जैसे लोग निर्माण होते है जो कोई भी गैरकानूनी काम करने से नहीं झिजकते| ये लोग देश की सुरक्षा और हित को भी दाव पर लगा देते है और फिर भी अपराधी / आतंकी करार नहीं दिए जाते|

यही वजह है कि जज पुष्पा गनेदीवाल रेप / सेक्सुअल असॉल्ट की परिभाषा को ही बदल देती है|पाकिस्तान और चीन से भी ज्यादा भारत गणतंत्र को , भारत की सुरक्षा को और भारत के लोगो को इन जैसे लोगो से सबसे ज्यादा खतरा है !इन क्रूर विकृत जातिवादी, सांप्रदायिक, महिला विरोधी लोगो को बल इन दोनों संस्थाओं मे मौजूद कॉलेजियम सिस्टम ( अयोग्य मगर अपने जाति और परिवार के लोगो की भर्ती) की वजह से मिलता है| इनकी पैदाइश वहीं से होती है|

इसीलिए देश को अगर सही मायने में एक गणतंत्र बनाना है तो मीडिया और ज्यूडिशियरी दोनों में यूपीएससी कि तर्ज पर ऑल इंडिया मीडिया सर्विस और ऑल इंडिया जुडिशल सर्विसेस होना जरूरी है.तभी वहां बहुजन अपनी संख्या के अनुपात में वहां पहुंच पाएंगे और इन संस्थानों के जरिए जो उच्चवर्णीय लोग अपनी तानाशाही लागू करते है उसपर रोक लगेगी| ये दोनों संस्थाएं देश और राष्ट्र निर्माण के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गए है|हमे इस चुनौती का सामना करते हुए, इन गंभीर समस्या का समाधान निकालते हुए अन्य कई गंभीर समस्याओं के हल ढूढना होगा !ये हम सब की जिम्मेदारी है .जय संविधान जय भारत !

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