मायावती, ममता बनाम मोदी और ब्राह्मणी मीडिया की साजिशें

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Published by- Aqil Raza
By- Dr. Manisha Bangar  

ममता बनर्जी की सरकार द्वारा सारधा चिटफंड घोटाला मामले में सीबीआई की जांच के संबंध में हुआ विवाद हालांकि सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद ठंडा पड़ गया है, लेकिन इसने भारत के सियासी गलियारे में नयी चर्चा छेड़ दी है। यह चर्चा है ममता का बतौर पीएम उम्मीदवार प्रोजेक्शन। इससे पहले सियासी गलियारे में मायावती को उम्मीदवान बताया जा रहा था।

दरअसल, मीडिया में हुई अबतक की रिपोर्टिंग को गौर से देखें तो ऐसा कुछ भी नहीं छपा है जिससे यह साबित हो सके कि ममता या मायावती को बतौर पीएम उम्मीदवार बताया जा रहा हो। मायावती के पक्ष में जो आवाजें उठी हैं, वे सोशल मीडिया के धुरंधरों की है। न तो स्वयं मायावती ने अपने आपको पीएम उम्मीदवार के पक्ष में पेश किया है और न ही मीडिया ने उन्हें दिखाने की कोशिश की है। जातिगत चरित्र के कारण भी मीडिया से ऐसी उम्मीद करना बेमानी है।

ममता बनर्जी का मामला थोड़ा अलग है। सोशल मीडिया पर कहा जा रहा है कि ममता बनर्जी ने मोदी से टकराकर स्वयं को पीएम उम्मीदवार के रूप में पेश कर दिया है। यह मामला बड़ा दिलचस्प है। दिलचस्प इसलिए कि यह बातें आरएसएस कैंप के धुरंधरों द्वारा कही जा रही हैं। ऐसा कहकर वे एक साथ तीन निशाना साध रहे हैं। पहला तो यह कि महागठबंधन जो कि इन दिनों बहुत मजबूती से उभर रहा है, के बारे में जनता के मन में यह विचार जाए कि वहां सभी पीएम पद के दावेदार हैं। दूसरा निशाना यह कि मायावती और अखिलेश यादव के बीच संकट उत्पन्न किया जाय और तीसरा यह कि जनता के बीच यह संदेश जाय कि आरएसएस के चेले-चपाटियों को छोड़ बाकी सब भ्रष्टाचारी हैं और वे एक हो रहे हैं।

बहरहाल, ये हमारे लिए कोई नयी बात नहीं है. इस देश में बहुजन सामाजिक पाश्वभूमि से आये हुए राजनितिक नेताओ के उभरते साथ ही एक और प्रक्रिया शुरू होती है और वह है उस नेता का उसकी जाती या दलित , मुस्लमान इत्यादि पहचान पर संकुचित कर उसका चरित्र हनन करना. किसी भी तरह से लोगो को ये बताना की ये नेतृत्व ब्राह्मण सवर्ण के नेताओ के सामने कुछ नहीं.

बिलकुल उसी तरह ब्राह्मणी महिला बनाम बहुजन महिला नेतृत्व यानी ममता बनर्जी बनाम मायावती जी के सन्दर्भ में होना निश्चय था. अगर मायावती जी PM के लिए उपयुक्त एवं पॉपुलर कैंडिडेट करके मान्यता समाज में बस रही है तो ये ब्राह्मणी वर्ग और मीडिया को कैसे गवारा होगा.

तब वो जो EVM का कांड करके लोकतंत्र को ही धोखे में डालने की कुख्यात कबिलियात रखते है क्या वे ब्राह्मणी वर्ग के कब्जे में आये हुए CBI, न्यायलय, मीडिया तंत्र और अन्य संस्थाओं के बलबूते एक दो दिन का ड्रामा करके इस बात को प्रस्थापित नहीं कर सकते की ब्राह्मणी स्त्री ममता बनर्जी लोकतंत्र को बचाने के लिए इन लोगो से भिड़ने के लिए मायावती जी से ज्यादा सक्षम है ??

जिस तरह से हाई लेवल ड्रामा करके दो दिन में SC ने मामले को निपटा दिया लेकिन मीडिया ने उतने में बहोत कुछ पढ़ लिए उससे क्या ये निष्कर्ष निकलना गलत होगा की कांग्रेस और भाजपा दोनों जनेऊधारी पार्टियां मिलकर देश को दिखाने की कोशिश कर रही हैं कि देखो जिस CBI से अखिलेश-मायावती डर गये। उसी CBI को ममता दीदी ने थाने में बंद करवा दिया.इस लिए अगली PM ममता दीदी होंगी.

~ डॉ मनीषा बांगर
~सामाजिक चिंतक, विश्लेषक एवं चिकित्सक.
~राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पीपल पार्टी ऑफ़ इंडिया-डी ,
~पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बामसेफ

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